विभिन्न व्यापारिक एवं प्रोफ़ेशनल एसोसिएशन्स ने वित्त मंत्री से निर्धारण वर्ष 2025–26 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (TAR) दाख़िल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि आयकर रिटर्न (ITR) की समयसीमा 16 सितम्बर 2025 को समाप्त हुई, लेकिन इसके तुरंत बाद ऑडिट की समयसीमा शुरू होने से करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर असामान्य दबाव बन गया। पोर्टल की तकनीकी समस्याओं और धीमी प्रोसेसिंग ने स्थिति को और जटिल बना दिया, जिससे ITR दाख़िल करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा। साथ ही, ITR और ऑडिट कार्य के समय के ओवरलैप होने से ऑडिट में देरी हुई। चूँकि ऑडिट में गहन जाँच और विश्लेषण की आवश्यकता होती है, जल्दबाज़ी गुणवत्ता और शुद्धता पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। पिछले वर्षों में ITR जुलाई तक पूर्ण हो जाते थे और ऑडिट सुचारु रूप से होता था, लेकिन इस बार देरी और तकनीकी कठिनाइयों से कार्य प्रभावित हुआ है। यदि तिथि नहीं बढ़ाई जाती, तो ऑडिट की गुणवत्ता प्रभावित होगी, त्रुटियों और विवादों की संभावना बढ़ेगी, और करदाताओं पर अतिरिक्त ब्याज, दंड एवं आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसके अलावा, प्रोफ़ेशनल्स पर मानसिक तनाव और कार्य दबाव भी बढ़ेगा। एसोसिएशन्स ने कम-से-कम दो माह का विस्तार माँगा है, जिससे गुणवत्ता सुनिश्चित हो, करदाताओं एवं प्रोफ़ेशनल्स को राहत मिले, और अनुपालन पारदर्शी एवं स्थिर बना रहे।
यहाँ एक Representation का ड्राफ्ट दिया जा रहा है जो कि TAX Associations माननीय वित्त मंत्री जी को भेज सकती है । सामूहिक प्रयास ही वांछित परिणाम देंगे।
प्रेषक
आदरणीय वित्त मंत्री महोदया,
भारत सरकार,
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली
विषय: निर्धारण वर्ष 2025–26 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (TAR) दाख़िल करने की तिथि बढ़ाने हेतु ।
महोदया,
हम, विभिन्न व्यापारिक एवं प्रोफ़ेशनल एसोसिएशन्स की ओर से, यह विनम्र निवेदन करते हैं कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (TAR) दाख़िल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाने पर आपकी कृपादृष्टि अपेक्षित है।
1. वर्तमान स्थिति की वास्तविकता
हालाँकि आयकर रिटर्न (ITR) दाख़िल करने की अंतिम तिथि 16 सितम्बर 2025 को समाप्त हो चुकी है, परंतु इसके तुरंत बाद ही ऑडिट की समयसीमा शुरू हो जाने से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं करदाताओं दोनों पर असामान्य दबाव बन गया है।
- पोर्टल की तकनीकी समस्याएँ – पोर्टल पर प्रोसेसिंग असामान्य रूप से धीमी रही। जहाँ सामान्यतः एक रिटर्न भरने में 15 मिनट लगते हैं, वहाँ इस बार एक घंटे से अधिक समय लगा।
- कार्य का ओवरलैप होना – जिस समय ऑडिट कार्य होना था, वह समय ITR दाख़िल करने में व्यतीत हो गया।
- ऑडिट का विशेष स्वरूप – ऑडिट कोई साधारण कार्य नहीं है। इसमें गहन जाँच, विश्लेषण, सत्यापन और प्रोफ़ेशनल निर्णय आवश्यक होते हैं। इसे जल्दबाज़ी में पूरा करना गुणवत्ता और शुद्धता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
2. पिछले वर्षों की तुलना
पारंपरिक रूप से अधिकांश ITRs जुलाई तक पूर्ण हो जाते थे, जिससे अगस्त–सितम्बर में ऑडिट सुचारु रूप से हो पाते थे। परंतु इस वर्ष ITR की समय-सीमा बढ़ने और पोर्टल की तकनीकी कठिनाइयों के कारण ऑडिट कार्य विलंब से प्रारंभ हुआ है।
3. वर्तमान समयसीमा का प्रभाव
यदि अंतिम तिथि में विस्तार नहीं किया जाता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे:
- ऑडिट की गुणवत्ता प्रभावित होगी – जल्दबाज़ी में किए गए ऑडिट से त्रुटियों और चूकों की संभावना बढ़ जाएगी।
- अनावश्यक विवाद एवं मुक़दमेबाज़ी – अधूरी या गलत रिपोर्टिंग से करदाताओं और प्रोफ़ेशनल्स दोनों को अनावश्यक वाद-विवाद का सामना करना पड़ेगा।
- करदाताओं पर आर्थिक बोझ – समय पर सही ऑडिट न होने की स्थिति में करदाताओं को अतिरिक्त ब्याज, दंड और अनावश्यक वाद-विवाद के कारण आर्थिक हानि झेलनी पड़ सकती है।
प्रोफ़ेशनल्स पर दबाव – मौजूदा परिस्थितियाँ प्रोफ़ेशनल्स में मानसिक तनाव, थकान और त्रुटियों की संभावना को और बढ़ा रही हैं।
4. हमारी माँग
यह कोई औपचारिक सलाह मात्र नहीं, बल्कि व्यावहारिक कठिनाइयों पर आधारित एक सशक्त एवं विनम्र माँग है।
अनुरोध है कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाख़िल करने की तिथि कम-से-कम दो माह के लिए बढ़ाई जाए।
इसके लाभ:
- ऑडिट की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता बनी रहेगी।
- करदाताओं एवं प्रोफ़ेशनल्स दोनों को राहत मिलेगी।
- करदाताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
- अनुपालन की पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ेगी।
5. निष्कर्ष
उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हम निवेदन करते हैं कि माननीय मंत्रालय शीघ्र संज्ञान लेकर तिथि-विस्तार की घोषणा करें, जिससे करदाताओं एवं प्रोफ़ेशनल बिरादरी को वर्तमान दबाव और व्यावहारिक कठिनाइयों से राहत मिल सके ।
आदर सहित



audit due date