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ऑडिट ट्रेल – अनुशासित एकाउंटिंग की ओर एक कदम

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Aseem Trivedi

कंपनी अधिनियम 2013 ने ऑडिट ट्रेल की नई अवधारणा पेश की है , जो एक कंपनी द्वारा किए गए सभी लेनदेन और व्यवहारों  के व्यवस्थित रिकॉर्ड कि रखरखाव को अनिवार्य करती है। ऑडिट ट्रेल का उद्देश्य कंपनी की वित्तीय और परिचालन गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही निर्धारित करना है। कंपनियों पर ऑडिट ट्रेल के इस प्रावधान के दूरगामी प्रभाव देखने में आयेंगे ऐसा माना जा रहा है। एक  विस्तृत रूप से स्पष्ट  ऑडिट ट्रेल रखने से, कंपनियां यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि सभी वित्तीय लेनदेन ठीक से प्रलेखित हैं, और उनका लेखा-जोखा सही है। यह ऑडिट ट्रेल कपटपूर्ण गतिविधि को रोकने में मदद कर सकती है, त्रुटियों और विसंगतियों की समय रहते पहचान कर सकती है, और कानूनी या नियामक जांच की स्थिति में साक्ष्य प्रदान कर सकती  है। ऑडिट ट्रेल की आवश्यकता अच्छे कॉर्पोरेट गवर्नेंस प्रथाओं को बढ़ावा देने में भी मदद करती है। कॉर्पोरेट गवर्नेंस के अन्तर्गत कंपनियों को सटीक और विश्वसनीय रिकॉर्ड बनाए रखने की अनिवार्यता होती है, जो उन्हें सटीक निर्णय लेने और अधिक कुशलता से काम करने में मदद करती है ।इसके अतिरिक्त, यह निवेशकों, लेनदारों और नियामकों सहित हितधारकों के बीच विश्वास और पारदर्शिता  बनाने में मदद करती है ।

हालाँकि, ऑडिट ट्रेल की अनिवार्यता के इस प्रावधान  से कंपनियों के लिए भी चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं। इस प्रभावी ऑडिट ट्रेल सिस्टम को स्थापित करने और बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता आज कंपनियों की चिंता का विषय है। ऑडिट ट्रेल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कंपनियों को नई तकनीकों में निवेश करने, अतिरिक्त कर्मचारियों को नियुक्त करने या बाहरी सहायता लेने की आवश्यकता हो सकती है।

भारत में ऐसे कई सॉफ़्टवेयर समाधान उपलब्ध हैं जो ऑडिट ट्रेल और लॉग सुविधाओं को संपादित करते हैं। इनमें से कुछ सॉफ्टवेयर समाधानों में शामिल हैं: टैली: क्विकबुक्स: ज़ोहो बुक्स: बिजी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर मार्ग ईआरपी:

Q.1 भारत में अभी किसे ऑडिट ट्रेल्स बनाए रखने की आवश्यकता है

कंपनियों के अधिनियम के तहत केवल कंपनियों के पास यह बाध्यता है, एलएलपी, साझेदारी, सोसायटी, ट्रस्ट, आदि इस आवश्यकताओं से बाहर हैं।

Q.2 क्या कंपनी अधिनियम के तहत सभी कंपनियों को ऑडिट ट्रेल/एडिट लॉग बनाए रखने की आवश्यकता है?

हां, ओपीसी, छोटी, निष्क्रिय और विदेशी कंपनियों सहित सभी कंपनियों को भारत में ऑडिट ट्रेल बनाए रखने की आवश्यकता है।

Q.3 यह आवश्यकता कब से लागू की गई है?

ऑडिट ट्रेल की यह आवश्यकता 01.04.2023 से लागू की गई

Q.4 यदि ऑडिट ट्रेल का रखरखाव नहीं किया जाता है तो इसके क्या परिणाम होंगे?

यह धारा 128 का उल्लंघन होगा और न्यूनतम 50 हजार से अधिकतम 5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

प्रश्न 5. क्या यह आवश्यकता उन कंपनियों पर लागू होती है जो मैन्युअल आधार पर खातों की पुस्तकों का रखरखाव कर रही हैं?

नहीं, लेकिन ऑडिटर को अपनी रिपोर्ट में इस तथ्य का खुलासा करना होगा कि कंपनी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर पर खातों की पुस्तकों का रखरखाव नहीं कर रही है इसलिए ऑडिट ट्रेल के लिए रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं है।

Q.6 क्या होगा अगर कंपनी अकाउंटिंग के लिए कई सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है?

लेखांकन सॉफ्टवेयर के साथ एकीकृत हर सॉफ्टवेयर में ऑडिट ट्रेल और एडिट लॉग फीचर होना अनिवार्य है ।

Q.7 वर्ष के दौरान किसी भी समय एडिट लॉग को इनेबल और डिसएबल किया जा सकता है?

नहीं, एडिट लॉग हमेशा पूरे वर्ष इनेबल मोड पर होना चाहिए यदि इसे किसी भी समय डिसएबल कर दिया जाए तो ऑडिटर अपनी रिपोर्ट में संपादन लॉग के साथ छेड़छाड़ के बारे में तथ्य का विवरण देगा।

Q.8 क्या होगा यदि कंपनी समय पर लेनदेन रिकॉर्ड नहीं कर रही है, कंपनी के पास अंशकालिक लेखाकार है जो मासिक प्रविष्टियां कर रहा है, इसका क्या प्रभाव होगा?

हालांकि विलंबित लेखांकन को कानून में कहीं भी प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित नहीं किया गया है , लेकिन एक सुदृढ़ आंतरिक नियंत्रण( इंटरनल कंट्रोल) में लेखांकन समय पर होना अनिवार्य है ।लेन-देन का अनुचित विलंबित लेखांकन धारा 143(10) के तहत अधिसूचित  SA 240 के तहत ऑडिटर के लिए फ्रॉड रिस्क फ़ैक्टर  है । इसके अतिरिक्त जिन कंपनियों में डायरेक्टर रेस्पोंसिबिलिटी स्टेटमेंट का विवरण धारा 134(5) के तहत दिया जाना है, वहाँ निदेशकों द्वारा घोषित किया जाता है कि कंपनी का आंतरिक वित्तीय नियंत्रण पूरे वर्ष प्रभावी रहा है और ऑडिटर को आंतरिक वित्तीय नियंत्रणों ( इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल ) पर एक रिपोर्ट देने की भी आवश्यकता होती है।वहाँ यह डिलेड एकाउंटिंग समस्या रहेगी ।

Q.9 यह ऑडिट ट्रेल प्रावधान कंपनियों में क्या अनुशासन सुनिश्चित करेगा?

उदाहरण के लिए ऑडिट ट्रेल के माध्यम से निम्नलिखित अनुशासन सुनिश्चित किया जाएगा:-

– लेखांकन सॉफ्टवेयर मे नेगेटिव केश बैलेंस को बाद की तारीख में नकद रसीद दर्ज करके लेखाकार द्वारा बाद में सुधार किया जाना ऑडिट ट्रेल में दर्ज होगा

– मुनाफे को समायोजित करने के लिए वर्ष के अंत के बाद दर्ज किए गए नकद लेनदेन ऑडिट ट्रेल में दर्ज होगा

– लाभ को समायोजित करने के लिए वर्ष के अंत के बाद पिछली दिनांकित प्रविष्टियाँ ऑडिट ट्रेल में दर्ज होगी

– आय कम करने या खर्च कम करने के लिए साल के अंत में वाउचर रद्द करना ऑडिट ट्रेल में दर्ज होगा

– आयकर के तहत अस्वीकृति से बचने के लिए लेनदेन को बाद में विभाजित करना ऑडिट ट्रेल में दर्ज होगा

Q.10 यदि कोई कंपनी आज एडिट लॉग ऑन करती है, तो क्या वह 2022-23 के खातों में किए गए समायोजन को भी रिकॉर्ड करेगी? चाहे वे इस ऑडिट में नहीं आयेंगे ?

हां, सभी समायोजन एडिट लॉग में होंगे, लेकिन वे 22-23 ऑडिट के अधीन नहीं हैं, लेकिन ऑडिटर 2023-24 ऑडिट में ओपनिंग बैलेंस के ऑडिट लिए उन्हे देख सकता है ।

Q.11 एडिटिंग लॉग इनेबल करने के बाद टैली जैसे एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में सबसे पहले क्या किया जाना चाहिए ?

एडिट  लॉग को इनेबल  या डिसएबल करने के प्रशासनिक अधिकार को कंपनी में उच्च प्राधिकारी तक सीमित करें। लेखा कर्मचारियों को सौंपे गए कर्तव्यों के अनुसार उचित लॉग इन बनाएं क्योंकि एडिट लॉग एडिट का समय, लॉगिन ऐड्रेस , और किए गए परिवर्तन के बारे में विवरण देगा और ये तीनों विवरण एडिट लॉग सुविधा में अनिवार्य हैं, यदि लॉगिन आईडी ठीक से नहीं बनाई गई हैं तो यह इंटरनल कंट्रोल की गंभीर चूक होगी ।

Q.12 क्या कोई छोटी कंपनी अपने अकाउंटिंग को एडिट लॉग के साथ अनुशासित अकाउंटिंग के लिए आउटसोर्स कर सकती है?

हां, यह सुनिश्चित करने के बाद कि अकाउंटिंग फर्म के पास ये सभी एडिट लॉग फीचर हैं और उनका सिस्टम ऑडिटर एडिट लॉग से संबंधित आंतरिक नियंत्रण पर टाइप 2 रिपोर्ट देगा।

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Author Info

CA. Aseem Trivedi
Qualification: CA in Practice
Location: INDORE, Madhya Pradesh
Articles Published: 3

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