वकालतनामें की क्या भूमिका है?
यह कि हाल में ही इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स प्रोफेशनल पर सर्च की है ।सर्च करने के कारण सभी टैक्स प्रोफेशनल में भय व्याप्त हो गया है तथा अपने भविष्य के बारे में चिंतित है ?क्योंकि करदाता अपने मतलब तक टैक्स प्रोफेशनल से संबंध रखता है ?उसके पश्चात वह टैक्स प्रोफेशनल पर ध्यान नहीं देता है ,जिसके कारण टैक्स प्रोफेशनल चिंतित है ?इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए टैक्स प्रोफेशनल के लिए वकालतनामें को आज परिभाषित किया जा रहा है, जो निश्चित रूप से आपको सहयोग करेगा तथा भविष्य की योजनाओं को बनाने में सहायक होगा । इस वकालतनामे की समीक्षा निम्न प्रकार है-
वकालतनामा क्या है?
Vakalatnama (वकालतनामा) एक कानूनी दस्तावेज (legal document) होता है।
वकालतनामा की परिभाषा (साधारण विधिक भाषा में)-
वकालतनामा वह अधिकृत दस्तावेज होता है ,जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति (जिसे client या पार्टीलिटिगेंट कहा जाता है) किसी एडवोकेट को अदालत या अर्ध न्यायिक में अपने मामले की पैरवी करने, दलीलें देने, और कानूनी कार्यवाही करने का घोषणा के द्वारा अधिकार देता है।
वकालतनामा किस नियम या कानून के अंतर्गत आता है?
1. Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) – Order III: Rule 1 & 2 Rule 4
वकालतनामा का विधिक आधार CPC की Order III में मिलता हैI
2. The Power-of-Attorney Act, 1882 (संदर्भ रूप में)–
वकालतनामा एक प्रकार की एजेंसी अथॉरिटी या पावर ऑफ अटॉर्नी मानी जाती है, इसीलिए इस अधिनियम के सामान्य सिद्धांत भी उस पर लागू होते हैं।
3. Bar Council of India Rules-
BCI Rules (Part VI, Chapter II, Section II – Duties of an Advocate towards the Court and Client):
हालाँकि इसमें वकालतनामा की सीधी परिभाषा नहीं दी गई, पर अधिवक्ता को क्लाइंट से प्राप्त अधिकारों और दस्तावेजों के अनुसार कार्य करने की जिम्मेदारी बताई गई है, जिसका आधार वकालतनामा होता है।
Order III – Code of Civil Procedure, 1908-
नियम 1 – उपस्थिति या कार्यवाही, व्यक्ति, एजेंट या वकील के माध्यम से कोई भी उपस्थिति, आवेदन या कार्य जो न्यायालय में किसी पक्ष द्वारा करना आवश्यक या अधिकृत है, वह:
स्वयं उस व्यक्ति द्वारा,
उसके मान्यता प्राप्त एजेंट द्वारा,
या उसके अधिवक्ता (वकील) द्वारा किया जा सकता है।
शर्त: यदि न्यायालय निर्देश दे तो पक्ष को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
Order III – Code of Civil Procedure, 1908-
Rule 1 – Appearances, etc., may be in person, by recognized agent or by pleader
Any appearance, application or act in or to any court, required or authorized by law to be made or done by a party in such court, may be made or done by the party in person, or by his recognized agent, or by a pleader appearing, applying or acting, as the case may be, on his behalf:
Provided that any such appearance shall, if the Court so directs, be made by the party in person.
नियम 2 – मान्यता प्राप्त एजेंट और वकील-
निम्नलिखित को मान्यता प्राप्त एजेंट माना जाएगा:
(a) वह व्यक्ति जिसे पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त है और जो पक्ष की ओर से उपस्थिति या कार्यवाही करने का अधिकार रखता है।
(b) वह व्यक्ति जो व्यवसायिक प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहा हो, बशर्ते कि पार्टी न्यायालय की क्षेत्राधिकार सीमा से बाहर रहती हो और कोई अन्य एजेंट नियुक्त न किया गया हो।
Rule 2 – Recognized agents and pleaders
The recognized agents of parties by whom such appearances, applications and acts may be made or done are—
(a) persons holding powers-of-attorney, authorizing them to make and do such appearances, applications and acts on behalf of such parties;
(b) persons carrying on trade or business for and in the names of parties not residing within the jurisdiction of the Court within which limits the limits of which the Court is situate, in matters connected with such trade or business only, where no other agent is expressly authorized to make and do such appearances, applications and acts.
नियम 4 – वकील की नियुक्ति-
(1) कोई भी वकील किसी पक्ष की ओर से तब तक कार्य नहीं कर सकता जब तक कि उसे उस पक्ष द्वारा लिखित रूप से नियुक्त न किया गया हो — यह नियुक्ति उस व्यक्ति के हस्ताक्षर या उसके एजेंट द्वारा होनी चाहिए।
(2) यह लिखित नियुक्ति अदालत में दाखिल की जानी चाहिए और यह तब तक वैध मानी जाएगी जब तक:
क्लाइंट या वकील द्वारा अदालत की अनुमति से समाप्त न की जाए, या
क्लाइंट या वकील की मृत्यु न हो जाए, या
मुकदमे की सभी कार्यवाहियाँ पूरी न हो जाएँ।
Rule 4 – Appointment of pleader-
(1) No pleader shall act for any person in any Court unless he has been appointed for the purpose by such person by a document in writing signed by him or by his recognized agent or by some other person duly authorized by or under a power-of-attorney to make such appointment.
(2) Every such appointment shall be filed in Court and shall, for the purposes of sub-rule (1), be deemed to be in force until determined with the leave of the Court by a writing signed by the client or the pleader, as the case may be, and filed in Court, or until the client or the pleader dies, or until all proceedings in the suit are ended so far as regards the client.
वकालतनामा प्रयोजन -अधिवक्ता को अदालत /अर्ध न्यायिक में पेश होने और कार्य करने की अनुमति देना महत्वपूर्ण प्रश्न है –
क्या GST और Income Tax मामलों में एडवोकेट को क्लाइंट से Declaration लेना चाहिए या Vakalatnama?”
जी हां यह थोड़ा प्राकृतिक और प्रक्रियात्मक अंतर पर आधारित है, जो कि प्रत्येक कानून की प्रकृति, संबंधित कार्यवाही के मंच (Forum) और विधिक आवश्यकता पर निर्भर करता है। यह जीएसटी और इनकम टैक्स में विधि द्वारा प्रतिपादित नियमों का संक्षेप में वर्णन करते हैं-
GST में – क्या Vakalatnama या Authorization Letter?
Tribunal / Appellate Proceedings (e.g., Joint/Additional Commissioner Appeals, GSTAT):
यहाँ पर Vakalatnama GSTAT फॉर्म 04 के साथ अनिवार्य होता है, अगर एडवोकेट केस की पैरवी, दस्तावेज दाखिल या बहस करता है।यह कि साथ ही, क्लाइंट को एक Authorization Letter / Declaration भी देना चाहिए (विशेष रूप से यदि कंपनी या फर्म है), जिसमें यह घोषित हो कि वे वकील को प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दे रहे हैं।
आवश्यक-
1. Vakalatnama (Bar-registered Advocate के लिए) के साथ Declaration ।
2. Authorization / Board Resolution (अगर क्लाइंट कोई कंपनी/LLP/फर्म है)
GST Departmental Proceedings (like reply to SCN, Audit, Summon, etc.):
वहाँ Vakalatnama की आवश्यकता होती, यदि कोई एडवोकेट क्लाइंट की ओर से जवाब दे रहा है। तथा एक Authorization Letter / Declaration जरूरी होता है, जो कहे कि हमारी ओर से यह Authorized Representative जवाब दे रहे हैं।
आवश्यक –
Authorization Letter / Declaration+
Vakalatnama mandatory (but can be used for formality)
2. Income Tax में – Vakalatnama या Declaration?
Before ITAT (Income Tax Appellate Tribunal):
यहां Vakalatnama आवश्यक होता है, अगर एडवोकेट ITAT में अपील की सुनवाई कर रहा है।साथ ही, कंपनी/फर्म के मामलों में Board Resolution / POA / Authorization देना भी जरूरी होता है।
आवश्यक-
Form 35 + Vakalatnama (with Advocate signature)+Authorization (if non-individual entity)
Before AO / CIT(A) (Assessment / Appeal Proceedings):
यहाँ आप Authorized Representative के रूप में कार्य कर सकते हैं।
Advocate के लिए Section 288 of Income Tax Act के तहत एक Power of Attorney / Authorization Letter / Declaration देना जरूरी होता है।
आवश्यक-
Form 12C या Simple Authorization Letter
+ Declaration कि आप Authorized Representative हैं।
वकालतनामा की मुख्य विशेषताएँ:
1. यह एक.प्राकृतिक स्वरूप एग्रीमेंट है, जिसमें क्लाइंट अपने एडवोकेट को प्रतिनिधित्व का अधिकार देता है।
2. यह एक विधिक वैधता यह भारतीय साक्ष्य अधिनियम, CPC और Advocates Act के तहत मान्य है।
3. यह एक कोर्ट में प्रस्तुत यह दस्तावेज अदालत में केस फाइल करते समय लगाया जाता है। बिना वैध वकालतनामा के एडवोकेट अदालत में पेश नहीं हो सकता।
4.यह कि बार काउंसिल ऑफ स्टेट द्वारा स्टाम्प पेपर / शुल्क वकालतनामा के साथ एक निर्धारित कोर्ट फीस स्टाम्प (Court Fee Stamp) चिपकाया जाता है (प्रत्येक राज्य में अलग हो सकता है, जैसे ₹10)।
प्रपत्र यह एक निर्धारित प्रारूप में होता है, जिसमें क्लाइंट और एडवोकेट दोनों के हस्ताक्षर होते हैं।
वकालतनामा की विषय सामग्री ?
1. क्लाइंट का नाम, पता और विवरण
2. एडवोकेट का नाम और बार रजिस्ट्रेशन नंबर
3. यह स्पष्ट घोषणा कि क्लाइंट वकील को अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर रहा है
4. केस की जानकारी (मामला नंबर, अदालत का नाम आदि)
5. यह कि एडवोकेट को दी जाने वाली शक्तियाँ — जैसे बहस करना, दस्तावेज दाखिल करना, आवेदन देना, सुलह करना आदि जो घोषणा /डिक्लेरेशन के द्वारा की गई हो,संलग्न किया जाना चाहिए।
हस्ताक्षर (client के) और तारीख
वकालतनामा की वैधता-
एक बार दिया गया वकालतनामा तब तक वैध रहता है जब तक:
केस समाप्त न हो जाए
क्लाइंट या एडवोकेट द्वारा निरस्त (revoke) न किया जाए
कोर्ट द्वारा विशेष कारण से एडवोकेट को हटाया न जाए
नमूना वकालतनामा(SPACEMAN COPY)
IN THE INCOME TAX APPELLATE TRIBUNAL / GST APPELLATE TRIBUNAL
[Bench Name]
Appeal No.: ____________ A.Y. ____________
Appellant: __________________________
Respondent: _________________________
VAKALATNAMA
I/We, the undersigned, do hereby appoint:
Mr./Ms. ____________________________, Advocate, enrolled with Bar Council under No. ____________, having address at _______________________________________,
to act, appear and plead on my/our behalf in the above case before the Hon’ble Tribunal. The Advocate is authorized to file documents, make submissions, receive notices, and take necessary steps required in connection with the said proceedings.
Date: __________
Place: __________
(Signature of Appellant / Authorized Signatory)
Name: _____________________
(Stamp of Firm / Company, if applicable)
Accepted by:
(Signature of Advocate)
Name: _____________________
Enrollment No.: ______________
Enclose-डिक्लेरेशन
निष्कर्ष- यह कि GST Tribunal / Appeal में अनिवार्य है।अनिवार्य (यदि कंपनी)+डिक्लेरेशन
यदि GST Departmental SCN, Audit का में वैकल्पिक हैं। लेकिन वकालतनामा+डिक्लेरेशन लेना चाहिए।
यह कि Income Tax Tribunal (ITAT) में अनिवार्य +डिक्लेरेशन Income Tax AO / CIT(A)ज़रूरी (Sec. 288 के तहत) पावर एटर्नी ऑथराइज्ड लेटर।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि एक टेक्स प्रोफेशनल को नियमावली के अनुसार सर्वप्रथम अपने वकालतनामें जिसके साथ एक घोषणा पत्र /डिक्लेरेशन फॉर्म संलग्न होना चाहिए ।तथा जितने भी डॉक्यूमेंट संबंधित विषय के हो उन सब में क्लाइंट के हस्ताक्षर कराने चाहिए, जैसे शपथ पत्र, बयान अन्य कागजात आदि। यदि हम नियमों का पालन करेंगे तो निश्चित रूप से टैक्स प्रोफेशनल को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि सभी दायित्व करदाता के होते हैं । क्योंकि टैक्स प्रोफेशनल तो केवल उसके द्वारा की गई घोषणा और दस्तावेज के आधार पर प्रक्रिया में शामिल होता है और उचित सलाह उसे देता है।
उपरोक्त लेख टैक्स प्रोफेशनल की सहायता के लिए लिखा गया है।यदि कहीं कोई त्रुटि रह गई हो तो कृपया उसका सुधार कर ले। अधिवक्ता हित में यह लेख लिखा गया है । यदि किसी टैक्स प्रोफेशनल को किसी प्रकार की परेशानी आ रही है, तो मेरी सलाह और सहायता सदैव निःशुल्क उपलब्ध है।
डिस्क्लेमर-यह लेखक के निजी विचार है।


