सरकार भारत में गुड्स एंड सर्विस टैक्स दिनांक 01/04/2016 से लाने की घोषणा कर चुकी है और इसके लिए सरकारी स्तर पर तैयारी भी चल रही है . क्या होगा भारत में इस कर का भविष्य और क्या संभावना है कि जी.एस.टी. सरकार लागू कर पायेगी उसी तिथी से जिसकी वह घोषणा कर रही है आइये जाने जी.एस.टी. विशेषज्ञ ‘सुधीर हालाखंडी’ से –

प्रश्न – क्या संभावना है कि जी.एस.टी. कि एकल कर के रूप में सभी अप्रत्यक्ष करो को हटा कर 1/04/2016 से प्रभावी हो जाएगा?

सुधीर हालाखंडी – सबसे पहले तो मै आपको यह स्पष्ट कर दूँ कि एक बहुत बड़ी भ्रांती है कि जी.एस.टी. एक एकल कर है . सरकार भी इसका एकल कर के रूप में प्रचार नहीं कर रही है लेकिन यह एक भ्रांती है जो जी.एस.टी. के साथ प्रारम्भ से ही चल रही है .

जी.एस.टी. के तहत बिक्री एवं सर्विस के एक ही व्यवहार पर राज्य एवं केंद्र दोनों अलग –अलग कर वसूल करेंगे. राज्यों द्वारा वसूल किया गया कर एस.जी.एस.टी. और केंद्र द्वारा वसूल किया गया कर सी.जी.एस.टी. के नाम से जाना जाएगा. इस प्रकार भारत में लागू किया जाने वाला जी.एस.टी. एक दोहरा कर है.

प्रश्न – तो जी.एस.टी. एक दोहरा कर है अर्थात यह केंद्र और राज्य दोनों द्वारा अलग-अलग वसूल किया जाएगा . इससे क्या समस्या आ सकती है या यह एक सामान्य अवस्था है ?

सुधीर हालाखंडी – जहाँ तक उन डीलर्स का प्रश्न है जो अभी तक केन्द्रीय उत्पाद शुल्क (सेंट्रल एक्साइज ) का भुगतान करते है उनके लिए तो यह स्तिथी कोई नयी नहीं है क्यों कि अभी भी वे राज्यों का वेट और केंद्र का केन्द्रीय उत्पाद शुल्क का भुगतान कर ही रहे है लेकिन जो डीलर्स केवल वेट का भुगतान कर रहे है उन्हें अब केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किये जाने वाले सी.जी.एस.टी. का भी भुगतान करना पडेगा.

प्रश्न – व्यवहारिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर आप इस स्तिथी को किस तरह से देखते है ?

सुधीर हालाखंडी – देखिये इस समय बहुत सी वस्तुए केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के दायरे में नहीं है और सभी व्यापारी भी इसके दायरे से वाहर है . निर्माताओं के लिए भी केन्द्रीय उत्पाद शुल्क की सीमा 1.50 करोड़ रूपये है अर्थात लघु एवं कुछ सीमा तक मध्यम उद्योग भी इसके दायरे में नहीं है . अब चूँकि जी.एस.टी. के तहत यह सीमा अभी प्राप्त समाचारों के अनुसार 10 लाख रुपये ही होगी एवं निर्माता एवं व्यापारी सभी को सी.जी.एस.टी. का भुगतान करना पडेगा .

प्रश्न – अच्छा ! इस प्रकार से कर का बोझ और बढ़ जाएगा ?

सुधीर हालाखंडी – फिलहाल हम कर के बोझ की बात नहीं कर रहे है क्यों कि जी.एस.टी. एक अप्रत्यक्ष कर है और आख़िरी बोझ तो जनता को ही उठाना है पर यहाँ मुद्दा दूसरा है . इस समय यदि राज्यों के वेट के दायरे में आने वाले डीलर्स की संख्या 100 है तो केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के तहत आने वाले डीलर 5 से भी कम है . अब सभी डीलर्स को “केन्द्रीय गुड्स एंड सर्विस टैक्स- सी.जी.एस.टी.” का भी भुगतान करना होगा इस प्रकार केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर के तहत पहली बार आने आने वाले एवं उससे से जुडी प्रक्रियाओं का पालन करने वाले डीलर्स की संख्या बहुत अधिक होगी . इतने अधिक डीलर्स को एक और कर की प्रक्रियाओं का पालन करना पड़े तो इसे हम करों का सरलीकरण तो नहीं कह सकते है ?

प्रश्न – हां यह तो एक समस्या ही है लेकिन यह बताइए जनता या उपभोक्ता जो इस कर का अंतिम बोझ उठाने वाला है उसे तो कहा जा रहा है कि वस्तुए सस्ती मिलेंगी ?

सुधीर हालाखंडी – यह भी एक अजीब सा दावा प्रतीत होता है . एक तरफ तो यह कहा जा रहा है कि अंतिम उपभोक्ता पर कर का भार कम होगा और दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि सरकार के राजस्व में भी वांछित वृद्धी होगी . यह दोनों एक साथ हो ऐसा इसलिए संभव नहीं है कि जी.एस.टी. एक अप्रत्यक्ष कर है और यदि राजस्व में वृद्धि होती है तो निश्चित रूप से उसका बोझ जनता पर ही पडेगा.

प्रश्न – सरकार कर की दर ही कम रखे तो ?

सुधीर हालाखंडी – इस समय जो सरकारी समाचार है उनके अनुसार जी.एस.टी. की पूरी दर लगभग 27 प्रतिशत तक रह सकती है जिसमे से 12 प्रतिशत राज्य का जी.एस.टी. और 14 प्रतिशत केंद्र का जी.एस.टी. और एक प्रतिशत वे केन्द्रीय बिक्री कर के रूप में वसूलना चाहते है इस प्रकार यह दर करीब –करीब 27 प्रतिशत तक बैठती है .

प्रश्न – आपका इस दर के बारे में क्या विचार है ? क्या यह उचित दर मानी जा सकती है ?

सुधीर हालाखंडी – स्वमं वित्त मंत्री कह चुके है कि इस दर को कम करना चाहिए लेकिन कितनी कम कर सकते है एक या दो प्रतिशत और यदि इससे ज्यादा कम करे तो जो सरकार का जी.एस.टी. के जरिये राजस्व वृद्धी का उद्देश्य है वही पूरा नहीं होगा . अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जी.एस.टी. दर का औसत 16 से 17 प्रतिशत के बीच है और 20 प्रतिशत से अधिक जी.एस.टी. की दर वाले देशों की प्रति व्यक्ती आय भारत की प्रति व्यक्ती आय से लगभग 30 गुना से भी अधिक है . कर की यह ऊँची दर हमारे देश में जी.एस.टी. के लागू होने और इसके बाद इसके सफल होने में बहुत बड़ी बाधा बनने वाली है और बहुत नीची दर सरकार के जी.एस.टी. लगाने के उत्साह को ही कम या ख़त्म कर देगी.

प्रश्न – दो स्तरीय दरो के बारे में आपका क्या विचार है ?

सुधीर हालाखंडी – अतिआवश्यक वस्तुओं पर कर की कम दर एवं अन्य वस्तुओं पर सामान्य दर की बात कभी – कभी सरकारी स्तर पर सुनने को तो मिलती है पर अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं है . लेकिन सब कुछ निर्भर करता है कि सरकार का जी.एस.टी. से कर वसूली या यह कहें कि कर वसूली में वृद्धी का लक्ष क्या है .

प्रश्न – केन्द्रीय बिक्री तो वेट के समय ही समाप्त करने की बात थी और अभी भी सरकार इसे एक प्रतिशत लगाना चाहती है ?

सुधीर हालाखंडी – हाँ वेट लगाते समय ही यह वादा किया गया था कि केन्द्रीय बिक्री कर को प्रतिवर्ष एक प्रतिशत की दर से कम करते हुए समाप्त कर दिया जाएगा . पहले यह चार प्रतिशत था , फिर तीन प्रतिशत किया गया और उसके बाद दो प्रतिशत लेकिन अब यह पिछले कुछ वर्षो से यह दो प्रतिशत पर ही अटका हुआ है . जी.एस.टी. के लागू होने के बाद भी सरकार इसे एक प्रतिशत तक पहले दो सालों तक लगाए रखना चाहती है इसका इशारा जी.एस.टी. के लिए किये जाने संविधान संशोधन विधेयक में सरकार कर चुकी है . इसके साथ ही जी.एस.टी. कौंसिल की सिफारिश पर इसे और आगे बढ़ने का प्रस्ताव भी है .

प्रश्न – क्या यह वादा खिलाफी नहीं है ?

सुधीर हालाखंडी – कर कानूनों को लेकर हमारे कानून निर्माताओ पर ज्यादा भरोसा करना हमारे यहाँ समझदारी की बात अब नहीं रही है इसलिए जो सरकार की मंशा होगी उसी का सभी को पालन करना होगा.

प्रश्न – क्या ऐसा पहले भी हो चुका है ?

सुधीर हालाखंडी – ऐसा कई बार हुआ है लेकिन जब हम अप्रत्यक्ष करों की बात कर रहें है तो मै आपको वेट का ही उदहारण दूंगा . वेट में एक कर की दर 4 प्रतिशत थी जो कि राज्यों ने दो साल में ही बढ़ा कर 5 प्रतिशत कर दी थी और कानूनन यह केंद के हाथ में भी नहीं था कि वो राज्यों को इस वृद्धी करने से रोके. लेकिन आगे देखिये एक कानून था कि केन्द्रीय बिक्री कर की धारा 14 में वर्णित वस्तुओ, जो कि अतिआवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में आती है , पर कर की दर को 4 प्रतिशत से अधिक नहीं किया जा सकता और इसी कारण से राज्य इन वस्तुओ पर कर की दर 4 प्रतिशत से 5 प्रतिशत नहीं कर पाए लेकिन केन्द्रीय सरकार ने केन्द्रीय बिक्री कर की धारा 14 में संशोधन कर इसकी छुट भी राज्यों को दे दी जब कि केंद्र को राज्यों को अन्य वस्तुओं पर भी ऐसा करने से रोकना चाहिए था . इसी से प्रोहत्साहित होकर राज्यों ने उच्चतम दर को भी 12 या 12.5 प्रतिशत से बढ़ा कर 14 या 14.5 प्रतिशत कर दिया .

प्रश्न – एक अंतिम सवाल , क्या जी.एस.टी. 01/04/2016 से भारत में लागू हो जाएगा ?

सुधीर हालाखंडी – देखिये अभी तो सरकार को जी.एस.टी. लगाने की शक्तियाँ ही प्राप्त नहीं हुई है जो कि जी.एस.टी. से सम्बंधित संविधान संशोधन बिल के पास होने पर मिलेंगी और अभी यह विधेयक सिर्फ लोकसभा से पारित हुआ है . राज्य सभा में इसे एक समिती को सोंप दिया गया है जिसकी रिपोर्ट आने पर ही इसे राज्य सभा में पारित होनी के लिए रखा जाएगा. राज्य सभा से संशोधन विधेयक पारित होने के बाद इसे देश के सभी राज्यों में से कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओ से पारित करवाना होगा और इसके बाद राष्ट्रपति महोदय के दस्तखत होंगे . यहाँ तक होने के बाद तो सरकार को जी.एस.टी. लगाने की शक्ति प्राप्त होगी.

इसके बाद केंद्र एवं सभी राज्यों को जी.एस.टी. को लेकर अपने –अपने कानून एवं प्रक्रियाए व् रूल्स बनाने होंगे जो काफी लम्बा और मुश्किल काम होगा क्यों कि अभी तक इस पर कोई ख़ास काम प्रारंभ नहीं हुआ है .

इसलिए भारत में जी.एस.टी. 01/04/2016 से लागू हो जाए ऐसा काफी मुश्किल प्रतीत होता है .

(CA Sudhir Halakhandi may be contacted at sudhirhalakhandi@gmail.com or on 9198280 67256)

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0 responses to “क्या 1 अप्रैल 2016 से लग पायेगा जी.एस.टी – सी.ए. सुधीर हालाखंडी”

  1. satish boob says:

    dear Sudhirbhai i am cent percent affirm your views.in my opinion,the g s t could be enacted not before 1-4-2018 considering all legal hurdles pl.

  2. HARIOM SHARMA says:

    Dear Sir,

    Please also put your comments about official organization of GST with respect to the existing offices of Central Excise and Service Tax /State VAT offices, who will be the final authority and its organization chart and relevance of the present offices and pending cases / records.

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