माल की बिक्री पर लगने वाले टीसीएस के सम्बन्ध में 15 सवाल और उनके जवाब

माल की बिक्री के सम्बन्ध में लागू हुए टीसीएस के प्रावधानों के बारे में कुछ सवाल और उनके जवाब यहाँ दिए जा रहे हैं  जो कि सभी के लिए उपयोगी हो सकते हैं. कृपया एक बार ध्यान से पढ़ें :-

क्र.संख्या प्रश्न जवाब
1. हमारी बिक्री पिछले वित्तीय वर्ष अर्थात 31 मार्च 2020 को समाप्त हुए वर्ष  में बिक्री 9.50 करोड़ रूपये थी . क्या मेरी फर्म को अपने  क्रेताओं से प्राप्त भुगतान  के लिए टीसीएस के प्रावधानों का पालन करना पडेगा . नहीं , यदि आपकी बिक्री बीते वित्तीय वर्ष अर्थात 31 मार्च 2020 को समाप्त वर्ष में 10 करोड़ रूपये से अधिक नहीं है तो इस वित्तीय वर्ष में  आपको टीसीएस के प्रावधानों का पालन नहीं करना पडेगा .
2. क्या माल के साथ – साथ सेवाओं पर भी हुई वसूली पर टीसीएस एकत्र कर भुगतान करना है . नहीं , इस समय जो प्रावधान लाया गया है वह केवल माल की बिक्री पर लागू है और वह भी तब लागू है जब आप एक वित्तीय वर्ष  में किसी एक क्रेता से 50 लाख रूपये से अधिक का भुगतान   माल की बिक्री के सम्बन्ध में प्राप्त  हुए हैं तो इस 50 लाख से अधिक की राशि पर टीसीएस एकत्र कर सरकार को जमा कराना है.
3. 10 करोड़ के टर्नओवर की गणना किस प्रकार से होगी ? विक्रेता के रूप में माल की बिक्री के सम्बन्ध में प्राप्त भुगतान पर टीसीएस की हमारी जिम्मेदारी है इसके लिए 10 करोड़ रूपये के टर्नओवर की किस प्रकार से होगी ? 10 करोड़ रूपये की बिक्री , सकल प्राप्तियां एवं  टर्नओवर को ज्ञात करने के लिए इस धारा 206 C (1H) में कुछ नहीं दिया गया है ना ही आपकर कानून में कहीं भी अलग से इसकी कोई परिभाषा दी गई है इसलिए आप अपने पिछले वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट में जो टर्नओवर घोषित किया है उसे ही आप इस धारा 206 C(1H) के तहत टर्नओवर मान लें जब तक कि सरकार कोई और स्पष्टीकरण जारी नहीं करती है.
4. हम माल और सेवाएं दोनों प्रदान करते हैं और 31/03 /2020 को 7 करोड़ रूपये का माल और 5 करोड़ रूपये की सेवाएं दी है तो क्या विक्रेता के रूप में हमें इस नए टीसीएस के प्रावधान का पालन करना होगा और हमारे क्रेताओं से जिनसे इस वर्ष की गई माल की वसूली 50 लाख रूपये से ज्यादा है उस पर टीसीएस एकत्र कर जमा करना होगा ?

देखी आप एक विक्रेता है तो यदि आपका बिक्री , सकल प्राप्तियां या  टर्नओवर 31 मार्च 2020 को समाप्त वर्ष में 10 करोड़ रूपये से अधिक है तो आप इस नए कानूनी प्रावधान के दायरे में आते हैं क्यों कि “विक्रेता” की जो परिभाषा इस धारा 206 C (1H) दी गई है उसके अनुसार आपके ब्यापार में प्राप्त सभी बिक्री , सकल प्राप्तियों एवं टर्नओवर को लिया गया है माल या सेवा का कोई फर्क नहीं किया गया है .

(इस सम्बन्ध में सरकार को स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए)

5. एक क्रेता से  हमें 30 सितम्बर 2020 से पूर्व 1 करोड़ रुपया एडवांस दिया था और इस माल की सप्लाई हमें 15 अक्तूबर 2020 तक करनी है . इस सम्बन्ध में क्या हमें टीसीएस एकत्र कर जमा करना होगा . यह  टीसीएस को 1 अक्तूबर 2020 से लागु किया गया है और यह प्राप्त भुगतान पर लागू  होता है जैसा कि मैंने अपने पिछले लेख में समझाया था इसलिए जो रकम आपको 1 अक्तूबर 2020 के पहले मिल गई है उस पर टीसीएस जमा नहीं करना है .
6. आपने बताया है कि जो भी एडवांस माल की बिक्री के लिए मिलता है उस पर टीसीएस का भुगतान करना है . मान लीजिये एक क्रेता ने जो मुझे अभी अक्तूबर 2020 में पहले माल खरीदने के  मुझे 1 करोड़ रुपया अग्रिम दिया है लेकिन बाद में सौदा कैंसिल हो गया है तो काटे गए टीसीएस का क्या होगा ? टीसीएस का भुगतान तो आपको एडवांस की प्राप्ति पर ही इसका भुगतान करना है . आप जिस माह में यह रकम प्राप्त करते हैं उसी माह की समाप्ति के अगले माह में 7 वें दिन तक  करना होगा. ऐसे में यदि आप उसी माह में एडवांस चुका देते हैं तो आप टीसीएस जमा नहीं कराएं और पूरी रकम लौटा दें और यदि आपने टीसीएस जमा करा दिया है तो शेष रकम लौटा दें और आपका क्रेता टीसीएस की क्रेडिट ले लेगा – यदि इस स्तिथी पर सरकार कोई स्पष्टीकरण जारी करती है तो आप उसका पालन करें .
7.

हमने एक क्रेता को 30 सितम्बर 2020 तक 5 करोड़ रूपये का माल बेचा है जिसका कोई भुगतान 30 सितम्बर तक प्राप्त नहीं किया है . अब यह भुगतान हमें अक्तूबर में प्राप्त होने वाला है तब क्या हमें इस रकम पर टीसीएस जमा करना होगा जब कि हम किसी भी प्राकर की सप्लाई इस कानून के लागू होने के बाद नहीं कर रहे हैं .

यदि हाँ तो फिर हम इसे अपने क्रेता से वसूल किस प्रकार करेंगे ?

यह एक भुगतान आधारित कर है इसलिए आप 1 अक्तूबर 2020 के बाद जो भी भुगतान प्राप्त करेंगे उस पर आपको टीसीएस का भुगतान करना ही होगा. इस दृष्टी से इस प्रकार के व्यवहार के लिए यह एक अजीब सा कर है.

आपको तो यह कर जमा कराना ही है और इसके लिए आप एक डेबिट नोट जारी कर अपने क्रेता से यह कर एकत्र करना होगा और उन्हें इस कानून के बारे में बताना होगा . इसके अतिरिक्त आपके क्रेता को इस कर का आपको भुगतान करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए क्यों कि इसकी क्रेडिट तो उन्हें अपना आयकर रिटर्न भरते समय मिल ही जाएगी .

8.

एक क्रेता को हमने 70 लाख रूपये की बिक्री की है उसमें से 40 लाख रूपये तो 30 सितम्बर से पहले प्राप्त हो गए और बकाया में से 15 लाख रूपये अक्तूबर 2020 में वसूल हुए हैं अब मुझे इस 15 लाख रूपये पर किस तरह से टीसीएस का भुगतान करना होगा .

 

इस व्यवहार में जो 15 लाख रूपये आपको अक्तूबर 2020 में प्राप्त हुए हैं उसमें से आपको 5 लाख रूपये पर टीसीएस का भुगतान करना है , इसकी गणना इस प्रकार  की जाएगी कि आपको 50 लाख रूपये के ऊपर की राशी पर कर का भुगतान करना है और इस व्यवहार में आपको कुल 55 लाख रूपये (40+15=55) प्राप्त हुए हैं और टीसीएस 50 लाख रूपये से ऊपर की राशि पर करना है इसलिए प्राप्त हुए 15 लाख में से आपको इस समय  5 लाख रूपये पर टीसीएस का भुगतान करना है .
9. जिस क्रेता से हमने टीसीएस एकत्र करना है क्या हम उसके बिल में इसे जोड़ कर भेज दें ताकि भुगतान भेजते समय इसका भी भुगतान कर दे या फिर आप बता दें कि इस सम्बन्ध में हमें और क्या विकल्प प्राप्त है.

आपको जहाँ भी जरुरी है वहां “भुगतान प्राप्त होने” पर ही टीसीएस जमा कराना है इसलिए माल की बिक्री होते ही टीसीएस की जिम्मेदारी नहीं बनती है लेकिन आपको यह वसूल तो अपने क्रेता से करना ही पडेगा और इसकी जिम्मेदारी भी आपकी तभी होगी जब कि क्रेता से आपको माल का भुगतान प्राप्त होता है .

अब आप इसे अपने विक्रेता से किस तरह वसूल करते हैं  आपके सोचने की बात है इसके लिए आप इसे बिल में जोड़ सकते हैं या  बिल में इसके बारे में सूचना लिख सकते हैं या भुगतान प्राप्त होने पर एक डेबिट नोट जारी कर सकते हैं और एक और बात भुगतान प्राप्त करने के बाद अपने क्रेता को फोन पर , पत्र लिखकर , ई -मेल पर सूचना देकर भी इसे वसूल कर सकते हैं . टीसीएस का भुगतान आपको जिस माह में “भुगतान प्राप्त होता है” उस माह की समाप्ति के 7 वें दिन तक  करना है अब इसे आप किस तरह से अपने क्रेता को सूचित करते हैं और उनसे किस तरह से वसूल करते हैं, कब करते हैं आप कर पाते भी हैं या नहीं इससे इस प्रावधान का कोई ख़ास  लेना देना नहीं है .

इसलिए आपको ही तय करना है कि इस बारे में आपको अपने क्रेता को किस प्रकार से वसूलना है इसे आप स्वयं ही फैसला कर सकते हैं . यदि वह आपको यह राशि नहीं देता है तो भी आपके पास वसूली के कानूनी रास्ते खुले है .

यहाँ आप ध्यान रखें कि टीडीएस और टीसीएस में यही एक मूल फर्क होता है कि टीडीएस में आप स्वयं काट कर प्राप्तकर्ता को  पैसे का भुगतान करते हैं तो वहां थोड़ा आसान होता है  और टीसीएस में आपको रकम क्रेता से  एकत्र करनी होती है.

आप मान कर चलो कि जैसे जीएसटी वसूल हो या  नहीं आपको जमा कराना है उसी तरह से टीसीएस भी है इसे भी आपको जमा कराना है  अब इसे आपको क्रेता से वसूल तो करना ही पडेगा  .

11. यदि हम यह टीसीएस अपने बिल में जोड़ देते है और इसका भुगतान इस माह प्राप्त नहीं होता है तब क्या होगा ?

यदि आप इसे बिल में ही लगना चाहते हैं जो कि आपका  अपना चयन है कोई अनिवार्य नहीं है  ( मैंने कई बड़ी कम्पनियों के बिल में ऐसा देखा है ) तो आपको माह के अंत में “प्राप्त  भुगतान” का एक स्टेटमेंट बनाना होगा और उसके अनुसार टीसीएस का भुगतान करना होगा . आप डेबिट नोट का विकल्प चुनते हैं तब भी आप इसी तरह एक भुगतान प्राप्ति का स्टेटमेंट बना कर टीसीएस का भुगतान करेंगे.

यह टीसीएस तो आपको भुगतान प्राप्त होने पर ही जमा कराना है और अब नया कानून है तो प्रक्रिया का थोडा काम तो बढेगा ही.

10.

मान लीजिये हम इसे बिल में जोड़ देते हैं तो इस सम्बन्ध में ई – वे बिल किस तरह बनेगा क्यों कि जैसा कि आपने बताया है

यह जीएसटी लगाने के बाद लगना है.

यह कोई बड़ी समस्या नहीं है यदि आप बिल में इसे लिख कर इनवॉइस वैल्यू में जोड़ देते हैं तो ऐसी रकम को ई -वे बिल मे Others (+) (-) का एक कॉलम हैं उसमें यह रकम आप लिख ले सकते हैं और यहाँ लिखी  यह रकम आपकी जीएसटी की जिम्मेदारी को भी  ई -वे बिल में नहीं बढ़ाती है .
11. ये कर कब एकत्र करना है और कब जमा कराना है ?

जैसा कि ऊपर और मेरे इस लेख में भी मैंने बताया इस कर का भुगतान आपको क्रेता से माल की बिक्री का  भुगतान प्राप्त करने पर करना है और जिस महीने में आप बिक्री का भुगतान प्राप्त करते हैं उस महीने के समाप्त होने के बाद 7वें दिन तक  आपको इसका भुगतान सरकार को करना है .

जैसे जैसे भुगतान आपको प्राप्त होता है वैसे ही आपकी टीसीएस की जिम्मेदारी हो जाती है ना कि माल की बिक्री पर  .

12. मेरे क्रेता को इस टीसीएस के क्रेडिट कैसे मिलेगी ? टीसीएस जमा करने के बाद आप जिस तरह से टीडीएस का रिटर्न  भरते हैं उसी प्रकार से आप टीसीएस का त्रैमासिक रिटर्न भरेंगे और जिस तरह टीडीएस की क्रेडिट मिलती है उससे तरह से टीसीएस की क्रेडिट भी मिल जायेगी .
13, आपने लिखा है कि इस प्रावधान को लेकर लिखा है कि इससे कार्यशील पूंजी (WORKING CAPITAL)  की समस्या खड़ी हो जायेगी लेकिन जब हमें यह रकम भुगतान प्राप्त होने पर ही जमा कराना है तो फिर कार्यशील पूंजी का किस तरह खड़ा होगा ? कृपया स्पष्ट करें ?

आपको यह भुगतान बिक्री पर नहीं करना है बल्कि भुगतान प्राप्त करने पर करना है तो इसके लिए आपके क्रेता को अब माल के भुगतान के साथ टीसीएस का भी भुगतान करना है इसलिए उनको कार्यशील पूंजी की अब थोड़ी ज्यादा जरुरत होगी और इसी तरह जहाँ आप क्रेता है वहां आपको अधिक कार्यशील पूंजे की जरुरत होगी .

इसके अलावा यह प्रावधान आपका प्रक्रिया संबंधी कार्य तो बढ़ाएगा ही.

14. यदि समय पर टीसीएस को जमा नहीं करा पाते हैं तो क्या होता है ? यदि आप ऐसा समय पर नहीं कर पाते हैं तो आपको टीसीएस को 1% प्रतिमाह या उसके किसी हिस्से के लिए ब्याज के साथ भुगतान करना पडेगा. यहाँ आप याद रखें कि आयकर कानून में ब्याज की गणना जीएसटी की तरह दिनों के हिसाब से नहीं होती है.
15. क्या इस टीसीएस को लेकर कोई रिटर्न  भी भरना है ?

हाँ आपको त्रैमासिक रिटर्न भरने होंगे और इन्ही रिटर्न से यह टीसीएस आपके क्रेता के आयकर खाते में दिखाई देगा.

यह रिटर्न 27EQ है जो हर तिमाही की समाप्ति के बाद भरना है और इसकी अंतिम तिथी 15 जुलाई , 15 अक्तूबर, 15 जनवरी और 15 मई को भरना होगा .

  • सुधीर हालाखंडी- sudhirhalakhandi@gmail.com

नोट :- ये सवाल मुझे विभिन्न करदाताओं से पिछले दो दिनों में मिले हैं और इस विषय को पूरा करने के लिए मैंने अपनी तरफ से 3 सवाल जोड़े हैं . एक नया कानूनी प्रावधान है इसलिए इस सम्बन्ध में भ्रम अवश्य है इसलिए इन सवालों का जवाब देते समय मैंने इस नए प्रावधान के लगभग सभी पक्ष कवर करने का प्रयास किया है लेकिन फिर भी किसी भी प्रकार की सम्पूर्णता का कोई दावा नहीं है इसलिए किसी भी  प्रकार की त्रुटि होने या भिन्न मत होने पर कृपया सूचित करें ताकि इन जवाबों को और भी उपयोगी बनाया जा सके .

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3 Comments

  1. Amit Vora says:

    We had sold to party 16 lakh before 30th sept-2020 & we had recd with previous year amount 52.06 lakh recd in 2020-21
    has he liable to charges for TCS

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