– सुधीर हालाखंडी

CA Sudhir Halakhandiडीलर्स और प्रोफेशनल्स अब थकने लगे है- जीएसटी सरलीकरण और सिस्टम सुधार एक बहुत बड़ी जरुरत

जीएसटी लागु किये हुए इस समय तक अब 18 महीने हो चुके हैं लेकिन जीएसटी प्रक्रियाएं प्रारम्भ से ही इतनी जटिल बनाई गई और इसके बैक टू बैक जिस तरह से रिटर्न्स भरने की जिम्मेदारी दी गई थी उससे प्रारम्भ में ही यह आशंका व्यक्त कर दी गई थी और यह आशंका तब और सच्चाई में बदल गई जब जीएसटी सिस्टम भी सरकार की उम्मीदों पर पूरा नहीं उतारा . जीएसटी प्रबंधन की जीएसटी रिटर्न पर लेट फीस वसूल करने की मुहीम ने इस स्तिथी की तब और बिगाड़ दिया जब कि रिटर्न भरने का सिस्टम भी डीलर्स और प्रोफेशनल्स को पूरी तरह से सपोर्ट नहीं कर रहा था .

कुछ रिटर्न्स की लगातार तारीखें बढाई गई , कुछ को अभी तक स्थगित रखा गया लेकिन मासिक रिटर्न को हमेशा समय पर माँगा गया और समय पर नहीं आने पर लेट फीस की वसूली जारी रही और इसके  साथ ही डीलर्स की लेट फीस माफ़ करने की मांग जोर पकडती रही .

इस समय भी जीएसटी सिस्टम सही से काम नहीं कर रहा है और रिटर्न भरनी की अंतिम तिथी जब भी होती है तब यह सिस्टम फ़ैल हो जाता है लेकिन अभी हाल ही मै अंतिम तिथी के कई दिन पहले भी बंद होना प्रारम्भ हो गया है .

सूचना तकनीक में जो भी सिस्टम विकसित किये जाते हैं वे आने वाले समय को देखे हुए विकसित किये जाते हैं उदाहरण के लिए मान लीजिये कि आज एक सिस्टम विकसित करना है तो इसे आज के दस साल बाद की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाना चाहिए लेकिन जीएसटी का सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है जो वर्तमान आवश्यकताओं को ही पूरा नही कर पा रहा है . यह जीएसटी का एक बहुत ही निराशाजनक पक्ष है .

GST Simplification

जीएसटी में एक वार्षिक रिटर्न भी है जिसे डीलर्स को वित्तीय वर्ष समाप्त होने के 9 माह की समाप्ति तक पेश करना था अर्थात यह रिटर्न दिसंबर माह की आखिरी तारीख तक प्रस्तुत करना था लेकिन इसे जीएसटी सिस्टम पर भरने योग्य बनाया ही नहीं जा सका . इसके लिए जीएसटी प्रबन्धन के अलावा और कौन दोषी हो सकता है ? इस रिटर्न की तिथी अब बढ़ा कर 31 मार्च कर दी गई है . इसी से पता लगता है कि जीएसटी प्रबन्धन कुशल हाथों में नहीं है .

जीएसटी लागू होने के बाद इतनी अधिसूचनाए जारी की गई है कि इस सम्बन्ध में भ्रम और असमंजस और बढ़ गया है. रिवर्स चार्ज के नाम पर जो एक अव्यवहारिक प्रावधान लागू किया गया वह बार-बार स्थगित होते हुए अंत में अभी वह सितम्बर 2019 तक स्थगित है और यह भी एक संकेत है कि जीएसटी की प्राम्भिक योजना ही खामियों से भरी पड़ी थी .कम्पोजीशन डीलर्स तो खरीद की सूचना को लेकर हर बार ही असमंजस में रहते है जिसे बार-बार सरकार को दूर करना पड़ता है . इस प्रकार जीएसटी अब इस प्रकार का कर कानून हो गया है जो अब अधिसूचनाओं पर आधारित हो गया है .

जीएसटी जब लागू किया गया था तो एक वचन दिया गया थी कि उस वक्त जारी अनेक अप्रतक्ष कर कानूनों की जगह एक सरलीकृत जीएसटी लाया जा रहा है . जीएसटी में मान लीजिये और बहुत कुछ होगा लेकिन सलीकरण से तो इसका दूर – दूर का कोई रिश्ता नजर नहीं आता है .

बिल टू बिल मेचिंग भी एक बड़ी समस्या है जो कि ना सिर्फ डीलर्स का समय बर्बाद करती है बल्कि बिल टू बिल मेचिंग के कारण जो हर बिल की डिटेल्स GSTR-1 में दी जाती है जो कि डीलर्स के लिए तो एक समस्या है ही इसके अतिरिक्त यह जीएसटी नेटवर्क को भी सूचनाओं की अधिकता से ब्लॉक करता है .इसका एक विकल्प डीलर टू डीलर मेचिंग है . सिस्टम जटिल हो जिससे कर की चोरी तो बचती है लेकिन व्यवहारिक भी होनी चाहिए और जीएसटी इसी व्यवहारिकता का प्रारम्भ से ही अभाव रहा है . जीएसटी के रिटर्न्स पर लगनी वाली लेट फीस को लेकर जीएसटी प्रबंधन की जिद भी इसी अव्यवहारिकता का परिणाम है .

जीएसटी एक अच्छा कर है लेकिन प्रक्रियाओं की जटिलता और जीएसटी प्रबंधन की अकुशलता और जीएसटी सिस्टम की क्षमता और गति इसकी सफलता पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है. सरकार को जीएसटी को लम्बे समय तक सफलता पूर्वक चलाना है और देश की अर्थ व्यवस्था को जीएसटी के सहारे आगे ले जाना है तो इसे लगाने के तरीके पर एक बार फिर से सोचना पडेगा और कोई सरलीकृत प्रक्रिया का निर्माण कर जीएसटी को सरल बनाना होगा , जीएसटी सिस्टम को सुधारना होगा  क्यों कि अब डीलर्स और प्रोफेशनल्स थकने लगे हैं जो की जीएसटी के भविष्य के लिए एक खतरनाक संकेत है.

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18 Comments

  1. Radheshyam Gour says:

    Tax Professionals शुरु दिन से सरकार को आगाह कर रहे है। परन्तु सरकार ने अपने दम्भ, जिद और बेपरवाही से एक अच्छे कर की बुरी गत बना दी। लगता है वितमन्त्री Tax Professionals और डीलर्स के प्रति पूर्वाग्रह पाले बैठे है । उनकी जिद से ना केवल उनकी अपनी सरकार की किरकरी हो रही है, डीलर्स और कर व्यवसायी भी निराश-हाताश है।

  2. Mukund says:

    First of all agar gst system ko sudharna hai to ise third class service provider se turant hatana hoga. Sarkar ki banai returns simple hai lekin ise software service provider ne third class bana diya hai. Is se achha software to nic wale banate hai. Sabse pahli jaroorat nikal bahar karo infosys ko or kisi achhi company ko do. Sab thik ho gayega.

  3. Radheshyam Gour says:

    Tax Professionals शुरू से ही आवाज उठा रहे थे, लेकिन सरकार ने उनको अनसुना कर दिया। सरकार ने अपनी जिद्द, बेपरवाही और वजह से एक अच्छी कर व्यवस्था की बुरी गत बना दी है।

  4. Atul says:

    Do not worry ! GST will settle .The worry is only that if it settles ,the money out of GST for professionals will also evaporate. In Modi 2.0 era , GST Returns system will simplify and the overall GST structures will also be repaired .But the more simple it goes ,the lesser attractive it will be for professionals . Bharat is a nation of great talent,let the talent works for itself to become more talented !!!

  5. SIDDHESH T YADAV says:

    Sirf aur Sirf Late fees Khane ke liye hi hain …aaj bhi sirf 1 bar GSTR3B KE liye delars ko agar kohi amnesty (Late fees waiver) dee jaye regular karne ke liye to bahot aasan hoga aur tax revenue bhi badega but government more interested in

  6. Amitabh says:

    We, the people of India made in error by giving power to person(s) who are so insensitive and unfortunately we are reaping the demons of it. GST should have been a simple tax system, with quaterly or even six monthly return for small and medium businesses with a duty to pay tax on estimate basis monthly else interest on delayed payment should have been levied.

    The only way out is to push this Dictator like government out of power and bring in someone who is sensitive to poor and small and medium businesses and not towards big players.

    We need to raise our voices against this and i am sure we will.

    There’s a saying in English,”Fool me once, Shame on You. Fool me twice, Shame on me.”

    I am sure the people of India would be fooled twice.

    Regards
    Amit

  7. Rohtash Kumar says:

    In my opinion, an excellent professional suggests better & best solutions for the problems. Due to new concept, there could be some problems. These would be rectified by our best suggestions. There is a big problem in India that we all wait for the last dates for submission all the Compliances and Tax Returns while the Authorities have already given us sufficient time for submission or completion the same. We must submit our all Tax Return and compliances before the eleventh hours. Why should we wait for the last dates?

    We have ICWAI, ICSI, ICAI and many more best institutes in India. Which are supporting the GST concept very enthusiastically. As we are already aware that the ICAI is the second largest professional Accounting & Finance body in the world which is providing us many best professionals and taking initiative and providing better suggestions for smoothening the process and systems.

  8. JITENDER KUMAR RANKA says:

    Very True and some more complications are like in addition to others:1. Treatment of reimbursement of discounts given by dealers under approval of principal company. It is basically reduction of purchase amount of dealer and sale amount of principal company. Why it is to be treated as sales promotion service income whereas there is no income by dealer. It is a mere reimbursement by principal company of discount given in market by dealer. No income involved and such reimbursemets should be out of GST.
    2. Govt. Levies interest on late payment @ 18% pa and time limit is 20 days for businesses who has very small set up and compliance is an issue. Most of the time even GST has not been collected as payment from market by the time of due date.

    Against it Govt. allows its machinery(depts) 60 days(as against 20 days allowed to businesses) for any refund and after this a very meagre rate of 6% is payable as interest. This is one example of double standard.
    Govt. wants to hold public accountable whereas govt. itself is not showing accountability. GST is in hands of unaccountable, irresponsible, impractical, theoritical, slow, backward thinking people.

  9. RADHA RANI SHUKLA says:

    सुधीर जी का लेख अक्षरशः सही है जी एस टी के प्रबंधन एवं प्रक्रिया में अभी तक पूर्णतः तालमेल नहीं हो पाया हैी इस सम्बन्ध में निम्नांकित सुझावों पर ध्यानाकर्षण करना चाहूंगी कि
    १. कुछ समय के लिए वैट प्रणाली के अंतर्गत उपयोग कियेजाने वाले मासिक एवं वार्षिक प्रारूपों को कुछ फेर बदल कर काम में लिया जाये.
    २.उपरोक्त प्रारूपों में आई जी एस टी , सी जी एस टी एवं एस जी एस टी के लिए एक पार्ट रखा जाये.
    ३.खरीदी और बिक्री का समामेलन खरीदार एवं विक्रेता के द्वारा वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करते समय किया जाये .
    ४. वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की तारीख ३१ मई रखी जाये.
    यदि ये सुझाव जी एस टी सरलीकरण में कारगर हो सकें तो मुझे लगेगा कि देश हित में मैंने कुछ योगदान किया.

  10. lalit sharma 9826537455 says:

    manyavr mahoday ji,
    namskar
    aapne gst ke khilaf jo aawaj uthai uske liye hraday se bahut bahut dhanyabad
    aape se asha karte hain ki bhavishya me aap hamesh aisi hi aawaj uthate rahenge
    tin rajyo me b j p ki haar ke baad kendra sarkar ki bhi bidai tay hain

  11. krishna chandra agarwal says:

    decision is being taken for GST, BY KEEPING IN THE MIND TO WIN THE ELECTION OF 2019,
    Moreover, the command of gst has been given in the hand of political person, who are not educated, how GST can be sucessful

  12. K.S.SHAH says:

    R/SIR,
    ALL DETAILS VERY GOOD AND DEEPLY WRITING ABOUT GST PROBLEMS.
    GSTR9 JO GSTR3B + GSTR1 SE HI BANTA HE TO YE SAB DETA PORTAL PAR HAMNE RAKHA HI HE, PORTAL HI CONCOLIDATE KARKE BANA LENA CHAYE SOFTWARE K THRU ESA MERA MAN NA HE.
    THANKS & REGARDS

  13. DS Yogita says:

    Dear Sir,

    Apart from this problems one more very important topic needs to be highlighted that if gstr1 has any error in gstn and which has not rectified in sep;18 then that error remains.
    There is really not way to rectify the same. this is more pathetic

  14. RAVI KKESHARWANI says:

    आपका ह्रदय से आभार , आपने GST सरलीकरण के लिए जो परेशानीयां गिनाई है वह वास्तव में बहुत ही कष्टदायक है, कृपया इसका सही सूझाव निकाल कर भारत सरकार को अवगत कराए , इसी तरह GSTR-9 में भी (GSTR -3B एवं GSTR-1 का ही DATA जाएगा जो की अव्यवहारिक है जिसमें की वह डाटा डालना था जो वास्तविक DATA है का कोई भी कॉलम नहीं है )एवं कई अन्य व्यावहारिक गलतियाँ है उसे भी दूर करने का सुझाव भारत सरकार को देने का कष्ट करे | सधन्यवाद

  15. Suresh Rai says:

    Sir,
    This is totally impractical and untested system implemented by the Government, and till now they are unable to understand how to simplify it.

    Every business community hot and bothered.

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