CA Sudhir HalakhandiCA Sudhir Halakhandi

जी.एस.टी. को राजनैतिक रूप से जितना प्रचारित किया गया है उसका एक सीधा असर यह हुआ है कि अब यह कर एक “राजनैतिक कर” में परिवर्तित हो चुका है . अब इस कर को लेकर हो यह गया है कि जो भी दल सत्ता में होगा वह इसे किसी भी प्रकार से लागू करना चाहेगा और जो सत्ता के बाहर होगा वह इसका विरोध तो नहीं कर सकेगा पर इसका समर्थन इसे लागू करने में सहयोग भी नहीं करेगा. भारत की अर्थव्यवस्था में बड़े ही सकारात्मक परिवर्तन की क्रांती के रूप में देखे जा रहे इस आर्थिक कर का अब पूरी तरह से राजनीतिकरण हो चुका है जो भारतीय अर्थ व्यवस्था के भविष्य के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है . जी.एस.टी. एक तरह से सत्ता में रहने वाले दल और सत्ता से बाहर दल दोनों के लिए एक राजनैतिक मजबूरी बन गया है .

आइये देखे कि क्या अब भी 1 अप्रैल 2016 से जी.एस.टी. लागू किया जा सकता है जैसा कि दावा किया जा रहा है सरकारी क्षेत्रों से . इसके अतिरिक्त एक और बात जो इन दिनों सामने आ रही है वह जी.एस.टी. की संभावित दर को लेकर है उसकी भी आज हम चर्चा करेंगे.

देखिये जी.एस.टी. संविधान संशोधन बिल अभी सिर्फ लोकसभा से पारित हुआ है और राज्य सभा में इसका पारित होना अभी भी संदेहास्पद बना हुआ है . इस सम्बन्ध में भी दो खबरे आ रही है पहली यह कि सरकार इसके लिए विशेष सत्र बुलाने जा रही है . यह हो सकता है और इस सत्र में यदि जी.एस.टी. बिल पास हो गया तो फिर आगे का रास्ता यह है कि इसे पूरे देश के आधे राज्यों की विधान सभाओं द्वारा अनुमोदित करवाना होगा और इसके बाद राष्ट्रपति महोदय के दस्तखत होंगे . दूसरी खबर यह है कि इसके लिए दोनों सदनों का सयक्त अधिवेशन बुलाया जा सकता है . इस सम्बन्ध में ध्यान देने योग्य बात यह है कि राज्य सभा को यह बिल जो कि “सविधान संशोधन बिल” है अपने ही सदस्यों के द्वारा पारित करना होगा . इस पर संयुक्त अधिवेशन बुलाने का कोई सीधा प्रभाव पड़ने वाला नहीं है . सरकार को सबसे पहले तो इस बिल को राज्य सभा से पारित करवाना ही पडेगा और उसके बाद देश में राज्यों की कम से कम आधी विधान सभाओं से भी इसे अनुमोदित करवाना होगा . यदि जी.एस.टी. बिल राज्य सभा से ही पारित नहीं हो पाता है तो फिर इसके लागू होने का कोई प्रश्न ही नही है और यह तो राजनैतिक दलों की मर्जी पर है कि वे इस बिल को राज्य सभा से पारित होने दें या नही . यही नियम विधानसभों से अनुमोदित करवाते समय भी लागू होगा.

जी.एस.टी. बिल पारित होते ही जी.एस.टी. भारतवर्ष में लागू हो जाएगा ऐसा नहीं है क्यों कि जी.एस.टी. से जुड़े कानून , प्रक्रियाए एवं काम में लिए जाने वाले प्रारूप और सबसे बड़ी बात जी.एस.टी. की दरें उसके बाद ही तय किये जायेंगे और इन सब में भी एक समय लगेगा और इन सबके होते 1 अप्रैल 2016 की समय सीमा निकल जाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है .

इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया पर भी अब जी.एस.टी. का प्रचार जोर शोर प्रारम्भ से हो गया है और यह इस कर से जुड़ा एक और नया संकेत है और यह खबर भी प्रचारित की जा रही है कि जी.एस.टी. की दर 20 प्रतिशत होगी तथा जी.एस.टी. नहीं आने से देश का विकास अवरुद्ध हो जायेगी. यह 20 की दर कहाँ से आई संभव नहीं है और यदि यह सच है तो सरकार को भी इस सम्बन्ध में घोषणा कर अपना पक्ष जी.एस.टी. के सम्बन्ध में मजबूत करना चाहिए. पेट्रोलियम पदार्थो को भी तुरंत जी.एस.टी. में लिए जाने की बातें भी की जा रही है . ये यदि सिर्फ अफवाह है तब भी इनका खंडन तो किया जाना चाहिए.

सरकारी सूत्र जी.एस.टी. से जुडी समस्याओं के बारे में यह भी कहते है कि एक बार जी.एस.टी. लागू होने दीजिये इन समस्याओं के बारे में उसके बाद विचार कर लिया जाएगा. यह भी इस बात का संकेत है कि अब बिना जी.एस.टी. से जुडी समस्याओं के बारे में बिना विचार विमर्श किये जी.एस.टी. लागू करने पर हमारे कानून निर्माता उतारू है और यही सबसे बड़ा संकेत है कि जी.एस.टी. का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो चुका है .

अब आइये देखें कि कोई भी राजनैतिक दल जी.एस.टी. पर चर्चा ही नहीं करना चाहता है और आप राजनैतिक रूप से जी.एस.टी. की खूबियों का तो खूब वर्णन सुनेंगे लेकिन इस कर में , इसे भारत में लगाए जाने वाले प्रारूप में कोई कमी भी है इसके बारे में कोई भी बात करने को तैयार नहीं है . अब जी.एस.टी. के भाग्य का फैसला इसके आर्थिक गुणों-अवगुणों के आधार पर नहीं होकर राजनीति दलों के संख्या बल के आधार पर होगा और यह हमारी अर्थ-यवस्था के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है .

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0 responses to ““जी.एस.टी.” का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो चुका है”

  1. amarjeet singh says:

    It is good articles & write in HINDI .

  2. sushil harsh says:

    nice one

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