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आयकर विभाग ने कैश लेन-देन पर कड़ी नजर रखने का निर्णय लिया है, और अपने केंद्रीय एक्शन प्लान 2024-25 में इसे प्रमुखता दी है। पिछले वर्ष 2023-24 में, विभाग ने 1,100 छापों में 2,500 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की, जिसमें 1,700 करोड़ रुपए कैश था। इस साल, आयकर विभाग ने 24.50 करोड़ रुपए की आउटस्टैंडिंग डिमांड को 43 करोड़ रुपए तक बढ़ते देखा है। इसे नियंत्रित करने के लिए, विभाग सितंबर 2024 से हर जिले में 5,000 बड़े मामलों की रिकवरी शुरू करेगा। कैश लेन-देन पर कड़ी नजर रखने के लिए, सरकार ने 2 लाख रुपए से अधिक के कैश लेन-देन की रिपोर्टिंग अनिवार्य की है, लेकिन इसका पालन पूरी तरह से नहीं हो रहा है। इसलिए, विभाग सितंबर से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा जहां कैश का उपयोग अधिक हो रहा है, जैसे होटल, विवाह स्थल, अस्पताल, और लक्जरी ब्रांड स्टोर्स। इसके परिणामस्वरूप, व्यापारियों को कैश लेन-देन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, और सरकारी नियमों में भी बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। वर्तमान स्थिति में, कैश लेन-देन को कम करके और बैंकिंग चैनल का उपयोग बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

आयकर विभाग चलाने वाला बोर्ड सीबीडीटी ने अपने सालाना सेंट्रल एक्शन प्लान २०२४-२५ में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इंगित किए हैं जो करदाता को कैश के उपयोग हेतु सावधानी बरतनी को कहते है:

कैश लेन-देन पर होगी आयकर विभाग की नजर - बैंकिंग चैनल से ही बड़े खर्च करें

  1. अर्थव्यवस्था में बढ़ता कैश का उपयोग इस बात से बढ़ रहा है कि आयकर विभाग द्वारा पिछले वर्ष २०२३-२४ में ११०० छापे मारें गए जिसमें २५०० करोड़ रुपए की प्रापर्टी जब्त की गई, इसमें १७०० करोड़ रुपए का कैश था.
  2. आयकर की आउटस्टैंडिंग डिमांड जो कि २४.५० करोड़ रुपए ०१/०४/२३ को खड़ा था, वो अब बढ़कर ०१/०४/२४ को ४३ करोड़ रुपए हो गए हैं.
  3. इस बढ़ती डिमांड को कम करने के लिए आयकर आयुक्त के अंतर्गत हर जिले में टीम गठित की जावेगी जो सितंबर २४ से ५००० बड़े केस पर रिकवरी शुरू करेगी.
  4. आयकर का बेस इस साल १०% बढ़ाने का टारगेट दिया गया है. पिछले वर्ष २३-२४ में ८ करोड़ लोगों ने विवरणी भरी थी, इसे ९ करोड़ तक बढ़ाने का टारगेट है.
  5. दो लाख रुपए से ऊपर के कैश लेन-देन पर सभी सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों को एसएफटी रिटर्न के माध्यम से जानकारी देने का नियम बनाया गया है लेकिन इसका पालन व्यापक स्तर पर नहीं हो रहा है जिससे कैश का उपयोग अर्थव्यवस्था में बढ़ता जा रहा है.
  6. कैश के उपयोग पर नकेल कसने के लिए जिन जगहों पर कैश का उपयोग सबसे अधिक हो रहा है वहां पर सितंबर २४ से टीम बनाकर जानकारी एकत्रित की जावेगी और बड़ी मात्रा के उपयोग पर एक्शन लिया जावेगा.
  7. जो जगह चिन्हित की गई है – होटल, मैरिज गार्डन एवं हाल, लक्जरी ब्रांड दुकानदार, आईवीएफ क्लीनिक, अस्पतालों, डिजाइनर कपड़ों के स्टोर्स एवं शोरूम और एनआरआई कोटा के सीट देने वाले मेडिकल कॉलेज, इत्यादि.

उपरोक्त तथ्यों से साफ है कि:

  1.  आने वाले महीनों में कैश के उपयोग पर विभाग की पैनी नजर रहेगी।
  2. होटल उद्योग, इवेंट मैनेजमेंट, शादी उद्योग, मंहगे अस्पताल में इलाज, ब्रांडेड आइटम की खरीद, प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, आदि पर कार्यवाही हो सकती है.
  3. रिकवरी के लिए करदाता पर जबरदस्ती का प्रैशर हो सकता है.
  4. आयकर बेस बढ़ाने के लिए उल जलूल अनुपालन बढ़ाए जा सकते हैं.

क्या यह उचित होगा कि इस तरह के एक्शन प्लान बनाए जावें, होना तो यह चाहिए:

  1. अर्थव्यवस्था में कैश का उपयोग दर्शाता है कि हमारे देश में इसके उपयोग को कम नहीं किया जा सकता और यह हमारी क्रय शक्ति का परिचायक है. सरकार को समझना होगा हमारी अर्थव्यवस्था यदि आज भी मजबूती से टिकी हुई है तो वो इसी अनरिकार्डेड समांतर कैश व्यवस्था के कारण है.
  2. जरुरत है कि कैश को समांतर व्यवस्था से निकालकर मुख्य व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए.
  3. कैश पर वार मतलब व्यापार और दुकानदारों को परेशान करना होगा. अनुपालन बढ़ाने से व्यापार करना मुश्किल होगा खासकर छोटा व्यापार मुश्किल में होता है। व्यापार में खर्च निकालने के लिए दुकानदार को बिक्री करनी होती है जिसके लिए उसे कैश में काम करना होता है.
  4. कैश पर नियंत्रण करने की बजाय करों के सरलीकरण पर फोकस होना चाहिए और अनुपालनों की कमी होनी चाहिए।
  5. कैश के लेन-देन को कठिन बनाने हेतु बड़े करेंसी नोट धीरे धीरे खत्म करने होंगे लेकिन कैश लेन-देन पर रोक-टोक न हों और कोई भी एक्शन व्यापार हित को ध्यान में रख कर हों।
  6. बढ़ती आयकर की एरियर्स डिमांड जो कि आज ४३ लाख करोड़ रुपए पर खड़ी है – साफ दर्शाती है कि टैक्स के उल जलूल नियमों के कारण सभी विवादित हो जाती है. साल दर साल आयकर डिमांड का बढ़ना आयकर निर्धारण प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह लगाता है और बताता है कि निर्धारण अधिकारियों द्वारा टैक्स वसूली के लिए ही निर्धारण किया जाता है और किसी भी प्रकार की व्यापारिक समझ नहीं दिखाई देती है.
  7. होना तो यह चाहिए कि टैक्स वसूली या रिकवरी की बजाय निर्धारण प्रक्रिया दुरस्त की जावें. अधिकारियों को उचित ट्रैनिंग देकर फील्ड में भेजें ताकि जमीनी स्तर पर काम हो और व्यापार को बढ़ावा मिलें.
  8. करदाता आज भी १.५० करोड़ लोग ही हैं, भले आयकर विवरणी ८ करोड़ लोग भरते हैं, ऐसे में मात्र फाइलें बढ़ रही है, करदाता नहीं। एचयूएफ, लेडीज, बच्चों और ट्रस्ट के नाम पर आय विभाजित कर सिर्फ फाइलें बढ़ रही है, टैक्स नहीं.
  9. होना तो यह चाहिए कि हर परिवार में कमाने वाले व्यक्ति को चिन्हित कर नियम हो कि सारी परिवारिक आय की विवरणी सिर्फ वही भरेगा। हमें फाइलें नहीं करदाता बढ़ाना होगा – नियमों का सरलीकरण जन हितैषी नियमों जैसे इंडेक्सेशन को हटाना या पार्टनर पर टीडीएस लगाने से नहीं होता, व्यवहारिक ज्ञान होना जरूरी है.

हम सभी देशहित में राजस्व बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं लेकिन साथ ही व्यापारी, दुकानदार और आम करदाता भी खुशी से योगदान दे । यह तभी हो सकता है जब सरकार और विभाग व्यापारिक लेन-देन को शक की नजर से न देखें बल्कि अर्थव्यवस्था में योगदान के रूप में देखें।

पैसा किसी भी रूप में मार्केट में आएगा तो वह अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा, जरुरत सिर्फ इस बात की है एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण हो जिससे देश और समाज हित की प्राथमिकता हो और पैसे के लेन-देन का सही चैनल में उपयोग हो। फिलहाल सभी करदाता कैश लेन-देन पर सतर्क रहें और बैंकिंग चैनल बड़े लेन-देन पर अपनाएं और साथ ही व्यापारी भी कोशिश करें कि कैश के लेन-देन को तरहीज न दें।

*सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर ९८२६१४४९६५*

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