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गैर-पेंशनभोगी वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और उनके जीवनयापन की कठिनाइयाँ भी बढ़ती जा रही हैं। इनके लिए आवास का किराया, दैनिक खर्च और बचत पर निर्भरता आर्थिक बोझ बन चुकी है। सरकार द्वारा 12 लाख तक की आय पर कर छूट दी गई है, लेकिन इसका लाभ इन्हें नहीं मिल रहा। इसके विपरीत, यदि ये अपनी बचत में से कुछ बेचते हैं, तो उस पर कर देना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और दयनीय हो रही है। इनमें से अधिकतर न तो राजनेताओं तक अपनी बात पहुँचा सकते हैं, न ही प्रदर्शन कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इन वरिष्ठ नागरिकों की समस्या को समझे और उनके लिए कर राहत की व्यवस्था करे।

हम वरिष्ठों को तीन श्रेणी है –  

१) पहली श्रेणी में वो वरिष्ठ आते हैं जिन्हें अच्छी-खासी पेन्शन मिलती है 
२) दूसरी श्रेणी में वे वरिष्ठ हैं जिन्हें नाममात्र की पेन्शन मिलती है
                                      जबकि
3)  तीसरी श्रेणी में वे वरिष्ठ हैं जिन्हें पेन्शन नहीं मिलती। और इन तीसरी श्रेणी वालों की तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
 
हम वरिष्ठ लोग जब मिलते हैं तब विशेषकर दूसरी व तीसरी श्रेणी वालों  के ललाट पर, बात व्यवहार में चिन्ता स्पष्ट झलकती है। उसका मुख्य कारण है आज तक हर बार बजट में इन  श्रेणी वाले वरिष्ठों के प्रति सरकार का उपेक्षित व्यवहार।
 
इस बार बजट में भी सरकार ने बारह लाख आय पर टैक्स छूट की जो सीमा तय की है उसमें ये दूसरी व तीसरी श्रेणी वाले नहीं आते। इनकी यदि आय टोटल बारह लाख है तो उसमें जो अल्पावधि हो या दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ होगा तो वे कर मुक्त नहीं माने जायेंगे । जबकि इनको तो अपने बचत में से घर चलाने के लिये शेयर या म्युचुअल फंड वगैरह में से कुछ न् कुछ बेचना पड़ता  ही है और हर बार की तरह इस बार भी बजट अनुसार उस पर होने वाली आय पर टैक्स चुकाना पड़ेगा। इस तरह इन श्रेणी वालों को दोहरी मार से काफी नुकसान हो चुका है और ऐसे ही चलता रहा तो प्रभु जानें आगे क्या होगा।
 
दूसरी व तीसरी श्रेणी वालों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। इस श्रेणी में बहुतायत को रहने के लिये फ्लैट का भाड़ा चुकाने के अलावा जीविका चलाने के लिये बचत में से जुगाड़ करना पड़ता है। और जैसा आप सभी जानते ही हैं इसलिये महँगाई के बारे में  कुछ भी जताने की आवश्यकता नहीं है। इससे स्पष्ट है कि इन श्रेणी वाले वरिष्ठों की बचत में जो छीजत होती रहती है वह आत्मा को चुभती है, जिससे दिन-प्रतिदिन इनकी चिन्ता में इजाफा ही होता है
 
आवश्यकता इस बात की है कि सरकार इन दूसरी व तीसरी श्रेणी वालों का दर्द व समस्या को समझें। इन्हें भी सभी स्तोत्रों से प्राप्त बारह लाख  आय पर टैक्स छूट राहत प्रदान करे। 
 
ध्यान रखें ये दूसरी व तीसरी श्रेणी वाले सब तरह से असक्त हैं। इनकी पहुँच भी बड़े-बड़े राजनेताओं तक नहीं है। इसके अलावा अपनी माँगों के लिये ये सड़क पर भी नहीं उतर सकते क्योंकि इनमें न तो ताकत है और न ही  इनके पास साधन। इनमें से अधिकांश तो सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर दूसरों को परेशानी में डालने को उचित भी नहीं मानते क्योंकि जनता का तो कोई दोष है ही नहीं तो फिर जनता को परेशान क्यों किया जाय।
 
हम दूसरी व तीसरी श्रेणी वाले तो सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिये पत्र लिख सकते हैं। समाचार के लिये अखबार वालों को लिख भेजेंगे। लेकिन ध्यान रखें हम आर्थिक युग में रह रहे हैं अतः बहुत कम अखबार वाले  हम दूसरी व तीसरी श्रेणी वाले वरिष्ठों की आवाज को जगह देते हैं।
 
हम सभी का मानना है की  व्यवस्था से लड़ने की बजाय सुधार के लिये जितना प्रयत्नशील हो सकें, प्रयत्न करते रहें। सात वर्ष की उम्र से पिताजी ने व्यवहारिक पढ़ाई रोजाना बैंक ले जाकर शुरू करायी जो आज तक चालू है अर्थात आज भी अपने अनुभव वृद्धि करने की चेष्टा चल रही है। इसी सिद्धान्त को अपनाते हुवे,अपने दायित्व को समझ, अपने अनुभव के आधार पर अनेक आर्थिक मामलों में समय-समय पर सुझाव प्रेषित भी करता रहा हूँ।
 
आशा है हमारी बात प्रधानमन्त्री जी तक पहुँचेगी ताकि समय रहते समस्या का उचित समाधान हो जाय।

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