Follow Us:

हाल ही में एनराक हाउसिंग एजेंसी की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि किफायती के बजाय लग्जरी घर आज मध्यम वर्ग की प्राथमिकता है। जहां किफायती घरों की मांग में कमी आ रही है तो दूसरी ओर लग्जरी घरों की मांग जो की १ करोड़ रुपए से लेकर १०० करोड़ रुपए तक के दायरे में आ रहें हैं – मांग बढ़ रही है।

मध्यम वर्ग खासकर जिनकी परिवारिक आय सालाना १५ लाख रुपए से लेकर १.५० करोड़ रुपए के मध्य आती है, लग्जरी घर उनकी जरूरत भी और स्टेंडर्ड भी बन गया है। ऐसे में भारी लोन लेना उनकी मजबूरी बन जाती है जिससे उन्हें वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

हम पायेंगे कि सरकार द्वारा विभिन्न रियायतें किफायती मकान जिनकी कीमत ४५ लाख रुपए तक है, उन्हें दी जाती है। ऐसे घर वो वर्ग लेता है जिनकी आय सालाना १५ लाख तक है और जो अब आयकर सीमा में नहीं आते हैं।

वहीं दूसरी ओर वह वर्ग जो कि १५ लाख रुपए से ज्यादा की कमाई करता है और जब लगभग १/३ हिस्सा अपनी आय का टैक्स के रूप में सरकार को देता है, उनके लिए न कोई सरकारी रियायतें न ही कोई टैक्स छूट उपलब्ध है।

नए टैक्स रिजीम में गृह ऋण पर न कोई ब्याज की छूट और न ही मूल धन की कोई कटौती उपलब्ध है। इसलिए यह मध्यम वर्ग अच्छी कमाई के बावजूद जीवन यापन के संघर्ष में लगा रहता है। जहां एक ओर गृह ऋण की किश्त चुकाने की जद्दोजहद वहीं दूसरी ओर मंहगी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जूझना। यही कारण है कि मध्यम वर्ग खुश नहीं हैं और सरकारी नीतियों की आलोचना करता है। जो ज्यादा कमा रहा है, उतना अधिक टैक्स दे रहा है और बिना किसी सरकारी मदद के।

क्या सरकार का दायित्व नहीं बनता कि ऐसा वर्ग जो की टैक्स देने में मुख्य भूमिका निभाता है, उन्हें रियायतें दी जावें ताकि करदाता बनने का लाभ मिलें और साथ ही टैक्स भरने का प्रोत्साहन मिलें। यदि रियायतें सिर्फ उस वर्ग को मिलती रहेगी जो कि टैक्स नहीं देता है, तो यह नाइंसाफी है।

सरकार को चाहिए की अपनी टैक्स नीति में आमूलचूल परिवर्तन कर ज्यादा टैक्स देने वालों को रियायतें और सुविधाएं उपलब्ध कराएं। कर संग्रह सही मायनों में तभी बढ़ेगा जब करदाता को प्रोत्साहन मिलेगा। समय की मांग है कि सरकार इन टैक्स संबंधित प्रस्तावों पर विचार करें:

1. घरों की कीमतों को कम करने के लिए स्टाम्प ड्यूटी को कम करते हुए पूरे देश में एक सी एवं युक्तिसंगत करनी होगी।

2. मकान खरीद बेच पर केपिटल गेन टैक्स को खत्म किया जाए।

3. अधिक आय पर लगने वाले सरचार्ज को हटाया जावे।

4. नए टैक्स रिजीम में भी गृह ऋण पर दिए जाने वाले ब्याज और मूल धन में छूट मिलें।

5. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में लगने वाले खर्च की अतिरिक्त छूट नए टैक्स रिजीम में मिलें।

उपरोक्त कदम उन करदाता को जो असली करदाता है और अपनी कमाई का एक तिहाई हिस्सा कर के रूप में चुकाते हैं – ज्यादा से ज्यादा कर चुकाने में उत्साह बढ़ाएगा, साथ ही जीवन यापन में सहुलियत देगा। सरकार का मकसद भी यही होना चाहिए की जो करदाता है – सुविधाएं और सहुलियत उनको भी उपलब्ध हो, न की सिर्फ बोझ।

*यदि नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन नहीं हुआ तो कानून और प्रावधानों में हम कितना भी परिवर्तन रुप दें- नई बोतल में पुरानी शराब ही कहलाएगा। समय की मांग है कि ज्वालामुखी फटने से पहले उसका समाधान हो।*

*सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर ९८२६१४४९६५*

Join Taxguru’s Network for Latest updates on Income Tax, GST, Company Law, Corporate Laws and other related subjects.

One Comment

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ads Free tax News and Updates
Search Post by Date
February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728