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झारखंड के अधिवक्ताओं के लिए स्वर्णिम दिवस।

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दिनांक 6 सितंबर 2024,  दिन शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, झारखंड सरकार ने वकीलों के लिए बीमा, वजीफा और पेंशन की पेशकश करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी,।नए स्वीकृत विधेयक के तहत, झारखंड में सभी 30,000 अधिवक्ताओं को ₹5 लाख का चिकित्सा बीमा कवर मिलेगा। इसके अतिरिक्त, सरकार ने एक पेंशन योजना जीवन बीमा और नए अधिवक्ताओं के लिए वजीफा के रूप में विधायक स्वीकार किया है नए अधिवक्ताओं को प्रैक्टिस की प्रारंभिक 5 वर्ष प्रति ₹5000 का प्रावधान किया गया है। झारखंड अधिवक्ता समाज के लिए यह अति महत्वपूर्ण दिवस साबित हुआ है।

झारखंड के महाधिवक्ता राजीव राजन, जिन्होंने इस विचार का प्रस्ताव रखा, ने कानूनी पेशे का समर्थन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रति वक्त पर प्रकाश डाला कि वकील वित्तीय चिताओं के बिना प्रैक्टिस कर सकें।

अब झारखंड की वकीलों की बल्ले-बल्ले होगी ,अब  14 हजार पेंशन और हेल्थ बीमा का लाभ भी प्राप्त होगा।वकीलों ने प्रोजेक्ट भवन में सीएम का किया अभिनंदन, समारोह आयोजित किया गया। 

राज्य की हेमंत सोरेन सरकार में वकीलों की बल्ले-बल्ले हो गयी है. अब 65 साल की अवधि पूरी होने या लाइसेंस सरेंडर करने पर वकीलों को 14 हजार रुपए पेंशन मिलेगी. जिसका वहन राज्य सरकार करेगी. इसके अतिरिक्त सभी निबंधित अधिवक्ताओं को प्रथम पांच वर्ष की अवधि के दौरान  वजीफा भत्ता को एक हजार रुपए से बढ़ाकर पांच हजार कर दिया गया है. इसकी 50 प्रतिशत के समतुल्य राशि राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी. राज्य सरकार मेडिकल इंश्योरेंस और मेडिक्लेम भी देगी. यह राशि वार्षिक अब छह हजार रुपए प्रति अधिवक्ता बतौर अनुदान झारखंड अधिवक्ता कल्याण निधि को राज्य सरकार उपलब्ध कराई जाएगी.

इस पर सरकार नौ करोड़ रुपए खर्च करेगी. इसका लाभ राज्य के 15 हजार अधिवक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा. यह निर्णय शुक्रवार 06 सितम्बर 2024 को मुख्यमंत्री हेंमत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया. मुख्यमंत्री के इस निर्णय के बाद अधिवक्ता प्रोजेक्ट भवन में पहुंचे और सीएम हेमंत सोरेन का अभिनंदन किया और उनके साथ जश्न मनाया. 

सीएम बोले : सभी के मान-सम्मान व कल्याण के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।मुख्यमंत्री ने सभी का अभिवादन स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार राज्य के अधिवक्ता समाज के प्रति समर्पित है. सभी का मान- सम्मान और कल्याण तथा उनके हितों का संरक्षण हमारी प्रतिबद्धता है. इसी बात को ध्यान में रखकर हमारी सरकार ऐसी नीतियां और निर्णय लेने पर विशेष जोर देती है, जिससे अधिवक्ता समाज के हर वर्ग को  लाभान्वित हो ,एवं सरकार की योजनाओं से कोई अधिवक्ता वंचित न रहे. हमारा प्रयास सभी की भागीदारी से झारखंड को एक खुशहाल प्रदेश बनाना है।.

तमिलनाडु और पुडुचेरी की बार काउंसिल भी सक्रिय रही है, जिसने चेन्नई, मदुरै और कोयंबटूर जैसे प्रमुख शहरों में काम करने वाले जूनियर वकीलों के के लिए न्यूनतम ₹20000 का वजीफा अनिवार्य कर दिया है। यह निर्देश मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है ,जिसमें जूनियर वकीलों को न्यूनतम वजीफा भुगतान लागू करने की आवश्यकता बताई गई थी

एक अन्य संबंधित घटनाक्रम में, दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को छह सप्ताह के भीतर जूनियर वकीलों को न्यूनतम वजीफे के लिए आदेश दिया है।

निष्कर्ष-

उपरोक्त लेख से स्पष्ट है कि देश में कुछ राज्य सरकार अधिवक्ता समाज के लिए कार्य करने के लिए तत्पर है ।निश्चित रूप से झारखंड के अधिवक्ता समाज को एक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की ओर उठाए गए इस कदम से वहां के अधिवक्ता को लाभ होंगा।लेकिन अभी देश में अधिवक्ता समाज के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल केंद्र सरकार ने पारित नहीं किया है और अन्य राज्यों द्वारा ऐसी कोई सामाजिक सुरक्षा की योजना प्रस्तुत नहीं की है, जिससे अधिवक्ता समाज के सदस्य स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। हाल फिलहाल की घटनाओं से स्पष्ट है ,कि अपराधी अधिवक्ता समाज पर लगातार हमले कर रहे हैं। जिसकी रोकथाम के लिए अति आवश्यक है । कि अधिवक्ता समाज को सामाजिक सुरक्षा और एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल को शीघ्र पास करके सुरक्षा की भावनाओं को मजबूत करें। मेरा बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से अनुरोध है कि प्रदेश में बढ़ती हुई घटनाओं को देखते हुए अधिवक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ हिंसक घटनाओं से बचाने का प्रयास होना चाहिए ।आशा है कि शीघ्र ही बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश भी इस विषय में एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल  राज्य सरकार से पास  कराने का प्रयास करेगी।

यह लेखक के निजी विचार है।

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