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बहुत देर कर दी हुजूर, आते आते – लघु उद्योग के लिए उपाय

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सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का तो यही कहना है कि जब पूरे देश भर में लाखों लघु उद्योग बंद होने की कगार पर है तब सरकार द्वारा उपाय करना नाकाफी है और बहुत देर हो चुकी है.

 प्रतिष्ठित दैनिक अखबार ग्रुप द हिन्दू द्वारा कराए गए सर्वे में यह आश्चर्यजनक तथ्य हमारे सामने है जो लघु उद्योगों की विकट स्थिति दर्शा रहें हैं और सरकार को चेतावनी दे रहे हैं.

 लघु उद्योगों के बंद होने के जो प्रमुख कारण इस सर्वे में सामने आए, वे इस प्रकार है:

 1. कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि और उपलब्धता में कमी

 2.  बढ़ती लेबर कास्ट एवं मजदूरों की उपलब्धता में कमी

 3. सस्ते कुशल कारीगरों की उपलब्धता न होना

 4. नौकरशाही द्वारा व्यापारी को तंग किया जाना एवं सरकार द्वारा उद्योगों की न सुनना

5. पेमेंट देर से मिलना

6.नियमित रूप से और सही समय पर सरकारी सहायता उपलब्ध न होना उपरोक्त समस्या एवं कारण जमीनी स्तर पर हाल में कराए गए सर्वे के अनुसार है, लेकिन २१ मार्च को हुई एसोचेम की एक मीटिंग में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री स्वेन द्वारा दिए गए व्यक्तव्य पर गौर करें तो आप पाएंगे कि सरकार के अनुसार सूक्ष्म एवं लघु उद्योग पनप रहे हैं, बढ़ रहें हैं और रोजगार के बढ़े साधन बन रहें हैं. उन्होंने सरकार की योजना कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि एमएसएमई देश में आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से बढ़ रहा है.

 एसोचेम एक बड़ा उद्योगिक चैम्बर है और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से वह कितना सरोकार रखता है, इस बारे में कुछ न कहना ही बेहतर है. यदि हम छोटे उद्योगों के चेम्बर्स से बात करें या जिला स्तरीय चेम्बर्स से बात करें तो असलीयत हमारे सामने होगी.

 एमएसएमई मंत्रालय के सचिव द्वारा जो आंकड़े रखे गए और बातें कही गई सिर्फ और सिर्फ दर्शाती है कि नौकरशाह को असली हालात और जमीनी स्तर की समस्यायों से कोई वास्ता नहीं होता. वास्ता सिर्फ किताबी रिकॉर्ड से होता है और सरकारी चापलूसी करने से. साथ ही बड़े बड़े उद्योगिक चैम्बर सिर्फ अपना मतलब पाटने के लिए लघु उद्योग की बात करते हैं.

 एसोचैम की इस मीटिंग में मंत्रालय सचिव द्वारा कुछ प्रमुख टिप्पणी की गई, वे इस प्रकार है:

 1.  एमएसएमई क्षेत्र देश में रोजगार और व्यापारिक योग्यता पैदा करने में आने वाले समय में महत्वपूर्ण योगदान देगा.

 2. नेशनल सेम्पल सर्वे जो वर्ष २०१५-१६ में किया गया था, उसके अनुसार ११ करोड़ लोगों को रोजगार दिया गया है.

 3. सरकार का ध्यान एमएसएमई को ऋण सुविधा, सस्ती ब्याज दर, प्रमोटर पूंजी, तकनीक की उपलब्धता, पर्यावरण संरक्षण, खरीदी की सुविधा, देशी एवं विदेशी बाजार का मार्केट और मजबूत सूचना तंत्र पर होगा.

4. बजट २३ में कुछ प्रावधान किए गए जैसे आयकर की धारा ४३बी के अंतर्गत खर्च की छूट तभी मिलेगी जब लघु उद्योगों को समय पर पेमेंट दिया गया हो, इसी प्रकार कांट्रेक्ट पूरा न होने की स्थिति में कोविड काल में लिए डिपाजिट का ९५% सरकारी विभाग द्वारा लौटाने की पेशकश और साथ ही क्रेडिट गारंटी के तहत अतिरिक्त ९००० करोड़ रुपए की राशि जिससे लगभग २ लाख करोड़ के अतिरिक्त ऋण की संभावना बढ़ने जैसे कदम है.

 एमएसएमई मंत्रालय सचिव द्वारा पुराने आंकड़े पेश करते हुए सरकारी योजना और प्रावधानों की जानकारी तो दी गई लेकिन आज के जमीनी स्तर हालात को न पेश कर पाए और न ही समझ पाए:

 1.  सरकार द्वारा लघु उद्योगों की व्याख्या बदलने से ५ करोड़ रुपए तक बिक्री करने वाला सूक्ष्म उद्योग में आता है और यही सबसे ज्यादा परेशानी में हैं.

 2. छोटे उद्योग की बिक्री ५० करोड़ रुपए तक होती है और मध्यम उद्योग की २५० करोड़ रुपए की बिक्री होती है.

 3. साफ है व्याख्या बदलने से सरकार छोटे और मध्यम उद्योग का आंकड़ा देकर वाहवाही लूट रही है और क्रेडिट गारंटी के तहत ऋण भी इसी तरह बड़े व्यापारी उपयोग कर रहे हैं, लेकिन सूक्ष्म उद्योग बंद होते जा रहे हैं और इसका असर अब लघु उद्योग पर भी पड़ने लगा है.

 4. सरकार ने योजनाएं तो बहुत बनाई लेकिन सही मायनों में यदि कौशल विकास, ऋण की आसान और सस्ती उपलब्धता, पेमेंट सिस्टम, तकनीक उपलब्धता पर काम किया होता तो यह समस्या न आती. मगर सरकार सिर्फ किताबी आंकड़ों और व्याख्या बदलने में लगी रही.

सरकार की सोच अच्छी है और प्रावधान भी अच्छे हैं लेकिन सही समय पर न होने से आज देश भर के लाखों सूक्ष्म उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं और ऐसे में नए प्रावधानों की दुहाई देना- कह सकते हैं – बड़ी देर कर दी, हुजूर आते आते!

 *सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर ९८२६१४४९६५*

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