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भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के साथ ही इसके सरलीकरण और दर संरचना को लेकर मांग उठती रही है। वर्ष 2017 में जब यह कर व्यवस्था शुरू हुई थी, तब से ही व्यापारियों, पेशेवरों और आम करदाताओं का अनुभव रहा कि यह कानून जितना आधुनिक है, उतना ही जटिल (complicated) भी है। दरअसल, GST को एक Good and Simple Tax” कहा गया था, लेकिन शुरुआत से ही दरों की बहुलता और प्रक्रियाओं की पेचीदगियाँ इसे “जटिल कर” बनाती रहीं।

पिछले आठ वर्षों में सरकार और जीएसटी कौंसिल  से लगातार यह मांग की जाती रही कि GST दरों में और GST से जुडी प्रक्रियाओं में सुधार लाए जाएँ, ताकि यह वास्तव में व्यापार करने में आसान बने जो कि जीएसटी को हमारे देश में लाने का मुख्य उद्देश्य था.  अब पहली बार GST Council की 56वीं बैठक में इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। लेकिन ध्यान रखें कि यह कदम मुख्य रूप से दर संरचना (rate rationalisation) से जुड़ा हुआ है। प्रक्रियात्मक सुधार अभी भी बहुत ही सीमित स्तर पर ही किए गए हैं, फिर भी यह बैठक ऐतिहासिक कही जा सकती है क्योंकि इसमें आम आदमी, किसानों और विभिन्न वर्गों को राहत देने का प्रयास किया गया है और सुधारों की शुरुआत तो हुई है . आप कुल मिलाकर मान सकते हैं कि एक आदमी के घर के बजट में राहत तो मिलेगी और दूसरी और मांग बढ़ने से उत्पादन और रोजगार भी बढेगा.

GST संग्रह में वृद्धि : सुधार का आधार

GST लागू होने के बाद सरकार का संग्रह लगातार बढ़ता रहा है। प्रारंभ में मासिक संग्रह लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के आसपास था। समय के साथ जीएसटी पालना  में सुधार और अर्थव्यवस्था के विस्तार से यह आंकड़ा अब बढ़कर प्रति माह 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह दर्शाता है कि प्रणाली अब स्थिर हो चुकी है और सरकार को भी इस बढ़े हुए संग्रह के बल पर दरों में राहत देने का अवसर मिला है जो कि साफ़ -साफ़ इस जीएसटी कौंसिल की मीटिंग में झलक रहा है .

किन-किन क्षेत्रों में राहत मिली

सभी क्षेत्रों को इस कर की दरों में राहत का लाभ दिया गया है . यह राहत 22 सितम्बर 2025 से लागु होगी जब कि सरकार इस सम्बन्ध में अधिसूचना जारी करेगी .

टेक्सटाइल, किसान , आम आदमी, ऑटोमोबाइल, हेंडीक्राफ्ट, होटल उधोग, स्पोर्ट्स, आम उपभोक्ता के काम आने वाली वस्तुएं समेत लगभग सभी क्षेत्रों को राहत दी गई है और इससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमत गिरेगी और आम आदमी को सस्ती वस्तुएं मिलेगी तो एक और तो उसका खर्च का बोझ कम होगा और दूसरा वो ज्यादा वस्तुएं खरीद सकेगा.

जीवनरक्षक दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं पर टैक्स बोझ घटाकर आम आदमी को राहत दी गई है। यह कदम सीधे तौर पर मरीजों और उनके परिवारों को फायदा पहुँचाएगा। आम और स्वास्थ बीमा योजनाओं में कर की दर को शून्य कर दिया गया है . ट्रैक्टर और उनके टायर-ट्यूब और उपकरण को 5% पर लाकर किसानों को राहत दी गई। इसके अलावा खेती में काम आने वाले कई उपकरण पर भी कर की दर 5% की गई है .

इसके अतिरिक्त अन्य सभी टायरों को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया। सीमेंट को भी 28% से घटाकर 18% पर लाया गया, जिससे मकान और इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत कम होगी और यह जीएसटी लगने के प्रारम्भ से ही यह मांग की गई थी।

GST दरों में बड़ा सुधार 56वीं बैठक के ऐतिहासिक कदम

ऑटोमोबाइल सेक्टर में 28% की दर सामान्य रूप से 18% हो गई है और इस प्रकार  अधिकत्तर  बिकने वाली  मोटर साइकिल , स्कूटर , छोटी कारें 28% की दर 18% हो गई है और वही इस सेक्टर को इस बात से भी बड़ी राहत मिलेगी तो  Mid-size और Big Cars तथा Luxury Motorcycles  पर भी अब 28% + Cess” की जटिलता खत्म कर दी गई है और सीधे 40% flat rate लागू कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि अब Cess अलग से नहीं लगेगा और ये गाड़ियां भी पहले से सस्ती होंगी और इनका कर ढांचा कर ढाँचा सरल हो गया है। इस वर्ष नवरात्री और दीपावली पर इस सेक्टर के लिए मोटर साइकिल , स्कूटर और कारों की बड़ी मांग आने वाली है.

ऐसा नहीं है कि हर जगह राहत ही दी गयी है कहीं कर का बोझ बढ़ाया भी गया है जैसे रेडीमेड कपडे और जूते चप्पल जो कि 2500 रूपये से ऊपर हैं उनकी दर अब 18 प्रतिशत होगी लेकिन वहीँ आम आदमी को राहत देते हुए 2500 रूपये से नीचे के रेडीमेड कपडे और जूते चप्पल अब 5 प्रतिशत की दर से करयोग्य होंगे जो इस वर्ग को  आदमी को राहत देंगे . ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इनपुट क्रेडिट लेने वाली GTA सेवाएं अब 12 प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत की दर से कर देना होगा लेकिन इसका लाभ यह होगा कि अब वे वाहनों की खरीद पर भुगतान की गई इनपुट जल्दी वसूल लेंगे.

आइये अब ये देखें कि मुख्य रूप से कौन सी सप्लाई को करमुक्त किया गया है तो इसमें जैसा कि ऊपर बताया है कि सबसे प्रमुख है स्वास्थ एवं जीवन बीमा को करमुक्त करना जो काफी पुरानी  और तार्किक मांग थी जिसे अब स्वीकार किया गया है . इसके अलावा कुछ प्रकार की जीवन रक्षक दवाइयां करमुक्त की गई है. इसके अलावा पिज्जा ब्रेड , रोटी चपाती , परांठा , पेन्सिल , कापियां , शार्पनर इत्यादि को करमुक्त किया गया है .

टूथ पाउडर , टूथ ब्रश , टूथ पेस्ट , टेलकम पाउडर , हेयर आयल , शैम्पू , टॉयलेट सोप , शेविंग क्रीम इत्यादि पर कर की दर घटा कर 12 प्रतिशत से 5 प्रतिशत कर दी गई है. एयरकंडीशनर , डिश वॉशर , टेलीविज़न इत्यादि पर भी कर की दर अब 28 प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत होगी.

ये तो सिर्फ कुछ उदाहरण है . यदि आपको जीएसटी दरों के सरलीकरण और समानीकरण का पूरा दृश्य देखना हो तो आप इस सम्बन्ध में जारी प्रेस रिलीज को देख सकते है जिसका जिक्र मैंने आगे किया है .

प्रेस रिलीज  और FAQs की विशेषता

इस बैठक की एक खास बात यह रही कि बैठक के बाद जारी Press Release और उसके साथ जो FAQs प्रस्तुत किए गए, वे बेहद विस्तृत और स्पष्ट हैं। इसमें हर क्षेत्र — ऑटोमोबाइल, सीमेंट, टेक्सटाइल, दवाइयाँ, हेल्थ सर्विसेज, हैंडीक्राफ्ट आदि — को विस्तार से शामिल किया गया है। इससे करदाताओं को दर परिवर्तनों को समझने में आसानी होगी और भ्रम की स्थिति कम होगी। ये प्रेस रिलीज और सवालों के जवाब , जिसका जिक्र मैं यहाँ कर रहा हूँ , वे सभी CBIC की वेब साईट www.cbic.gov,in पर उपलब्ध है.

क्या 22 सितम्बर तक खरीददारी स्थगित कर देनी चाहिए ?

इसकी संभावना मैंने अपने पिछले लेख में भी की थी और अब जब तारीख ही तय हो गई है तो निश्चित रूप से यदि बहुत जरुरी नहीं हो तो फिर घटी हुई जीएसटी दरें लागू होने पर ही खरीददारी करनी चाहिए . वैसे तो जब से माननीय प्रधानमंत्री जी ने दरें घटाने का जिक्र किया था तब से ही उपभोक्ताओं ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी थी. कारें , स्कूटर , मोटरसाइकिल , एयर कंडीशनर जैसी वस्तुओं की खरीद कुछ दिन रोकी ही जा सकती है लेकिन उसके बाद इनके सस्ते होने के कारण इनकी बिक्री बढ़ने की संभावना बहुत अधिक है .

कर की कम दरों का लाभ उपभोक्ता को कैसे मिले

यह एक बहुत बडा सवाल है कि सरकार ने तो अपनी कर की दरें सुधार कर कम कर ली है लेकिन अंतिम उपभोक्ता तक इसका लाभ कैसे पंहुचे इसकी निगरानी भी सरकार को करनी होगी कि यह पूरा लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पंहुचे विशेष तौर पर सीमेंट , दवाइयां, रेडीमेड और जुते – चप्पल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रोनिक्स और कास्मेटिकस में क्षेत्र  में. एक सवाल उठ सकता है कि जब सारा लाभ उपभोक्ता तक पंहुचना है तो फिर व्यापार और उध्योग को इससे क्या लाभ होगा. आइये इस पक्ष पर भी बात करते हैं.

कम कर की दरों से वस्तुएं सस्ती होंगी तो ज्यादा खरीदी जायेंगी तो उत्पादन और लाभ बढेगा. कर की कम दर के कारण असंगठित और अन -रजिस्टर्ड क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा कम होगी. कर की दरों में कमी से लागत कम आएगी तो निर्यात के नए क्षेत्र खुलेंगे. कर की दर कम होने से भुगतान किये जाने वाले कर में कमी आएगी तो कार्यशील पूंजी की जरुरत में कमी आएगी तो ब्याज का लाभ होगा.

प्रक्रियात्मक सुधार  : अभी भी अधूरा है

जहाँ तक प्रक्रियात्मक सुधार का सवाल है, वहाँ बहुत अधिक प्रगति दिखाई नहीं देती। केवल एक प्रमुख घोषणा की गई है कि Registration Process को सरल बनाते हुए अब 3 दिन में ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन दिया जाएगा। यह निश्चित ही स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसके साथ ही प्रेस रिलीज़ में यह भी अस्पष्टता बनी हुई है कि यदि कोई करदाता कर की निश्चित मासिक सीमा जो कि 2.50 लाख बताई गई है को  पार कर जाता है, तो इन रजिस्ट्रेशन  का आगे क्या होगा।

रिफंड  प्रक्रिया में भी कुछ सुधार किए गए हैं, लेकिन अभी भी व्यापार और उद्योग  कई समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं। उदाहरण के लिए, inverted duty refund में capital goods और services के ITC का refund नहीं मिलता, जिससे वे उद्योग जिनमें भारी पूंजीगत व्यव होता है को कार्यशील पूँजी पर ब्याज का भारी  नुकसान उठाना पड़ता है। अभी सरकार इस पर निर्णय लेने को तैयार नहीं दिखती लेकिन उम्मीद रखें कि यदि इन जीएसटी सुधारों के वांछित परिणाम निकले तो और भी महत्वपूर्ण सुधार भी होंगे.

आगे की राह

यह स्पष्ट है कि दर संरचना में सुधार की दिशा में यह बैठक बड़ा कदम है। लेकिन procedures (प्रक्रियाएँ) को लेकर सुधार की गुंजाइश बहुत अधिक है। जब तक रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, नोटिस, अपील और रिफंड जैसी प्रक्रियाएँ सरल और स्पष्ट नहीं होंगी, तब तक GST को वास्तव में Good and Simple Tax कहना मुश्किल होगा।

निष्कर्ष

करों के दरों में सुधार की और यह एक बड़ा कदम है लेकिन  करदाताओं और पेशेवरों की नज़रें अब भी इस पर टिकी हैं कि सरकार procedural simplification की ओर कब गंभीर कदम उठाएगी। उम्मीद यही है कि आने वाले समय में इन सुधारों से GST को सचमुच उस रूप में देखा जा सकेगा, जिसकी कल्पना 2017 में इसके लागू होने के समय की गई थी।

Also Read: 1. FAQs on decisions of 56th GST Council Meeting 2. Recommendations of 56th Meeting of GST Council

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