हाल में ही डोलो 650 टेबलेट बनाने वाली कंपनी माइक्रो लेब पर आयकर रेड के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आये. कोरोना काल में देश में सबसे ज्यादा टेबलेट बिकने का रिकॉर्ड दर्ज करने वाली कंपनी ने फर्जी रुप से मेडिकल संस्थानों और डाक्टरों को 1000 करोड़ रुपये का खर्च सेल्स प्रमोशन के नाम पर […]
भारत में 1999 में शेयर की फिजिकल ट्रेडिंग बंद करते हुए पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक रूप दिया गया, जिसमें फिजिकल शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक फार्म में रखना भी शामिल था और इसके लिए डीमेट खाता बनाया गया. हम आप आज के समय शेयर को भी बैंकों में जमा पैसे की तरह डीमेट खाते से उपयोग कर […]
कौन बनेगा करोड़पति गेम शो शुरू होने वाला है और इसी तरह के अनगिनत गेम शो, एप, आनलाइन गेम, आदि सोशल मीडिया पर धडल्ले से चल रहे हैं. सरकार इनसे बचने की जरूर सलाह देती है लेकिन इनकी कानूनी वैधता पर चुप रहती है. लेकिन हां इस पर टैक्स लगाकर राजस्व वसूलने में सरकार को […]
वैसे तो पड़ोसी की मदद करना हमारी सभ्यता के अनुरूप है, लेकिन मदद तभी कारगर साबित होती है जब हम खुद आत्मनिर्भर हो गए हो. लेकिन आज जो देश में हालात हैं, उसे देखते हुए पड़ोसी देश को मदद कर पाना मुश्किल बन पड़ा है. अब इसे मजबूरी ही कहिये कि चीन अपना आधिपत्य हमारे […]
18/07/2022 से जिन उत्पादों पर जीएसटी दरें बढ़ाई गई है, उससे सरकार की मंशा साफ तौर पर दिख रही है कि:1. ज्यादातर जीएसटी की दरें 18% पर सरकार लाना चाहती है2. किसी भी उत्पाद और सेवा को करमुक्त नहीं रखना चाहती3. केन्द्र सरकार समझ गई है कि राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति का हर्जाना जारी रखना होगा नहीं तो राज्य बगावत भी कर सकते हैं
देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले दीवान हाउसिंग – सन् 2010 से 2018 तक इसके प्रमोटरों ने खुलकर फर्जीवाड़ा किया और हमारी सरकार इन्हें हाउसिंग सेक्टर में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए इनाम देते रहे, बैंक इन्हें लोन बांटता रहा और तब इन्हें खुले आम किए जा रहा फर्जीवाड़ा भी अच्छा लगता रहा और जब 2019 में कंपनी ने डिफाल्ट किया तो सब खटकने लगा
सरकार द्वारा समय समय पर किए गए उपायों के बावजूद सिसक सिसक कर बढ़ रहा प्रापर्टी मार्केट फिर कराहने लगा है. ऐसा नहीं की सरकारें इस क्षेत्र को उठाने और बढ़ाने का भरसक प्रयास कर रही है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं दिख रहे हैं. हम सभी भलिभांति परिचित है कि रीयल एस्टेट सेक्टर न केवल […]
सामान्यत ये चलन व्यापक स्तर पर देखा जाता है कि व्यापारी या उद्योगपति अपनी बैंक लिमिट जारी रखने के लिए या बढ़वाने के लिए या बैंकों से अधिक वित्तीय सुविधा प्राप्त करने के लिए बढ़ा चढ़ाकर स्टाक दिखाते हैं जितना रिकॉर्ड में नहीं होता है और ऐसा करने में प्रायः यह भी देखा जाता है कि बैंकर्स, सीए और कर सलाहकार भी सहायता करते हैं.
रांची केस में सीए सुमन कुमार की गिरफ्तारी दर्शाता है कि न माया मिली न राम, बदनामी और जान के लाले पड़े सो अलग. हम सभी जानते हैं कि राजनेता, नौकरशाह और व्यापारी अपने धन और शक्ति बल से केस से बरी हो जाएगा लेकिन नुकसान होगा तो सिर्फ पैशेवर को. सिर्फ उसका व्यवसाय और केरियर […]
एक तरफ सरकार डिजिटल असेट जैसे क्रिप्टोकरेंसी, आदि जुए, सट्टे के प्रारुप को कानूनी मान्यता नहीं देने की बात कह रही है तो दूसरी तरफ इससे होने वाली आय पर टैक्स लेकर कानूनी मान्यता देने तैयार है और अब म्यूचुअल फंड को परमीशन दी जा रही है कि वो इन जुए सट्टे प्रारुप आभाषी मुद्रा […]