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Goods and Services Tax

माइनिंग सेक्टर पर RCM टेक्स की डिमांड के सम्बन्ध में राहत दिलवाने के लिए प्रार्थना पत्र

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All India MSME and Tax Professionala Association

Ref:- AIMTPA/001/22-23

Date:- 01-Apr-2022 

माननीया श्रीमती निर्मला सीतारमण जी,
अध्यक्ष, जीएसटी कौंसिल,
नई दिल्ली

महोदया,

विषय :- माइनिंग सेक्टर पर RCM टेक्स की डिमांड के सम्बन्ध में राहत दिलवाने के लिए प्रार्थना पत्र |

उपरोक्त विषय में निवेदन है कि इस समय माइनिंग इंडस्ट्री पर RCM = REVERSE CHARGE MECHNISM, जो कि उनके द्वारा राज्य सरकार को भुगतान की गई रॉयल्टी से सम्बंधित है, के भुगतान के सम्बन्ध में जीएसटी विभाग से नोटिस भी आ रहें है और भुगतान के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है जो कि विभागीय कार्यवाही का हिस्सा है| इस समय हमारा यह सेक्टर 2 साल के कोविड के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहा है, इसलिए यह सेक्टर इस समय यह बोझ उठाने की स्तिथि में नहीं है और इसके अतिरिक्त इस तरह के RCM का भुगतान ना होने से कोई वितीय प्रभाव भी नहीं पड़ता है, और तो और इससे सरकार की आय पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, क्युकी इसको चुकाने के बाद करदाता वापिस इसकी क्रेडिट अपने आउटपुट कर के समक्ष ले लेता है, इसके लिए हम आपके समक्ष निम्नलिखित तथ्य रख रहें है ताकि आप इस सेक्टर को वांछित राहत देने की व्यवस्था कर सकें और यह सेक्टर इस समय और आर्थिक संकट से बचाया जा सके|

Application for relief in respect of demand of RCM tax on mining sector

महोदया, वैसे तो जीएसटी में RCM एक कर भुगतान की व्यवस्था है जिसके तहत कुछ वांछित माल और सेवाओं की आवक पर प्राप्त करने वाले को कर का भुगतान करना होता था और फिर उसी माह में इसकी इनपुट क्रेडिट लेनी होती थी अर्थात अधिकाँश मामलों में इसका कोई वित्तीय प्रभाव नहीं होता था, विशेष तौर पर जब कि प्रभावित डीलर्स उस सेक्टर से आते हैं जहां बिक्री की जाने वाली वस्तु करयोग्य है अर्थात भुगतान किये जाने वाले RCM की इनपुट क्रेडिट तो मिलनी ही थी|

इस सेक्टर के सभी डीलर्स ने करयोग्य माल ही बेचा है और अपने कर का भुगतान भी बराबर किया है इस प्रकार यदि वे RCM के तहत कर का भुगतान कर देते तो उन्हें बाकी कर का कम भुगतान करना होता और इस तरह से सरकार को प्राप्त होने वाला कर वही होता है जितना भुगतान वे अभी तक कर चुके हैं| RCM सिर्फ उनके कर भुगतान करने के तरीके को बदल देता लेकिन इससे सरकार के कुल राजस्व पर कोई फर्क नहीं पड़ता|

क्रमश :

RCM के तहत सरकार को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ती तभी होती जब कि बेचे जाने वाला माल कर मुक्त हो लेकिन माइनिंग सेक्टर में ऐसा नहीं है, इसको निन्म्नलिखित उदाहरण के द्वारा समझने का प्रयास करते है:-

A नाम के इस माइंस के मालिक को माह मार्च 2020 में कुल 1 लाख रूपये का भुगतान आउटपुट टैक्स के रूप में करना था और इसी माह उन्होंने राज्य सरकार को रॉयल्टी का 50 हजार रूपये का भुगतान किया जिस पर 18% की दर से 9000.00 का RCM का भुगतान करना था|

A यदि RCM का भुगतान करता है तो फिर वह 9000.00 का भुगतान RCM के रूप में करता है और उसकी इनपुट क्रेडिट इसी माह में ले भी लेता है और सामान्य कर के रूप में 1 लाख रूपये में से 9000.00 की RCM इनपुट कम करके 91 हजार रूपये का भुगतान करता है, इस प्रकार से उन्होंने कुल कर का भुगतान 1 लाख रूपये (9 हजार रूपये RCM + 91 हजार रुपए) किया है|

यदि वे RCM का भुगतान तकनीकी रूप से नहीं करते हैं तो भी वो सीधे तौर पर ही आउटपुट के रूप मे 1 लाख रूपये के कर का भुगतान करेंगे और वास्तविक रूप से ऐसे में भी सरकार को कुल कर का भुगतान भी 1 लाख रूपये ही होगा |

इस प्रकार से स्पष्ट है कि RCM का माइनिंग सेक्टर में केवल कर के भुगतान का एक तरीका है जिसका पालन नहीं करना एक तकनीकी भूल है जिसका कोई भी वितीय प्रभाव नहीं है क्योंकि ये सभी डीलर्स तो अपने कर का भुगतान कर चुके हैं और यदि इन्होने RCM का भुगतना नहीं किया है तो उसकी इनपुट क्रेडिट भी नहीं ली है, इस प्रकार से उनके द्वारा भुगतान किये गए कर में कोई कमी नहीं हुई है ना ही कोई कम कर का भुगतना हुआ है|
अत: आपसे निवेदन है कि उक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अब माइनिंग सेक्टर को 2017 जुलाई से अभी तक के RCM की मांग से राहत देने का कष्ट करें ताकि यह सेक्टर जो कि पहले ही आर्थिक मंदी को झेल रहा है उसे इस समय तत्काल राहत मिल सके|

धन्यवाद   

 जय हिन्द

भवदीय

Team AIMTPA

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