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GST विभाग में फर्जी पंजीयन एवं फर्जी व्यापार को रोकने के लिए GST पंजीयन में वकालतनामा लगाया जाना अनिवार्य किया जाए ! मान्यवर ! आपको विदित है कि इन दिनों लगातार गुड्स एवं सर्विस टैक्स विभाग में फर्जी पंजीयन हो रहे हैं तथा गुड्स एवं सर्विस टैक्स की लगातार टैक्सचोरी/फर्जी टैक्स बिल/फर्जी टैक्स रिफंड आदि […]
जीएसटी कौंसिल की 31वीं मीटिंग 22 दिसंबर 2018 अर्थात इससे सप्ताह में होनी है और इस समय जीएसटी जिस हालात से गुजर रहा है ,आप समझ सकते हैं कि यह मीटिंग बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण हो गई है क्यों कि हमने अपने पहले लेख में आपको बताया था कि जीएसटी में ना सिर्फ बहुत अधिक सुधार की गंजाइश है बल्कि अब यह जीएसटी के अस्तित्व के लिए अनिवार्य भी है .
इस समय भी जीएसटी सिस्टम सही से काम नहीं कर रहा है और रिटर्न भरनी की अंतिम तिथी जब भी होती है तब यह सिस्टम फ़ैल हो जाता है लेकिन अभी हाल ही मै अंतिम तिथी के कई दिन पहले भी बंद होना प्रारम्भ हो गया है .
हमारे देश में 1 जुलाई 2017 से बाजे गाजे के साथ GST लगाया गया! लम्बे चौड़े भाषण दिए गए थे कि- एक देश, एक कर! व्यापारी को अब बड़ी आसानी हो जाएगी! पड़ोस के बच्चे से भी अपना रिटर्न भरवा सकोगे ! और क्या बोला था कि रिटर्न तो आपको बस एक ही भरनी होगी ! बाकी रिटर्न अपने आप भर जाया करेंगे।चुटकियो का खेल है रिटर्न भरना, इत्यादि ! सब बातें अब फेल हो गयी ! सबसे पहले तो पड़ोस के बच्चे से रिटर्न का एक कॉलम तो भरवाकर दिखाओ !
जीएसटी लागू हुए लगभग अब दो माह पूरे होने को है तो आइये अब समय आ गया है की हम चर्चा प्रारम्भ करें जीएसटी होने के बाद की समस्याओं की और आज चर्चा कर रहें है कुछ् ऐसे ही छोटे व् मध्यम दर्जे की डीलर्स की व्यवहारिक रूप से सिर्फ कम्पोजीशन स्कीम के तहत ही काम कर सकते है लेकिन जी.एस.टी. के सिस्टम की तकनीकी खामियों के कारण उन्हें कपोजीशन के लाभ से वंचित कर दिया गया है .
ये कैसा सरल कानून और कार्यतंत्र बनाया है सरकार ने GST का, जिसमें कि उसको रोज ही नए-नए सर्कुलर, अमेंडमेंट ही नहीं बल्कि extension भी लाना पड़ रहा है, जिससे करदाताओं और सलाहकारों को असुविधा और confusion दोनों ही हो रहे हैं।
वस्तु एवं सेवा कर या जी एस टी एक व्यापक, बहु-स्तरीय, डेस्टिनेशन (गंतव्य) आधारित कर है जो वस्तु व् सेवा कर बढ़ते हुए मूल्य पर लगेगा. यह कर प्रणाली वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) की तरह ही है, जहाँ प्रत्येक सप्लाई पर सप्लाई के मूल्य में जो भी इजाफा होगा उस पर कर देय होगा. नई GST प्रणाली में यों तो अनेक कर (टैक्स) समाहित किये गए है,
आई.जी.एस.टी. बिक्री के लिए ट्रांजेक्शन- प्रथम विक्रेता x मुंबई – 10 लाख रूपये मुंबई के ही y को . द्वितीय विक्रेता – Y मुंबई 10.50 लाख रूपये राजस्थान के Z को . तृतीय विक्रेता – Z राजस्थान 11 लाख रूपये राजस्थान में ही उपभोक्ता को. 1.पहला ट्रांजेक्शन राज्य के भीतर है . 2. दूसरा ट्रांजेक्शन अन्तर प्रान्तीय है (IGST). तीसरा ट्रांजेक्शन राज्य के भीतर है .
जी.एस. टी. के लिए 1 अप्रैल 2017 की तारीख तो अब स्थगित की जा चुकी है और अब नयी तारीख 1 जुलाई 2017 दी गई है . एक तारीख और है 16 सितम्बर 20017 और इस तारीख तक यदि जी.एस.टी. लागू नहीं हुआ तो एक अप्रत्यक्ष करो को लेकर एक संकट पैदा हो जाएगा क्यों की जी.एस.टी. संवैधानिक संशोधन विधेयक के अनुसार 16 सितम्बर 2017 को अभी लागू सभी कर समाप्त हो जायेंगे.
जी.एस.टी. की जो पिछली कुछ बैठकें हुई थी उनमें से अंतिम तीन मीटिंग्स में जो मुद्दा सबसे अधिक चर्चा का विषय बना था वह था करदाताओं के ऊपर दोहरे नियंत्रण अर्थात ड्यूल कण्ट्रोल का.