कार , स्कूटर्स , मोटर साइकल्स इत्यादि यदि आप अपने व्यवसाय के लिए खरीदते हैं या उनकी मरम्मत कराते हैं , टायर बदलवाते हैं और इस पर जीएसटी का भुगतान करते हैं तो क्या आप इसकी इनपुट क्रेडिट ले सकते हैं क्या ? यह सवाल कई बार पूछा जाता रहा है तो आइये आज इस सम्बन्ध में वस्तुस्तिथी क्या है आपके इस सवाल का जीएसटी कानून में क्या जवाब है आइये देखें .

जीएसटी जब से लागू हुआ है एक सवाल हमेशा डीलर्स के मन में रहता है कि वो अपने व्यवसाय में काम में लेने के लिए जो वाहन खरीदते हैं चाहे वे माल  वाहन हो या कार , स्कूटर या कोई और वाहन इत्यादि हो उनकी खरीद पर जो जीएसटी का भुगतान वे करते हैं क्या उसकी क्रेडिट उन्हें मिलेगी या नहीं . इसके अतिरिक्त इन वाहनों के लिए जो भी मरम्मत होती है , स्पेयर लगते हैं जैसे टायर, पार्ट्स  इत्यादि  या इन्शुरन्स करवाते हैं उसपर भी जीएसटी लगता है तो उसकी क्रेडिट मिलती है क्या ? यदि इनमें से कुछ की क्रेडिट नहीं मिलती है तो क्यों नहीं मिलती है और इस सम्बन्ध में कानून की वस्तुस्तिथी क्या हैं . ये सवाल जब से जीएसटी भारत में लगा है लगातार पूछा जाता रहा है तो आइये आज इस सम्बन्ध में वस्तुस्तिथी क्या हैं इसका अध्ययन करतें हैं और ये भी देखेंगे कि दिनांक 1 फरवरी 2019 से इसमें कोई परिवर्तन हुआ है क्या ?

वैसे आपकी जानकारी के लिए प्रारम्भ में ही बता दें कि व्यवहारिक रूप से अधिकांश  एवं सामान्य मामलों में यात्री वाहनों पर यह क्रेडिट नहीं मिलती है इसलिए इस लेख से आप कोई बहुत अच्छी खबर का इन्तजार नहीं करें . यह लेख इसलिए लिखा जा रहा है ताकि आपका कोई भ्रम इस सम्बन्ध में हो तो वह दूर हो जाए और यह भी मालूम हो जाए कि 1 फरवरी 2019 से भी स्तिथी बहुत अधिक आपके पक्ष में नहीं गई है.

हाँ ध्यान रखें कि  माल वाहनों के सम्बन्ध में पहले भी कोई क्रेडिट ब्लॉक्ड नहीं थी और उनकी स्तिथी यथावत बनी रहेगी और उन्हें यह क्रेडिट जो माल वाहनों के खरीद और उन पर होने वाले  खर्च पर मिलती थी मिलती रहेगी .

1. पेसेंजर कार , स्कूटर इत्यादि

देखिये व्यवहारिक रूप से पेसेंजेर कार , स्कूटर , मोटरसाइकिल या कोई भी वाहन जो यात्री वाहन हो अर्थात माल वाहन नहीं है  इत्यादि की खरीद पर लगने वाले जीएसटी की कोई क्रेडिट आपको नहीं मिलेगी चाहे आपने ये वाहन अपने व्यवसाय में काम में लेने के लिए ही क्यों नहीं ख़रीदे हों.

इसी प्रकार से जो भी मरम्मत होती है , स्पेयर लगते हैं जैसे टायर, पार्ट्स  इत्यादि  या इन्शुरन्स करवाते हैं उसपर भी जीएसटी लगता है तो उसकी क्रेडिट भी आपको नहीं मिलेगी .

आप जो कार,  स्कूटर , मोटरसाइकिल इत्यादि मोटर व्हीकल या अन्य यात्री वाहन  खरीदते हैं उनके सम्बन्ध में भी यही नियम है अर्थात उन पर भी आप द्वारा चुकाए हुए जीएसटी की इनपुट क्रेडिट नहीं मिलती हैं ना ही उनके स्पेयर पार्ट्स , टायर ट्यूब इत्यादि की खरीद एवं इन्शुरन्स पर चुकाए गए जीएसटी की इनपुट क्रेडिट मिलती है .

यह पढ़कर आपको निराशा जरुर होगी लेकिन जीएसटी का सामान्य और प्रारम्भ अर्थात 1 जुलाई 2017 से ही  नियम यही है . अब आप पुछेंगे कि इसका क्या कारण है कि ये सब खर्चे एवं खरीद व्यापार के दौरान किये जा रहे हैं फिर भी इनकी कोई इनपुट क्रेडिट क्यों नहीं मिलती है ? इसके पीछे तर्क क्या है ?

इसका जवाब यह है कि ये खर्च एवं खरीद जीएसटी कानून की धारा 17 (5) के तहत ब्लॉक्ड क्रेडिट की श्रेणी में लिए गए हैं  इसलिए हम इनकी क्रेडिट क्लेम नहीं कर सकते हैं लेकिन आपका एक सवाल यह भी है कि इसके पीछे तर्क क्या है तो इसका जवाब कोई नहीं है सिर्फ कानून निर्माताओं ने इसे “ब्लॉक्ड क्रेडिट” की श्रेणी में डाल दिया है इसलिए इस इनकी खरीद पर  यह क्रेडिट नहीं मिलती है और इसी कारण से इनके स्पेयर पार्ट्स, टायर ट्यूब , मरम्मत इत्यादि पर किये खर्चे की इनपुट क्रेडिट भी नहीं मिलती है.

क्या 1 फरवरी 2019 से इस व्यवस्था में कोई परिवर्तन आया है ?

हाँ लेकिन बहुत अधिक नहीं और आपमें से अधिकाँश डीलर्स पर वह व्यवहारिक रूप से लागू नहीं होगा. अब 1 फरवरी 2019 से किया यह गया है कि 13 से अधिक सिटिंग कैपेसिटी (ड्राईवर सहित ) के यात्री वाहनों पर यह “ब्लॉक्ड क्रेडिट” का  नियम लागू नहीं होगा और उनकी खरीद एवं खर्च पर चुकाए जीएसटी की क्रेडिट मिल जायेगी यदि वे वाहन व्यापार या व्यवसाय में काम आ रहें हों . लेकिन व्यवहारिक रूप से आप स्वयं समझते हैं कि 13 से   अधिक सिटिंग कैपेसिटी के वाहनों का कितना प्रयोग आप अपने व्यापार में कर पाते हैं . इसके अतिरिक्त यह भी समझ ले कि यात्री वाहन की कैपेसिटी (ड्राईवर) सहित यदि 13 है या इससे कम है तो यह क्रेडिट नहीं मिलेगी.

हाँ एक बात 1 फरवरी 2019 से एक परिवर्तन और हुआ है और वह यह है कि पहले यात्री मोटर व्हीकल्स के अन्य यात्री वाहन इस ब्लॉक्ड क्रेडिट में जुडे थे लेकिन अब केवल मोटर व्हीकल्स अर्थात कार, स्कूटर , मोटर साइकिल इत्यादि पर ही यह ब्लॉक्ड क्रेडिट का नियम लागू होगा लेकिन व्यवहारिक रूप से इसका कोई बड़ा फर्क नहीं पडेगा.

अब आप यह भी पूछ सकते हैं कि अब  13 से अधिक  पेसेंजेर कैपेसिटी  की गाड़ियों पर इनपुट 1 फरवरी से प्रारम्भ करने के पीछे क्या तर्क है तो यह कानून में लिखा है और इसके पीछे क्या कानून निर्माताओं का तर्क है यह स्पष्ट नहीं है. एक संभावना यह हो सकती है कि सामान्य यात्री वाहन के व्यक्तिगत उपयोग (व्यवसाय के अलावा) काम में आने की संभावना रहती है और इसे किसी पैमाने पर नापा नहीं जा सकता है लेकिन इसके लिए पूरी ही क्रेडिट ब्लाक करने का तर्क समझ नहीं आता है .

आप स्वयम ही सोचिये क्या वाहन , बिल्डिंग ( व्यापार में काम आने वाले बिल्डिंग चाहे वह ऑफिस या फैक्ट्री बिल्डिंग ही क्यों ना हो के  बनाने पर भी लगे मटेरियल एवं सेवाओं पर क्रेडिट नहीं मिलती है ) के बिना वह व्यापार या व्यवसाय हो सकता है जिससे सरकार जीएसटी वसूलना चाहती है ? और विशेष बात तो यह है कि ये बिल्डिंग्स तो कभी व्यापार के अतिरिक्त किसी और काम में आ भी नहीं सकती तो कुल मिला कर अर्थ यह है कि जीएसटी कानून में आप अब तार्किकता देखना छोड़ ही दें तो ठीक रहेगा.

इसके अतिरिक्त 1 फरवरी से जो परिवर्तन लागू हुए हैं उनमें इस प्रकार से जिन यात्री वाहनों पर इनपुट क्रेडिट ब्लॉक की गई है उनपर सर्विस, इन्सुरांस एवं मरम्मत और रख रखाव पर भी दिए गए जीसटी की इनपुट क्रेडिट पर भी  स्पष्ट रूप से प्रतिबन्ध लगा दिया है और इससे एक सवाल और उठता है कि क्या इसके पहले अर्थात 1 जुलाई से इस परिवर्तन तक क्या सर्विस इत्यादि पर यह क्रेडिट ली जा सकती है तो इस सम्बन्ध में प्रारम्भ से ही एक विवाद रहा है और विशेषज्ञों का एक मत था इसे प्राप्त नहीं किया जा सकता है लेकिन इसके विपरीत मत भी थे और प्रारम्भिक जो सरकारी स्पष्टीकरण आये उनमें स्थायित्व नहीं था और इससे और भी भ्रम उत्पन्न हुआ था लेकिन अब लगता है सरकार की मंशा इसे प्रारम्भ से ही  ब्लाक करने की ही थी लेकिन इस सम्बन्ध में विवाद था इसलिए अब इसे और भी अधिक स्पष्ट तरीके से कानून में लिख दिया गया है .   

क्या नियम का कोई अपवाद भी हैं ?

हाँ , यदि ये यात्री वाहन (ड्राईवर सहित 13 यात्री कैपेसिटी तक)  निम्नलिखित कार्यों से प्रयोग हो रहें हैं तो इस “ब्लॉक्ड क्रेडिट” के नियम से बाहर रहेंगे और इनकी खरीद एवं अन्य खर्च पर आपको चुकाए गए जीएसटी की इनपुट क्रेडिट मिल जायेगी :-

1. इन वाहनों को कर योग्य बिक्री करने के लिए खरीदा जाता है .

2. इन वाहनों का प्रयोग यात्रियों को लाने ले जाने की करयोग्य सेवा देने हेतु  किया जाता है .

3. इन वाहनों का प्रयोग इन्हें चलाने की ट्रेनिंग देने की करयोग्य सेवा देने हेतु किया जाता है .

एक और मुख्य बात ध्यान में रखें कि 1 फरवरी 2019 से पूर्व यात्री वाहन यदि माल के लाने –ले जाने में काम आते थे तो उनकी एवं उनपर किये गए खर्च पर चुकाए गए जीएसटी की इनपुट क्रेडिट मिल सकती थी लेकिन अब 1 फरवरी 2019 से इस सम्बन्ध में स्तिथी अलग हो गई है और अब यात्री वाहन जिनपर इनपुट क्रेडिट ब्लॉक कर दी गई है वे यदि माल के लाने –लेजाने के काम आते हैं तो भी उनकी खरीद एवं खर्च पर चुकाए हुए जीएसटी की क्रेडिट नहीं मिलेगी. अब आपको यह ध्यान रखना पडेगा कि माल के लाने –लेजाने के लिए यदि आप इनकी खरीद एवं खर्च पर जीएसटी की क्रेडिट लेनी है तो आप यात्री वाहन की जगह माल वाहन ही खरीदें और यदि आप यात्री वाहन का प्रयोग माल वाहक के रूप में करते हैं तो आपको इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगी.

माल वाहक के सम्बन्ध में इनपुट क्रेडिट

माल वाहक वाहनों पर “ब्लॉक्ड क्रेडिट” का नियम लागू नहीं होता है और इनकी खरीद पर एवं इनपर किये गए खर्च पर चुकाए हुए जीएसटी की क्रेडिट मिलती हैं और इसमें किसी भी प्रकार का विवाद नहीं हैं.

आइये अब देखें कि कारों , स्कूटर इत्यादि पर  इस प्रकार से इनपुट क्रेडिट को ब्लाक करना तार्किक हैं क्या ? तो इसका जवाब यह है कि ऐसा नहीं हैं ना तो इसके बिना व्यापार एवं व्यवसाय किया जा सकता है ना ही मरम्मत एवं स्पेयेर्स के बिना इन्हें चलाया जा सकता है इसलिए यह रोक उचित नहीं हैं लेकिन कानून में यह रोक दी हुई है इसलिए आपको इस समय तो यह छूट नहीं मिल सकती है .

नोट :- इस लेख में दिए विचार लेखक के अपने विचार है . आप विपरीत या संशोधित  विचार के साथ विषय को और भी ज्ञानवर्धक बनाने के लिए अपने विचार Sudhirhalakhandi@gmail.com पर शेयर कर सकते हैं जिनका हमेशा इन्तजार/स्वागत रहेगा.

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5 Comments

  1. Kundan Jha says:

    Yes you will not get bank details option while Filing application for new gst registration so in this case you need firstly to file application for GSTIN after getting GSTIN, you will get bank details tab on portal and you will have to be provided bank details along with GSTIN.

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