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जैसा आप सभी जानते हैं सरकार ने अंकीयकरण [डिजीटलाईजेशन] पर पूरा फोकस कर रखा है।  उसी का परिणाम है कि आजकल शहरी इलाकों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी  बैंकिंग लेनदेन काफी होने लग गये हैं जिसके फलस्वरूप बैंकिंग प्रणाली [सिस्टम] पर भी दबाब बढा ही है और उसके चलते जितना ज्यादा प्रणाली[सिस्टम] में सुधार होगा वह सभी के हित में रहेगा।

मैं इस रचना के माध्यम से एक महत्वपूर्ण छोटे प्रशासनिक प्रकार के सुधार मामले की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ  – जो निश्चित रूप से आम जनता को राहत प्रदान करेगा, अगर इसे लागू किया जाता है तो बैंकिंग क्षेत्र को भी निश्चितरूप से  लाभप्रद स्थिति में पहूँचा देगा।

आजकल अंकीयकरण [डिजीटलाईजेशन] के कारण हमारे वेतन, लाभांश, ब्याज आदि  सीधे हमारे बैंक खातों में जमा हो रहे हैं। इसी तरह, विभिन्न ईएमआई, स्कूल शुल्क, घर का किराया आदि भी हमारे बैंक खातों से हमारे स्थायी निर्देशों के अनुसार नामे [डेबिट] किए जाते हैं।और इस तरतीब से सरकार के अलावा खाताधारक हो या बैंक या भुगतानकर्ता  यानि सभी प्रसन्न तो हैं ही बल्कि पूर्णरूपेण संतुष्ट भी हैं।

हालाँकि अभी भी जब हम अपना बैंक विवरणी  प्राप्त करते हैं, तो हमें अपने खातों को मिलाने  में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिनमेंं दो मुख्य कारण निम्न है –

1. डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा भाषा का उपयोग

2. सॉफ्टवेयर सिस्टम में शब्द प्रतिबन्ध यानी पूर्ण कथन दिखाई नहीं देते हैं।

इसके अलावा  यह भी देखा गया है कि बैंक विभिन्न प्रकार के कथानकों का उपयोग करते हैं। एक स्थान पर, उदाहरण के लिए, टाटा टेलीसर्विसेज के लाभांश का श्रेय, वे एक विशेष कथन Div / Tata / 76767868768 का उपयोग करेंगे, लेकिन दूसरे महीने में वे स्वयं एक और कथन TataTel / NEFT / 687674676 का उपयोग करते हैं। हम अनुमान लगाते रहते हैं कि इस कथन का क्या अर्थ होगा और अगर हम समझ नहीं पाये तो हमें समझने के लिए बैंक से सम्पर्क करना आवश्यक हो जाता है अर्थात बैंक जा कर तहकीकात करना आवश्यक हो जाता है यानि –

1. यह क्रेडिट किस बारे में है !

2. किस कम्पनी से NEFT के रूप में यह लाभांश आया है या और कुछ !

उपरोक्त उल्लेखित उदाहरण से दो मुद्दे सामने आये हैं  वो  इस प्रकार हैं  : –

1. कथन में केवल टाटा का उल्लेख करने से भ्रम बढ़ता है क्योंकि कई कम्पनियाँ हैं जो टाटा शब्द से शुरू होती हैं।

2. बैंकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कथन का प्रारूप मानकीकृत / प्रमाणीकृत नहीं है।

सुझाव: –

1. कम्पनी के लिए एक मानकीकृत नाम या क्रेडिट का उपयोग किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए TISCO, TataTele, Tata Power आदि।

2. कथन का प्रारूप भी तय अनुसार यानि लेनदार नाम / लेन-देन का प्रकार / लेन-देन की प्रकृति / UTRN होना चाहिए। उदाहरण के लिए-

A] यदि टाटा पावर NEFT के रूप में लाभांश भेजा  है, तो कथन TataPower / NEFT / Div / 536637474 होना चाहिये ।

ख] यदि सूरज कुमार बिन्नाणी ने मुझे ५६५६ नम्बर का चेक जारी किया है जो मैंने अपने खाते में जमा किया है और मेरे बैंक द्वारा जमा किया जा रहा है, तो विवरण सूरज बिनानी / समाशोधन / चेक / ५६५६  होना चाहिये।

इन सभी कठिनाइयों को दूर करने के लिए मेरे विचार से रिज़र्व बैंक  को सभी मध्यस्थों की मदद से ज्यादा से ज्यादा काम आने वाले लेनदेन की एक संक्षिप्त सूची तैयार करनी चाहिये,जो सभी बैंकों द्वारा उपयोग किए जाने के लिए आवश्यक भी होनी चाहिए। यह विडम्बना है कि रिज़र्व बैंक ने इस विषय पर सभी बैंकों को सलाह दी थी, लेकिन जमीनी हकीकत हम सभी को अच्छी तरह से पता है, यानी इस पर अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है।

संक्षिप्त सूची एकरूपता, अनुशासन लाएगी और डेटा फीडर के साथ-साथ बैंक प्रबन्धन और ग्राहकों को यह समझने में मदद करेगी कि इसका क्या मतलब है। संक्षिप्त सूची तैयार होने के बाद इसका सन्दर्भ प्रत्येक बैंक की वेबसाइटों पर आसानी से उपलब्ध कराया जाना चाहिये और समय-समय पर अद्यतन [अपडेट ]भी किया जाना चाहिये।

जब तक हम बैंकिंग प्रणाली में इस प्रकार के अनुशासन का परिचय नहीं देते, हम सेवाओं में सुधार की उम्मीद नहीं कर सकते। यह कार्यान्वयन समय, ऊर्जा की बचत करेगा और बैंकों और इसके ग्राहकों के बीच सम्बन्ध को मधुरता प्रदान करने में अवश्य सहायक होगा।

इसके अलावा, मैं आगे सुझाव दूँगा कि रिजर्व बैंक को जनादेश के रूप में सभी बैंकों द्वारा इसके कार्यान्वयन पर निगरानी रखने के लिए उचित व्यवस्था भी करनी चाहिये।

उपरोक्त प्रक्रिया पर तत्काल निर्णय ले कर बैंकिंग लेन-देन से सम्बन्धित “संक्षिप्त सूची” को युद्ध स्तर पर तैयार किया जाना आवश्यक समझ बिना विलम्ब जारी कर देना चाहिये। एक बार सूची को व्यवस्था [सिस्टम ] में प्रवेश मिल जाता है, तभी इसके निहितार्थों का आँकलन सम्भव हो पायेगा।

इसके अलावा इस संक्षिप्त सूची में सब तरह के संशोधन की भी गुंजाइश रखनी चाहिये ताकि इसकी उपयोगिता सबको सन्तुष्ट रख सके।

आशा करता हूँ, आप सभी प्रबुद्ध पाठक स्वयं के हित में इस मामले को, सभी स्तरों पर व्यक्तिगत रूप से उठायेंगे साथ ही साथ अपने से सम्बन्धित सभी मंचों पर रखेंगे, ताकि उपयुक्त विवरण सूची बिना किसी देरी के रिज़र्व बैंक जारी कर, हम सभीको राहत प्रदान कर दे।

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