CA Sudhir Halakhandi

1.  क्या होगा यदि जी.एस.टी. 16 सितम्बर 2017 तक लागू नहीं होता है

प्रश्न :- 1  जी.एस. टी. के लिए  1 अप्रैल 2017 की तारीख तो अब स्थगित की जा चुकी है और अब नयी तारीख 1 जुलाई 2017 दी गई है . एक तारीख और है 16 सितम्बर 20017 और इस तारीख तक  यदि जी.एस.टी. लागू नहीं हुआ तो एक अप्रत्यक्ष करो को लेकर एक संकट पैदा  हो जाएगा क्यों की जी.एस.टी. संवैधानिक संशोधन विधेयक के अनुसार 16 सितम्बर 2017 को अभी लागू सभी कर समाप्त हो जायेंगे.   ऐसे मे सरकार किस तरह से करों को एकत्र करेगी .

सुधीर हालाखंडी :-  जिस तरह से सरकार की तैयारी है और जिस तरह के कानून निर्माताओं द्वारा दावे किये जा रहें है उनके अनुसार जी.एस.टी. एक जुलाई   2017  से लागू हो ही जाएगा और अब सरकार का कर्तव्य भी है  कि अब वह इस तारीख से जी.एस,टी. को लागू कर दे . अत: इसमें कोई संशय नहीं होना चाहिए कि ऐसी कोई स्तिथी उत्पन्न होगी .

GST by Sudhir Halakhandi

प्रश्न :-2  चलिए मान लेते हैं  लेकिन हो सकता है कि सरकार  16  सितम्बर 2017 तक जी.एस.टी. नहीं लागू कर सके तो क्या होगा ?

सुधीर हालाखंडी :- इस तरह की स्तिथी में संकट तो है पर इसके दो हल है पहला यह कि सरकार कारण बताए हुए राष्ट्रपति महोदय के पास जाए और वे अपनी संविधान संशोधन विधेयक द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग कर अभी तक जारी करों को आगे बढ़ा दें और दूसरा यह यह है कि सरकार फिर से संसद मे जाए .

इन दोनों ही रास्तों से इस समस्या का हल मिल सकता है . इसलिए आप निश्चिन्त रहिये ऐसी किसी भी स्तिथी में देश अप्रत्य्यक्ष करों के बिना नहीं रहेगा और अभी चल रहे अप्रत्यक्ष कर लागू रहेंगे.

2. जी..एस.टी. से जुड़ी सभी समस्या दोहरे नियंत्रण का प्रश्न

प्रश्न :- 1  क्या जी.एस.टी. से जुड़ी सभी समस्याएँ हल कर ली गई है ?

सुधीर हालाखंडी :- जी.एस.टी. कौंसिल की जो अंतिम मीटिंग हुई थी उसमें यह घोषित किया गया है कि जी.एस..टी. से जुड़ी हुई सभी समस्याएँ हल कर ली गई है और अन्तिम समस्या जो डीलर्स पर राज्य एवंम केंद्र के दोहरे नियंत्रण की समस्या थी वह भी हल कर ली गई है . यह समस्या भी अब केंद्र और राज्यों की बीच हल हो चुकी है .

प्रश्न :- 2 अच्छा तो डीलर्स  अब दोहरे नियंत्रण की कोई समस्या नहीं है.

सुधीर हालाखंडी :-  जिस तरह से इस समस्या को हल करने का दावा किया गया है उसके अनुसार अब १५० लाख रूपये  से ऊपर के  डीलर्स में से आधे केंद्र सरकार के पास और आधे राज्य सरकार के पास रहेंगे . इस तरह से यह समस्या 50:50 तरीके से हल की गई है जो मेरी राय में करदाताओं के लिए भविष्य में असमंजस और भ्रम की स्तिथी पैदा करेगी . इसलिए हो सकता है केंद्र और राज्य ने आपस में यह समस्या हल कर ली है लेकिन जिस तरह से यह समस्या हल की गई है उससे ही डीलर्स के लिए  कई समस्याएं खड़ी होने वाली है .

प्रश्न :- 3 तो क्या हल हो सकता है इस समस्या का ताकि डीलर्स को कोई परेशानी नहीं हो.

सुधीर हालाखंडी :- हाँ यदि हमारे कानून निर्माता इस समस्या को डीलर्स के हित ध्यान में रखते हुए हल करना चाहते है तो उन्हें डीलर्स का इस तरह से बंटवारा करने की जगह केंद्र एवं राज्य सरकार के अप्रत्यक्ष कर के समस्त स्टाफ को एक कैडर में लाकर एक संघीय ढांचा तैयार करना चाहिए ताकि यह दोहरे नियंत्रण की समस्या भी हल हो जाये और डीलर्स को भी कोई तकलीफ नहीं हो .

प्रश्न :- 4 क्या यह सम्भव है ?

सुधीर हालाखंडी :- जिस तरह से भारत में जी.एस..टी. लागू किया जा रहा है कोई जी.एस.टी. का आदर्श स्वरुप नहीं है इसमे केंद्र और राज्यों के कर लगाने के अधिकार की रक्षा करने के लिये बहुत से समझौते  किये गए है  और यदि अब  इसे सफलता पूर्वक लागू करना है और भारतीय अर्थव्यवस्था को जी.एस.टी. के लाभ देने है तो इसी तरह से और भी  समझौते करने होने ताकि डीलर्स को परेशानी कम से कम हो सके  क्यों कि जी.एस.टी. के तहत कर  इन्ही डीलर्स को एकत्र करना है .

यह एक नया प्रयोग होगा जो मुश्किल तो है पर असंभव नहीं है . डीलर्स को केंद्र और राज्य के बीच “फ़ुटबाल” बनाने से तो अच्छा है सरकार इस फार्मूले पर कार्य करे.

3. आई.जी.एस.टी. क्या यह की लागत बढ़ाएगा

प्रश्न :- 1 आई.जी.एस.टी. के बारे में कहा जा रहा है कि दो राज्यों के बीच होने वाले व्यापार के दौरान ना सिर्फ माल की लागत बढ़ाएगा बल्कि प्रक्रिया सबंधी उलझने भी पैदा करेगा . क्या यह सही आशंका है ?

सुधीर हालाखंडी :- आई.जी.एस.टी. कोई अलग कर नहीं है बल्कि यह एक ऐसा तन्त्र है जिससे दो राज्यों के बीच होने वाले व्यापार को इस तरह से नियंत्रित किया जाएगा जिससे एकत्र होने वाले कर का एक हिस्सा जो कि सी.जी.एस.टी. अर्थात केंद्रीय जी.एस.टी. के  बराबर होगा वह केंद्र को जाएगा एवं दूसरा हिस्सा जो कि एस.जी.एस.टी. अर्थात राज्यों के  जी.एस.टी. के बराबर होगा वह उस राज्य को जाएगा जहाँ वह माल उपभोग किया जाएगा . जी.एस.टी. एक अंतिम उपभोक्ता के राज्य को मिलने वाला कर है  इसलिए जो निर्माता राज्य होगा उसे कोई कर नहीं मिलेगा.  इस प्रकार आपके प्रश्न का जो पहला हिस्सा है उसका जवाब है और  इससे कोई कर नहीं बढेगा लेकिन आई.जी..एस.टी .डीलर्स के प्रक्रिया संबंधी लागत एवं उलझने जरुर बढ़ जायेंगी.

 प्रश्न :- 2 क्या आई.जी.एस.टी. भी केंद्र एवं राज्यों के जी.एस.टी. कानून के अनुसार चलेगा ?

सुधीर हालाखंडी :- नहीं, आई.जी.एस.टी.  के लिए एक अलग आई.जी.एस.टी. कानून बन रहा है . जी.एस.टी. कानून  की तरह इसका भी प्रारूप जी.एस.टी. कौंसिल के द्वारा  जारी कर दिया गया है .

प्रश्न :- 3 क्या आई.जी.एस.टी. भी अभी जारी केंद्रीय बिक्री कर कानून सी.एस.टी.  की तरह सी- फॉर्म इत्यादि होंगे जिनसे अक्सर व्यापारी वर्ग परेशान रहता है.

सुधीर हालाखंडी :- आई.जी.एस.टी. में सी.एस.टी. अर्थात अभी जारी  केन्द्रीय बिक्री कर की तरह कर की कोई रियायती दर ही नहीं होगी इसलिए सी-फॉर्म जैसे किसी फॉर्म की कोई जरुरत नहीं होगी.

4.क्या जी.एस.टी. गेम चेंजर होगा ?

प्रश्न :- 1 जिस तरह से प्रचारित किया जा रहा है क्या जी.एस.टी. उसी तरह से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए  “ गेम चेंजर” होगा ?

सुधीर हालाखंडी :- हाँ , जी.एस.टी. के बारे में जो कहा जा रहा है वह सच है . यदि जी.एस.टी. लागू होगा तो यह भारतीय  अर्थव्यवस्था की दशा बदल कर रख देगा . भारतीय अर्थव्यवस्था पर जी.एस.टी. एक बहुत प्रभाव डालने वाला होगा. यह भारतीय कर व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा परिवर्तन है इसलिए इसके परिणाम भी इतने ही बड़े होंगे.

प्रश्न :- 2 क्या यह प्रभाव सकारात्मक होगा ?

सुधीर हालाखंडी :- हां , आप प्रार्थना करें कि यह प्रभाव सकारात्मक ही हो क्यों कि जिस उम्मीद और प्रचार के साथ जी.एस.टी. लागू किया जा रहा अब उसमे सफलता के अलावा कोई और कल्पना करना भी अव्यवहारिक होगा . यदि जी.एस.टी. के परिणाम नकारात्मक हुए तो यह भारत की अर्थव्यवस्था के लम्बे समय तक इन्हें बर्दाश्त करना होगा क्यों  कि जी.एस.टी. एक बार लागू करने के बाद इसे वापिस लेना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं होगा.

इसलिए इस समय जी.एस.टी. की असफलता की चर्चा करने का कोई महत्त्व नहीं है और हम यह मांग कर चले कि जी.एस.टी. जब भी लागू होगा सफल ही होगा भारत की अर्थयवस्था पर इसके प्रभाव सकारात्मक ही होंगे.

प्रश्न :- 3 क्या जी.एस.टी. को सरकार द्वारा कुछ ज्यादा ही महिमामंडित  किया गया है ?

सुधीर हालाखंडी :- हाँ यह बिलकुल  सही है क्यों कि भारत में जो जी.एस.टी. लागू किया जा रहा है वह जी.एस.टी. का आदर्श स्वरुप नहीं है और यह कोई “एकल कर” भी नहीं है इसमे राज्य एवं केंद्र सेवा और बिक्री के एक ही व्यवहार पर अलग –अलग दो कर लगाएँगे एवं यह एक राज्यों और केंद्र के बीच कर लगाने के अधिकारों के मध्य से उपजा समझौतावादी  कर है . इसलिए जी.एस.टी. का आदर्श स्वरूप नहीं होते हुए भी इसके जो लाभ बताये जा रहें है उससे से यही लगता है कि आपकी बात सही है .

5. कौन ज्यादा शक्तीशाली होगा –  केंद्र या राज्य ?

प्रश्न :- 1. जी.एस.टी. के तहत  कहा जा रहा है कि केंद्र राज्यों के मुक़ाबले अधिक शक्तिशाली हो जाएगा . क्या यह सही धारणा है ?

सुधीर हालाखंडी :- जी.एस.टी. की इस पूरी प्रक्रिया के तहत राज्य अपने कर लगाने के अधिकार की सफलता पूर्वक रक्षा कर पाए है इसलिए यह कहना कि राज्य जी.एस.टी. के तहत कमजोर हो जायेंगे पूरी तरह सही नही है लेकिन केंद्र का एक तो जी.एस.टी. के तहत कर आधार बढेगा क्यों कि अब तक १५० लाख तक की बिक्री के निर्माता केंद्रीय उत्प्पाद शुल्क का भुगतान नहीं करते थे एवंम इसके अतिरिक्त व्यापारी भी केन्द्रीय उत्पाद शुल्क से मुक्त थे अब वे सभी अब केंद्र को सी.जी.एस.टी. का भुगतान करेंगे . इसके अतिरिक्त निर्माता राज्यों उनके राज्य से बाहर जाने वाले माल पर इस समय केन्द्रीय बिक्री कर के रूप में जो कर मिलता है वह नहीं मिलेगा  मिलेगा और वे इसकी क्षतिपूर्ति के लिए केंद्र पर निर्भर रहेंगे .

 इसलिए कुछ बिन्दु तो यहाँ केंद्र सरकार के पक्ष में है ही. इसके अतिरिक्त केंद्र को जी.एस.टी. कौंसिल में भी “वीटो” हासिल है.

6. जी.एस.टी. की प्रक्रियाएं :- क्या सरलीकरण आवश्यक है

प्रश्न :- 1 जी.एस.टी. के दौरान कर संम्बन्धी प्रक्रिया का सरल होना भी जरुरी है . अब तक जी.एस.टी. के दो मॉडल ड्राफ्ट जारी हो चुके है . आपको क्या लगता है इन ड्राफ्ट्स को देखने के बाद कि क्या प्रक्रियाओं में अभी और सरलीकरण की जरुर है ?

सुधीर हालाखंडी :- अभी जी.एस.टी. की जो प्रक्रिया सम्बन्धी कानून जारी किये गए है उनमे अभी और भी सरलीकरण की जरुरत है क्यों  कि कठिन प्रक्रिया वाले कानून डीलर्स के लिए परेशानी उत्पन्न करते है जो अंतिम रूप से कर एकत्र करने के लिए जिम्मेदार है इसलिय जी.एस..टी. की सफलता के लिए जी..एस.टी. की प्रक्रियाओं में सरलीकरण की अहम् आवश्यकता है .

इसके अतिरिक्त दोहरे नियंत्रण के लिए लिया गया 50 : 50 का फैसला भी प्रक्रिया संम्बन्धी उलझनें ही पैदा करेगा .

प्रश्न :- 2 रिटर्न की जी.एस.टी. के तहत क्या स्तिथी रहेगी ?

सुधीर हालाखंडी :- जी.एस.टी. के तहत हर माह तीन रिटर्न हर डीलर को भरने होंगे . इनमें से पहला बिक्री का रिटर्न होगा जो कि  जी.एस.टी.आर. -1 फॉर्म में प्रत्येक माह के समाप्त होने के अगले माह की दस तारीख तक भरना होगा . दूसरा रिटर्न जी.एस.टी.आर. -2 खरीद का होगा जो कि 10 तारीख के बाद लेकिन 15 तारीख तक भरना होगा एवं तीसरा रिटर्न जी.एस.टी. आर-3 होगा जो कि 20 तारीख तक भरना होगा एवं इस प्रकार से प्रत्येक डीलर को पूरे वर्ष में कम से का 36 रिटर्न भरने होंगे . इसके अतिरिक्त एक वार्षिक रिटर्न भी भरना होगा और इस हर वर्ष के कुल 37 रिटर्न हुए जो सही में बह ज्यादा है .

प्रश्न :- 3 जब सब कुछ ऑनलाइन है तो फिर डीलर्स को क्या परेशानी होगी ?

सुधीर हालाखंडी :- इस समय अधिकाँश डीलर्स केवल वेट में ही रजिस्टर्ड है और वे केन्द्रीय बिक्री कर के दायरे से बाहर है और अधिकाँश राज्यों में उन्हें हर तीन माह में एक रिटर्न भरने होते है इस तरह इस समय वार्षिक रिटर्न को मिलाते हुए वे कुल 5 रिटर्न ही भरते है लेकिन अब उन्हें कम से कम 37 रिटर्न भरने होंगे . अभी भी राज्यों में वेट के रिटर्न ऑनलाइन ही भरे जा रहे है और  सिस्टम के ऑनलाइन होने का यह अर्थ नही होना चाहिए कि डीलर्स द्वारा भरे जाने वाले रिटर्न्स की सख्या को 7 गुना से भी अधिक बढ़ा दिया जाए.

बड़े डीलर्स के लिए तो यह कोई परेशानी नहीं होगी पर जीएस.टी. के तहत बहुमत उन डीलर्स का होगा जो लघु और मध्यम श्रेणी से आते है और अभी सिर्फ वेट का ही भुगतान कर रहेंन है और उनके लिए इतने रिटर्न भरना सरल नहीं होगा.

कानून निर्माताओं को इस बात पर गौर करना चाहिए कि प्रक्रियाओं को सरल किया जाय और डीलर्स द्वारा भरे जाने वाले रिटर्न्स की संख्या को भी सीमित किया जाए.

7. छोटे डीलर्स के लिए कम्पोजीशन स्कीम

प्रश्न :- 1 क्या जी.एस.टी. के दौरान छोटे डीलर्स के लिए कोई कम्पोजीशन स्कीम भी होगी  ताकि उन्हें जी.एस.टी.  की प्रक्रिया से राहत मिल सके .

सुधीर हालाखंडी :- देखिये कम्पोजीशन स्कीम उन्ही डीलर्स के लिए व्यवहारिक होती है जो कि सीधे ही उपभोताओं को माल बेचते है . जो डीलर्स दूसरे  डीलर्स को माल बेचते है उनके लिए कम्पोजीशन स्कीम को कोई व्यवहारिक प्रयोग नहीं होता है क्यों कि कम्पोजीशन डीलर्स द्वारा बेचे गये माल पर “इनपुट क्रेडिट” नहीं मिलती है .

जी.एस.टी. के दौरान भी कम्पोजीशन स्कीम होगी और यह व्यापारी  और निर्माता दोनों के लिए होगी .

प्रश्न :- 2 कम्पोजीशन के तहत कर की दर क्या रहेगी ?

सुधीर हालाखंडी :- जी.एस.टी. मॉडल एक्ट के तहत व्यापरी के लिए कम्पोजीशन की दर कम से कम एक प्रतिशत होगी और निर्म्माताओं के लिए कम्पोजीशन की दर कम से कम 2.5 प्रतिशत होगी और इस प्रकार एस.जी.एस.टी. और सी.जी.एस.टी. दोनों की दर मिलाते हुए  व्यापारी  के कम्पोजीशन की सयुक्त दर कम से कम 2 प्रतिशत एवं निर्माता  के लिए यह सयुंक्त दर कम् से कम  5 प्रतिशत होगी .

प्रश्न :- 3 और कम्पोजीशन के लिए अधिकतम  टर्नओवर क्या होगा ?

सुधीर हालाखंडी :- 50 लाख रूपये . इससे अधिक के डीलर कम्पोजीशन का लाभ नहीं ले पायंगे.

प्रश्न :- 4 सर्विस टैक्स डीलर ?

सुधीर हालाखंडी :- सर्विस टैक्स डीलर्स  एवं अंतरप्रांतीय बिक्री करने वाले डीलर्स  भी कम्पोजीशन स्कीम  का लाभ नहीं ले पायेगें .

8. .जी.एस.टी. और कर की दर

प्रश्न :- 1 जी.एस.टी. के तहत कर की दर क्या रहने वाली है .

सुधीर हालाखंडी :- जी.एस.टी. के तहत कर की दरों को मुख्यत: चार भागों में बांटा जाएगा और यह दरें 5 प्रतिशत , 12 प्रतिशत , 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत होंगी . 5 प्रतिशत की दर सामान्य रूप से काम लेने वाली वस्तुओं पर लागू  होगी . 12 एवं 18 प्रतिशत एक स्टैण्डर्ड कर की दर होगी एवंम “विलासिता तथा हानिकारक” वस्तुओं पर कर की दर 28 प्रतिशत होगी .

खाद्य पदार्थ सामान्यतया करमुक्त होंगे .

प्रश्न :- 2 और सोना तथा अन्य कीमती धातुएं पर कर की दर ?

सुधीर हालाखंडी :- केंद्र सरकार ने इन पर चार प्रतिशत की दर प्रस्तावित की है लेकिन अभी इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है . इस क्षेत्र से मांग एवं इन वस्तुओं पर अभी की कर की दर को ध्यान में रखे हुए यह दर अंतिम रूप से  कुछ कम रहने की उम्मीद है .

प्रश्न :- 3 क्या अलग – अलग वस्तुओं पर कर की दरें तय कर दी गई है ?

सुधीर हालाखंडी :- हो सकता है कानून निर्माता इस और अपना अधिकाँश कार्य कर चुके हो लेकिन अभी इस बारे में कोई सूचियाँ जारी नहीं  की गई है .

9.जी.एस..टी. के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान

प्रश्न :- 4 जी.एस.टी. के तहत डीलर्स की गिरफ्तारी के प्रावधान भी काफी चर्चा में है . इस बारे में आप क्या कहेंगे ?

सुधीर हालाखंडी :-जी.एस.टी. के जो ड्राफ्ट मॉडल जारी किए गए है उनके अनुसार डीलर्स की विशेष प्रकार की  कर चोरी पर गिरफ्तारी के प्रावधान है जिनका काफी विरोध है लेकिन जो दूसरा ड्राफ्ट जारी हुआ है उसमे भी इन प्रावधानों में कोई विशेष रियायत नहीं दी गई है . गैरजमानती अपराध के लिए जहां पहले ड्राफ्ट में 250 लाख रूपये की कर चोरी  पर यह प्रावधान था उसे अब और भी घटा कर 100 लाख रूपये की कर चोरी  कर दिया गया .

लेकिन अभी यह खबर आ रही है कि अब जी.एस.टी. कौंसिल इसे 200 लाख  रूपये की कर चोरी  पर  करने पर विचार कर रही है .

प्रश्न :- 5 इस प्रावधान के बारे में आपकी क्या राय है और क्या यह पहली बार ही लाये जा रहे है ?

सुधीर हालाखंडी :- ऐसे प्रावधान अभी भी सर्विस टैक्स एवं केन्द्रीय उत्पाद  कर के तहत इस तरह के प्रावधान है लेकिन विशेषज्ञों की यह राय भी है कि इस तरह के प्रावधानों का दुरूपयोग होने की संभावना भी रहती है .

-सुधीर हालाखंडी

(CA SUDHIR HALAKHANDI, Laxmi Market, BEAWAR-305 901 (Raj), Rajasthan, Cell: – 98280 67256, Sudhirhalakhandi@gmail.com)

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3 responses to “जी.एस.टी. – सामयिक सवालों के जवाब”

  1. ajay kakkar says:

    sir i want to know one thing if i have the closing stock of goods which is 14.5% in vat act and 5% in gst act then which rate are apply on this stock after 1 july 2017 (after gst come in to force)

  2. Smit says:

    I m doing business of ticketing…airlines & railway
    How this new law of gst affect us…. wthat is the meqning of 20 lakh turnover in my business

  3. ashok jain says:

    A registered taxable person in delhi sends goods to a cold storagein Sonepat.and after paying rent for one two months received back his goods
    the goods are supply without consideration and also no property in goods is transferred

    what will be the nature of this transaction
    whether GST is leviabl or not
    If yes why
    if no why no
    D

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