माल की बिक्री के सम्बन्ध में प्राप्त राशि पर टीसीएस का नये प्रावधान – धारा 206C(1H)- आयकर चर्चा

1 अक्तूबर 2020 से सरकार ने माल की बिक्री के सम्बन्ध एकत्र कर टीसीएस जमा करनाने में एक नया प्रावधान लागु किया है जो कि आयकर कानून की धारा 206C(1H) में दिया गया है और इससे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं जिन्हें यहाँ अत्यंत सरल भाषा में समझाया गया है ताकि आपको इसके पालन करने में कोई परेशानी नहीं हो. यह एक प्राम्भिक जानकारी है जिससे आपका इस समय इस प्रावधान के पालन का का काम आराम से चल जाएगा.

भारत सरकार के केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने भी इस सम्बन्ध में एक सर्कुलर संख्या 17 दिनांक 29 सितम्बर 2020 को जारी किया है जिससे भी इस प्रावधान को व्यवहारिक रूप से समझने में मदद मिलेगी.

इसके बाद दिनांक 30 सितम्बर 2020 को एक प्रेस रिलीज भी आया जिसमें भी इस प्रावधान को समझने में मदद मिलती है.

आइये समझने की कोशिश करें इस समय व्यापार एवं उद्योग जगत में सबसे ज्यादा चर्चित इस माल की बिक्री ले सम्बन्ध में प्राप्ति पर लागु किये गए इस टीसीएस के प्रावधान को.

क्या है ये नया प्रावधान

1 अक्तूबर 2020 से टीसीएस के नए प्रावधान लागू हो गए हैं और यदि आपकी बिक्री बीते वर्ष में अर्थात 31 मार्च 2020 को जो वर्ष समाप्त हुआ है उसमें 10 करोड़ से अधिक थी तो इस वर्ष आपको अपने उन क्रेताओं, जिनसे आपने इस वित्तीय वर्ष में 50 लाख से अधिक बिक्री के सम्बन्ध में “भुगतान” प्राप्त किया है तो 1 अक्तूबर के बाद प्राप्त भुगतान में से जितना भी इस वितीय वर्ष में प्राप्त 50 लाख रूपये से अधिक होगा उस पर आपको 0.1% टीसीएस एकत्र कर जमा कराना है. इस समय इस कर की दर में 25% की छूट 31 मार्च 2021 तक दी गई है और इसकी प्रभावी दर इस समय 0.075% जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे.

यदि 31 मार्च को समाप्त हुए बर्ष में आपकी बिक्री 10 करोड़ से कम है तो आपको यह टीसीएस एकत्र नहीं करना है. इसके अतिरिक्त यदि पूरे वर्ष में आप 50 लाख से ऊपर भुगतान प्राप्त करते हैं लेकिन 1 अक्तूबर 2020 के बाद आपने कोई भी भुगतान प्राप्त नहीं किया है तो भी आपको किसी प्रकार का टीसीएस एकत्र नहीं करना है अर्थात 30 सितम्बर से पूर्व प्राप्त किये गए भुगतानों पर यह टीसीएस नहीं लगना है.

यहाँ प्राप्त भुगतानों का आशय केवल माल की “बिक्री के सम्बन्ध” में प्राप्त भुगतान से है चाहे वह एडवांस ही क्यों नहीं प्राप्त हुआ है.

यदि आपकी बिक्री 31 मार्च 2020 को समाप्त वर्ष में 10 करोड़ से अधिक है तो इस प्रावधान को समझने के लिए आइये कुछ उदहारण देखें :-

1. यदि किसी एक खरीददार से आपकी बिक्री के सम्बन्ध में “प्राप्त राशि” 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक 5 करोड़ रूपये है लेकिन इसमें से आपको 2 करोड़ की सप्लाई अब 1 अक्तूबर के बाद करनी है अर्थात आपको 30 सितम्बर 2020 तक मिली राशि में से 2 करोड़ रुपया एडवांस है लेकिन इस पर आपको कोई अब टीसीएस नहीं एकत्र करना है भले ही आप वह सप्लाई 1 अक्तूबर 2020 को या इसके बाद ही क्यों नहीं कर रहें है क्यों कि यह एक प्राप्ति आधारित कर है और यह 1 अक्तूबर 2020 से लागु हुआ है और इस तारीख के बाद प्राप्त राशी पर ही लगना है.

2. आपने 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 किसी एक क्रेता को 5 करोड़ की बिक्री की है जिसमें 4 करोड़ रूपये 30 सितम्बर तक ही प्राप्त हो गए थे और 1 करोड़ रूपये का भुगतान 2 अक्तूबर को प्राप्त हुआ है तो भी आपको इस 1 करोड़ रूपये पर टीसीएस एकत्र करना है क्यों कि यह भुगतान प्राप्ति पर आधारित कर है और 1 करोड़ रुपया आपको 1 अक्तूबर 2020 या इसके बाद प्राप्त हो रहा है.

3. यदि आपने किसी एक डीलर को 60 लाख रूपये की बिक्री 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 के बीच और इसमें से 45 लाख रूपये 30 सितम्बर 2020 तक प्राप्त हो गए और 2 अक्तूबर को 10 लाख रूपये और प्राप्त होते हैं तो इस प्राप्ति में से इस समय आपको 5 लाख रूपये पर ही कर एकत्र करना है क्यों कि यह कर पूरे वर्ष में 50 लाख रूपये से अधिक की वसूली पर लगना है और इस केस में कुल वसूली 55 लाख रूपये हुई है तो 50 लाख को छोड़ते हुए शेष पर टीसीएस एकत्र करना है क्यों कि यह प्रावधान 50 लाख रूपये की प्राप्ति के ऊपर के आधिक्य पर ही है.

4. 50 लाख की सीमा को ज्ञात करने के लिए आपकी 1 अप्रैल 2020 से प्राप्त हुई सारी राशि को गिना जाएगा क्यों कि यह सीमा वित्तीय वर्ष पर आधारित है लेकिन टीसीएस उसी राशि पर एकत्र करना है जो कि आपको 1 अक्तूबर 2020 या उसके बाद प्राप्त होती है. आइये इसे भी देख लें यदि आपकी प्राप्ती 30 सितम्बर से पहले 50 लाख है तो फिर 1 अक्तूबर के बाद प्राप्त होने वाली प्रत्येक राशि पर टीसीएस एकत्र करना होगा क्यों कि 50 लाख रूपये की वार्षिक सीमा तो 30 सितम्बर तक पूरी हो चुकी थी. अब 1 अक्तूबर को यदि आपको 5 लाख रुपया ही एकत्र होता है तो उस पर टीसीएस एकत्र कर जमा करना होगा क्यों कि आपने 50 लाख रूपये के एकत्रीकरण की सीमा इस वित्तीय वर्ष में पूरी कर ली है.

5. 30 सितम्बर के बाद जो भी राशि प्राप्त होती है उसका आपको विभाजित करने की आवश्यकता नहीं है कि यह किस बिल से सम्बन्धित है या यह भुगतान 30 सितम्बर 2020 से पहले का है या बाद का. यह प्रावधान इसी तरह बनाया गया है कि यदि किसी क्रेता से आपको यह टीसीएस एकत्र कर जमा करना है तो आपको 30 सितम्बर के बाद प्राप्त सारी राशि पर करवाना है बिना यह देखे कि इसकी बिक्री कब हुई है. यहाँ बिक्री की राशी का महत्त्व नहीं है बल्कि उस सम्बन्ध में प्राप्त राशि का महत्त्व है.

आइये इन उदाहरणों के बाद अब इस प्रावधान से जुड़े कुछ अन्य मुद्दों पर विचार कर लेते हैं जिससे आपको इन प्रावधानों का पालन करने में कोई परेशानी नहीं आएगी.

1. क्या यह सेवाओं की सप्लाई पर भी लागु है ?

नहीं. इस समय जो प्रावधान लाया गया है वह सिर्फ माल की बिक्री के सम्बन्ध में ही है और सेवाओं को इस प्रावधान से अभी दूर रखा गया है.

अत: यह प्रावधान सेवाओं की सप्लाई के सम्बन्ध में प्राप्त हुए प्रतिफल के भुगतान पर लागू नहीं है.

2. क्या कोरोना काल में इस दर में कोई छूट है ?

कोरोना प्रकोप के कारण 31 मार्च 2021 तक इस दर में 25 प्रतिशत की छूट है और यह प्रभावी दर 0.075% रहेगी. यह टीसीएस आपको भुगतान प्राप्त होने पर जमा कराना है और इसकी जमा कराने की अंतिम तारीख माह समाप्त होने के बाद 7 वां दिन होगी. यदि आपके खरीददार जो कि इस टीसीएस के दायरे में आता है के पास पेन नंबर/आधार नंबर नहीं है, जो कि शायद ही ऐसा कोई खरीददार हो आपके पास हो , तो कर की यह दर 1% प्रतिशत रहेगी और इस दर1% में कोरोना प्रभाव की कोई छूट नहीं है.

3. क्या इस समय यह यह प्रावधान लाना जरुरी था ?

बिलकुल नहीं. यह कोई प्रयोग करने का समय नहीं है क्यों कि इस समय अर्थ व्यवस्था की स्तिथी कोई बहुत अच्छी नहीं है जिसके कारण कार्यशील पूंजी की कमी है इसीलिये सरकार को विशेषज्ञों द्वारा यह सलाह दी गई थी कि इस समय इस प्रावधान को स्थगित किया जाए लेकिन फिर भी इसे लागू किया गया है. 50 लाख से ऊपर की खरीद करने वाले और फिर इस खरीद की राशि का भुगतान करने वाले लगभग सभी खरीददार जो इसके दायरे में आते हैं वे सभी यों भी जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं तो फिर इस प्रावधान का महत्त्व क्या है ? दूसरा यह सभी पॉइंट्स पर लगेगा जैसे निर्माता से स्टेट डीलर , स्टेट डीलर से डीलर और डीलर से सब – डीलर. कई सेक्टर्स ऐसे हैं जो इससे बुरी तरह से प्रभावित होंगे जैसे ऑटोमोबाइल्स. लेकिन अब हमारी सरकार ने लागु कर ही दिया है तो इसका पालन करना हम सबका कर्तव्य है.

4. क्या यह टीसीएस बिल में चार्ज करना चाहिए ?

ऐसा अनिवार्य हो इस प्रकार से इस प्रावधान में नहीं बताया गया है लेकिन समझदारी इसी में है कि इसे बिल में ही चार्ज कर लेना चाहिए ताकि आपके खरीददार को पता रहे कि वह और आप इस टीसीएस के दायरे में हैं और इससे फायदा यह होगा कि भुगतान के समय कोई विवाद नहीं हो. इससे आपके खरीददार को पता चल जाएगा कि आपकी बिक्री पिछले वर्ष में 10 करोड़ से अधिक थी. इस प्रावधान के दायरे में केवल बड़े निर्माता ही नहीं आ रहे हैं बल्कि डिस्ट्रीब्युटर्स डीलर्स और सब डीलर्स भी आयेंगे इसलिए वे तो कम से कम अपने बिल में इसे चार्ज कर ही लें. यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको भुगतान प्राप्त होने पर इस टीसीएस के लिए एक डेबिट नोट करना होगा.

आप यह याद रखें कि यह भुगतान आपको एकत्र तो अपने क्रेताओं से ही करना पडेगा.

5. यह टीसीएस किस राशी पर चार्ज करना है ? क्या यह राशि जीएसटी सहित होगी या जीएसटी को छोड़ते हुए टीसीएस चार्ज करना है ?

यह टीसीएस आपको जीएसटी सहित राशि पर एकत्र करना है अर्थात इस टीसीएस की गणना के लिए आपको जीएसटी को कम नहीं करना है. आइये इसे किस तरह से एकत्र करना है इसे एक उदाहरण के जरिये समझने का प्रयास करें :-

माल की कीमत 7500000.00
जोडिये :- जीएसटी 18 % 1350000.00
कुल रकम 8850000.00
टीसीएस 0.075 % 6638.00
कुल बिल की रकम 8856638.00

6. 50 लाख रूपये की प्राप्ती की सीमा इस वर्ष किस तरह से निकाली जायगी ?

देखिये यह प्रावधान किसी एक वितीय वर्ष में बिक्री के सम्बन्ध में 50 लाख रूपये के अधिक की प्राप्ती पर लागू है और प्रावधान लागु हो रहा है 1 अक्तूबर 2020 से इसलिए इस मुद्दे को समझना भी जरुरी है. देखिये 50 लाख रूपये की प्राप्ति की राशी की गणना तो की जायेगी 1 अप्रैल 2020 से ही और यदि 1 अक्टूवर 2020 से पहले ही 50 लाख रूपये की यह सीमा पूरी हो गई है तो 1 अक्तूबर 2020 या इसके बाद की हर प्राप्ती पर यह टीसीएस लागू होगा.

एक और केस देखिये कि एक क्रेता से आप 1 अक्तूबर से पूर्व 45 लाख रूपये एकत्र कर चुके हैं और 2 अक्तूबर को 10 लाख रूपये और प्राप्त करते हैं तो इस समय अर्थात 2 अक्तूबर को आपको केवल 5 लाख रूपये पर ही टीसीएस एकत्र करना होगा और इसके बाद हर प्राप्ति पर टीसीएस एकत्र करना होगा.

7.क्या माल के सम्बन्ध में प्राप्त एडवांस पर भी ये टीसीएस के प्रावधान लागु होंगे ?

ये प्रावधान बिक्री के सम्बन्ध में प्राप्त हुई राशि पर लागू है और अगर इससे सम्बन्धित कोई एडवांस 1 अक्तूबर या उसके बाद प्राप्त हुआ है तो उस पर भी टीसीएस के प्रावधान लागु होंगे.

लेकिन एक बात ध्यान रखें कि यदि एडवांस राशी आपको 1 अक्तूबर से पूर्व ही प्राप्त हो गई है और सप्लाई 1 अक्तूबर के बाद की गई है तो भी टीसीएस नहीं चार्ज करना है क्यों कि यह प्रावधान प्राप्ति पर ही आधारित है.

8.यदि बिक्री 1 अक्तूबर 2020 के पहले की है और भुगतान 1 अक्तूबर 2020 या उसके बाद आ रहा है तो इस स्तिथी में टीसीएस की स्तिथी क्या रहेगी ?

अभी आपको पहले ही बताया है कि यह प्रावधान भुगतान आधारित है और यदि भुगतान 1 अक्तूबर या उसके बाद प्राप्त हुआ है तो इसपर टीसीएस के प्रावधान लागू होंगे.

9.टीसीएस का भुगतान कब करना है ?

टीसीएस के भुगतान की जिम्मेदारी क्रेता से भुगतान प्राप्त होने पर ही होगी और जिस महीने में आपको भुगतान प्राप्त होता है उस महीने की समाप्ति के 7 वें दिन आपको इसे सरकार को जमा कराना है. उदाहरण के लिए आपको भुगतान अक्तूबर 2020 में प्राप्त होता है तो इसके टीसीएस का भुगतान आपको 7 नवम्बर 2020 तक करना होगा.

10. यदि पहले से टीसीएस जिन वस्तुओं पर चार्ज हो रहा है उनको इस प्रावधान में कैसे लिया जाएगा.

जिन वस्तुओं पर पहले से टीसीएस चार्ज हो रहा है वे उसी प्रावधान के तहत ही रहेंगी जिन पर अभी तक टीसीएस जमा हो रहा था उन वस्तुओं के सम्बन्ध में टीसीएस के ये नए प्रावधान लागू नहीं होंगे. जैसे तेंदू पत्ते , मानव उपभोग के लिए लिकर , स्क्रेप इत्यादि. याद रखें कि इन वस्तुओं पर पहले से जारी टीसीएस के प्रावधान जारी रहेंगे.

11. ऑटोमोबाइल सेक्टर पर 10 लाख रूपये के ऊपर के मोटर वाहन बेचने पर टीसीएस पहले से लागू है तब फिर इस सेक्टर पर किस तरह से यह नया प्रावधान लागू होगा ?

ऑटोमोबाइल्स पर 10 लाख से ऊपर की कीमत के वाहन पर ग्राहक को बेचने पर टीसीएस लागू है लेकिन यह निर्माता से डिस्ट्रीब्युटर, डीलर या सब डीलर तक लागू नहीं है इसलिए केवल इस कारण से कि 10 लाख रूपये से ऊपर का वाहन ग्राहक को बेचने पर यदि टीसीएस लागू है तो भी यह सेक्टर इस नए टीसीएस प्रावधान से मुक्त नहीं है और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी यह टीसीएस का प्रावधान लागु है.

12. इस टीसीएस से कोई और भी छूट उपलब्ध है ?

हाँ , यदि यह बिक्री के सम्बन्ध में यह राशि निम्नलिखित से प्राप्त हुई है तो ये टीसीएस के प्रावधान लागू नहीं होंगे :-

1. निर्यात के दौरान बेचे गए माल
2. यदि खरीददार केंद्र सरकार, राज्य सरकार , किसी दूसरे देश का दूतावास इत्यादि , स्थनीय निकाय जैसे – नगर पालिका इत्यादि , कोई व्यक्ति जो भारत में माल आयात कर रहा है या अन्य कोई अधिसूचित व्यक्ति (अभी तक कोई अधिसूचित नहीं है ).

याद रखने कि इन सभी की खरीदारी तो इस टीसीएस से मुक्त है लेकिन उनके द्वारा की गई बिक्री पर, यदि लागू होता है तो उन्हें टीसीएस क्रेता से एकत्र कर जमा करना है.

3. ऐसा माल जिस पर पहले से आयकर टीसीएस प्रावधान लागू है जैसे तेंदू पत्ते, मानव उपयोग के लिए लिकर , स्क्रेप इत्यादि. इस सम्बन्ध में आयकर प्रावधान में पहले से जारी टीसीएस प्रावधान देख लें.
4. भारत में आयात करने वाले व्यक्ति- इन्हें खरीददार की परिभाषा से बाहर रखा गया है.
5. सरकार यदि किसी को अधिसूचित करे जिसे खरीददार की परिभाषा से बाहर रखा जाना है. अभी तक एससी लोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है.

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8 Comments

  1. नीलम भंडारी says:

    यदि आपकी बिक्री बीते वर्ष में अर्थात 31 मार्च 2020 को जो वर्ष समाप्त हुआ है उसमें 10 करोड़ से अधिक थी या इस से पिछले किसी भी साल में 10 करोड़ हो।

  2. Suresh Panjwani says:

    आपके द्वारा अत्यंत ही उपयोगी जानकारी दी जाती है, इसके लिए साधुवाद.

  3. HAPPY SINGLA says:

    IF SALES TAKE EFFECT BEFORE 31/03/20 & THE CONSIDERATION REMAIN OUTSTADING AS ON 31.03.2020 & RECEIVED DURING CURRENT FIN. YR.THEN WHAT IS THE POSITION OF TCS?

    1. neelam says:

      In my opinion,if the payment is received in the next financial year then TCS will have to be deposited on the new rates(since the relaxation has been given till 31.03.2021)

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