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जीएसटी 2.0: नई दरें, नई उम्मीदें एवं व्यापार को संजीवनी   -व्यापारियों की पशोपेश एवं चुनोतियाँ – एक विश्लेषण 

A. INTRODUCTION:

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीजी ने गत 15 अगस्त 2025 को दिल्ली के लाल किले से भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर  अनेको घोषणाएं की लेकिन देश के आर्थिक दृष्टिकोण की नज़र से सबसे महत्वपूर्ण घोषणा जीएसटी मे बड़े बदलाव कर इस कानून को और अधिक व्यावहारिक एवं उपयोगी बनाना  प्रधानमंत्रीजी ने जीएसटी सुधारों को दिवाली का तोहफा बताया, जो करदाताओं और व्यवसायों के लिए अनुपालन को सरल बनाएगा और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें घटाएगा। लगभग पंद्रह दिनों के बाद 56वी जीएसटी परिषद् की बैठक मे जो की 3 सितम्बर को दिल्ली मे हुई कई ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए देश के सामने जीएसटी दरों  का एक नया प्रारूप मे पेश किया। जिससे GST को आम आदमी और व्यापारियों दोनों के लिए सरल और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है।

B. CHANGES PROPOSED:

इस मीटिंग मे लिए गए कुछ प्रमुख निर्णय इस प्रकार है :

  • चारकी जगह दो स्लैब: अब 5% और 18% केवल दो टैक्स स्लैब होंगे। पुरानी 12% और 28% दरें समाप्त कर दी गईं हैं, जिससे टैक्स स्ट्रक्चर काफी आसान हो जाएगा।
  • सिनगुड्स के लिए अलग स्लैब: लग्ज़री व हानिकारक वस्तुएं—जैसे सिगरेट, पान मसाला, कोल्ड ड्रिंक्स, कैफीनयुक्त पेय, 350 सीसी से ज्यादा दुपहिया वाहन, हेलीकॉप्टर, याच आदि—पर 40% का विशेष स्लैब लागू किया गया है।
  • रोजमर्राकी वस्तुएं और सेवाएं सस्ती:
    • शून्यटैक्स रेट (0% GST): दूध, छेना-पनीर, घी से चुपड़ी रोटी, सभी भारतीय ब्रेड, मैप्स, चार्ट्स, ग्लोब, पेंसिल, इरेज़र, शार्पनर, एक्सरसाइज बुक्स आदि को शून्य टैक्स के दायरे में लाया गया है।
    • 5% GST रेट: पाश्चुराइज्डदूध, इंस्टैंट नूडल्स, पास्ता, चॉकलेट, घी, बटर, प्रिजर्व्ड मीट, बच्चों के स्कूल बैग, शेविंग क्रीम, टूथ पेस्ट, टूथ ब्रश, फेस पाउडर, हेयर आयल , सेविंग थ्रेड,थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर,बर्तन आदि जैसी आम चीजें भी अब केवल 5% टैक्स में उपलब्ध होंगी।
    • 18% GST रेट: पहलेजिन वस्तुओं पर 28% या 18% GST था, उन पर अब एकरूपता करते हुए 18% रेट कर दिया गया है, जैसे कि 32 इंच से बड़े टीवी, एयर कंडीशनर, डिशवॉशिंग मशीन, छोटी कारें और मोटरसाइकिल आदि ।
    • जीवनव स्वास्थ्य बीमा पर राहत: सभी व्यक्तिगत लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम्स पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा।
    • कई  दवाओंपर टैक्स कम: आवश्यक दवाइयों पर टैक्स कम किया गया है जिससे इलाज सस्ता होगा।
    • सीमेंटपर टैक्स 18%: घर निर्माण संबंधित सीमेंट पर टैक्स 28% से घटाकर 18% किया गया; घर बनाना तथा खरीदना सस्ता होगा।
    • कृषिमशीनरी पर 5% टैक्स: ट्रैक्टर, थ्रेशिंग, मृदा तैयारी एवं कम्पोस्ट मशीनें और अन्य कृषि मशीनरी पर टैक्स 12% से 5% किया गया है।
  • छोटेव्यापारियों को फायदा: कंपोजिशन स्कीम के तहत छोटे कारोबारियों को अनुपालन सुविधा दी गई है और ई-कॉमर्स रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान होगी।
  • रीफंडप्रणाली में तेजी: निर्यातकों और इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर ( Inverted Duty structure)  वाले कारोबारियों को, जल्द प्रोविजनल रिफंड उपलब्ध कराया जाएगा।
  • छोटेएक्सपोर्ट पर भी बेझिझक फायदा: छोटी वैल्यू के एक्सपोर्ट पर अब कोई रीफंड सीमा नहीं होगी, जिससे छोटे व्यापारी भी निर्यात कर सकेंगे।
  • GST अपीलेटट्रिब्यूनल प्रभावी: जीएसटी ट्रिब्यूनल का रास्ता भी सरकार ने साफ़ कर दिया है शीघ्र ही GST Appellate Tribunal (GSTAT) शुरू होगा , जिसमें केस सुनवाई दिसंबर 2025 से शुरू होगी। ज्ञात रहे की सरकार ने ट्रिब्यूनल मेंबर्स का चयन व नियुक्ति कुछ दिन पहले ही कर दी थी।

इसके अलावा सरकार ने कई अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं में फेरबदल कर सामंजस्य बिठाने की कोशिश की है।  जैसे की  रेडीमेड गारमेंट्स पर भी जीएसटी मे रियायत दी गई है जो की पहले 1000 रुपये से अधिक के सामान पर 12% थी अब इस सीमा को बढाकर 2500 रुपये कर दी गई है जिस पर कर दरें अब 5% होगी तथा 2500 से ऊपर की कीमत वाले गारमेंट्स पर नयी कर दर 18% राखी गई है। इसी प्रकार का बदलाव फुटवियर मे भी किया गया है।  साथ ही कोयला पे कर दर को 5% से बढाकर 18% कर दिया गया है। कई सेवाओं पर भी कर दरों को बढ़ाया गया है तथा जहाँ कर दरें कम की गई है वहां ITC को खत्म कर दिया गया है। जैसी की होटल रूम रेंट पर पहले 7500  रुपये या उससे निचे के प्रीतिदिन किराये पर कर दर 18% विथ इनपुट हुआ करती थी लेकिन अब इससे 5% बिना इनपुट के कर दिया गया है । अतः जिन सेवाओं पर सरकार ने इनपुट को ख़त्म किया है उनकी कीमतों में वृद्धि की आशंका को  नकारा  नहीं जा सकता है।

इन घोषणाओं की एक प्रमुख बात यह रही की सरकार ने आम जनता से लेकर, विद्यार्थी, किसान, उपभोगता, व्यापारी, मैन्युफैक्चरर  सभी का ध्यान रखते हुए यह कदम उठाये है जिससे की कर दरों में कमी का लाभ ऊपर से निचे साफ़ तौर पर दिखे और वस्तुएं सस्ती हो जाये। इन फैसलों के लागू होने से भारतीय टैक्स प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे।आम लोगों को जहां चीजें सस्ती मिलेंगी, वहीं व्यापारियों और किसानों के लिए अनुपालन और कारोबारी माहौल ज्यादा अनुकूल एवं पारदर्शी होगा।

C. REASONS FOR PROPOSED CHANGES & MEETING OF REVENUE DEFICIT:

जबसे प्रधानमत्री जी ने जीएसटी में सुधारों की 15 अगस्त को घोषणा की है तबसे ही सभी वर्गों के लोगों में यह कयास लगाया जा रहा था की अमेरिका के टैरिफ युद्ध द्वारा होने वाले आर्थिक नुकसान से निपटने  हेतु सरकार ने भारतीय उपभोगताओं के हाथों में अधिक पैसा रहे इसलिए जीएसटी की दरों में रियायत देने का निर्णय लिया है। हालाँ की सरकार आधिकारिक तौर पर कहती रही है  है कि जीएसटी दर-कटौती अमेरिकी टैरिफ युद्ध से “सीधे प्रेरित” नहीं है, लेकिन अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह टैरिफ से होने वाले संभावित झटके को कम करने और घरेलू खपत बढ़ाने के लिए ही समयबद्ध कदम है। कर दरों में संसोधन के पीछे एक प्रमुख कारण विसंगतियों को दूर कर एक सरल कर प्रणाली को स्थापित करना भी है।  मल्टीप्ल रेट स्ट्रक्चर के कारण कई जगह दरों को लेकर भ्रम की स्थिति थी और मुकदमेबाजी बढ़ रही थी। अब नए ढांचे के अनुसार सरकार ने दरों में काफी स्पष्टता ला दी है।

अब पाठकों के दिमाग में यह सवाल जरूर आ रहा होगा की अगर सरकार कर दरों में इतनी रियायत दे रही है  तो  इससे होने वाले राजस्व घाटे से कैसे निपटेगी ? क्या कोई नया अतिरिक्त कर लगेगा या किसी  और तरीके से सरकार इस घाटे से उबरेगी ?

देखिये केंद्र सरकार जब भी करों में कोई बड़ा बदलाव करती है  तो उससे होने वाले लाभ-हानि की गणना करने के बाद ही कदम उठाती। सरकार ने राजस्व तटस्थता के लिए सिन गुड्स पर 40% कर दरें कर दी है। उपभोग वृद्धि से राजस्व पूर्ति एवं कम कीमतों से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि की उम्मीद है। मोटर वाहनों पर लगने वाले कंपेंसेशन सेस को समाप्त कर दिया गया। अब इसके बजाय 40% GST लगेगा, जिसमें से 20% केंद्र को और 20% राज्यों को मिलेगा । कंपेंसेशन सेस की समाप्ति से राज्यों को अधिक हिस्सा मिलेगा ।  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी ने GST परिषद की बैठक में स्पष्ट आश्वासन दिया राज्यों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा । लेखक का मानना है की शुरुआती छह महीनों में GST संग्रह पर असर पड़ सकता है। लेकिन अगले वित्तीय वर्ष से सकारात्मक परिणाम दिखने की उम्मीद है।

D. CHALLENGES BEFORE THE BUSINESS HOUSES:

अब नयी कर दरें तो दिनाँक 22 सितम्बर 2025 से लागू हो जाएगी ( पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, जर्दा जैसे चबाने वाले तंबाकू उत्पाद, कच्चा तंबाकू और बीड़ी को छोड़कर) लेकिन व्यापारी वर्ग पशोपेश मे है की इस दरमियान माल की खरीदारी की जाये या नहीं। उनके सामने कई प्रश्न खड़े हो जाते है जैसे की –

1.क्या ज्यादा कर दर से खरीदे गए माल (मान लीजिये 28%) का पूरा इनपुट उनको मिलेगा या सिर्फ उतना इनपुट ही मिलेगा जितना आउटपुट देय ( मान लीजिये 18%) है?

लेखक के विचार : जो माल पुरानी दरों मे ख़रीदा गया है ( मान लीजिये 28% ) उसका इनपुट धारा 49(4) के तहत व्यापारी इस्तेमाल कर पाएंगे भले ही वह माल अब कम दर ( मान लीजिये 18%) मे बिके।  अतः व्यापारी को घबराने की कोई जरुरत नहीं है। ऐसी स्तिथि में उनका कोई इनपुट का नुक्सान नहीं होने वाला है।

2. जिन वस्तुओं पर कर दर 5%, 12%, 18% या 28% से 0% हो गई है उन वस्तुओं पर अब कोई कर नहीं लगेगा। लेकिन जो पुरानी खरीद पर इनपुट बचा हुआ पड़ा है उसका क्या होगा ? 

लेखक के विचार : जहाँ तक माल बेचने के कर दरों की बात है वहां तो दिनाँक 22/09/2025 से टैक्स दर 0% ही लगेगी।  लेकिन उस माल का खरीद का जो इनपुट बचा हुआ है वो व्यापारी को धारा 17 एवं नियम 42 को ध्यान मे रखते हुए रिवर्स करना पड़ेगा । इसका मतलब यह हुआ की व्यापारी को इस इनपुट टैक्स का नुक्सान होने वाला है।

3. क्या 21/09/2025 तक के स्टॉक की  कोई डिटेल्स या ब्यौरा कर विभाग को जीएसटी पोर्टल के माध्यम से देना पड़ेगा ? 

लेखक के विचार : अभी तक सरकार ने ऐसे किसी नियम की घोषणा नहीं की है लेकिन लेखक के हिसाब से व्यापारी को अपने स्टॉक का पूर्ण ब्यौरा तैयार  रखना चाहिए क्यों की जब कभी भी कर विभाग उनके खातों की जांच करेगा (ऑडिट या असेसमेंट या अन्य किसी कारण से) उस समय व्यापारी को पूर्ण रूप से स्टॉक का ब्यौरा देना पड़ सकता है।

4. जो माल पहले भेज (dispacth) दिया गया है या पहले एडवांस पेमेंट ले लिया गया है लेकिन उसका इनवॉइस 22/09/2025 को या उसके बाद बनाया गया है तो ऐसी स्थिति मे क्या नयी कर दर लगाई जाएगी या पुरानी दर लगेगी ?

लेखक के विचार : यहाँ व्यपारी को जीएसटी कानून की धारा 14 को अपने कर सलाहकार से सही रूप मे समझना पड़ेगा क्यों की ऐसी स्तिथि मे जो नियम  धारा 14 मे बताये गए है उनकी अनुपालना करनी पड़ेगी।  धारा 14, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 (CGST Act, 2017) की वह धारा है जो वस्तुओं या सेवाओं की दर में बदलाव के समय आपूर्ति के समय (Time of Supply) का निर्धारण करती है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कर की नई दर कब लागू होगी जब कर दर में बदलाव हो । व्यापारी को यह ध्यान रखना है की तीन “ट्रिगर” तिथियों   मे से कोई भी दो तिथियाँ  पुरानी दरों के समय मे पड़ती है तो पुरानी दरे ही लगेगी। अगर दो तिथियां नयी दरों के आने के बाद पड़ती है तो नयी दरें लगेगी।

मालकी आपूर्ति (Supply)

भुगतान  (Payment receive) 

इनवॉइस (Invoice)

5. क्या जिन वस्तुओं पर कर दरे कम हुई है उनके दाम व्यापारी को कम करके बेचने पड़ेंगे या पहले वाले दाम पर ही बेचेंगे ?

लेखक के विचार : सरकार की इन कर दरों को कम करने के पीछे की मंशा की बात करे तो यह स्पष्ट है की सरकार चाहती है की उपभोगताओं के हाथ में कम कर दरों का लाभ पहुंचे और वस्तुओं की कीमत  कम हो जाये जिससे की लोगों की क्रय शक्ति बढे और उपभोग क्षमता बढे।  ऐसी स्थिति मे व्यापारियों को एवं मैन्युफैक्चरर को वस्तुओं के दाम कम करने ही पड़ेंगे।  नहीं तो कर विभाग की करवाई झेलनी पड़ेगी और anti -profiteering के आक्षेप भी लग सकते है।

6. क्या मैन्युफैक्चरर को वस्तुओं की MRP बदलनी  पड़ेगी ?

लेखक के विचार : जी हां, MRP अपडेट करनी होगी ।

यदि किसी प्रोडक्ट पर टैक्स रेट बदलता है और उसकी डीलर/कंज्यूमर को अंतिम कीमत (MRP) प्रभावित होती है, तो लेखक के हिसाब से Legal Metrology Act के तहत निर्माता, पैकर्स और इम्पोर्टर को नई MRP के स्टीकर लगाने या पैकेजिंग बदलने की बाध्यता है।

7. क्या कंपनसेशन सेस (Compensation Cess) हटने के बाद उसका बचा हुआ इनपुट  क्रेडिट वापिस मिलेगा ?

लेखक के विचार : सरकार की तरफ से इस पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं दी गई है। लेकिन ऐसा सुनने मे आ रहा है की सरकार इस सेस को वापिस देने के मूड मे नहीं है। लेखक का मानना है की इस Compensation Cess का इनपुट व्यापारी को वापिस मिलना चाहिए। इसके पीछे एक तर्क  यह भी है की जहाँ वस्तुओं पर कर पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया है  अर्थात  0% कर दिया गया है वहां तो सरकार इनपुट रिवर्सल की बात कर रही है लेकिन जहाँ पे Compensation Cess को समाप्त करके जीएसटी दरों में वृद्धि की गई है वहां पर सरकार सेस का पैसा लौटाने के पक्ष मे नहीं है। लेखक को विश्वास है की सरकार इसके लिए जरूर कोई न कोई नियम लाएगी। अन्यथा automobile sector, aerated/carbonated drinks एवं Coal के स्टॉक पर या तो भरी नुक्सान लगेगा या मूल्यों मे वृद्धि हो जाएगी।

E. HOW TO PREPARE FOR NEW RATES:

अब आइये यह जानने की कोशिश करते है की नई कर दरों के लागू होने पर  व्यापारियों को किस तरह की तैयारी  करनी है और  किन-किन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना पड़ेगा –

व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को 22 सितंबर 2025 से लागू हो रहे नए जीएसटी (GST) रेट्स को लागू करते समय कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नीचे कुछ प्रमुख बिंदु दिए जा रहे हैं, जिनसे बड़े और छोटे व्यवसाय मसलन ट्रेडिंग, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, सर्विस आदि हर क्षेत्र में सुगमता रहे—

रेट मास्टरअपडेट करें

मूल्यसूची और कोटेशन सुधारें

इन्वेंटरी/स्टॉकका पुनर्मूल्यांकन करें

कॉन्ट्रैक्टऔर एग्रीमेंट की समीक्षा करें

GST रिटर्न्सऔर आईटीसी पर ध्यान दें

अकाउंट्स, सेल्सऔर ऑपरेशन टीम को प्रशिक्षण (Training)

इन प्रमुख बातों को ध्यान में रखते हुए व्यवसाय घराने नए GST सुधार का लाभ उठा सकते हैं, अनुपालन में आसानी हो सकती है और टैक्स संबंधी कारवाई से बच सकते हैं।

F. CHALLENGES BEFORE GOVT. FOR PROPER IMPLEMENTATION:

सरकार के सामने नए जीएसटी (GST) टैक्स रेट लागू करने में कई बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हैं। इन बिंदुओं पर सरकार को विशेष रणनीति, संवाद और निगरानी की आवश्यकता होगी ताकि बदलाव का लाभ सभी तक पहुंच सके और व्यावसायिक व राज्यीय स्तर पर कोई दिक्कत न आए। सबसे पहली चुनौती तो राजस्व घाटे की चिंता है  खासतौर पर जब कई श्रेणियों की वस्तुओं पर  पर टैक्स घटाया गया है। दूसरी  जीएसटी नेटवर्क (GSTN) और राज्यों के पोर्टलों को नए स्लैब, इनवॉइसिंग और रिटर्न्स के हिसाब से तुरंत अपडेट करना और उसमें संभावित गड़बड़ी रोकना बड़ा सरोकार है। यह संभव तभी होगा जब  तकनीकी बदलाव और आईटी तैयारी पूर्ण रूप से सुदृढ़ हो।  तीसरी  सरकार को आम जनता, व्यापारी, और वस्तु/सेवा प्रदाताओं तक सभी बदलाव की सटीक और समय पर जानकारी पहुंचाना, जिससे भ्रांतियाँ और अफवाहें न फैलें। यह सिर्फ  जागरूकता और संवाद से संभव होगा।

इसके साथ ही GSTN पोर्टल, ई-इनवॉइस सिस्टम में उच्च लोड के दौरान तकनीकी दिक्कतें, डेटा की असंगति, और बार-बार अपडेट से निगरानी एवं दुरुस्ती करना चुनौतीपूर्ण है। टैक्स घटाने के बाद व्यापारियों द्वारा उचित कीमत कम किए जाने या मुनाफा बढ़ाने की जांच सतत करनी पड़ेगी  ताकि उपभोक्ता को लाभ पहुंचे। सरकार को उपभोक्ता शिकायत प्रबंधन भी बनाना पड़ेगा जिससे की उपभोक्ताओं की शिकायतों को समय पर पंजीकृत कर उचित निवारण हो। इसके लिए संसाधन और प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार तकनीकी उन्नयन, सख्त निगरानी, जागरूकता अभियान और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत कर रही है, ताकि नए टैक्स दरों के लाभ का असर सीधे आम उपभोक्ता तक पहुंचे और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहे। 

लेखक को इस बात का डर है की  जीएसटी दरों के कम होने का लाभ कही कंपनियां अपने पास ही ना रख ले,और उपभोक्ता अपने आप को ठगा सा महसूस करे। मुझे याद है जब वैट से जीएसटी लगा था उस समय भी कर ढांचे और दरों में बदलाव के कारण सरकार ने कार्यवाही करते हुए कई नामी गिरामी कंपनियों से कर दरों में बदलाव के लाभ को वसूला था जो की उपभोगताओं को नहीं दिया गया था।  इस बार भी सरकार इस बात को सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी की उपभोक्ता  को कम कीमतों पर सामन मिले।  इसलिए सरकार अपने  निगरानी तंत्र मजबूत करने के साथ साथ अपने अधिकारीयों को भी ट्रेनिंग देगी । अन्यथा सरकार की मंशा पर पानी फिर जाएगा ।

 G. CONCLUSION:

पहली नज़र में, ये सुधार उपभोक्ता-हितैषी प्रतीत होते हैं, जिनमें कम कर बोझ और अधिक सामर्थ्य का वादा किया गया है। हालाँकि, बारीकी से देखने पर पता चलता है कि कई प्रमुख क्षेत्रों में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी)  को नकारा गया है , साथ ही संरचनात्मक दरों में विसंगतियाँ, वास्तव में व्यवसायों और अंततः उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा सकती हैं। लेकिन राज्यों की सहमति, राजस्व क्षतिपूर्ति की रूपरेखा और त्वरित आईटी सुधारों के संकल्प के साथ यह निर्णय न केवल उद्योग-व्यापार की अनुपालन-लागत कम करेगा, बल्कि त्योहारी मौसम से पहले मांग को प्रोत्साहन देकर अर्थव्यवस्था को नई गति भी देगा। संक्षेप में, परिषद का यह विवेकपूर्ण संतुलन—उपभोक्ता राहत, व्यापार सुगमता और राजकोषीय जिम्मेदारी—जीएसटी को उसके मूल उद्देश्य “एक राष्ट्र, एक कर” के और निकट ले जाता है, जिससे आगामी वर्षों में समावेशी वृद्धि (Inclusive Growth) की ठोस आधारशिला रखी गयी है।

Note:

नोट: लेखक ने उपरोक्त आलेख सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति, FAQs और लेखक की निजी अनुभव के आधार पर तैयार किया गया है।  इसमे दिए गए सभी विचार लेखक के निजी है तथा दूसरों के विचार भिन्न भी हो सकते है जिसका लेखक सम्मान करते है।अतः पाठकों से निवेदन है की इस आलेख के ऊपर अमल करने से पहले अपने कर सलाहकार से उचित मार्गदर्शन जरूर ले लेवे। 

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