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मौद्रिक नीति का रुख ‘अकोमोडेटिव’ रखते हुए आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार रखा है.

केंद्रीय बैंक ने लगातार 10वीं बार ब्‍याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इससे पहले, रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को ब्याज दरों में बदलाव किया था.

आरबीआई की मौद्रिक नीति की समीक्षा मीटिंग 8 फरवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो 10 फरवरी को खत्‍म हुई.

इसके पहले 8 दिसंबर 2021 को पॉलिसी मीटिंग के बाद भी ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया था.

मंहगाई दर 4% से 5% रहने का अनुमान किया गया है और जीडीपी विकास दर 7.5% रहने का अनुमान किया गया है. व्यापारिक जगत पर तीसरी लहर का आंशिक रहा है और अर्थव्यवस्था की रिकवरी धीरे धीरे होने की संभावना है. सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय बढ़ाना अर्थव्यवस्था रिकवरी में मददगार साबित होगा.

*दो बातें वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट और आरबीआई द्वारा घोषित मौद्रिक नीति में विरोधाभासी है:*

पहली जहाँ बजट में अर्थव्यवस्था की तेज रिकवरी के साथ मंहगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण की संभावना जताई गई, वही आरबीआई द्वारा अर्थव्यवस्था की धीमी रिकवरी के साथ अगले 1-2 सालों तक मंहगाई और बेरोजगारी पर राहत दिखती नहीं नजर आती.

दूसरी जहाँ सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी पर नियामक नहीं होने के बावजूद टैक्स लगाते हुए इसे एक तरह की कानूनी मान्यता देने का बजट में प्रयास किया है, वही आरबीआई गवर्नर ने इससे दूर रहने की लोगों को चेतावनी दी है.

RBI governor warns people against cryptocurrencies while announcing monetary policy

आरबीआई गवर्नर ने मौद्रिक नीति समीक्षा में साफ कहा कि क्रिप्टोकरेंसी जुए से कम नहीं है और इसकी न कोई गारंटी है, न ही कोई मापदंड है, न ही कोई कानूनी मान्यता है.

जहाँ एक ओर सरकार ने अगले वित्त वर्ष से आरबीआई द्वारा देश की क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल रुपया लांच करने की बात कही, वही आरबीआई गवर्नर ने इसके बहुत जल्द आने की संभावना से इंकार करते हुए कहा कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं कर लिया जाता है कि इसका उपयोग काले धन और टेरर फंडिंग एवं मनी लॉन्ड्रिंग में नहीं होगा तब तक ऐसी करेंसी को लांच करना अच्छा कदम नहीं होगा.

साफ है सरकार द्वारा बजट घोषणाएं उत्साहिक ज्यादा है लेकिन जमीनी सच्चाई से दूर नजर आती है जैसा कि आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति पेश करते हुए आगह किया है. जरूरत है सरकार मौद्रिक नीति का आधार लेकर बजट में प्रस्तावित घोषणाएं पर काम करें ताकि आम जनता तक सही मायनों में राहत पहुँच सकें.

*लेखक एवं विचारक: सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर 9826144965*

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