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आयकर विवरणी की ऑफलाइन यूटिलिटी v/s आयकर विवरणी दाखिल करने की नियत तिथी बढ़ाने की माँग वित्तीय वर्ष 2020-2021

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वित्तीय वर्ष 2020-2021 के लिए CBDT ने दिनांक 03.04.2021 को आयकर फॉर्म्स जारी कर दिए  एवं ITR-1 और ITR-4 की ऑफलाइन यूटिलिटी जारी  कर दी है I

ज्ञात रहे कि आयकर फॉर्म्स जारी कर देने मात्र या आयकर विवरणी की ऑफलाइन यूटिलिटी जारी कर देने मात्र से करदाता अपनी आयकर विवरणी दाखिल कर  सकता, यह एक प्रश्न ही है I

  देखा जाये तो पिछले पांच वर्षो से हमेशा आयकर विवरणी दाखिल करने की तिथियां निम्ननुसार बढ़ाई गयी

क्रमांक वित्तीय वर्ष नियत तिथी बढाई गई तिथी आदेश संख्या एवं जारी करने की दिनांक
1 2019-20 31 जुलाई 2020 10 जनवरी 2021 PRESS RELEASE ON 30.12.2020
2 2018-19 31 जुलाई 2019 31 अगस्त 2019 F.NO.225/157/2019/ITA.II DT. 23.07.2019
3 2017-18 31 जुलाई 2018 31 अगस्त 2018 F.NO.225/242/2018/ITA.II DT. 26.07.2018
4 2016-17 31 जुलाई 2017 5 अगस्त 2017 PRESS RELEASE ON 31.07.2017
5 2015-16 31 जुलाई 2016 5 अगस्त 2016 F.NO.225/195/2016/ITA.II DT. 29.07.2016

जिसका मुख्य कारण देश के विब्भिन  उच्च न्यायालयो  द्वारा दिए गए न्यायिक निर्णय  है जिनमे CBDT  द्वारा  आयकर फॉर्म्स  समय पर जारी न करना मुख्य  बताया गया इसी  मद्देनजर CBDT ने वित्तीय वर्ष 2020-2021 के लिए आयकर फॉर्म्स 03.04.2021 को ही जारी कर दिए लेकिन आयकर फॉर्म्स जारी कर देने मात्र से या  आयकर विवरणी की ऑफलाइन यूटिलिटी जारी कर देने की उपयोगिता  तब तक नहीं जब तक क़ि :-

1. ऑफलाइन यूटिलिटी या जारी किये गए ITR फॉर्म्स के साथ  साथ ऑनलाइन यूटिलिटी  भी जारी करे ताकि करदाता अपनी आयकर विवरणी समय पर दाखिल कर सके I वित्तीय वर्ष 2020-2021 के लिए ऑनलाइन यूटिलिटी आज दिनांक 29.04.2021 तक जारी नहीं हुई है I

2. टीडीएस की चतुर्थ तिमाही विवरणी दाखिल करने की नियत तिथी 31 मई  होती है जबकि कटौती किये गए टीडीएस  का सर्टिफिकेट नियत तिथी से पन्द्रह दिन के  भीतर जारी करना होता है , इसका सीधा अर्थ यह है क़ि  करदाता 15 जून से पहले अपनी आयकर विवरणी दाखिल नहीं कर सकता  जबकि आयकर विभाग द्वारा आगाह  किया जाता है कि  करदात अपनी आयकर विवरणी दाखिल करने से पहले अपनी कटौती किये गए टैक्स की मिलान फॉर्म् न  26AS से कर ले I अतः टीडीएस की चतुर्थ तिमाही की विवरणी दाखिल करने की नियत तिथी और आयकर विवरणी दाखिल करने की तिथि में सामंज्यस स्थापित किया जाना चाहिए I

3. कई बार आयकर विभाग द्वारा अंतिम तिथियों पर यूटिलिटी या स्कीमा  में संसोधन किया जाता है, ज्ञात रहे की देश में टैक्स सम्बंधित अधिकतम कार्य कर सलाहकार और चार्टेड अकाउंटेंट  द्वारा विब्भिन सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है I जब भी विभाग द्वारा यूटिलिटी में संसोधन किया जाता है तो  सॉफ्टवेयर प्रदाता कंपनिया  भी अपने टेक्निकल सपोर्ट से यूटिलिटी को अद्यतनीकरण करती है इस हेतु उन्हें पर्यापत समय की आवश्यकता होती है अतः यूटिलिटी में अंतिम समय पर संसोधन न किया जाकर उपरोक्त त्रुटि को अगले वर्ष के लिए पहले से ही संधारित कर देना चाहिए I

4. आयकर विवरणी की नियत तिथी या  बढाई जाने वाली तिथि निर्धारित करते समय सम्बंधित माह कि  अन्य टैक्स ( GST, TDS, COMPANY LAW etc.) सम्बंधित कार्यो की तिथियां  भी ध्यान में रखनी चाहिए क्योंकि एक ही समय में कर सलाहकार और चार्टेड अकाउंटेंट  द्वारा समस्त कार्यो को पूरा कर पाना संभव नहीं है साथ ही उनमे त्रुटि की सम्भावना भी रहती है I

भवदीय

[भरत काबरा]

अधिवक्ता एवं कर सलाहकार

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Author Info

BHARAT KABRA
Name: BHARAT KABRA
Qualification: LL.B / Advocate
Location: CHITTORGARH, Rajasthan
Articles Published: 2

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