यह कि जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन (GSTAT BAR ASSOCIATION) नई दिल्ली द्वारा 18 फरवरी 2026 को हाइब्रिड फिजिकल सेमिनार, मालवीय स्मृति भवन, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग नई दिल्ली पर आयोजन किया गया ।सभा में जीएसटी ट्रिब्यूनल के पोर्टल पर आ रही विभिन्न समस्याओं के संबंध में नेशनल बेंच के पदाधिकारिओ को अवगत कराया गया।
सर्वप्रथम नेशनल बेंच के NIC के अधिकारी श्री विवेक सिंह और श्री मनोज तुली एडवाइजर जीएसटीएन ने उपस्थित अधिवक्ताओं को जीएसटी ट्रिब्यूनल के पोर्टल से संबंधित विभिन्न विषयों पर डेमो प्रस्तुत किया गया तथा उपस्थित सदस्यों से अनुरोध किया कि अधिक से अधिक अपील दाखिल करें।
इस विषय में जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन (GSTAT BAR ASSOCIATION) नई दिल्ली ने अपनी विभिन्न मांगों को नेशनल बेंच के अधिकारियों के समक्ष रखा और जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील फाइल करने के लिए और समय प्रदान करने की मांग की और पोर्टल को आरामदायक बनाने की भी मांग प्रस्तुत की।
इस गोष्ठी में विशेष आमंत्रित मेरठ के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री संजय शर्मा को जीएसटी ट्रिब्यूनल पोर्टल पर आ रही विभिन्न समस्याओं के लिए आमंत्रित किया गया जिस पर वरिष्ठ अधिवक्ता संजय शर्मा (मेरठ) द्वारा निम्न विषय नेशनल बेंच के अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए,जो निम्न प्रकार हैं –
1. यह कि एडवोकेट किस हैसियत से जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के पोर्टल पर कार्य करेंगे। इसकी विधिक स्थिति पर चर्चा होनी आवश्यक है तथा सुझाव दिया कि जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के पोर्टल पर अपील फाइल करते समय प्रथम कलम एडवोकेट के लिए अंडरटेकिंग के लिए होना चाहिए।
2. यह कि जीएसटी ट्रिब्यूनल के पोर्टल पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रथम अपीलीय अधिकारियों का क्षेत्राधिकार प्रदर्शित नहीं हो रहा है जैसे मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद आदि की विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया ऐसी स्थिति में अधिवक्ता कैसे अपील फाइल करेंगे ।
3. यह कि भारतवर्ष में सभी स्टेट में हिंदी भाषा का प्रयोग किया जाता है। जबकि ट्रिब्यूनल में नियम 23 के अंतर्गत अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता दी गई है। जिसका विरोध विभिन्न मंचों के माध्यम से किया जा रहा है। अतः ट्रिब्यूनल द्वारा कार्रवाई करते हुए इस विषय में दिशा निर्देश पारित किए जाने चाहिए ।
4. यह कि सहारनपुर के कुछ अधिवक्ताओं की शिकायत है ,कि जब पोर्टल पर फीस जमा करते हैं तो वह उचित राशि प्रदर्शित नहीं कर रहा है।
5. यह कि उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं द्वारा कुछ अपील फाइल की गई है। लेकिन वह पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रही है
6. यह कि उत्तर प्रदेश एक बड़ा प्रदेश है जहां पर वर्तमान में VAT की ट्रिब्यूनल बेंच कार्य कर रही है ।जबकि जीएसटी में तीन बेंच रखी गई है ,जबकि उत्तर प्रदेश के बड़े शहर जैसे मेरठ, कानपुर ,बरेली ,गोरखपुर आदि को नजरअंदाज कर दिया है, जो सस्ते न्याय सुलभ न्याय की अवधारणा को समाप्त करना है ।अतः उत्तर प्रदेश में स्थित ट्रिब्यूनल का इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से ही मौजूद है अतः उन्हीं ट्रिब्यूनल में अगली कार्रवाई होनी चाहिए ।
7. यह कि जीएसटी ट्रिब्यूनल नियमावली के नियम 29 67 आदि के अधीन किसी भी प्रार्थना पत्र पर रुपए 5000=00 के शुल्क का विरोध किया गया तथा इसके व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई। शुल्क सामान्य रूप में की जानी चाहिए।
यह कि गोष्ठी में उपस्थित नेशनल बेंच के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है । कि प्रयास किया जाएगा की पोर्टल से संबंधित समस्याओं को जल्द हल किया जाएगा।
यह कि सेमिनार में भारी संख्या में दिल्ली( NCR हरियाणा, उत्तर प्रदेश) के अधिवक्ताओं के अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और बार काउंसिल आफ दिल्ली के पदाधिकारी मौजूद थे । श्री हर्ष शर्मा उपकास संस्थापक/ अध्यक्ष और श्री MOHD SALEEM मेरठ भी शामिल रहे।
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डिस्क्लेमर– यह लेखक के निजी विचार हैं। जो सेमिनार की कार्यवाही से संबंधित हैं।


