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कानूनी अधिकार के बिना जीएसटी संग्रह नहीं किया जाएगा। (जीएसटी will not be collected without legal Authority.)

यह कि धारा 67सर्च एंड सीजर. … (Section 67. Power of inspection, search and seizure) के अंतर्गत अधिकारी के द्वारा दबाव डालकर करदाता से DRC 03 के माध्यम से कर जमा कराया जाता हैI जो धारा 67 की प्रक्रिया के तहत जमा नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन कर अधिकारी इस तरह का दबाव डालकर अनावश्यक रूप से DRC 03 के द्वारा कर् जमा करते हैं ,जो बिना कानूनी अधिकार के कर का संग्रह करने जैसा है। क्योंकि कर अधिकारी इसके संबंध में कोई भी आदेश या जमा की रसीद जारी नहीं कर सकते ।लेकिन दबाव के तहत करदाता के द्वारा DRC 03 से कर्ज जमा कराया जाता हैI इसी संदर्भ में यह लेख प्रस्तुत है-

यह कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 265 में यह प्रावधान है कि कर (Tax)का संग्रह कानून के अधिकार से ही होना चाहिए। यदि कर (Tax)किसी कानून के अधिकार के बिना एकत्र किया जाता है, तो यह किसी व्यक्ति को बिना किसी कानून के अधिकार के उसकी संपत्ति से वंचित करने के समान होगा और भारत के संविधान के अनुच्छेद 300 A के तहत उसके अधिकार का भी उल्लंघन होगा। इस प्रकार, स्व-मूल्यांकन कर को छोड़कर, जीएसटी अधिनियम के तहत कोई भी कर(Tax) न्यायनिर्णयन आदेश DRC 07 जारी किए बिना एकत्र नहीं किया जा सकता है। निम्न निर्णय से यह विषय स्पष्ट है –

दिवाकर एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड बनाम सीसीजीएसटी (दिनांक 14 मार्च, 2023)। 2023

यह कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी को ब्याज सहित 1,99,90,000/- रुपये वापस करने का निर्देश देने की मांग की ।

लेकिन भारत के संविधान के अनुच्छेद 265 में कहा गया है कि कर (Tax)का संग्रह कानून के अधिकार से होना चाहिए।

यह कि कर (Tax) किसी कानून के अधिकार के बिना एकत्र किया गया है, तो यह किसी व्यक्ति को बिना किसी कानून के अधिकार के उसकी संपत्ति से वंचित करने के समान होगा और भारत के संविधान के अनुच्छेद 300 A के तहत उसके अधिकार का भी उल्लंघन होगा ।

यह कि आरोपित राशि स्वीकार करने के बाद उचित अधिकारी द्वारा कोई रसीद नहीं दी गई । इस प्रकार, याचिकाकर्ता द्वारा विरोध के तहत जमा की गई राशि वापस की जाने योग्य थी, क्योंकि याचिकाकर्ता को उसके अधिकार से वंचित किया गया है ।

यह कि वर्तमान मामले में, जीएसटी विभाग के अनुसार, याचिकाकर्ता ने स्वेच्छा से आरोपित राशि जमा की है और उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है।

टिप्पणी- यह कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 265 में यह प्रावधान है कि कर का संग्रह कानून के अधिकार से होना चाहिए। यदि कर किसी कानून के अधिकार के बिना एकत्र किया जाता है, तो यह किसी व्यक्ति को बिना किसी कानून के अधिकार के उसकी संपत्ति से वंचित करने के समान होगा और भारत के संविधान के अनुच्छेद 300 A के तहत उसके अधिकार का भी उल्लंघन होगा। वर्तमान मामले में, आरोपित राशि स्वीकार करने के बाद उचित अधिकारी द्वारा कोई रसीद नहीं दी गई। इस प्रकार, याचिकाकर्ता द्वारा विरोध के तहत जमा की गई राशि उपर्युक्त निर्णयों के मद्देनजर वापस किए जाने योग्य थी, क्योंकि याचिकाकर्ता को उसके अधिकार से वंचित किया गया है।

उच्च न्यायालय ने प्रतिवादी को 6% ब्याज के साथ 1,99,90,000/- रुपये की राशि वापस करने का निर्देश दिया जाता है।

यह कि उपरोक्त निर्णय के पश्चात केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड तथा गुजरात राज्य के केंद्रीय/राज्य कर के मुख्य आयुक्त को उपयुक्त परिपत्र/निर्देशों के माध्यम से निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया गया कि-

1) किसी भी परिस्थिति में केंद्रीय/गुजरात माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 67 के तहत तलाशी/निरीक्षण कार्यवाही के समय चेक, नकद, ई-भुगतान या इनपुट टैक्स क्रेडिट के समायोजन द्वारा किसी भी तरीके से वसूली नहीं की जानी चाहिए।

(2) यदि करदाता DRC-03 फॉर्म दाखिल करके स्वैच्छिक भुगतान करने के लिए आगे आता है, तो भी करदाता को तलाशी कार्यवाही समाप्त होने के अगले दिन और दौरा करने वाली टीम के अधिकारियों के करदाता के परिसर से चले जाने के बाद फॉर्म DRC-03 दाखिल करने के लिए कहा/सलाह दी जानी चाहिए।

(3) यदि करदाता को तलाशी कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान किसी भी तरीके से भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया हो तो तलाशी कार्यवाही समाप्त होने के बाद शिकायत/शिकायत दर्ज करने की सुविधा करदाता को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

(4) यदि करदाता द्वारा शिकायत दर्ज की जाती है और अधिकारी को पूर्वोक्त निर्देशों की अवहेलना करते हुए पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।

निष्कर्ष-

यह कि उपरोक्त निर्णय से स्पष्ट है कि कानूनी अधिकार के बिना कर(Tax )का संग्रह नहीं किया जा सकता। सभी टैक्स प्रोफेशनल ने यदा कदा सुना होगा कि जीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 67सर्च एंड सीजर. . . (Section 67. Power of inspection, search and seizure) में अधिकारियों द्वारा दबाव दिया जाता है कि वह DRC 03 के माध्यम से कर जमा करें ।चाहे उसकी परिस्थिति प्रतिकूल हो । यह धारा 67 में ही नहीं अन्य धाराओं में जो कार्रवाई की जाती है,उसके लिए भी न्यायिक निर्णय है। यह उपरोक्त निर्णय उपयोगी सिद्ध होगा।

डिस्क्लेमर- यह लेखक के निजी विचार हैं।

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मेरा नाम संजय शर्मा हैं।मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में इनडायरेक्ट टैक्सेस में वकालत करता हूं ।तथा मेरी शैक्षिक View Full Profile

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