जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान

आज आपसे हम जीएसटी कानून से जुड़े एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा कर रहें है और वह है जीएसटी कानून में गिरफ्तारी के प्रावधान .

जीएसटी जिस समय भारत में लगाया गया था उस समय एक सवाल सबसे अधिक चर्चा का विषय था वह था क्या जीएसटी में गिरफ्तारी भी हो सकती है ? और यदि हाँ तो किन परिस्तिथियों में किसी एक डीलर को जीएसटी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है और क्या जीएसटी कानून की किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किये जाने पर ही किसी डीलर को जीएसटी अधिकारी गिरफ्तार कर सकते हैं

जीएसटी कानून से पूर्व भी कर कानूनों में गिरफ्तारी के प्रावधान थे लेकिन जीएसटी में ये प्रावधान इतनी चर्चा में इसलिए आ गए कि जीएसटी कानून एक दम नया कानून था और एक बहुत बड़े कर सुधार के रूप में इसको प्रचारित किया गया था इसलिए इस कानून पर आम करदाताओं के बीच चर्चा बहुत हुई थी और इसीलिये गिफ्तारी के ये प्रावधान उस समय काफी चर्चा और अधिक व्यवहारिक भाषा में कहें तो तो भ्रम का विषय बन गए थे.

जब यह स्पष्ट किया गया कि जीएसटी कानून में गिरफ्तारी का प्रावधान सिर्फ कर चोरी पर ही है तब सवाल यह उठाया गया कि गलती और कर चोरी के बीच का अंतर कभी –कभी स्पष्ट नहीं होता है और ऐसे हालात में यदि स्थानीय अधिकारियों को गिरफ्तारी के अधिकार दे दिए गए तो आम करदाता के लिए तो यह काफी परेशानी का कारण बन जाएगा . लेकिन फिर जैसे – जैसे जीएसटी का साहित्य आम हुआ और विशेष तौर पर हमारी मातृभाषा हिंदी में,तब यह भ्रम दूर हुआ .

जीएसटी की प्रारम्भिक अवस्था में दो प्रकियाओं को लेकर बहुत बड़ा भ्रम और असमंजस करदाता के मन में था जो कि उस समय जीएसटी के साथ और विशेष तौर हिन्दी भाषी क्षेत्र के करदाताओं से बहुत अधिक जुड़े रहने के कारण मझे साफ़ – साफ़ दिखा .

एक तो जीएसटी में बिल कैसे बनेगा और इसके बारे में यह प्रचारित हो गया था कि जीएसटी में हर बिल जीएसटी पोर्टल पर जाकर बनाया जाएगा और दूसरा जीएसटी एक सख्त कानून है और इसमें गिरफ्तारी का प्रावधान आम करदाताओं के लिए बहुत बड़ी परेशानी बनने वाला है .

आगे जाकर जीएसटी सख्त कानून तो साबित हुआ ही लेकिन उसके कार अलग थी . जीएसटी अव्यवहारिक और सख्त कानून साबित हुआ अपनी अव्यवहारिक प्रक्रियाओं और लगातार जारी किये जाने वाली अधिसूचनाओं और स्पष्टीकरण के कारण और इसे और भी सख्त बना दिया जीएसटी नेटवर्क की समस्याओं ने और अव्यवहारिक लेट फीस ने .

लेकिन जीएसटी बिल और गिरफ्तारी के लिए बनाए गए प्रावधानों के प्रति जो भ्रम और असमंजस या यों कहे डर था वह धीरे –धीरे दूर हो गया और डीलर्स और प्रोफेशनल्स ने अपनी तरफ से जीएसटी का पालन करने में और इसे सफल बनाने में पूरा योगदान दिया .

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान हैं ही नहीं . ये प्रावधान है लेकिन जिस तरह से इन्हें बनाया गया है कि ये आम करदाता को प्रभावित नहीं करते हैं लेकिन जिस समय जीएसटी लागू हुआ था उस समय अर्थात वर्ष 2017 में सबसे ज्यादा सवाल मेरे पास इसी गिरफ्तारी के प्रावधान के सम्बन्ध में ही आये थे

और जब जीएसटी की पूर्व संध्या पर एक बड़े टीवी चैनल ने मेरी जीएसटी की पुस्तक पर प्राइम टाइम पर चर्चा की थी तो एंकर ने एक बहुत बड़ा समय इस प्रावधान को भी दिया था मेरी इस राय के साथ कि जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान तो हैं लेकिन इनका आम करदाता पर कोई विशेष प्रभाव नहीं है क्यों कि ये प्रावधान केवल कर की चोरी करने पर ही लागू होते हैं और वह भी तब जब कि कर चोरी की रकम बहुत अधिक हो.

आइये देखें कि क्या है जीएसटी कानून में गिरफ्तारी की प्रावधान और किस तरह हम यह कह रहें हैं कि सामान्य रूप से आम करदाता इनसे लगभग अप्रभावित है .

Arrest Under GST

कब लागू होंगे जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान

जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान जीएसटी कानून की धारा 69 में दिए गए हैं जिसे हम धारा 132 के साथ पढेंगे तो यह पायेंगे कि यह प्रावधान केवल विशेष प्रकार की कर की चोरी पर ही लागु है और तभी लागू होंगे जब कि कर की चोरी की रकम 2 करोड़ रुपये से अधिक हो तो आप यह मान कर चलिए आम करदाता का इस प्रावधान से सामान्य तौर पर कोई सम्बन्ध नहीं है.

एक और बात जो इस प्रावधान के साथ जुडी है वह अह है कि स्थानीय जीएसटी अधिकारीयों को गरफ्तारी का अधिकार प्राप्त नहीं है और यह गिरफ्तारी जरूरी है या नहीं है इसका फैसला लेने का अधिकार सिर्फ जीएसटी आयुक्त को ही है और ऐसा फैसला लेने के बाद आयुक्त ही किसी अधिकरी को इस गिरफ्तारी के लिए अधिकृत करेंगे.

आइये इन प्रावधानों का अध्ययन करें जो कि जीएसटी कानून की धारा 69 में दिये गये हैं :-

जो मामले धारा 69 में गिरफ्तारी के लिए बताये गए हैं वे धारा 132(1) की उपधारा (a) , (b) , (c) और (d) में उल्लेखित हुए कर चोरी के मामले हैं आइये देखें कि ये क्या मामले हैं जिनमें यदि जीएसटी आयुक्त, दि उनके पास ऐसा विश्वास करने के कारण है कि डीलर ने निम्नलिखित अपराध किये हैं और इनमें कर चोरी की रकम एक निश्चित सीमा से अधिक है तो वे तो डीलर की गिरफ्तारी की आदेश दे सकते हैं .

आइये देखें कि धारा 132 (1) में उल्लेखित वे अपराध कौनसे है :-

धारा 132 के वे मामले जिनमें जीएसटी आयुक्त धारा 69 के तहत गिरफ्तारी के आदेश दे सकते हैं
धारा 132 की उपधारा अपराध का विवरण
(a). कर चोरी के उद्देश्य से कोई भी व्यक्ति बिना बिल जारी किये किसी भी माल या सेवा की सप्लाई करता है .
(b) कोई भी व्यक्ति जीएसटी प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए किसी माल या सेवा अथवा दोनों की सप्लाई किये बिना ही बिल जरी करता है जिससे कोई गलत इनपुट ली गई हो या किसी प्रकार का रिफंड लिया गया हो.
(c) कोई भी बिना माल या सेवा अथवा दोनों की सप्लाई हुए बिना जारी किये गए ऐसे बिल जिनका उल्लेख ऊपर (b) में किया गया है के आधार पर इनपुट क्रेडिट लेता है
(d) कोई भी व्यक्ति यदि जीएसटी कर अपने ग्राहक से एकत्र करता है और उसके जमा करने की नियत तिथी से तीन महीने तक उसे जमा नहीं कराता है .

इन 4 प्रकार के अपराधों पर जीएसटी आयुक्त डीलर की गिरफ्तारी का फैसला ले सकते हैं यदि वे जरुरी समझे तो लेकिन यह फैसला लेने के पहले यह भी देखना होगा कि यह अपराध धारा 132(1) की उपधारा (i) अथवा (ii) के तहत दंडनीय हैं और यदि ऐसा नहीं है तो फिर गिरफ्तारी के आदेश नहीं दिए जा सकते हैं.

132(1) की उपधारा (i) या (ii) का अध्ययन करने पर ये पता लगता है कि उपधारा (i) तो 5 करोड़ से ऊपर की कर चोरी को संबोधित करती है और उपधारा (ii) 2 करोड़ से 5 करोड़ की कर चोरी के लिए है यहाँ आप ध्यान रखे कि हम यहाँ गिरफ्तारी के प्रावधान जो कि धारा 69 में दिए हैं उनका अध्ययन कर रहें हैं ना कि इन अपराधों पर सजा के प्रावधानों का.

2 करोड से ऊपर की चोरी पर गिरफ्तारी का प्रावधान तो है ही लेकिन इससे नीचे के अपराध भी तय हो जाने पर भी सजा का प्रावधान तो है ही लेकिन इनमें धारा 69 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार गिरफ्तारी के आदेश नहीं दिये जा सकते है. इस प्रकार से यह स्पष्ट है कि किन अपराधों के लिए गिरफ्तारी के आदेश देने के अधिकारों का प्रयोग किया जा सकता है लेकिन यह भी ध्यान रखें इन प्रकरणों में टैक्स की चोरी की रकम 2 करोड़ से अधिक होनी चाहिए .

आइये इस सम्बन्ध में धारा 69 जो कि जीएसटी आयुक्त के गिरफ्तारी के अधिकारों के सम्बन्ध में है के अन्य प्रावधानों का अध्ययन करें :-

क्र. संख्या प्रावधान
1. यदि जीएसटी आयक्त के पास ऐसे कारण है जिनसे उन्हें यह विश्वास होता ही कि एक डीलर ने धारा 132 की उपधारा (a) , (b) , (c) और (d) में उल्लेखित कर चोरी का अपराध किया है और जीएसटी आयुक्त ऐसे विशिष्ट मामलों में जहां कर चोरी की रकम 2 करोड़ रूपये से अधिक हो गिफ्तारी के आदेश दे सकते हैं .

आयुक्त ऐसे हर मामले में गिरफ्तारी की आदेश देंगे ही ऐसा भी कानून में नहीं लिखा है वे गिरफ्तारी के आदेश दे सकते हैं और यह जीएसटी आयुक्त के विवेक पर छोड़ा गया है कि वे इस बारे में क्या ऐसा आदेश देना चाहते हैं .

2. यदि जीएसटी आयुक्त गिरफ्तारी का आदेश देते हैं तो वे इसके लिए अधिकारी को अधिकृत करेगे. हाँ ध्यान रखे गिफ्तारी तो अधिकृत अधिकारी करेगा लेकिन उसे गिरफ्तारी का फैसला लेने का अधिकार नहीं है.
3. गिरफ्तारी के लिए दो तरह के मामले होंगे . एक तो वह जिनमें जमानत मिल सकती है और दूसरे वे जिनमें गैर –जमानती होंगे . इन दोनों का विवरण इस लेख में आगे दिया जा रहा है.
4. जिस भी व्यक्ति को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया जाता है उसके अधिकारों की रक्षा का भी प्रबंध इस कानून में है . जिस व्यक्ति को इस धारा के तहत गिरफ्तार किया जाता है जहाँ उल्लेखित अपराध की श्रेणी गैर जमानती है तो उस डीलर को गिरफ्तारी के कारण बताने होंगे और और गिरफ्तारी के 24 घंटे के अन्दर मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना होगा.

गैर जमानती अपराध वे होंगे जिनमें कर चोरी का आरोप 5 करोड़ से अधिक है.

4. जहां उल्लेखित अपराध जिसके लिए गिरफ्तारी की गई है जमानती है अर्थात कर चोरी की आरोपित रकम 5 करोड़ रूपये से कम है वहां डीलर को जमानत दे दी जाएगी और यदि जमानत में कोई व्यवधान आता हैं तो उसे मजिस्ट्रेट को सुपुर्द करना होगा.
5. जमानती मामलों के संम्बंध में गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत पर या किसी अन्य तरीके से छोड़ने के जीएसटी के सहायक आयुक्त एवं उपायुक्त को वही अधिकार प्राप्त हैं जो कि एक पुलिस स्टेशन के इंचार्ज को इस सम्बन्ध में प्राप्त है .

यहाँ यह ध्यान रखें कि गिरफ्तारी का आदेश देने के पहले जीएसटी आयुक्त को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास यह विश्वास करने के कारण हैं कि डीलर ने, ये अपराध जो ऊपर उल्लेखित हैं, किये हैं जिनका जिक्र धारा 132 (1) (a) , (b), (c) और (d) में है और कर चोरी की रकम 2 करोड़ रूपये से अधिक है . डीलर की गिरफ्तारी एक बहुत ही संवेदनशील विषय है और इसलिए कानून में इस प्रावधान को बहुत ही सावधानी के साथ बनाया गया है .

जमानती और गैर जमानती अपराध

आइये अब देखे कि कौनसे अपराध जमानती है और कौनसे गैर जमानती हैं –

जमानती अपराध

जमानती अपराध वे हैं जिनमें आरोपित टैक्स चोरी की रकम 5 करोड़ से अधिक नहीं हो. व्यवहारिक रूप से हम कहें तो ये वो मामले होंगे जिनमें कर चोरी की रकम 2 करोड़ रुपये से लेकर 5 करोड़ रूपये तक हैं. – धारा 132(4)

गैर जमानती अपराध

गैर जमानती अपराध वे हैं जहाँ कर चोरी की रकम 5 करोड़ से अधिक है – धारा 132 (5)

गिरफ्तारी की आदेश कौन दे सकता है

केवल आयुक्त (Commissioner) एक अधिकारी को ऊपर वर्णित स्थिति में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए किसी अधिकारी को अधिकृत (Authorize) कर सकता है। सभी क्षेत्र के आयुक्त के नीचे के अधिकारियों को गिरफ्तारी के मामले में कोई फैसला लेने और शक्तियों का इस्तेमाल करने के लिए अधिकार अपने आप नहीं होता क्योंकि गिरफ्तारी” खुद ही एक अपने आप में बहुत संवेदनशील मामला है . इसीलिये यह अधिकार जीएसटी आयुक्त को ही दिए गए हैं.

गिरफ्तारी के समय क्या सावधानियां रखी जानी चाहिए

भारतीय दंड संहिता के सभी प्रावधानों को जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्तियों को अधिकृत करते हुए और इस्तेमाल करते हुए ध्यान में रखा जाना चाहिए क्योंकि हमने पहले ही उल्लेख किया है कि यह मामला बहुत संवेदनशील है। इसे नियमित कार्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इस संबंध में आपराधिक प्रक्रियाएं के दौरान गिरफ्तारी के सभी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए और उस मामले में गिरफ्तार अधिकारी को प्रक्रियाओं और नियमों का का ज्ञान होना चाहिए।

डीके बसु बनाम राज्य बंगाल राज्य के मामले में 1997 (1) एससीसी 416 माननीय सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के मामले में अगली दिशा-निर्देश जारी कर रखें है

और जो कि सभी प्रकार की गिरफ्तारियों पर लागू हैं अत: इन शक्तियों को काम में लेने वाले अधिकारियों को भी इन्हें ध्यान में रखना होगा । इस संम्बंध में कुछ महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों इस प्रकार हैं :-

1.गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत अधिकारियों के नाम उनके पदनाम (Ddesignation) के साथ , स्पष्ट और दिखते होने चाहिए तथा उनकी पहचान पत्र उनके पास होना चाहिए.

2.गिरफ्तारी के दौरान किसी एक रिश्तेदार के द्वारा गिरफ्तारी मेमो पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए या उसकी अनुपस्थिति में किसी क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किये जाने चाहिए और इसके अतिरिक्त गिरफ्तार व्यक्ति द्वारा भी गिरफ्तारी मेमो पर काउंटर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए .

3.गिरफ्तारी व्यक्ति को उस जगह से एक रिश्तेदार या मित्र को सूचित करने का अधिकार होगा जहां उसे गिरफ्तार किए जाने के बाद रखा जाता है जैसे एक पुलिस स्टेशन, लॉकअप या पूछताछ स्थल.

4.गिरफ्तार व्यक्ति का हर 48 घंटों के दौरान मेडिकल परीक्षण कराया जाना चाहिए

5.पूछताछ के दौरान गिरफ्तारी को अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए, हालांकि पूरी पूछताछ के दौरान लगातार वकील की उपस्तिथी की अनुमति नहीं होगी ।

6.गिरफ्तारी मेमो सहित सभी दस्तावेजों की प्रतियों को उनके रिकॉर्ड के लिए मजिस्ट्रेट को भेजा जाना चाहिए।

इनमें से जो भी जीएसटी डीलर की गिरफ्तारी के समय परिस्तिथियां बनती हों उस हिसाब से जीएसटी अधिकारियों को सावधानी रखनी होगी .

गिरफ्तारी कब की जानी चाहिए

यह विशुद्ध रूप से आयुक्त के विवेकाधीन निर्णय पर आधारित है लेकिन जैसा कि मैंने पहले भी लिखा है गिरफ्तारी और वह भी एक कर कानून के तहत यह एक बहुत ही संवेदनशील मामला है अत: इन अधिकारों का प्रयोग बहुत ही सावधानी से किया जाना चाहिए । निर्णय लेने के दौरान सामन्य रूप से निम्नलिखित कारकों को ध्यान में लेने के बाद ही शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए: –

1. अपराधकीउचित जांच।

2. फरारहोनेसे व्यक्ति को रोकने के लिए

3. सबूतोंकेसाथ छेडछाड होने की संभावना को रोकने के लिए।

4. गवाहयागवाहों को डरा देने या प्रभावित करने से रोकने के लिए।

ये कुछ कारण हैं जिन्हें एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने का निर्णय करते समय विचार किया जाना चाहिए।

क्या 2 करोड़ से नीचे की कर चोर पर भी गिरफ्तारी संभव है कब लागू होंगे

अभी ऊपर यह बताया गया है कि 2 करोड़ के ऊपर की कर चोरी के आरोपी को ही गिरफ्तार करने के आदेश देने के अधिकार जीएसटी आयुक्त को हैं लेकिन क्या किसी परिस्तिथी में 2 करोड़ से कम की कर चोरी जो कि धारा 132 (1) के (a) से लेकर (d) में उल्लेखित है पर भी आयुक्त को गिरफ्तारी के अधिकार मिल जाते हैं क्या ?

यह एक बहुत बड़ा सवाल है और इसका जवाब यह है कि यदि किसी डीलर ने धारा 132 (1) के (a) से लेकर (i) (ध्यान रखें यहाँ मैंने दारा 132 में आये सभी अपराधों का जिक्र किया ना कि सिर्फ 132(1) में उपधारा (a) से (d) का ) में दर्ज कोई अपराध किया है और उसे सजा हो गई है और उस सजा के बाद उसी डीलर ने फिर से 132 (1) के (a) से लेकर (d) कोई अपराध फिर किया है तब ऐसे मामले में आयुक्त को 2 करोड़ के नीचे की कर चोरी पर भी गिरफ्तारी के अधिकार मिल जायेंगे.

क्या है उद्योग और व्यापार की राय

जीएसटी में गिरफ्तारी की शक्तियां भारत में किसी भी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में नई नहीं हैं और यह हमारे पूर्व में जारी कर कानून के सामान है या नहीं इस मुद्दे को अभी छोड़ भी दें तो भी व्यापार और उद्योग हमेशा इन शक्तियों के दुरुपयोग के बारे मेंआशंका करते रहें हैं। जीएसटी एक नया कानून है और करदाताओं को जीएसटी के लागू के आरंभिक चरण में इन प्रावधानों को पसंद नहीं किया गया है .

इसके अलावा, व्याख्या की समस्या, राय के अंतर में इन प्रावधानों का दुरूपयोग हो सकता है यह आशंका भी उद्योग एवं व्यापार और उनसे जुडी संस्थाओं द्वारा समय –समय पर जताई गई है .

लेकिन यह तथ्य यह है कि सामान्यतया 2 करोड़ रुपये की कर चोरी राशि की निचली सीमा रख अधिकांश डीलरों को इन गिरफ्तारी के प्रावधानों से बाहर रखा गया है अत: यह आम करदाता को प्रभावित नहीं करता है .

– सुधीर हालाखंडी

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