जीएसटी परिषद की 54 वीं मीटिंग की सिफारिश के आधार पर वित्त मंत्रालय द्वारा एक अधिसूचना संख्या 22/ 2024/ CT /दिनांक 8.10.2024 जारी की थी ।इस अधिसूचना के अनुसार किसी पंजीकृत व्यक्ति द्वारा इसके खिलाफ अधिनियम की धारा 16(4) के कर के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण आईटीसी क्लेम करने की मांग के संबंध में आदेश जारी किया गए थे। उसके संबंध में धारा 16 में दो उप धारा (5 )और (6) को शामिल करते हुए ऐसे मांग /आदेशों में सुधार के लिए आवेदन दाखिल करने के लिए पोर्टल पर सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। यह सुविधा 7 जनवरी 2025 से उपलब्ध करा दी गई है ।
यह कि जीएसटी पोर्टल ने करदाताओं के लिए धारा 73/ 74 के अंतर्गत जारी ऐसे मांग आदेशों के सुधार के लिए आवेदन प्रस्तुत करने हेतु निम्न प्रक्रिया बताइ है –
जीएसटी पोर्टल लॉगिन करे
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सर्विस
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उपयोग सर्विस
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मेरे आवेदन
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आवेदन में सुधार आवेदन
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सम्बन्धित डिमांड आर्डर
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सभी औपचारिकता(जिसमे अनुलग्नक A को भरना अनिवार्य है)
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परीक्षण कर
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दाखिल करे।
उपरोक्त विधि के अनुसार सुधार आवेदन नोटिफिकेशन संख्या 22/ 2024/CT / दिनांक 8.10.2024 प्रस्तुत किया जा सकता है।
सुधार आवेदन की शर्तें –
1. यह कि सुधार आवेदन वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।
2. यह कि सुधार आवेदन प्रत्येक डिमांड के विरुद्ध अलग-अलग प्रस्तुत किया जाएगा।
3. यह कि सुधार आवेदन में नोटिफिकेशन संख्या 22 /2024/ CT दिनांक 8.10.2024 के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
4. यह कि सुधार आवेदन में जैसा है जहां है के आधार पर प्रस्तुत किया जाना है ।
उदाहरण यदि आपके द्वारा उपरोक्त वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 ,2019-20 और 2020-21 में कर और ब्याज या अन्य कोई राशि जमा की गई है, तो वह वापस योग्य नहीं है अर्थात जो करदाता द्वारा जमा किया गया है वह वापस नहीं होगा।
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 16 की उप-धाराओं (5) और (6) के संबंध में स्पष्टीकरण ।
धारा 16 (5)( 6) की आवश्यकता क्यों?
यह कि जीएसटी अधिनियम 2017 में धारा 16(5) और( 6 )को क्यों लाया गया है ?यह विचारणीय बिंदु है ,क्योंकि मान्य सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि धारा 16 (2)(c) &(4) को उनके द्वारा संवैधानिक मान्यता दी गई है, क्योंकि जीएसटी जुलाई 2017 से जल्दबाजी में लागू किया गया कानून है, जिसके कारण बहुत सी कमी इस कानून में है ,उन कमी के कारण करदाता को बहुत अधिक नुकसान हुआ है ,जिसको सुधारने के लिए सरकार ने वित्त विधेयक संख्या 2 प्रभावी दिनांक 16 अगस्त 2024 से धारा 16(4) के सापेक्ष धारा 16(5) और( 6 )को पूर्वगामी दिनांक 1 जुलाई 2017 से लागू किया है तथा वर्ष 2017- 18 से 2020-21 तक इसे लागू किया गया है ।यदि किसी करदाता ने 30 नवंबर 2021 तक धारा 39 के अंतर्गत अपना रिटर्न फाइल किया है ,तो धारा 16(5) का लाभ एक प्रक्रिया के तहत वह ले सकता है।
जिसमें विशेष रूप से इनपुट टैक्सक्रेडिट (ITC) के दावों और कर में राहत का प्रावधान किया गया हैं।
यह कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने धारा16(4) की वैध घोषित किया है।जिससे जीएसटी विभाग इनपुट टैक्स क्रेडिट की नियमावली को बढ़ावा मिला है।
ये संशोधन धारा 73 और 74 के तहत जीएसटी कार्यवाही में धारा 16 को अपडेट किया गया है और लागू करने की अनुमति देते हैं।
यह कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 16 की उप-धाराओं (5) और (6) के संबंध में एक स्पष्टीकरण जारी किया है जिसमें सभी शंकाओं, शर्त और नियमों का विवरण दिया गया है , जिसका स्पष्टीकरण बिंदुवार प्रस्तुत किया जा रहा है -यह कि CBIC बोर्ड ने स्पष्टीकरण जारी किया है, जो 1 जुलाई, 2017 से प्रभावी हों गया है। वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2024 के माध्यम से पेश किया गया यह परिवर्तन विशिष्ट मामलों में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त करने की समय सीमा को पूर्वव्यापी रूप से बढ़ाता है।
धारा 16 की उपधारा (4) में वर्णित किया गया है कि पंजीकृत व्यक्ति किसी भी चालान या डेबिट नोट के लिए उस वित्तीय वर्ष के आगामी 30 नवंबर तक या वार्षिक रिटर्न दाखिल करने पर, जो भी पहले हो, आईटीसी का दावा कर सकता है। लेकिन, मार्च 2019 तक दाखिल किए गए वित्त वर्ष 2017-18 के चालान के लिए एक अपवाद है, यदि आपूर्तिकर्ता द्वारा विवरण अपलोड किए गए थे। तो मार्च 2019तक लाभ प्राप्त होगा।
यह कि धारा 16 उप-धारा (5) वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 से संबंधित चालानों के लिए आईटीसी दावों की अनुमति देती है, यदि रिटर्न 30 नवंबर, 2021 तक दाखिल किया जाता है।
यह कि धारा 16 यदि उप-धारा (6) आईटीसी दावों के लिए प्रावधान करती है यदि करदाता का पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है, लेकिन बाद में बहाल कर दिया जाता है, तो विशिष्ट समय सीमा के भीतर दायर चालानों के लिए आईटीसी की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2024 की धारा 150 स्पष्ट करती है कि इन पूर्वव्यापी संशोधनों के कारण भुगतान किए गए करों या उलटे आईटीसी के लिए कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा। अर्थात यदि पूर्व में कोई कर जमा कर दिया है तो वापस नहीं होगा।
विशेष – यह कि जारी अधिसूचना संख्या 22/2024 दिनांक 8अक्टूबर 2024 के अनुसार, उन करदाताओं के लिए एक विशेष सुधार प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की गई है, जिन्हें गलत तरीके से आईटीसी प्राप्त करने के लिए सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या 74 के तहत आदेश प्राप्त हुए थे। जिन करदाताओं ने इन आदेशों के विरुद्ध अपील नहीं की है, वे नए सम्मिलित प्रावधानों के आधार पर सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। जीएसटी अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (5) या उप-धारा (6) के पूर्वव्यापी रूप से सम्मिलित प्रावधानों के कारण लाभ प्राप्त करने के लिए कर अधिकारियों और/या करदाताओं द्वारा विभिन्न परिदृश्यों में निम्न कार्रवाई की जा सकती है-
1. यदि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या धारा 74 के अंतर्गत कोई मांग नोटिस/विवरण जारी नहीं किया गया है?
CBIC बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि आईटीसी के गलत लाभ के संबंध में जांच शुरू की गई है, लेकिन सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या 74 के तहत कोई मांग नोटिस जारी नहीं किया गया है, तो करदाता अभी भी सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (5) या (6) के तहत आईटीसी का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे मामलों में, उचित अधिकारी को इन उप-धाराओं को 1 जुलाई, 2017 से पूर्वव्यापी रूप से मान्यता देनी चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें ऐसे मामले शामिल हैं, जहाँ उप-धारा (4) के कथित उल्लंघन के कारण आईटीसी से इनकार करने के लिए फॉर्म DRC-01ए में सूचना जारी की गई है, बशर्ते कोई डिमांड नोटिस जारी न किया गया हो।
2. यदि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या धारा 74 के तहत मांग नोटिस/विवरण जारी किया गया है, लेकिन न्यायनिर्णयन प्राधिकारी द्वारा सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या धारा 74 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया गया है?
सीबीआईसी(CBIC )ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में, न्यायाधिकरण को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (5) और (6) को स्वीकार करना होगा, जो 1 जुलाई, 2017 से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी होगी, और सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या 74 के तहत आवश्यक आदेश जारी करना होगा।
3. यदि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या धारा 74 के तहत आदेश जारी किया गया है और सीजीएसटी अधिनियम की धारा 107 के तहत अपील प्राधिकारी के पास अपील दायर की गई है, लेकिन अपील प्राधिकारी द्वारा सीजीएसटी अधिनियम की धारा 107 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया गया है?
CBIC ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में अपीलीय प्राधिकरण को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (5) और (6) को मान्यता देना आवश्यक है, जिन्हें 1 जुलाई, 2017 को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया था, और सीजीएसटी अधिनियम की धारा 107 के तहत उचित आदेश जारी करना आवश्यक है।
4. यदि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या धारा 74 के तहत आदेश जारी किया गया है और पुनरीक्षण प्राधिकरण ने सीजीएसटी अधिनियम की धारा 108 के तहत कार्यवाही शुरू की है, लेकिन पुनरीक्षण प्राधिकरण द्वारा सीजीएसटी अधिनियम की धारा 108 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया गया है?
सीबीआईसी(CBIC )ने स्पष्ट किया कि पुनरीक्षण प्राधिकरण को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (5) और (6) को मान्यता देनी चाहिए, जो 1 जुलाई, 2017 से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी थीं, और सीजीएसटी अधिनियम की धारा 108 के तहत उचित आदेश जारी करना चाहिए।
5. यदि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 या धारा 74 के तहत आदेश जारी किया गया है, लेकिन उक्त आदेश के खिलाफ अपीलीय प्राधिकारी के पास कोई अपील दायर नहीं की गई है, या जहां सीजीएसटी अधिनियम की धारा 107 या धारा 108 के तहत आदेश अपीलीय प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है, लेकिन उक्त आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण के पास कोई अपील दायर नहीं की गई है?
CBIC बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जिन करदाताओं को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73, 74, 107, या 108 के तहत आदेश प्राप्त हुआ है, जिसमें धारा 16 की उप-धारा (4) के उल्लंघन के कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट के गलत लाभ की मांग की पुष्टि की गई है, वे अब सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह तब लागू होता है जब इनपुट टैक्स क्रेडिट धारा 16 की उप-धारा (5) या (6) के तहत उपलब्ध है, और आदेश के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई है।
सुधार की प्रक्रिया-
यह कि करदाताओं को आवेदन को जारी अधिसूचना संख्या 22/2024 – केंद्रीय कर 8 अक्टूबर, 2024 के अनुसार सीजीएसटी अधिनियम की धारा 148 में उल्लिखित विशेष प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और अधिसूचना की तारीख से छह महीने के भीतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
करदाता को जीएसटी पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं । CBIC बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि करदाताओं को सुधार आवेदन दाखिल करते समय अधिसूचना संख्या 22/2024- केंद्रीय कर/8. अक्टूबर 2024 के अनुलग्नक ए में निर्धारित जानकारी शामिल करनी होगी। इसमें सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (4) के उल्लंघन के कारण दावा किए गए गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित मूल आदेश में पुष्टि की गई किसी भी मांग का विवरण शामिल है, जो अब उसी धारा की उपधारा (5) या (6) के तहत पात्र है। सुधार के लिए आवेदन उस अधिकारी द्वारा संभाला जाएगा जिसने मूल आदेश जारी किया था। इस अधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह आवेदन पर निर्णय ले और आवेदन की तिथि से तीन महीने के भीतर आदेश जारी करे। यदि अधिकारी कोई सुधार करता है, तो उसे सुधारे गए आदेश का सारांश इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपलोड करना होगा।
A धारा 73 या 74 के तहत आदेशों के लिए फॉर्म DRC-08 में, और
B धारा 107 या 108 के तहत आदेशों के लिए फॉर्म GST APL-04 में। अपने आवेदन की समीक्षा करते समय, अधिकारी को धारा 16 की उपधारा (4) के उल्लंघन से इनपुट टैक्स क्रेडिट से इनकार करने के अन्य आधारों पर भी विचार करना चाहिए, जैसा कि धारा 73 या 74 के तहत जारी प्नोटिस में उल्लेख किया गया है। यदि सुधार करदाता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, तो अधिकारी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना होगा।
करदाता को उपचार –
सीजीएसटी अधिनियम की धारा 107 या 112 के तहत किसी भी संशोधित आदेश के खिलाफ निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील कर सकते हैं। वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2024 की धारा 150 के अनुसार, यदि धारा 16 की उपधारा (4) के उल्लंघन के कारण पहले भुगतान किया गया था या उलट दिया गया था, तो कर की वापसी या इनपुट टैक्स क्रेडिट का उलटा उपलब्ध नहीं होगा, जैसा है वैसा रहेगा के अंतर्गत भले ही इनपुट टैक्स क्रेडिट अब उपधारा (5) या (6) के तहत योग्य हो।
यह कि CBIC बोर्ड ने परिपत्र में कहा, कि धारा 73, 74, 107 या 108 के तहत आदेशों के लिए सुधार आवेदन केवल अधिसूचना संख्या 22/2024-केंद्रीय कर में उल्लिखित विशेष प्रक्रिया के तहत अधिसूचना तिथि से छह महीने के भीतर दायर किया जा सकता है। यह तभी लागू होता है जब आदेश में उपधारा (4) के अनुसार गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट के मुद्दे शामिल हों और जहां ऐसा क्रेडिट अब उपधारा (5) या (6) के तहत पात्र है। यदि कोई विचाराधीन विषय मौजूद नहीं है। यदि कोई करदाता विशेष प्रक्रिया के तहत सुधार आवेदन प्रस्तुत करता है, लेकिन यह निर्धारित किया जाता है कि आदेश धारा 16 की उपधारा (4) के किसी भी उल्लंघन को संबोधित नहीं करता है, तो अधिकारी यह देखते हुए आवेदन को अस्वीकार कर देगा कि यह अधिसूचना संख्या 22/2024-केंद्रीय कर के अंतर्गत नहीं आता है, और अस्वीकृति के कारणों को स्पीकिंग ऑर्डर के द्वारा जारी करेगा।
निष्कर्ष –
उपरोक्त स्पष्टीकरण से स्पष्ट है कि यदि करदाता को वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 तक धारा 16 (5) और (6 )के अंतर्गत कोई राहत चाहिए तो दिनांक 7जनवरी 2025 से सुधार प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के लिए पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। जिस पर प्रॉपर अधिकारी द्वारा अधिसूचना संख्या 22/ 2024/. दिनांक 8 अक्टूबर 2024 का उल्लेख करते हुए प्रस्तुत सुधार प्रार्थना पत्र को स्वीकार या अस्वीकार की कार्यवाही करनी होगी। कई करदाताओं को इस अधिसूचना के माध्यम से लाभ प्राप्त होगा।