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कैसा होगा दोहरे नियंत्रण की 50 : 50 सहमती के तहत जी.एस.टी.

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सी.ए. सुधीर हालाखंडी

जी.एस.टी. की जो पिछली कुछ बैठकें हुई थी उनमें से अंतिम तीन मीटिंग्स में जो मुद्दा सबसे अधिक चर्चा का विषय बना था वह था करदाताओं के ऊपर “दोहरे नियंत्रण” अर्थात ड्यूल कण्ट्रोल का.

अभी जो 16 जनवरी 2017 को जी.एस.टी. कौंसिल की अभी तक की  अंतिम मीटिंग हुई थी उसमे इस समस्या का समाधान ढूंढ लेने का दावा किया जा रहा है उसके अनुसार 150 लाख रूपये तक  की बिक्री तक के डीलर्स का नियंत्रण राज्यों और केंद्र के बीच 90 प्रतिशत एवं 10 प्रतिशत के अनुपात में बांटा जाएगा अर्थात 90 प्रतिशत डीलर्स पर राज्यों का नियंत्रण रहेगा और शेष 10 प्रतिशत डीलर्स पर केंद्र का नियंत्रण रहेगा. इस नियंत्रण का अर्थ यहाँ उनके “कर निर्धारण” अर्थात असेसमेंट से है .

150 लाख रुपये की बिक्री से अधिक के डीलर्स के नियंत्रण को राज्य और केंद्र के बीच सहमती के तहत  50 : 50 के अनुपात में बांटा जाएगा अर्थात कुल डीलर्स के 50 प्रतिशत पर राज्य नियंत्रण रखेंगे और शेष 50 प्रतिशत पर केंद्र नियंत्रण रखेगा.

सर्विस टैक्स डीलर्स और अंतरप्रांतीय बिक्री करने वाले डीलर्स के सम्बन्ध में भी यह फैसला लागू होगा यह अभी तक जो बयान आ रहें है उनमे स्पष्ट नहीं किया गया है और यहाँ ध्यान रखे कि सर्विस टैक्स डीलर्स  के लिए 150 लाख रूपये का टर्नओवर बहुत बड़ी रकम है और ऐसे 90 प्रतिशत डीलर्स का नियंत्रण केंद्र राज्यों के पास छोड़ दे यह शायद संभव नहीं लगता है .

यहाँ नियंत्रण रखने का अर्थ यह है कि इन डीलर्स का कर निर्धारण ऊपर बताये गये अनुपात के अनुसार राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा और इसी मुद्दे पर राज्य और केंद्र एक मत नहीं हो पा रहे थे इसीलिये जी.एस.टी. कौंसिल की पिछली तीन मीटिंग बिना किसी नतीजे के समाप्त हो रही थी .

यहाँ यह ध्यान रखें कि जब सभी रिटर्न जी.एस.टी.एन. नामक एक ही नेटवर्क पर भरे जायेंगे और चूँकि इस समय भी लगभग अधिकांश राज्यों में वेट के भी सभी “कर निर्धारण” ऑनलाइन ही होते है तब फिर एक सोचने वाली बात यह है कि यह दोहरे नियंत्रण का प्रश्न इतना बड़ा कैसे हो गया या कहीं ऐसा तो नहीं है कि एक अप्रैल 2017 से जी.एस.टी. से कुछ माह स्थगित करने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल किया गया है क्यों कि यदि इसी तरह का 50 : 50 जितना आसान समाधान ही किया जाना था तो यह पहले भी हो सकता था . नोटबंदी के अर्थव्यवस्था पर तत्कालीन नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए 1 अप्रैल 2017 जी.एस.टी. लागू करने की कोई आदर्श तिथी भी नहीं लग रही है .

अब इस 50:50 के तहत कौनसा डीलर का कर निर्धारण राज्य करेगा इसका फैसला भी किसी भी फार्मूले के तहत होगा जिस पर राज्य एवं केंद्र सहमत होंगे लेकिन ऐसा नहीं लगता इस तरह का फैसला व्यापार और उध्योग के लिए प्रक्रियाओं में  कोई सरलीकरण लाएगा  और यहाँ विशेष बात यह है कि  जी.एस.टी. पर केंद्र और राज्य ही आपस में ही प्रारम्भ से ही विवाद रहा है और जी.एस.टी. स्वयम ही केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों की एक खीचतान का मुद्दा रहा है  और इस कर प्रणाली को लागू करने में  व्यापार और उध्योग की राय को कोई अधिक महत्त्व नहीं दिया गया है . दोहरे नियंत्रण का मामला भी इसी तरह से केंद्र और राज्यों की अपने –अपने अधिकार सुरक्षित करने की लड़ाई का ही एक हिस्सा है  इसीलिये इस तरह के 50:50 तरह के प्रक्रियाओं को और भी उलझाने वाले  फैसले लेने में हमारे कानून निर्माताओं को कोई दुविधा अथवा हिचक नहीं हुई है .

आखिर यह दोहरे नियंत्रण का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण कैसे हुआ इसके पीछे कारण यह है कि राज्यों के पास कुल मिला कर अप्रत्यक्ष कर को देखने के लिए लगभग 265000 अधिकारी एवं कर्मचारी है एवं केंद्र के पास भी इसी काम के लिए कुल 85000 अधिकारी एवं कर्मचारी है इसलिए काम का बँटवारा भी जरुरी था, ऐसा भी कहा जा रहा है  और इसके साथ ही राज्यों एवं केंद्र के अधिकारों की बात भी इस मुद्दे से जुडा था .

लेकिन यदि  व्यापार और उध्योग के हितों की और देखना हो और जी.एस.टी. को सरलीकरण की और ले जाना है तो राज्य एवं केंद्र के अप्रयक्ष करों के सभी स्टाफ को मिला कर एक “संघीय स्टाफ कैडर”   बनाया जा सकता है जिससे कि व्यवहारिक रूप से भी दोहरे नियंत्रण की समस्या हल हो सकती है और 50:50 जैसे तरीके का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता .

(CA SUDHIR HALAKHANDI, Laxmi Market, BEAWAR-305 901 (Raj), Rajasthan, Cell: – 98280 67256, [email protected])

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6 Comments
  1. अपने कर्मचारियों की लगातार कमियाँ ढूँढने वाली केन्द्र की सरकार आज ट्रेड की भलाई छोड़कर राज्यों की 50:50 कंट्रोल की गैर वाजिब डिमांड के आगे घुटने टेकने पर विवश नजर आ रही है.

    यह सरकार केन्द्र को कमजोर करने के लिये जानी जाएगी और केन्द्र की शक्तियों का बुरा हाल होना तय है. जी एस टी अपने मौजूदा स्वरूप में संघीय ढाँचा के ध्वस्त होने का कारण बन सकती है.

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