GST Act में अधिकृत प्रतिनिधि: जीएसटी एक्ट 2017 के तहत अधिकृत प्रतिनिधि की धारा 116 का विश्लेषण तथा धारा 70 (समन जारी करने की शक्ति) के साथ इसका संबंध ।
जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 116 करदाताओं को जीएसटी प्राधिकरण के समक्ष स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने का वैधानिक अधिकार प्रदान करती है, सिवाय उन मामलों के जहाँ व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य हो। अधिकृत प्रतिनिधि में रिश्तेदार, कर्मचारी, अधिवक्ता, सीए/सीएमए/सीएस, सेवानिवृत्त कर अधिकारी (निर्धारित शर्तों सहित) या अन्य अधिकृत व्यक्ति शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे नियम 116 के तहत अयोग्य घोषित न हों। दुराचार, आपराधिक दोषसिद्धि या पेशेवर प्रतिबंध की स्थिति में आयुक्त सुनवाई के बाद अयोग्यता घोषित कर सकता है। अधिकृत प्रतिनिधि और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता अलग-अलग भूमिकाएँ हैं। धारा 70 अधिकारियों को समन जारी कर साक्ष्य या दस्तावेज मांगने की शक्ति देती है और कार्यवाही न्यायिक मानी जाती है। धारा 70(1A) अधिकारी के निर्देशानुसार व्यक्तिगत या प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थिति की अनुमति देती है। सीबीआईसी निर्देशों के तहत समन जारी करने पर नियंत्रण और सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं।
आइए हम इसका पूर्ण विश्लेषण करें-
1. जीएसटी एक्ट में धारा 116 क्या है?
यह कि जीएसटी प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित होने के लिए हकदार या आवश्यक कोई भी व्यक्ति निम्न कार्य कर सकता है:
स्वयं उपस्थित हो सकता है
या
किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम सेसिवाय उन मामलों के जहां व्यक्तिगत उपस्थिति विशेष रूप से आवश्यक हो।
यह निर्णय, अपील, पुनरीक्षण कार्यवाही आदि पर लागू होता है।
2. जीएसटी एक्ट में अधिकृत प्रतिनिधि कौन हो सकता है?
यह कि धारा 116(2) निम्नलिखित की अनुमति देती है। जैसे
रिश्तेदार
या
नियमित कर्मचारी
या
वकील
या
सीए/सीएमए/सीएस
या
सेवानिवृत्त कर अधिकारी (प्रतिबंधों के अधीन)
या
कोई भी अधिकृत व्यक्ति (जैसा निर्धारित हो)
परन्तु ऐसा व्यक्ति नियम 116 के तहत अयोग्य नहीं होना चाहिए।
3. जीएसटी एक्ट में नियम 116- अयोग्यता –
यह कि यदि कोई अधिकृत प्रतिनिधि:
दुराचार का दोषी हो
या
अपराध का दोषी ठहराया गया हो
या
पेशेवर निकाय द्वारा प्रतिबंधित किया गया हो
आयुक्त सुनवाई का अवसर देने के बाद उसे अयोग्य घोषित कर सकता है।
यह जीएसटी मुकदमेबाजी में पेशेवर अनुशासन सुनिश्चित करता है।
4. जीएसटी एक्ट में अधिकृत प्रतिनिधि बनाम अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ,ये एक ही नहीं हैं।
अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (धारा 2(94) नियम 8)-
रिटर्न पर हस्ताक्षर करता है। एवं जीएसटी पोर्टल संचालित करता है।अनुपालन इंटरफ़ेस करना।
अधिकृत प्रतिनिधि (धारा 116)-
प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित होता है।
मामलों की पैरवी करता है
प्रस्तुतियाँ दाखिल करता है
सुनवाई में प्रतिनिधित्व करता है
एक व्यक्ति दोनों भूमिकाएँ निभा सकता है, लेकिन जीएसटी में विधिक रूप से ये अलग-अलग भूमिकाएँ हैं।
5. वकालतनामा बनाम प्राधिकरण पत्र-
एडवोकेट वकालतनामा दाखिल करते हैं (एडवोकेट अधिनियम और प्रैक्टिस मानदंडों के अनुसार)।
लेकिन सीए/सीएमए/सीएस/कर्मचारी प्राधिकरण पत्र दाखिल करते हैं(कंपनी के लेटरहेड पर)।
जीएसटी का कोई निर्धारित प्रारूप नहीं है, लेकिन प्राधिकरण स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए।
6. जीएसटी एक्ट धारा 70 – समन जारी करने की शक्ति-
यह कि धारा 70(1) के तहत, उचित अधिकारी किसी भी व्यक्ति को निम्नलिखित के लिए समन जारी कर सकता है:
साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए
दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए
कार्यवाही न्यायिक मानी जाएगी (आईपीसी 193 एवं 228)।
धारा 70(1ए) (नया प्रावधान)-
यह कि समन प्राप्त व्यक्ति को निम्नलिखित तरीके से उपस्थित होना होगा:
स्वयं
या
अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से
जैसा अधिकारी निर्देश दे।
Note: यह अधिकारी के निर्देश के अधीन है।
यदि समन में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य है । तो अनुपालन आवश्यक है।
सीआरआईसी निर्देश 02/2022-22/समन
7. सीबीआईसी निर्देश 03/2022-23 (समन सुरक्षाउपाय)-
समन दुरुपयोग रोकने के लिए:
पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
डीआईएन (DIN)अनिवार्य हैं।
वरिष्ठ प्रबंधन को नियमित रूप से समन न भेजा जाए।
बार-बार समन भेजना हतोत्साहित किया जाता है।
उचित तामील आवश्यक है।
अधिकारी को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होना चाहिए।
ये निर्देश जीएसटी विभाग पर बाध्यकारी हैं।
निष्कर्ष-
यह कि धारा 116 प्रतिनिधित्व अधिकारों की रक्षा करती है। तथा पेशेवर अनुशासन की रक्षा करता है।
यह कि धारा 70 जांच का अधिकार प्रदान करती है।
यह कि धारा 70(1ए) उपस्थिति में लचीलेपन का संतुलन बनाए रखती है।
यह कि समन गंभीर होते हैं – बयानों का साक्ष्य के रूप में महत्व होता है।
यह कि जीएसटी के तहत प्रतिनिधित्व संरचित होता है, अनौपचारिक नहीं। इस ढांचे को समझना करदाता और टैक्स प्रोफेशनल दोनों की सुरक्षा करता है।
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डिस्क्लेमर –
यह लेखक के निजी विचार हैं।


