सुधीर हालाखंडी

CA Sudhir Halakhandiजीएसटी -2019- जीएसटी कौंसिल की 32वीं मीटिंग- उम्मीदें और आशाएं

जीएसटी कौंसिल की 32 वीं मीटिंग अब 10 जनवरी 2019 को हो रही है, माहौल और कारण कोई भी हो, जिनके कारण हम अब जीएसटी में तीव्र सुधारों की आशा कर रहें हैं , उनकी  गहराई में जाने की जगह , आइये देखें इस मीटिंग से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं क्यों कि अब जीएसटी कौंसिल के त्वरित फैसले ही जीएसटी में उद्योग एवं व्यापार का विश्वास को ना सिर्फ पुन: स्थापित कर सकते हैं बल्कि जीएसटी को भी एक नया जीवन दे सकते हैं  :-

सीमेंट और टायर पर कर की दर :-

सबसे पहले हम उस मुद्दे पर बात करें जो पिछली मीटिंग में अधूरा छोड़ दिया गया था वह था सीमेंट और टायर पर कर की दर को 28 प्रतिशत से कम कर 18 प्रतिशत करना जिसे इसके राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण स्थगित कर दिया गया था .

वित्तमंत्री महोदय ने राजस्व पर इसके पड़ते प्रभाव को स्पष्ट करते हुए इस फैसले को आने वाले समय पर टाला था लेकिन एक बात तो माननी ही पड़ेगी की “सीमेंट और टायर” किसी भी तरह से 28% की दर पर रखी जाने वाली “सिन और लक्जरी” वस्तुओं की श्रेणी में नहीं आती है तो जीएसटी लगाए जाने के समय जो वादा किया गया था कि 28% की कर दर सिर्फ “सिन और लक्जरी” वस्तुओं पर ही होगी तो अब सरकार को इस सम्बन्ध में सकारत्मक रुख अपनाते हुए कोई फैसला ले ही लेना चाहिए . व्यापार एवं उद्योग के व्यापक विकास के लिए यह फैसला बहुत ही उपयोगी होगा और इसका इन्तजार भी काफी समय से किया जा रहा है .

प्रक्रियाओं का सरलीकरण :-

सरलीकरण एक और मुद्दा है जिस पर जीएसटी कौंसिल को अब शीघ्र ही ठोस  फैसला कर लेना चाहिए और यह उम्मीद हमेशा रहती है कि अब सरलीकरण के मुद्दे पर जीएसटी कौंसिल कोई ठोस निर्णय लेगी लेकिन हर बार होता यह है कि इसे किसी अन्य तिथी पर टाल  दिया जा है जैसे रिटर्न सरलीकरण पर यह कहा जाता है कि इसका एक प्रायोगिक प्रोजेक्ट 1 अप्रैल से प्रारम्भ किया जाएगा लेकिन इसकी जरुरत इस समय तत्काल है . जीएसटी रिटर्न पेश करने के आंकडें निरंतर गिरते जा रहे हैं और अभी हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार रिटर्न नहीं भरने वाले डीलर्स की संख्या अब आने वाले समय में 25% को छूने वाली है आइये इस सम्बन्ध में जारी आंकड़ों को देखें कि किस तरह से प्रक्रियाओं के उलझाव के कारण डीलर्स के रिटर्न भरने का प्रतिशत गिरता जा रहा है:-

जीएसटी नेटवर्क की क्षमता और गति :-

जीएसटी नेटवर्क की क्षमता और गति के बारे में भी जीएसटी कौसिल को अब कोई अंतिम निर्णय लेकर इसके सुधार के प्रयास करने चाहिए. इस संम्बंध में शायद ही जीएसटी कौसिल में कोई बहस हुई हो जबकि जीएसटी प्रक्रियाओं में आने वाली अडचनों के लिए जीएसटी नेटवर्क को भी एक बहुत बड़ा पक्ष माना जाता है और इस सम्बन्ध में एक राय यह भी है कि जीएसटी नेटवर्क को सम्हालने की जिम्मेदारी अब एक से अधिक ऑपरेटर्स को दी जानी चाहिए क्यों कि जीएसटी नेटवर्क की समस्याओं को अब 18 माह से अधिक हो गए हैं और इसमें वांछित सुधार नहीं हो पाया है .

जीएसटी लेट फीस :-

जीएसटी लेट फीस पर पिछली मीटिंग में एक फैसला हुआ था जिसमें जिन डीलर्स ने अपने रिटर्न नहीं भरे थे उनको लेट फीस से पूरी तरह से  मुक्त कर दिया गया था और इसी फैसले ने उन डीलर्स की, जिन्होंने लेट फीस के साथ रिटर्न भरे हैं , इस मांग ने जोर पकड़ लिया है कि उनकी वसूल की गई लेट फीस को लौटाया जाए. यह मांग समानता के अधिकार और व्यवहार पर आधारित है और इसे नहीं मानने का कोई कारण भी नहीं है इसलिए इस मांग पर इसी मीटिंग में फैसला हो जाना चाहिए ताकि सन्देश यह जाए कि “एक देश एक कर” के तहत लागू किये गए जीएसटी में फैसले करते समय भी कोई भेदभाव नहीं किया जाता है.

जीएसटी की थ्रेशहोल्ड लिमिट :- 

जीएसटी की इस समय थ्रेशहोल्ड लिमिट 20 लाख रूपये है और इसे बढ़ा कर छोटे उद्योग और व्यापारी को राहत दी जा सकती है. देखिये वेट में अधिकांश राज्यों में यह लिमिट 10 लाख रूपये थी लेकिन केद्रीय उत्पाद शुल्क (सेंट्रल एक्साइज) में यह सीमा 150 लाख थी और सेवा कर में भी यह सीमा 10 लाख रूपये थी. एक अनुमान के अनुसार यह सीमा 40 लाख रूपये होनी चाहिए लेकिन अगर कानून निर्माता इस सीमा तक नहीं भी जाए तो उन्हें कम से कम यह सीमा 30 लाख तक तो बढ़ा देनी चाहिए . जीएसटी वेट, सेंट्रल एक्साइज और सेवा कर का एक मिश्रित रूप है अत: प्रारम्भ में भी यही कहा गया था कि जीएसटी के दौरान भी यह सीमा इन सभी सीमाओं को मध्य में रखकर किया जाना चाहिए . जीएसटी लगने के बाद डीलर्स इसकी प्रक्रियाओं में इतना उलझ कर रह गए कि इस मांग पर ज्यादा जोर दिया ही नहीं गया . अब जीएसटी में मंत्रियों की समिती ने ही इस सीमा को बढाने की सिफारिश की है तो जीएसटी कौंसिल को भी इस पर कोई फैसला लेते हुए इसे बढ़ाकर छोटे पैमाने पर कार्य कर रहे डीलर्स को राहत दे देनी चाहिए.

सेवा क्षेत्र के लिए कम्पोजीशन स्कीम :-

इस समय निर्माताओं , व्यापरियों और रेस्टोरेंट डीलर्स के लिए कम्पोजीशन स्कीम है और इसके टर्नओवर की सीमा 1 करोड़ रुपये जिसे 1.50 करोड़ रूपये करने के अधिकार सरकार को प्राप्त हो गए है अब जीएसटी कौंसिल को कम्पोजीशन स्कीम  की अधिकत्तम सीमा को व्यवहारिक रूप से बढा कर 1.50 करोड़ करने की सरकार को सिफारिश कर देनी चाहिए .

सेवा क्षेत्र को अब तक कम्पोजीशन स्कीम से बाहर रखा गया है लेकिन अब इसे भी कम्पोजीशन स्कीम का विकल्प देने की बात चल रही है और जीएसटी कौंसिल द्वारा गठित मंत्रियों की समिती इसकी सिफारिश भी कर चुकी है तो इस बारे में भी अब फैसला हो जाना चाहिए .

आइये देखें क्या होता है जीएसटी कौंसिल की 32 वीं मीटिंग में जो कि 10 जनवरी 2019 को होने वाली है .

(Author can be reached on sudhirhalakhandi@gmail.com)

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5 responses to “जीएसटी कौंसिल की 32वीं मीटिंग- उम्मीदें और आशाएं”

  1. Rakesh Pundir says:

    what about the Natural Gas
    when Natural Gas will come under GST

  2. BRIJESH GUPTA says:

    when peritoneum will come under GST

  3. Shabdar Ali says:

    GST mein sudhaar se desh ki arthvayvastha aur adhik sudrigh hogi aur vikas ki dar mein bhi kaafi sudhaar honi ki sambhawnayen badhengi

  4. SURESH says:

    WHAT ABOUT THE GST ON TRANSACTION RELATED TO SALE OF PROPERTY. ITS TOO HIGH AS STAMP DUTY PREVAILS IN EVERY STATES FOR REGISTRATION OF PROERTY DOCUMENTS.

  5. Jisab Raul says:

    Respected Sir this useful news for us and also verry good for translating in hindi Keep it up Sir

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