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यह कि धारा 108 पुनरीक्षण प्राधिकारी की शक्तियाँ ,निर्णय के बाद, जीएसटी एक्ट में तीन सुधारात्मक तंत्र प्रदान करता है –

1. धारा 107 अपील

2. धारा 108 – पुनरीक्षण

3. धारा 161 – सुधार

आज, आइए धारा 108 – पुनरीक्षण को स्पष्ट रूप से समझें।

धारा 108 क्या है?

यह कि धारा 108 पुनरीक्षण प्राधिकारी (आयुक्त या अधिकृत अधिकारी) को किसी भी कार्यवाही के अभिलेखों को मंगवाने और उनकी जांच करने तथा अधीनस्थ अधिकारी द्वारा पारित आदेश को संशोधित करने का अधिकार देती है।

यह पर्यवेक्षणीय, निर्णय के बाद, राजस्व-संरक्षणात्मक, स्वयं प्रेरित प्रकृति का ,यह अपील नहीं है।यह सुधार नहीं है।इसे करदाता द्वारा अधिकार के रूप में लागू नहीं कर सकता है।

जीएसटी एक्ट क्या  कहता है कि प्राधिकारी “अपनी मर्जी से” कार्रवाई कर सकता है। इसलिए, आवेदन द्वारा पुनरीक्षण की मांग नहीं की जा सकती। करदाता अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन प्राधिकारी कार्रवाई करने के लिए बाध्य नहीं है।

पुनरीक्षण कब किया जा सकता है?

यदि मूल आदेश निम्न में से कोई एक हो-

यह कि आदेश त्रुटिपूर्ण हो ,अवैध या अनुचित, राजस्व हित के प्रतिकूल त्रुटि और पूर्वाग्रह, दोनों ही तत्व महत्वपूर्ण हैं।

विशिष्ट मामले-

यदि गलत तरीके से रिफंड स्वीकृत किया गया है।

या

यह कि बिना सत्यापन के आईटीसी स्वीकृत करना।

गलत तरीके से मांग वापस लेना।

या

बाध्यकारी परिपत्र की अनदेखी की गई हैं।

पुनरीक्षण केवल निर्णय आदेश पारित होने के बाद ही किया जा सकता है। इसे एससीएन(SCN) स्तर पर नहीं किया जा सकता। अर्थात धारा 73/74 के अंतर्गत पारित आदेश के बाद लागू होता हैं।

समय सीमा एवं प्रतिबंध-

पुनरीक्षण नहीं किया जा सकता-

यदि आदेश पर पहले ही अपील की जा चुकी हैI

या

यदि अपील की अवधि समाप्त नहीं हुई हैI

या

यदि आदेश पहले ही संशोधित हो चुका है I

आदेश की तिथि से 3 वर्ष बाद(अदालत के स्थगन की अवधि शामिल नहीं है) पुनरीक्षण अपीलीय क्षेत्राधिकार को रद्द नहीं कर सकता।

नियम 109B के अंतर्गत प्रक्रिया-

पुनरीक्षण एक परिभाषित प्रपत्र संरचना का पालन करता है-

1.जीएसटी RVN-01 – पुनरीक्षण के लिए सूचना पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा जारी किया जाता है जिसमें आधार निर्दिष्ट होते हैं। वृद्धि का प्रस्ताव यहां स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिए।

2. उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई –

धारा 108(4) के अंतर्गत सुनवाई का अवसर अनिवार्य है।

3. जीएसटी APL-04 – पुनरीक्षण आदेश –

यह कि अंतिम आदेश में प्राधिकारी इसमें संशोधन, वृद्धि, निरस्तीकरण या इसे रद्द कर सकता है।

यदि मांग उत्पन्न होती है, तो वसूली सारांश DRC-07 के माध्यम से दर्शाया जा सकता है।

यदि करदाता पुनरीक्षण आदेश को चुनौती देता है, तो जीएसटी APL-01 का उपयोग करके धारा 107 के अंतर्गत अपील की जा सकती है।पुनरीक्षण चरण में कोई पूर्व जमा राशि आवश्यक नहीं है।

धारा 107 के अंतर्गत अपील के विपरीत, पुनरीक्षण कार्यवाही के दौरान किसी पूर्व जमा राशि की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, स्वतः स्थगन भी लागू नहीं होता है।

धारा 108 बनाम धारा 161 में अंतर –

धारा 161 – सुधार –

यह कि एक ही अधिकारी द्वारा लिपिकीय या अंकगणितीय त्रुटि का सुधार। सीमित दायरा। 6 महीने के भीतर (लिपिकीय त्रुटियों को छोड़कर)।

धारा 108 – पुनरीक्षण –

उच्च अधिकारी वैधता और औचित्य की पुनः जांच करता है।

यह व्यापक पर्यवेक्षी शक्ति 3 वर्ष की समय सीमा निर्धारित है।

यह सुधार त्रुटियों को ठीक करता है।

यह पुनरीक्षण कानूनी रूप से गलत आदेशों को ठीक करता है।

निष्कर्ष –

यदि आपको अनुकूल निर्णय आदेश प्राप्त होता हैIतो याद रखें। कि 3 वर्ष की पुनरीक्षण अवधि लागू होती है।

यदि आपको RVN-01 प्राप्त होता है, तो तुरंत निम्नलिखित की जाँच करें:

क्या नोटिस सीमा अवधि में जारी किया गया है।

क्या अपील दायर की गई है?

क्या विशिष्ट आधार उल्लेखित हैं।

क्या संवर्धन प्रस्ताव किया गया है।

यह कि पुनरावलोकन प्राधिकारी का क्षेत्राधिकार है।

*****

डिस्क्लेमर- यह लेखक के निजी विचार हैं।

Author Bio

मेरा नाम संजय शर्मा हैं।मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में इनडायरेक्ट टैक्सेस में वकालत करता हूं ।तथा मेरी शैक्षिक View Full Profile

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