Follow Us:

विधि के छात्रों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच, सीसीटीवी निगरानी और बायोमेट्रिक उपस्थिति के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्देशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन।

(संदर्भ -प्रकृति जैन बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया, डायरी नंबर 47760/2024)

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा सितंबर, 2024 में जारी दो सर्कुलर के खिलाफ दायर दो जनहित याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, जिसमें विधि शिक्षा या अभ्यास के लिए उम्मीदवारों के नामांकन से पहले आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच, एक साथ डिग्री या रोजगार की घोषणा और उपस्थिति मानदंडों का अनुपालन अनिवार्य किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने नालसार यूनिवर्सिटी के फाइनल ईयर के विधि के विद्यार्थी प्रकृति जैन और केयूर अक्कीराजू द्वारा दायर याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया, जो व्यक्तिगत रूप से पक्षकार के रूप में पेश हुए। 

सुप्रीम कोर्ट संक्षेप में 24 सितंबर, 2024 को BCI ने BCI:D:5186/2024 (LE Circular No.13/2024) Date: 24.09.2024

सभी यूनिवर्सिटी/लॉ कॉलेज/लॉ शिक्षा केंद्रों को एक परिपत्र जारी किया था ।जिसमें अनिवार्य रूप से उन्हें आपराधिक पृष्ठभूमि जांच प्रणाली लागू करने, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली स्थापित करने और संस्थानों के कक्षाओं और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता थी।

यह कि 25 सितंबर, 2024 को BCI ने सर्कुलर BCI- D- 5199/Dated 25.09.2024 को सभी राज्य बार काउंसिल को पत्र लिखकर कहा कि वकीलों को नामांकित करने से पहले आपराधिक पृष्ठभूमि का सत्यापन किया जाना चाहिए। उनसे डिग्री और नौकरी के बारे में घोषणा प्राप्त की जानी चाहिए।

 इन सर्कुलर से व्यथित होकर, प्रकृति जैन और केयूर अक्कीराजू याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और तर्क दिया कि बार काउंसिल आफ इंडिया ( BCI )द्वारा कानूनी पेशे के नैतिक मानकों को बनाए रखने की आड़ में जारी किए गए सर्कुलर अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

  सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ताओं के तर्क 

A यह कि बार काउंसिल आफ इंडिया (BCI) के सर्कुलर में दिए गए निर्देश स्वतंत्र और लोकतांत्रिक समाज के मूल्यों के साथ असंगत हैं, क्योंकि वे ‘यूनिवर्सिटी के स्थानों’ में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्टूडेंट और शिक्षकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और साथ ही निजता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। सर्कुलर के अनुसार, कानूनी शिक्षा केंद्रों (CLE) को अंतिम मार्कशीट और डिग्री जारी करने से पहले प्रत्येक छात्र की पूरी तरह से आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच करने की आवश्यकता होती है। विधि के छात्रों को अपनी ओर से किसी भी चल रही FIR, आपराधिक मामले, दोषसिद्धि या बरी होने की घोषणा करने की आवश्यकता होती है। आपराधिक मामलों में किसी भी तरह की संलिप्तता की सूचना बार काउंसिल आफ इंडिया ( BCI) को दी जानी चाहिए तथा CLE को अंतिम मार्कशीट या डिग्री जारी करने से पहले बार काउंसिल आफ इंडिया(BCI )के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।

B. याचिकाकर्ता ने तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें दी जाने वाली घोषणाओं की श्रेणियों का उचित वर्गीकरण नहीं किया गया। ‘चल रही FIR, आपराधिक मामला, दोषसिद्धि या बरी’ के बीच वर्गीकरण और अंतर करने में विफलता उचित वर्गीकरण परीक्षण को पूरा नहीं करती है। इसके अलावा, प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्य, यानी कानूनी पेशे के नैतिक मानकों को बनाए रखना’ और आपराधिक पृष्ठभूमि जांच प्रणाली के अनिवार्य कार्यान्वयन, प्रासंगिक रूप से बरी होने की स्थिति का भी खुलासा करने की आवश्यकता के बीच कोई तर्कसंगत संबंध नहीं है। जहां तक इस सर्कुलर में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को विधि के छात्रोंतथा CLE के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया, जिसमें सूचना का खुलासा न करने के कारण अंतिम मार्कशीट तथा डिग्री को रोकना शामिल है, याचिकाकर्ता ने इस बात पर जोर दिया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI ) के निर्णय लेने की प्रक्रिया को निर्देशित करने के लिए कोई नीति तैयार नहीं की गई, जिससे विवादित प्रावधान अत्यंत अस्पष्ट, अतिव्यापक, मनमाना तथा इसलिए संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघनकारी है ।

C. यह कि जहां तक CCTV कैमरे लगाने के निर्देश का प्रश्न है, याचिकाकर्ता का दावा है कि इस तरह की निगरानी से CLE में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) द्वारा गारंटीकृत) के प्रयोग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिन्हें राजनीतिक स्थान माना जाता है। इसके अलावा, इससे छात्र और अध्यापकों पर अनिश्चित परिणामों के सामने आत्म-सेंसरशिप में संलग्न हो जाएंगे। उपस्थिति की बायोमेट्रिक प्रणाली के संबंध में याचिकाकर्ता का दावा है कि बायोमेट्रिक डेटा किसी व्यक्ति का ‘व्यक्तिगत डेटा’ होता है, जिसका अनधिकृत उपयोग/पहुंच निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा। इसके अलावा, यह कहा गया कि बायोमेट्रिक डेटा का अनिवार्य संग्रह गैर-सहमति वाला है और ‘ऑप्ट आउट’ का विकल्प नहीं देता है।

D. यह कि याचिका में कहा गया, प्रतिवादी ने डेटा लीक, संभावित द्वितीयक उपयोग, निजी पक्षों द्वारा दुरुपयोग आदि के खिलाफ कोई पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए हैं। यह कि बार काउंसिल आफ इंडिया ( BCI) द्वारा जारी दूसरे सर्कुलर (राज्य बार काउंसिल को निर्देश के साथ) को अनुच्छेद 19(1)(जी) के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी गई, जिसमें तर्क दिया गया कि बार काउंसिल आफ इंडिया (BCI) ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत संरक्षित पेशे की स्वतंत्रता के प्रयोग पर मनमाने तरीके से अनुचित प्रतिबंध लगाए हैं। 

निष्कर्ष

यह है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा कानूनी पेशे में नैतिकता, निष्ठा और जवाबदेही के उच्चतम मानकों की आवश्यकता के लिए यह सर्कुलर जारी किया था। जिससे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इन निर्देशों के कार्यान्वयन में सभी सीएलई और कानून के छात्रों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानूनी पेशे की पवित्रता उच्चतम नैतिक स्तर और शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्तियों द्वारा बरकरार रखी जाए।

यह कि बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा विधि संस्थान ,विश्वविद्यालय, विधि के छात्रों के लिए जारी परिपत्र 

BCI:D:5186/2024 (LE Circular No.13/2024) Date: 24.09.2024

BCI ने सर्कुलर BCI- D- 5199/Dated 25.09.2024 राज्य बार काउंसिल के लिए।

उपरोक्त परिपत्र जारी करने से विधि के व्यवसाय में काफी परिवर्तन नजर आएगा,क्योंकि अभी तक विधि व्यवसाय को वैकल्पिक व्यवसाय मानते हुए कई व्यक्तियों द्वारा विधि स्नातक बन जाने के पश्चात वह विधि व्यवसाय को गंभीर रूप से स्वीकार नहीं करते हैं। उपरोक्त चारों नियम काफी समय पहले से लागू हो जाने चाहिए थे ,अब वास्तव में जो विधि व्यवसाय में आना चाहता है वही व्यक्ति विधि की पढ़ाई करेगा अन्यथा इससे बाहर रहेगा ।इससे नए अधिवक्ताओं के लिए विधि व्यवसाय में नए अवसर प्राप्त होंगे संख्या कम होने के कारण अधिवक्ताओं को वास्तविक अधिवक्ता के रूप में कार्य करने का मौका मिलेगा तथा आपराधिक छवि के लोग प्रारंभिक परीक्षण पर ही बाहर हो जाएंगे। जिस प्रकार सरकारी सेवा या निजी सेवा में कार्यरत होते हुई विधि स्नातक बनना चाहते हैं, उसमें एनओसी का प्रावधान अति महत्वपूर्ण हो गया है, साथ ही केवल एक डिग्री कोर्स रेगुलर करने की शर्त तथा बायोमेट्रिक द्वारा अटेंडेंस भी महत्वपूर्ण साबित होगी जिस प्रकार विधि के स्कूल केवल नाम मात्र के लिए फीस लेकर परीक्षा में बैठने की अनुमति देते हैं उस पर भी रोक लगेगी तथा सभी विधि के छात्रों को बायोमेट्रिक द्वारा अपनी उपस्थिति दर्ज करानी अनिवार्य होगी ।आशा है कि आने वाले विधि स्नातक सामाजिक, नैतिक तथा आर्थिक रूप से श्रेष्ठ होंगे ,जो विधि व्यवसाय के लिए सुखद होगा । और कानूनी पेशे में नैतिकता, निष्ठा और जवाबदेही के उच्चतम मानकों की स्थापना हो सकेगी।

अब इन दो याचिकाओं के द्वारा उठाए गए प्रश्नों का उत्तर माननीय सुप्रीम कोर्ट को ही देना है,क्योंकि पूर्व में जारी सर्कुलर नोटिफिकेशन माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अंतर्गत ही जारी किए गए थे, तथा उनके क्रियान्वयन हेतु बार काउंसिल आफ इंडिया और सभी स्टेट बार काउंसिल का दायित्व था ,कि वह कानूनी शिक्षा में हो रही गिरावट को कैसे दूर करें ।और यह सर्कुलर उन मानकों को स्थापित करता है ,जिससे कानूनी शिक्षा और पेशे में उच्च मानक स्थापित किया जा सके ,जो आज के वातावरण में अत्यंत आवश्यक है।

डिस्क्लेमर -यह लेखक के निजी विचार है। इनका विधिक प्रयोग नहीं किया जा सकता। लेखक स्टेट बार काउंसिल और बार काउंसिल आफ इंडिया की सामान्य जानकारी का ज्ञाता है।

Author Bio

मेरा नाम संजय शर्मा हैं।मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में इनडायरेक्ट टैक्सेस में वकालत करता हूं ।तथा मेरी शैक्षिक View Full Profile

My Published Posts

GSTAT की नई व्यवस्था: डिवीजन बेंच, सिंगल बेंच और अपीलों के वर्गीकरण की विस्तृत व्याख्या वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जीएसटी अनुपालन के लिए 10 महत्वपूर्ण विषय जीएसटी विवाद मार्गदर्शन: प्री-डिपॉजिट रिफंड अधिकार, धारा 74 दंड पर सुप्रीम कोर्ट की सीमित राहत और 100% जुर्माने से बचने की अनिवार्य शर्तें जीएसटी एक्ट धारा 108 पुनरीक्षण: कब और कैसे आदेश संशोधित हो सकता है GST धारा 116: अधिकृत प्रतिनिधि का वैधानिक अधिकार क्यों महत्वपूर्ण है View More Published Posts

Join Taxguru’s Network for Latest updates on Income Tax, GST, Company Law, Corporate Laws and other related subjects.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ads Free tax News and Updates
Search Post by Date
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031