CA Sudhir Halakhandi

जीएसटी लागू  हुए लगभग अब दो माह पूरे होने को है तो आइये अब समय आ गया है की हम चर्चा प्रारम्भ करें जीएसटी होने के बाद की समस्याओं की और आज चर्चा कर रहें है कुछ् ऐसे ही छोटे व् मध्यम दर्जे की डीलर्स की व्यवहारिक रूप से सिर्फ कम्पोजीशन स्कीम के तहत ही काम कर सकते है लेकिन जी.एस.टी. के सिस्टम की तकनीकी खामियों के कारण उन्हें कपोजीशन के लाभ से वंचित कर दिया गया है .

आइये देखें कि हुआ क्या है इन डीलर्स के साथ जो जीएसटी लगने की साथ ही अर्थात 1 जुलाई से कम्पोजीशन डीलर्स की तरह माल बेच रहे थे और चूँकि वे माइग्रेशन की प्राथमिक प्रक्रिया पूरी कर चुके थे इसलिए वे अपने “बिल ऑफ सप्लाई” पर भी अपना जीएसटी नंबर लिख कर माल बेच रहे थे और इसके साथ ही उन्होने अपना अंतिम माइग्रेशन करनी के लिए दस्तावेज भी जीएसटीन पर प्रस्तुत कर दिए थे लेकिन सिस्टम ने तकनीकी वजहों से उनकी सेवाएं साईट पर प्रारंम्भ नहीं की थी . यहाँ यह ध्यान रखे कि सिस्टम से अंतिम माइग्रेशन के अनुमोदन के बाद ही डीलर के अकाउंट में सर्विसेज प्रारम्भ होती है और इसके बाद ही वह डीलर कम्पोजीशन के लिए विकल्प ले सकता है .16 अगस्त कम्पोजीशन में विकल्प लेने की अंतिम तिथी थी और जिन डीलर्स की सर्विसेज इस तिथी तक प्रारम्भ नही हुई वे कम्पोजीशन का विकल्प नहीं ले सके. अब उन डीलर्स के लिए एक असंभव  सी स्तिथी उत्पन्न हो गई है . वे जीएसटी में जा नहीं सकते क्यों कि उन्होंने 1 जुलाई से ना तो कोई जीएसटी बिल काटा है और ना ही कोई कर ग्राहकों से एकत्र किया है इसके अतिरिक्त उनके व्यापार का जो स्वरुप है उसमें आगे भी जीएसटी के सामान्य डीलर की तरह काम करना संभव नहीं है.

आइये देखें कि यह समस्या क्यों उत्पन्न हुई और क्या इसमें डीलर को बिना उसकी किसी गलती या त्रुटि के एक अव्यवहारिक और असंभव स्तिथी में डाल दिया गया है तो अब ये मान लीजिये कि इस संकट का हल निकालना भी हमारे कानून निर्माताओं का ही काम क्यों कि उन्ही की त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण ही यह समस्या उत्पन्न हुई है . व्यवहारिक रूप से होना यह चाहिए कि प्रथम माइग्रेशन के साथ ही कम्पोजीशन में जाने का विकल्प प्रारम्भ हो जाना चाहिए या फिर अंतिम माइग्रेशन के के दस्तावेज अपलोड करने के साथ ही यह विकल्प दे देना चाहिए लेकिन जब यह विकल्प सर्विसेज प्रारम्भ होने के बाद ही मिलनी थी और जिन डीलर्स की सर्विसेज ही 16 अगस्त तक “सिस्टम द्वारा”  प्रारम्भ ही नहीं की गई तो अब इस असम्भव स्तिथी के लिए डीलर्स को कम्पोजीशन से वंचित रखना तो जीएसटी मूल उद्देश्य सरलीकरण एवं तार्किकता के ही विरुद्ध है .

जीएसटी एक नया कानून है और इसमें इस तरह की कई व्यवहारिक समस्याएं आना स्वाभाविक है जो कि जैसे –जैसे कानून आगे बढेगा वैसे –वैसे मालुम होगीं और जब भी ये समस्याएँ मालूम हो तो तुरंत ही इनका व्यवहारिक हल निकालना “कानून निर्माताओं” का काम है यदि वे चाहते है कि जीएसटी भारत में उसी तरह से सफल हो जैसे कि हमारे नीति निर्माता चाहते है .

अब इस समस्या का तुरंत हल निकलना ही सभी पक्षों और इस नए कानून जीएसटी के हित में है.

CA Sudhir Halakhandi

“Halakhandi”, Laxmi Market, Beawar-305901(Raj)

Cell- 9828067256, MAIL –sudhirhalakhandi@gmail.com

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9 Comments

  1. VIJAY J PUROHIT says:

    I AGREE WITH THE AUTHOR. ALL OVER INDIA THERE WILL BE SO MANY SMALL DELAERS WHO COULD NOT OPT FOR COMPOSITION DUE TO PORTAL PROBLEM OR DUE TO VALIDATION ERROR . NOW DATE FOR FORM 3B HAS ALSO EXPIRED CAN ANYBODY DRAW GOVT OR GSTN ATTENTION TO THIS PROBLEM. LOCAL SALES TAX DEPARTMENT ARE NOT GIVING ANSWERS

  2. om says:

    sir gst 3b wrong submit —this is no revice —-so please all return revice option open ——please sir this matter ————————–this problam solve me —-

  3. om says:

    compostion scheme date agian open because gst 3b return very tuff so businessman one time again this ——gst or composition scheme choose your personal business——-very very thanks this matter reopen——–thanks sir

  4. Hemant Bhandwalkar says:

    This is correct then what can be solution for the same issue can we request to department for opening of composition leavy…?

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