Follow Us:

पहले ही सरकार ने नेशनल फाइनेंशियल आथिरटी के गठन के साथ ही सीए संस्थान के अनुपालनीय प्रक्रिया को सूचिबद्ध कंपनियों के केस से अलग कर दिया था और संस्थान सिर्फ छोटे केस में ही निर्णय दे सकती है.

और अब जंयत सिन्हा की अध्यक्षता में गठित संसदीय पैनल ने आज अपनी रिपोर्ट संसदीय पटल पर रख सीए संस्थान को बड़ा झटका दिया है.

आपको ज्ञात होता कि सरकार द्वारा सीए एक्ट 1949, कास्ट एकाउंटेंट एक्ट 1959 एवं कंपनी सेक्रेटरी एक्ट 1980 में संशोधन हेतु दिसम्बर 2021 में प्रस्तावित बिल लाया गया था, जिसे अनुमोदन के लिए स्टेंडिंग कमिटी को भेजा गया था और जिसने 23/03/2022 को अपने सुझावों के साथ इसे अनुमोदित किया, जो कि हैरान करने वाले है खासकर सीए पैशे के लिए, कुछ प्रमुख सुझाव इस प्रकार है:

1. आईआईटी और आईआईएम के तर्ज़ पर आईआईए संस्थान जो कि एकाउंटिंग और फाइनेंस के कोर्स करवायेगी, उसका गठन हो ताकि वहाँ से निकले छात्र भी सीए जैसे आडिट का काम करेंगे और ऐसा होने से समाज में आडिट की क्वालिटी अच्छी होगी एवं स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा का निर्माण होगा.

2. सीए संस्थान की डिसीप्लीन प्रक्रिया स्वतंत्र होगी और उसमें सदस्य कानून के तहत नियुक्त किए जावेंगे.

3. डिसीप्लीन कमिटी या बोर्ड के कहने पर शिकायत वापस नहीं ली जा सकेगी.

4. डिसीप्लीन प्रक्रिया और फैसले को जल्द करने के प्रावधानों को लेकर यह बिल संसद में पेश किया गया था और साफ है कहीं न कहीं सरकार इन तीनों संस्थानों के कामकाज से खुश नहीं है और पर कतरने जा रही है, जिसका सबसे ज्यादा असर सीए संस्थान पर होगा.

*सरकार की यह सोच साफ दर्शाती है कि:*

1. एक तरफ सीए संस्थान को राष्ट्र निर्माण में अपना सहायक बताना और दूसरी तरफ सरकारी संस्थान गठन करने का सुझाव देना और कहना कि अन्य संस्थाएं भी एकाउंटिंग और फाइनेंस के पैशेवर पैदा करें- दर्शाता है कि सीए संस्थान की कानून में विशेषज्ञता से सरकार डर रही है.

मूंह में राम, बगल में छुरी- सीए संस्थान के पर कतरने की तैयारी में सरकार

2. जीएसटी में हजारों बदलाव और न्यायलयों द्वारा इसे जटिल कानून की संज्ञा देना शायद सरकार को अच्छा नहीं लगा क्योंकि सीए सदस्यों द्वारा समय समय पर सरकार को इसमें व्याप्त खामियों पर चेताया गया.

3. सीए संस्थान के हेड और काउंसिल सदस्यों की यह नाकामी ही है कि वे सरकार को सही मायनों में यह नहीं समझा पाए कि आज राजस्व बढाने में सीए सदस्यों का मुख्य योगदान है और उनके सलाह मश्ववरे से चलेंगे तो देश की अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ेगी.

4. सीए पैशे और एकाउंटिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में नजर रखने और नियंत्रण के लिए सीए संस्थान से उपयुक्त और कोई नहीं हो सकता, इसलिए इस पैशे से जुड़े कानून में संशोधन के लिए सीए सदस्य की अध्यक्षता में ही कमिटी गठित होनी चाहिए.

5. एकाउंटिंग और वित्तीय क्षेत्र में सीए संस्थान जैसी विशेषज्ञता कोई और संस्थान कैसे दे पाऐगी, शायद सरकार यह नहीं समझ पा रही. अन्य संस्थान गठित करके या मान्यता देकर सरकार व्यापार, राजस्व और पैशे के साथ अन्याय करेगी- ये तो तय है.

*संसदीय कमिटी यदि सही मायनों में एकाउंटिंग, आडिट, टेक्सेशन, कंपनी कानून आदि वित्तीय कानूनों के सहारे राजस्व और अर्थव्यवस्था बढ़ाना चाहती है तो यह करना चाहिए:*

1. सीए एवं अन्य दोनों संस्थानों के हाथ और मजबूत करने चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र सरकार के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अपने पैशे में आगे बढ़े.

2. सीए संस्थान का ही नियंत्रण अपने पैशेवरों पर होना चाहिए ताकि बेहतर सेवाएं और उच्च क्वालिटी पर फोकस हो सकें.

3. संस्थान डिसीप्लीन प्रक्रिया को और व्यापक, सरल एवं समयबद्ध बनाने प्रतिबद्ध हैं.

लेकिन सरकार द्वारा यह कहना कि और कोई संस्थान सीए पैशेवर से ज्यादा अच्छा पैशेवर एकाउंटिंग और वित्त क्षेत्र में पैदा कर सकती है, यह किसी भी रुप से तर्कसंगत और न्यायपूर्ण नहीं प्रतीत होता.

– क्या सरकार चाहती है कि परीक्षा प्रक्रिया इतनी सरल हो कि ज्यादा से ज्यादा पैशेवर बनें?

– क्या ऐसे में उचित क्वालिटी मिल पाऐगी?

– क्या स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा और बेहतर सेवा – कानून की बारीकी न समझने वाले पैशेवर कर पाएंगे?

– क्या सरकार सीए संस्थान के पर कतरने से व्याप्त भ्रष्टाचार और खामियों को दूर कर लेगी?

– क्या सरकार द्वारा गठित एक संस्थान के खिलाफ दूसरी संस्थान गठित करना समय और पैसे की बरबादी नहीं होगा?

– क्या सरकार को नहीं चाहिए कि इन संस्थानों के बेहतर नियंत्रण और प्रबंधन पर सुझाव दें न कि कोसें?

*अब समय आ गया है कि सीए और अन्य दो संस्थानों के लीडर और सदस्य बड़ी निडरता और साफगोई तरीके से सरकार के समक्ष अपनी बात खुलकर रखें और सरकार की अपेक्षाएँ पूछें. कैसे सरकार के साथ मिलकर कानून की खामियों को दूर किया जा सकता है, अर्थव्यवस्था और राजस्व को कैसे बढ़ाया जा सकता है, क्या कदम हो सकते हैं- बढ़ी स्पष्टता से सरकार को बताना होगा और यदि सरकार न माने तो यह भी बताना होगा कि खामियों की जबाबदारी सरकार और उनके नौकरशाहों की होगी.*

*एक तरफ सीए संस्थान सरकार के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलने तैयार है, उनके सुझाव मानने तैयार है तो दूसरी तरफ सरकार को भी हमारी कोशिशों की प्रशंसा करनी होगी न कि राम राम कहकर पर कतर दें.

*लेखक एवं विचारक: सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर 9826144965*

Join Taxguru’s Network for Latest updates on Income Tax, GST, Company Law, Corporate Laws and other related subjects.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ads Free tax News and Updates
Search Post by Date
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930