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EDPMS (Export Data Processing and Monitoring System) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संचालित एक अनिवार्य डिजिटल प्रणाली है, जो निर्यात शिपमेंट और विदेशी भुगतान की रीयल-टाइम निगरानी करती है। यह प्रणाली सीमा शुल्क, बैंकों और निर्यातकों को जोड़कर शिपिंग बिल और आवक प्रेषण का तुरंत मिलान करती है, जिससे निर्यातकों को भुगतान शीघ्र प्राप्त होता है और FEMA के अंतर्गत अनुपालन आसान बनता है। EDPMS ने कागजी कार्यवाही को समाप्त कर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाया है। निर्यात के बंद होने पर बैंक e-BRC या FIRA जारी करता है, जो GST रिफंड और निर्यात प्रोत्साहन के लिए अनिवार्य है। भौतिक वस्तुओं और सॉफ्टवेयर के सभी निर्यातकों के लिए EDPMS अनिवार्य है। समय पर क्लोजर न होने पर निर्यातक कॉशन लिस्ट में डाले जा सकते हैं, जिससे भविष्य के निर्यात और लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

तेज़ भुगतान: EDPMS भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और आपके बैंक को शिपमेंट की रीयल-टाइम जानकारी देता है। बैंक तुरंत आपकी शिपिंग बिलों के साथ भुगतानों का मिलान कर सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारतीय निर्यातकों को देय सभी भुगतान प्राप्त हो गए हैं और उनका हिसाब रखा गया है। इसका मतलब है कि आपके खाते में धनराशि जल्दी जारी हो जाती है।

आसान अनुपालन (Smoother Compliance): निर्यात डेटा को केंद्रीकृत करके, EDPMS रिपोर्टिंग को स्वचालित (automate) करता है। जैसा कि एक उद्योग स्रोत कहता है, यह “RBI के दिशानिर्देशों और विदेशी मुद्रा नियमों का पालन सुनिश्चित करता है,” जिससे आपको दंड (penalties) से बचने में मदद मिलती है।

कम कागजी कार्रवाई: EDPMS से पहले, निर्यातकों को ढेर सारे फॉर्म भरने पड़ते थे। अब यह प्रक्रिया डिजिटल हो गई है। RBI की प्रेस विज्ञप्ति में EDPMS को एक “प्रमुख हरित पहल” बताया गया है जो कागज और मैनुअल डेटा प्रविष्टि को समाप्त करती है। अब आप बैंक के चक्कर लगाने के बजाय अपने व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

पूर्ण पारदर्शिता (Full Transparency): EDPMS सीमा शुल्क (Customs) और बैंकों को जोड़ता है, ताकि आप अपने निर्यात की स्थिति ऑनलाइन देख सकें। यह सिस्टम “एक बिखरी हुई प्रक्रिया को एक सुचारू, एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ़्लो में बदल देता है।” आपको पता चल जाएगा कि आपका शिपमेंट कब स्वीकार किया गया, भुगतान कब लंबित है, और यह कब बंद हुआ।

प्रोत्साहन और GST रिफंड का दावा: जब आपका बैंक EDPMS में निर्यात को बंद (close) कर देता है, तो वह एक विदेशी आवक विप्रेषण सलाह (FIRA) या eBRC जारी करता है। निर्यात प्रोत्साहन (Export Incentives) और GST रिफंड का दावा करने के लिए ये आवश्यक प्रमाण हैं। EDPMS का सही उपयोग यह सुनिश्चित करता है कि आपको ये लाभ आसानी से मिलें।

EDPMS की आवश्यकता किसे है? भारत से सभी भौतिक सामान (physical goods) और सॉफ्टवेयर निर्यातक जो SOFTEX के अंतर्गत आते हैं, उन्हें EDPMS का उपयोग करना अनिवार्य है। इसमें MSMEs, अमेज़न ग्लोबल सेलर्स, ई-कॉमर्स निर्यातक और विदेश में शिपिंग करने वाले अन्य नए जमाने के निर्यातक शामिल हैं।

फ्रीलांसर: जो फ्रीलांसर सेवाएं प्रदान करते हैं, वे आमतौर पर EDPMS का उपयोग नहीं करते हैं, क्योंकि वे शिपिंग बिल दाखिल नहीं करते हैं। यदि आप सामान या सॉफ़्टवेयर निर्यात करते हैं, तो किसी भी समस्या से बचने के लिए सुनिश्चित करें कि प्रत्येक खेप (consignment) और प्रेषण (remittance) EDPMS में रिपोर्ट किया गया है।

EDPMS किसके लिए प्रासंगिक है? यह मुख्य रूप से उन माल और सॉफ़्टवेयर निर्यातकों के लिए है जो शिपिंग बिल और SOFTEX फ़ॉर्म से जुड़े हैं। निर्यातकों को अपने निर्यात के मूल्य की घोषणा करने और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत RBI के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक SOFTEX फॉर्म भरना होगा।

बैंकों के लिए: बैंक EDPMS का उपयोग शिपिंग बिल डाउनलोड करने, आवक प्रेषण (inward remittances) के साथ डेटा का मिलान करने और निर्यातित खेप की स्थिति को ट्रैक करने के लिए करते हैं।

चेतावनी: भारत में निर्यातकों के लिए EDPMS क्लीयरेंस अनिवार्य है। यदि निर्यातक EDPMS आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रहते हैं, तो उनके बैंक उन्हें “कॉशन लिस्ट” (Caution List) में डाल सकते हैं।

EDPMS का उपयोग कैसे करें (सरल चरण)

1. बैंक के साथ अपना IEC पंजीकृत करें: सुनिश्चित करें कि आपका निर्यातक आयातक कोड (IEC) EDPMS पोर्टल में आपके अधिकृत बैंक से जुड़ा हुआ है।

2. अपना माल निर्यात करें और शिपिंग बिल प्राप्त करें: हमेशा की तरह सीमा शुल्क पर शिपिंग बिल दाखिल करें। सुनिश्चित करें कि सभी निर्यात दस्तावेज (चालान, पैकिंग सूची, बिल ऑफ लैडिंग, यदि लागू हो तो सॉफ्टेक्स फॉर्म) तैयार हैं।

3. 21 दिनों के भीतर बैंक में दस्तावेज जमा करें: अपने बैंक को डुप्लिकेट शिपिंग बिल, चालान आदि दें। बैंक शिपिंग बिल डेटा को EDPMS में अपलोड करेगा (स्थिति: लंबित स्वीकृति/Pending Acknowledgement)।

4. EDPMS के माध्यम से भुगतान ट्रैक करें: एक बार जब आपका विदेशी खरीदार भुगतान करता है, तो आपके बैंक को आवक विप्रेषण (Inward Remittance) प्राप्त होता है और रसीद के प्रमाण के रूप में FIRA जारी करता है। बैंक फिर भुगतान विवरण के साथ EDPMS को अपडेट करता है (स्थिति: भुगतान/Payment)।

5. EDPMS पर निर्यात बंद करें: भुगतान के साथ निर्यात दस्तावेजों का सत्यापन और मिलान करने के बाद, बैंक एक e-BRC (इलेक्ट्रॉनिक बैंक प्राप्ति प्रमाणपत्र) बनाता है। यह प्रमाणपत्र पुष्टि करता है कि EDPMS पर निर्यात बंद हो गया है और यह GST रिफंड या निर्यात प्रोत्साहन का दावा करने के लिए आवश्यक है।

(EDPMS स्थिति ICEGATE पर देखी जा सकती है: Public Enquiries > RBI-SB-EDPMS Enquiry चुनें और अपना शिपिंग बिल नंबर और तारीख दर्ज करें)

छोटे मूल्य की प्रविष्टियों के लिए तेज़ क्लोजर (अक्टूबर 2025 नियम) प्रति शिपिंग बिल ₹10 लाख तक की प्रविष्टियों के लिए, बैंक निर्यातक की घोषणा (declaration) के आधार पर EDPMS को मेल (reconcile) या बंद कर सकते हैं। वे उसी घोषणा पर चालान मूल्य में कमी (invoice value reductions) को स्वीकार कर सकते हैं और त्रैमासिक समेकित घोषणाएं भी ले सकते हैं।

EDPMS कॉशन लिस्ट (Caution List) क्या है? EDPMS कॉशन लिस्ट उन निर्यातकों को फ्लैग करने का RBI का तरीका है जिनके पास लंबित निर्यात भुगतान या अनुपालन मुद्दे हैं। FEMA दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी निर्यात शिपिंग बिलों को शिपमेंट के 9 महीनों के भीतर बंद किया जाना चाहिए।

यदि आप कॉशन लिस्ट में हैं तो क्या होगा?

  • आपके भविष्य के निर्यात शिपमेंट में देरी हो सकती है।
  • आपको निर्यात लाभ या प्रोत्साहन से वंचित किया जा सकता है।
  • हर नए लेन-देन की बैंकों या सीमा शुल्क द्वारा अधिक जांच की जा सकती है।

क्या यह अभी भी स्वचालित (Automatic) है? अब नहीं। पहले (2016 के नियम के अनुसार), यदि 2 साल के भीतर शिपिंग बिल बंद नहीं होता था तो निर्यातक अपने आप सूची में जुड़ जाते थे। लेकिन अक्टूबर 2020 में RBI ने सिस्टम को अपडेट किया। अब, आपके अधिकृत डीलर (AD) बैंकों के पास यह विवेक है कि यदि उन्हें कुछ असामान्य लगता है तो वे मैन्युअल रूप से निर्यातकों को कॉशन लिस्ट में जोड़ सकते हैं।

सुझाव: भुगतानों पर हमेशा नज़र रखें और समय पर EDPMS पर शिपिंग बिल बंद करने के लिए अपने बैंक के साथ समन्वय करें।

EDPMS बनाम IDPMS: क्या अंतर है? जबकि दोनों भारत में व्यापार गतिविधियों की निगरानी के लिए आवश्यक उपकरण हैं:

  • EDPMS विशेष रूप से निर्यात (Export) लेनदेन के प्रबंधन के लिए है।
  • IDPMS (आयात डेटा प्रसंस्करण और निगरानी प्रणाली) आयात (Import) लेनदेन पर केंद्रित है, यह सुनिश्चित करता है कि देश में आने वाले माल के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं।

Author Bio

CS Piyush Goyal is an associate member of the ICSI and the founder of Piyush Goyal & Associates (Practicing Company Secretaries Firm) based in Jaipur. I am a competent professional having great post-qualification experience in GST, Income tax, Corporate Law, Labour law, SEBI, RBI etc. I have View Full Profile

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