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यह कि सुप्रीम कोर्ट ने 281 याचिका जिसमे GST एक्ट के तहत होने वाली गिरफ्तारियों पर व्यापारियों को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक कस्टम और जीएसटी एक्ट में होने वाली गिरफ्तारियों में व्यक्तियों के सीआरपीसी के तहत मिलने वाली सभी सुरक्षा मिलेगी.  कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि कस्टम अधिकारी को पुलिस अधिकारी नहीं माना हैं।

यह कि जीएसटी एक्ट में होने वाली गिरफ्तारियों पर राहत का एलान करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी व्यापारियों को राहत दी।

पृष्ठभूमि 

यह कि पहले हम आपको बता दें कि ये मामला क्या है? दरअसल जीएसटी एक्ट और कस्टम एक्ट के तहत गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में करीब 281 याचिकाएं दायर की गई थी। जिनकी सुनवाई मई 2024 में हो चुकी थी।जिस पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 27.02.2025 में दिया गया है।

यह कि इन याचिकाओ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी के तहत मिलने वाली सभी सुरक्षा मिलेगी. गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत मिल सकेगी.

यह कि करदाता/व्यापारी राहत के लिए कोर्ट में याचिका दे सकते है।कस्टम अधिकारी को पुलिस अधिकारी नहीं माना जा सकता।

यह कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सीआरपीसी, बीएनएसएस के तहत आरोपी करदाता को मिलने वाली सुरक्षा GST, सीमा शुल्क के तहत अभियोजन का सामना करने वालों को भी मिलेगी।

यह कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि GST, सीमा शुल्क के तहत अभियोजन का सामना करने वाले लोग अग्रिम जमानत मांग सकते हैं. यहां तक कि उन मामलों में भी जहां FIR दर्ज नहीं की गई है।

यह कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा GST, सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तारी, अन्य दंडात्मक शक्तियों को चुनौती देने वाली 281 याचिकाओं की सुनवाई की थी।

यह कि क्या GST एक्ट- GST (Goods and Services Tax) एक्ट भारत में इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम को सरल और एकीकृत करने के लिए लागू किया गया एक कानून है।इस कानून को 1 जुलाई 2017 को पूरे देश में लागू किया गया था. यह एक देश एक कर (One Nation, One Tax)सिस्टम पर आधारित है, जिसका मतलब है कि पूरे देश में सामान और सेवाओं पर एक समान कर लागू होगा.

यह कि GST एक्ट के तहत किसी को कभी गिरफ्तार किया जा सकता है? नहीं, GST (Goods and Services Tax) अधिनियम, 2017 के तहत किसी व्यक्ति को कभी भी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.

यह कि गिरफ्तारी के लिए कुछ विशेष परिस्थितियांं और कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं, जिन्हें पूरा किए बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

यह कि GST अधिनियम में गंभीर कर चोरी, फर्जी बिलिंग या सरकार को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में ही गिरफ्तारी का प्रावधान है। जीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 69 और धारा 132 में इसका प्रावधान किया गया है।

यह कि किसी को बिना जांच, बिना नोटिस या मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. अगर कोई व्यक्ति निर्दोष है और जांच में सहयोग कर रहा है, तो उसे गिरफ्तार करने की संभावना बहुत कम होती 

यह कि इस फैसले में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस एम एम सुंदरेश की बेंच ने 281 से ज्यादा याचिकाओं का निपटारा किया है।. इन याचिकाओं में जीएसटी एक्ट और कस्टम्स एक्ट के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों के दुरुपयोग का मसला उठाया गया था

यह कि 3 जजों की बेंच ने कहा है गिरफ्तारी के मामलों में लोगों को जो अधिकार सीआरपीसी और बीएनएसएस में दिए गए हैं, वह जीएसटी और कस्टम्स के मामलों में भी लागू हैं।

माननीय सुप्रीम कोर्ट नेजीएसटी की धारा-69 में अस्पष्टता पर चिंता जताई ।सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी की धारा-69 में अस्पष्टता पर भी चिंता जताई जिसमे जो गिरफ्तारी की शक्तियों से संबंधित है।

निष्कर्ष

यह कि उपरोक्त लेख के संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सीआरपीसी  के अंतर्गत जीएसटी और कस्टम की नियम भी शामिल है ।जब से जीएसटी अधिनियम लागू हुआ है, यह पहला आदेश है जिसने स्पष्ट किया है कि सीआरपीसी के अधीन देश के सभी कानून आते हैं और कस्टम विभाग द्वारा की गई कार्रवाई पुलिस की कार्रवाई नहीं मानी जायेगी ।और कस्टम विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को पुलिस जैसे अधिकार नहीं है । यह कि जीएसटी में धारा 69 में गलत तरीके से गिरफ्तारी नहीं की जा सकती और स्पष्ट कर दिया है कि करदाता अग्रिम जमानत की मांग कर सकता है।

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डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं ।जो प्राप्त जानकारी प्रिंट मीडिया ,मीडिया के आधार पर तैयार किया गया है ।जिसके लिए लेखक जिम्मेदार नहीं होगा।

Author Bio

मेरा नाम संजय शर्मा हैं।मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में इनडायरेक्ट टैक्सेस में वकालत करता हूं ।तथा मेरी शैक्षिक View Full Profile

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