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Summary: केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 128ए करदाताओं को जुलाई 2017 से मार्च 2020 तक की अवधि के बकाया करों का निपटान बिना ब्याज और दंड के करने का अवसर प्रदान करती है। यह प्रावधान 1 नवंबर 2024 से लागू होगा, और कर का भुगतान 31 मार्च 2025 तक किया जा सकता है। आवेदन प्रक्रिया के तहत जीएसटी एसपीएल-01/एसपीएल-02 फॉर्म 30 जून 2025 तक दाखिल करना अनिवार्य है। आवेदन के साथ अपील या रिट याचिका वापस लेने का प्रमाण आवश्यक होगा। छूट का लाभ आईटीसी का उपयोग कर लिया जा सकता है, जबकि रिवर्स चार्ज देयता में कैश लेजर का उपयोग जरूरी है। सीबीआईसी परिपत्र के अनुसार, पहले भुगतान की गई राशि भी पात्र मानी जाएगी। हालांकि, विलंब शुल्क, मोचन जुर्माना, या अन्य दंड छूट के तहत नहीं आएंगे। धारा 128ए कर अनुपालन को प्रोत्साहित करते हुए करदाताओं पर वित्तीय दबाव कम करने का प्रयास है। करदाताओं को समयबद्ध अनुपालन और स्पष्ट दस्तावेज़ीकरण सुनिश्चित करना चाहिए।

यह लेख केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 128ए के तहत ब्याज और जुर्माने में छूट के प्रावधानों और उनसे संबंधित प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण प्रदान करता है। प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

धारा 128ए के अंतर्गत छूट का सारांश:

1. लागू अवधि:

    • जुलाई 2017 से मार्च 2018, वित्त वर्ष 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 की अवधि।
    • यह प्रावधान 1 नवंबर 2024 से प्रभावी होगा।

2. कर भुगतान की समयसीमा:

    • यदि नोटिस/आदेश धारा 128ए के तहत आता है, तो कर का भुगतान 31 मार्च 2025 तक किया जा सकता है।
    • धारा 73 के तहत पुनर्निर्धारित कर मामलों में, आदेश की सूचना की तिथि से 6 महीने के भीतर भुगतान करना होगा।

3. आवेदन प्रक्रिया:

    • जीएसटी एसपीएल-01 या एसपीएल-02 फॉर्म में आवेदन 30 जून 2025 तक दाखिल करें।
    • यदि भुगतान पहले ही डीआरसी-03 के माध्यम से किया जा चुका है, तो डीआरसी-03ए में आवेदन दायर करना होगा।

4. महत्वपूर्ण शर्तें:

    • प्रत्येक नोटिस, विवरण या आदेश के लिए अलग से आवेदन दायर करना होगा।
    • आवेदन के साथ अपील या रिट याचिका वापस लेने का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

5. सहमति/अस्वीकृति: यदि अधिकारी आवेदन खारिज करते हैं, तो नोटिस (फॉर्म जीएसटी एसपीएल-03) जारी किया जाएगा। उत्तर संतोषजनक होने पर आदेश (फॉर्म जीएसटी एसपीएल-05) जारी किया जाएगा, अन्यथा अस्वीकृति का आदेश (एसपीएल-07) जारी होगा।

6. छूट के दायरे से बाहर: विलंब शुल्क, मोचन जुर्माना, या अन्य प्रकार के दंड छूट के अंतर्गत नहीं आते।

7. आईटीसी उपयोग: छूट का लाभ आईटीसी का उपयोग करके लिया जा सकता है। हालांकि, रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत देयता के मामलों में इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर का उपयोग अनिवार्य है।

स्पष्टीकरण (सीबीआईसी परिपत्र 238/32/2024-जीएसटी):

  • कर घटक पहले भुगतान होने पर भी लाभ उपलब्ध: यदि कर 31 मार्च 2025 से पहले चुका दिया गया है, तो इसे छूट के लिए मान्य माना जाएगा।
  • सरकारी वसूली की राशि भी मान्य: यदि वसूली 31 मार्च 2025 से पहले की गई है।
  • धारा 128ए के लाभ: केवल तभी मिलेंगे जब आदेश में मांग की गई कर राशि का पूरा भुगतान किया गया हो।

निष्कर्ष: धारा 128ए करदाताओं को ब्याज और जुर्माने में राहत देने का प्रयास है, लेकिन इसके लिए समयबद्ध अनुपालन और स्पष्ट दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता है।

नई जीएसटी धारा 128ए: प्रमुख प्रावधान और उनका प्रभाव

जीएसटी अधिनियम के तहत नई धारा 128ए के लिए मार्गदर्शिका

केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम में धारा 128 का समावेश, 1 जुलाई 2017 से 31 मार्च 2020 के बीच कर दायित्वों के प्रति करदाताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है। यह संशोधन करदाताओं को बिना अतिरिक्त ब्याज या दंड के अपने बकाया करों का निपटान करने की सुविधा देता है, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी की जाएं।

नवीनतम अद्यतन

1. छूट योजना की सलाह: जीएसटी विभाग ने धारा 128ए के तहत छूट योजना का मार्गदर्शन जारी किया है।

2. सीबीआईसी द्वारा स्पष्टीकरण: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने जीएसटी धारा 128ए से संबंधित मुख्य सवालों के उत्तर दिए हैं।

जीएसटी धारा 128ए के प्रमुख प्रावधान

1. आवेदन का दायरा

  • धारा 73 के तहत नोटिसों से प्राप्त राशि, जो कर का भुगतान न करने या कम भुगतान से संबंधित है।
  • धारा 107 और 108 के तहत पारित आदेश, जो कर निर्धारण और अपीलों के संशोधन से संबंधित हैं।

2. राहत प्रावधान

  • करदाता को कुल बकाया राशि का भुगतान करना होगा, जैसा कि संबंधित नोटिस या आदेश में निर्दिष्ट है।
  • यदि मामला अपील प्रक्रिया में है, तो राहत लागू नहीं होगी जब तक कि अपील वापस नहीं ली जाती।

3. आगामी कार्यवाहियाँ

  • राशि का निपटान होने के बाद संबंधित कार्यवाही समाप्त मानी जाएगी।
  • ऐसे मामलों में अपील का विकल्प समाप्त हो जाएगा।

4. बिना जुर्माने के कर का भुगतान

  • करदाता ब्याज और दंड के बिना अपने दायित्वों का निपटान कर सकते हैं।
  • भुगतान को निर्धारित तिथि तक पूरा करना आवश्यक है।

5. प्रतिबंध

  • यह प्रावधान गलत रिफंड के मामलों में लागू नहीं होगा।
  • पहले भुगतान किया गया ब्याज और जुर्माना रिफंड के लिए पात्र नहीं होगा।

करदाताओं पर प्रभाव

  • वित्तीय राहत: पुराने कर दायित्वों का दंड-मुक्त भुगतान करदाताओं के लिए वित्तीय दबाव कम करेगा।
  • अनुपालन में सुधार: दंड और ब्याज को हटाने से कर अनुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • आर्थिक सुधार में सहायता: कठिन आर्थिक परिस्थितियों में संघर्षरत करदाताओं को राहत देने का उद्देश्य।

अंतिम निष्कर्ष

सीजीएसटी अधिनियम की धारा 128 का समावेश, पुराने कर दायित्वों से बोझिल करदाताओं को राहत प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संशोधन न केवल अनुपालन को सरल बनाता है, बल्कि आर्थिक सुधार में भी योगदान करता है।

करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे इन प्रावधानों को समझने के लिए अपने कर सलाहकारों से परामर्श लें और छूट योजना का अधिकतम लाभ उठाएं।

Author Bio

Ashish Kamthania (Saxena), Managing Director : TAX & LEGAL PROFESSIONAL PRIVATE LIMITED, RAMPUR UP INDIA currently (at present) : Secretary : TAX BAR ASSOCIATION, RAMPUR UP 244901 INDIA Treasurer : RAMPUR TAX BAR ASSOCIATION, RAMPUR UP 244901 INDIA STATE EXECUTIVE MEMBER : THE UP TAX BAR View Full Profile

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