Goods and Services Tax : लेख इस मुद्दे का विश्लेषण करता है कि सरकारी विभाग...
Goods and Services Tax : GSTAT के नए आदेश के अनुसार सभी लंबित और नई अपीलें पहले...
Corporate Law : इस विश्लेषण में बताया गया कि दिवाला कानून अपेक्ष...
Corporate Law : न्यायालयों ने स्पष्ट किया कि विक्रय प्रमाण पत्र ...
Goods and Services Tax : GST में भवन को अचल संपत्ति मानकर ITC रोका गया है। जबकि ...
Goods and Services Tax : यह कि जीएसटी के अंतर्गत अपीलीय ट्रिब्यूनल ट्रिब...
Income Tax : कर पेशेवरों और करदाताओं ने ITR और टैक्स ऑडिट तिथियो...
Corporate Law : जानें उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की 2025 साक्षात्कार ...
Income Tax : आयकर पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ियों के कारण करदाताओ...
Goods and Services Tax : गुड्स एंड सर्विस टैक्स सेंट्रल मेरठ (Goods & Services Tax) की ...
Goods and Services Tax : Ministry of Finance Recommendations of the 42nd GST Council Meeting Posted On: 05 OCT 2020 The 42nd GST Council met under the Chai...
कार , स्कूटर्स , मोटर साइकल्स इत्यादि यदि आप अपने व्यवसाय के लिए खरीदते हैं या उनकी मरम्मत कराते हैं , टायर बदलवाते हैं और इस पर जीएसटी का भुगतान करते हैं तो क्या आप इसकी इनपुट क्रेडिट ले सकते हैं क्या ? यह सवाल कई बार पूछा जाता रहा है तो आइये आज इस […]
इस समय की सरकार का आम चुनाव के पहले जो अंतरिम बजट इस समय वित्त मंत्री श्री पीयूष गोयल ने पेश किया उसमें यह तो उम्मीद थी कि आयकर में कुछ तो छूट मिलेगी ही और इस सम्बन्ध में ये उम्मीद कुछ हद तक पूरी तो हुई ही है और अब 5 लाख तक की कुल आय पर कोई कर नहीं देना पडेगा. आइये इसे और अन्य परिवर्तनों को ध्यान से देखें कि आखिर इस अंतरिम बजट में हुआ क्या है कर प्रस्तावों को लेकर.
चार्टर्ड एकाउंटेंट के सर्टिफिकेट के लिए यूडीआइएन नंबर अनिवार्य-१ फरवरी २०१९ से पूरे देश मे लागू बाजार मे कई लोग ऐसे हैं जो चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ना होते हुए भी अपने आपको सीए बताकर सर्टिफिकेट जारी करके फर्जी वित्तीय लाभ प्राप्त कर लेते हैं, अतः इस तरह के धोकाधड़ी से बचने के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट […]
सुधीर हालाखंडी जीएसटी कोंसिल की 32वीं मीटिंग: जीएसटी कौंसिल की ताजा मीटिंग के फैसले और उनके प्रभाव जीएसटी कौंसिल की 32वीं कौंसिल की मीटिंग 10 जनवरी को संपन्न हो गई और इसमें जैसी कि अपेक्षा थी लगभग उससे के अनुसार छोटे एवं मध्यम उद्योग एवं व्यापार के हित में जो फैसले लिए गए उनका और […]
जीएसटी कौंसिल की 32 वीं मीटिंग अब 10 जनवरी 2019 को हो रही है, माहौल और कारण कोई भी हो, जिनके कारण हम अब जीएसटी में तीव्र सुधारों की आशा कर रहें हैं , उनकी गहराई में जाने की जगह , आइये देखें इस मीटिंग से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं क्यों कि अब जीएसटी कौंसिल के त्वरित फैसले ही जीएसटी में उद्योग एवं व्यापार का विश्वास को ना सिर्फ पुन: स्थापित कर सकते हैं बल्कि जीएसटी को भी एक नया जीवन दे सकते हैं :-
जीएसटी के दौरान रिटर्न देरी से पेश किये जाने के लिए लेट फीस के प्रावधान बनाये गये थे उनके बारे में जीएसटी विशेषज्ञ प्रारम्भ से ही सहमत की नहीं थे क्यों कि जीएसटी कानून नया था और ये लेट फीस के कानून ना सिर्फ सख्त थे बल्कि लेट फीस की राशि का डीलर द्वारा भुगतान किये जाने वाले कर की राशी से भी कोई संबंध नही था और इसके कारण हुआ यह कि जिन कर दाताओं के कोई कर की मांग नहीं थी उन्हें भी लेट फीस के रूप में हजारों रूपये की लेट फीस जमा करानी पड़ी थी.
जीएसटी के दौरान ई –वे बिल का एक प्रावधान है जिसके अनुसार 50 हजार से अधिक के माल की सप्लाई पर ई –वे बिल जारी करना होता है और इस प्रावधान को लेकर व्यापार और उध्योग प्रारम्भ से ही असहज महसूस करता रहा है और इस सम्बन्ध में प्रारम्भ से ही दो तरह की मांग की गई उनमें से एक तो थी कि इस फॉर्म की अनिवार्यता को 50 हजार रुपये से बढ़ा कर 2 लाख कर दिया जाए और दूसरी थी कि इस केवल एक राज्य से दूसरे राज्य को गई गई सप्लाई के दौरान ही लागू किया जाए अर्थात राज्य के भीतर की सप्लाई पर पर ई-वे से या तो मुक्ति दी जाए या कोई छूट दी जाये .
जीएसटी 2017 में भारत वर्ष में लागू किया गया था और अब हम आज नए वर्ष 2019 में प्रवेश कर रहें है और जुलाई 2017 से अभी तक जीएसटी में क्या –क्या हुआ इसके बारे में हम लगातार चर्चा करते रहें हैं आइये आज देखें कि 2019 में आप जीएसटी से क्या आशा और उम्मीद रख सकते हैं:-
जिस समय भारत में जीएसटी लगाया गया था उस समय भी यही बताया गया था कि जीएसटी की प्रक्रियाएं जिस प्रकार से कठिन से कठिन बनाई जा रही है और व्यापार एवं उध्योग के लिए इन्हें पूरा करना आसान नहीं होगा . इसका एक बहुत बड़ा कारण था कि जीएसटी भारत में लाया तो एक बहुत अच्छे उद्देश्य से था लेकिन इसे जिन लोगों ने प्रारम्भ में बनाया उनका एक ही ख्याल था कि जीएसटी में कर की चोरी किस तरह से रोकी जाये और इसी एक मात्र उद्देश्य ने जीएसटी की सरलीकरण की राह में बहुत बड़ी बाधा खड़ी कर दी जो कि जीएसटी का मुख्य उद्देश्य था और इस सख्ती ने आज हालात यहाँ तक पहुचा दिए है कि अब ये सवाल पूंछा जा रहा है कि क्या अब भी जीएसटी को बचाया जा सकता है ?
जीएसटी कौंसिल की 31वीं मीटिंग जो 22 दिसम्बर 2019 को हुई है इससे आम करदाता एवं कर विशेषज्ञों को बहुत अधिक उम्मीद थी . आइये एकबार देखें कि क्या ये उम्मीदें पूरी हुई या फिर से उन्हें निराश होना पडा. आइये देखें कहाँ तक करदाता की उम्मीदें पूरी हुई है और जहां नहीं हो पाई उनमें आगे क्या उम्मीद है और जहाँ नहीं हुई है वहां सरकार की क्या मजबूरियां थी .