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जीएसटी एक्ट में सप्लायर द्वारा टैक्स ना जमा करने पर सेक्शन 16(2)(c) का जवाब कैसे दें?

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जीएसटी एक्ट के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 ,2018-19 और 2019-20 के अंतर्गत जीएसटी विभाग द्वारा सप्लायर द्वारा टैक्स ना जमा करने के कारण सेक्शन 16 (2)(c) के अंतर्गत नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वैसे तो सभी टैक्स प्रोफेशनल को ज्ञात है। कि यदि हमें आईटीसी का उपयोग करना है। तो सेक्शन 16 के अंतर्गत जो शर्ते दी गई हैं ।उनका पालन करना होगा। तभी हम आईटीसी का उपभोग कर सकते हैं। जीएसटी एक्ट जुलाई 2017 से लागू किया गया ।लेकिन अपूर्ण रूप से लागू किया गया ।क्योंकि उस समय जीएसटी का पोर्टल सुचारू रूप से कार्य करने में असमर्थ रहा ।जिसके कारण जीएसटी विभाग द्वारा समय-समय पर कई निर्देश सर्कुलर जारी किए और करदाता को कर जमा करने में सहायता प्रदान की। जीएसटी विभाग ने करदाता को ऐसा सिस्टम या तंत्र नहीं दिया जिससे खरीदार द्वारा सप्लायर के संबंध में कोई जानकारी मिल सके। जिसके कारण आरंभिक वर्ष 2017-18 ,2018-19 और 2019-20 में ऐसा कोई सिस्टम नहीं था। जैसे वर्तमान में 2a और 2b। शुरुआती वर्ष में विभाग द्वारा 3B दाखिल करने के निर्देश दिए थे ।तथा करदाता के पास जो टैक्स इनवॉइस या डेबिट नोट उनकी आईटीसी लेने के लिए कहा गया था/ सभी करदाता ने 2017-18 से उस पर उपलब्ध टैक्स इनवॉइस डेबिट नोट के आधार पर आईटीसी का उपभोग किया था ।जीएसटी विभाग द्वारा जीएसटी पोर्टल पर 2A 2019 में प्रस्तुत किया गया था। इसके पूर्व के 3B के द्वारा टैक्स जमा करने का माध्यम था। जीएसटी आर 1 भी काफी समय बीत जाने पर शुरुआत हो सकी थी। वर्तमान में जीएसटी विभाग के अधिकारियों द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 के लिए मिसमैच के नोटिस के साथ सेक्शन 61, 73 और 74 के भी नोटिस जारी कर दिए हैं। आज हम उसी परिपेक्ष में सेक्शन 16(2)(c) के नोटिस का जवाब कैसे तैयार करें। उस पर चर्चा करते हैं

माननीय न्यायालय द्वारा निर्णय Case Law

1. मैसर्स डीवाई बीथेल इंटरप्राइजेज बनाम राज्य कर अधिकारी डाटा सेल मद्रास उच्च न्यायालय रिट पिटिशन संख्या 2127 वर्ष 2021 आदेश दिनांक 24 फरवरी 2021 

रिट पिटिशन में विवादित विषय याचिकाकर्ता नागरकोइल असेसमेंट सर्किल के साथ रजिस्टर्ड करदाता है ।इस याचिका में 17 अन्य याचिकाकर्ता शामिल है ।तथा सभी ने इसी विषय पर रिट पिटिशन फाइल की है ।सभी याचिकाकर्ता कच्चे रबड़ की सीट के व्यापारी हैं ।उनके द्वारा यह माल श्री चार्ल्स और उनकी पत्नी शांति नाम के व्यापारियों से यह माल क्रय किया गया।

याचिकाकर्ता ने सप्लायर के द्वारा दाखिल रिटर्न के आधार पर आईटीसी का उपभोग किया। बाद में प्रतिवादी ने निरीक्षण के दौरान पाया की चार्ल्स और उनकी पत्नी ने सरकार को कोई टैक्स जमा नहीं किया है ।प्रतिवादी ने याचिकाकर्ताओं को इस संबंध में नोटिस जारी किए ।याचिकाकर्ताओं ने उत्तर दाखिल करते हुए स्पष्ट किया। कि हमारे द्वारा चार्ल्स और उनकी पत्नी को जीएसटी का समस्त भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया है। लेकिन राज्य कर अधिकारी द्वारा उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए टैक्स लगाया गया।

याचिकाकर्ता ने इस आदेश के विरोध रिट पिटिशन मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष इस आधार पर प्रस्तुत की विक्रेता द्वारा टैक्स जमा ना करने के कारण उसे दंडित नहीं किया जा सकता ।क्योंकि उसके द्वारा जीएसटी एक्ट के अंतर्गत सेक्शन 16 की सभी शर्तो को पूरा किया है।

याचिकाकर्ता के वकील ने ध्यान दिलाया श्री विनायका एजेंसी बनाम सहायक आयुक्त सिटी वड़ापलानी 2013 वीएसटी पेज नंबर 283 में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा निर्णय दिया है। कि प्राधिकरण को आईटीसी उलटने का कोई अधिकार नहीं है।

याचिकाकर्ता ने जीएसटी परिषद द्वारा जारी प्रेस नोट दिनांक 4 मई 2018 की प्रति उपलब्ध कराई गई ।जिसमें जीएसटी परिषद ने बिंदु संख्या 6 में सप्लायर के विषय में स्पष्ट राय व्यक्त की है। कि प्रथम सप्लायर पर टैक्स ना जमा करने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट किया कि राज्य कर अधिकारियों ने चार्ल्स और उसकी पत्नी शांति पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की है ।क्योंकि प्रथम दृष्टया में विक्रेता द्वारा माल सप्लाई किया गया है।

याचिका कर्ता ने न्यायालय के समक्ष अन्य विषय भी प्रस्तुत किए जिस पर न्यायालय ने बिंदुवार अपना निर्णय जारी किया।

मद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय

 न्यायालय ने पक्ष और विपक्ष की दस्तावेज और तर्कों के आधार पर राज्य कर अधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को प्रतिवादी के पास सुनवाई हेतु प्रेषित किया तथा जांच नए सिरे से शुरू की जाएगी जिसमें प्रथम पक्ष कार चार्ल्स और उसकी पत्नी शांति से गवाह के रूप में पूछताछ की जाएगी और याचिका स्वीकार की गई।

लेखक का मत

 उपरोक्त रिट पिटिशन में माननीय उच्च न्यायालय मद्रास ने स्पष्ट किया हैं। कि जीएसटी अधिकारियों को प्रथम सप्लायर के संबंध में जांच की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और तर्कों के आधार पर निर्णय उचित है।

सेंट्रल एक्साइज कमिश्नर जालंधर बनाम केके इंडस्ट्रीज वर्ष 2013

Supreme court का निर्णय

उपरोक्त वाद में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादी केके इंडस्ट्रीज को modvat क्रेडिट करने की अनुमति दी ।भले ही सप्लायर ने प्राप्तकर्ता से प्राप्त कर का भुगतान करने में चूक की है।

लेखक का मत

उपरोक्त निर्णय जीएसटी से संबंधित नहीं है ।लेकिन आज भी मील का पत्थर है ।क्योंकि एक्साइज मैं मोटिवेट लेने का प्रावधान था। लेकिन सप्लायर द्वारा अपना टैक्स जमा नहीं किया ।तो इसके लिए क्रेता व्यापारी को दोषी नहीं माना जाएगा।

उपरोक्त न्यायिक निर्णय से स्पष्ट है ।कि यदि सप्लायर द्वारा टैक्स जमा नहीं किया जाता है ।तो जीएसटी विभाग को सबसे पहले सप्लायर पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रेस नोट दिनांक 4 मई 2018

जीएसटी परिषद ने आईटीसी के संबंध में एक प्रेस नोट दिनांक 4 मई 2018 को जारी किया था। तथा सभी अधिकारियों से अपेक्षा की गई थी कि वह इस प्रेस नोट के द्वारा आईटीसी के संबंध में प्रक्रिया को अपनाएंगे जिसमें बिंदु संख्या 6 में सप्लायर के संबंध में पूरी प्रक्रिया को बताया गया है।

निष्कर्ष

उपरोक्त विषय पर जीएसटी परिषद को कोई उचित निर्णय लेना होगा ।ताकि बोनाफाइड करदाता को कोई परेशानी ना उठानी पड़े जीएसटी परिषद ने जैसे 2a और 2b को प्रस्तुत किया है ।जिससे आईटीसी के संबंध में काफी हद तक एकरूपता हो रही है ।उसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2017-18 2018-19 और 2019-20 में आईटीसी के संबंध में ऐसे विषय उत्पन्न होंगे ।उसके लिए कोई स्पष्ट नीति घोषित करनी होगी ।क्योंकि जीएसटी अधिकारी खरीददार को तुरंत नोटिस जारी कर रहे हैं। जिसके लिए उन्हें प्रेस नोट दिनांक 4 मई 2018का भी संदर्भ ग्रहण करना चाहिए और प्रथम सप्लायर पर कार्रवाई की जानी चाहिए। अभी तक इस विषय में कोई स्पष्ट राय नहीं बनी है।

उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं।

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