यह कि जीएसटी अधिनियम 2017 में जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने से पूर्व अपीलार्थी को एक चेकलिस्ट जो धारा 112 जीएसटी अधिनियम के अंतर्गत के लिए जारी की गई है ।करदाता जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील फाइल करने से पहले इस चेक लिस्ट के अनुसार अपनी अपील दाखिल करें। साथ ही एडवोकेट और टैक्स प्रोफेशनल के लिए भी एक सलाह प्रस्तुत की जा रही है, जो काफी लाभप्रद होगी। इस चेकलिस्ट का वर्णन निम्न प्रकार है-
1. आदेश / दस्तावेज़ अपलोड-
1.1 यह कि अपीलीय / पुनरीक्षण प्राधिकारी का आदेश (स्व-प्रमाणित कॉपी)।
1.2 यह कि उचित अधिकारी (Sec. 107 / 108 में दाखिल मूल आदेश) की स्व-प्रमाणित कॉपी।
1.3 यह कि अपीलीय / पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा जारी सभी नोटिस (स्व-प्रमाणित कॉपी)।
1.4 यह कि उचित अधिकारी द्वारा जारी शो कॉज़ नोटिस / बयान (स्व-प्रमाणित कॉपी)।
1.5 यह कि यदि कोई आदेश/नोटिस अंग्रेज़ी के अतिरिक्त भाषा में है तो उसका अंग्रेज़ी अनुवाद अपलोड।(नियम23 के अंतर्गत)
1.6 यह कि अनुवाद की शुद्धता का शपथपत्र (अपीलार्थी/ अधिकृत प्रतिनिधि / अनुवादक द्वारा)।
2. विवाद का विवरण-
2.1 यह कि ट्रिब्यूनल में जिन मुद्दों पर विवाद है, वे स्पष्ट रूप से लिखे जाय।
2.2 यह कि विवाद का सारांश (Case Summary) दिया गया है या नहीं।
2.3 यह कि तथ्य विवरण (Statement of Facts) शामिल किए गए हैं या नहीं ।
3. तकनीकी व प्रक्रियात्मक अनुपालन-
3.1 यह कि सभी अपलोड किए गए दस्तावेज़ डिजिटल हस्ताक्षरित होगे।
3.2 यह कि सभी दस्तावेज़ रंगीन स्कैन (मूल प्रति से, A4 साइज, निर्धारित DPI, कोई पन्ना गायब नहीं) मेंअपलोड हो।
3.3 यह कि पृष्ठ संख्या (Pagination), अनुक्रमणिका (Indexing) और बुकमार्किंग सही की गई।
3.4 यह कि सभी दस्तावेज़ एक ही सही तरह से इंडेक्स किए गए PDF में।
3.5 यह कि यदि पेपर बुक्स शामिल हैं तो वे सही पेजिंग और इंडेक्स के साथ हो ।
3.6 यह कि टाइप किए गए दस्तावेज़ –
I .A4 Size पेपर
Ii. एक तरफ़ा टाइपिंग हो ।
Iii. डबल स्पेसिंग में हो ।
Iv. जस्टिफाइड अलाइनमेंट
V. निर्धारित फ़ॉन्ट और फ़ॉन्ट साइज
4. फीस और प्री-डिपॉज़िट-
4.1 यह कि फीस (Rule 110(5), CGST Rules, 2017) जमा की गई।
4.2 यह कि आवश्यक प्री-डिपॉज़िट (Sec. 112(8), CGST Act, 2017) किया जाय।
5. सत्यापन और प्रमाणीकरण-
5.1 यह कि सभी शपथपत्र (Affidavits) विधिवत सत्यापित (Notarized/Attested)।
5.2 यह कि सभी हस्ताक्षरित दस्तावेज़ – फिजिकल सिग्नेचर करके स्कैन व अपलोड।
5.3 यह कि अंग्रेज़ी अनुवाद का शपथपत्र (यदि लागू हो)।
6. प्रशासनिक विवरण-
6.1 यह कि अपील सही “Category of Case” और कोड के अंतर्गत दाखिल जाय ।
6.2 यह कि अपीलीय/पुनरीक्षण प्राधिकारी का पदनाम व कार्यालय विवरण सही दर्ज किया जाय ।
6.3 यह कि उचित अधिकारी (जिसने आदेश पारित किया) का पदनाम व कार्यालय विवरण सही दर्ज।
6.4 यह कि आदेश का विवरण (दिनांक, नंबर, संदर्भ) सही भरा।
6.5 यह कि अपील में दर्शाई गई डिमांड वही है जो अपीलीय आदेश में हो।
6.6 यह कि अपीलीय प्राधिकारी (Sec. 107) के समक्ष स्वीकृत राशि, ट्रिब्यूनल अपील में सही दिखाई गई।
“स्व-प्रमाणित” (Self-Certified / Self-Attested) का जीएसटी में अर्थ –
यह कि जब कोई व्यक्ति (Taxpayer / Appellant) ट्रिब्यूनल, अपीलीय प्राधिकारी या विभाग को दस्तावेज़ देता है (जैसे – ऑर्डर की कॉपी, चालान, नोटिस, रसीद आदि), तो उसकी मूल प्रति (original document) विभाग को नहीं दी जाती।
बल्कि उसकी फोटोकॉपी / स्कैन कॉपी दी जाती है।
उस कॉपी को स्व-प्रमाणित (self-certified) करने का मतलब है कि –
a. करदाता / अधिकृत प्रतिनिधि (Authorized Representative) उस कॉपी पर अपने हस्ताक्षरकरता है।
b. साथ ही यह अंकित किया जाय कि –
“यह दस्तावेज़ मूल प्रति की सत्य एवं सही प्रति है।”
यह कि विधिक दृष्टि से इसका अर्थ है कि आप यह घोषणा और जिम्मेदारी ले रहे हैं कि आपने जो प्रति/कॉपी जमा की है, वह मूल (original) दस्तावेज़ की सटीक और पूर्ण प्रति है।
उदाहरण –
मान लीजिए आपको Appellate Authority का Order ट्रिब्यूनल में अपलोड करना है:
1. Order की फोटोकॉपी / स्कैन कॉपीलें।
2. उसके नीचे लिखें –
“स्व-प्रमाणित कि यह मूल प्रति की सत्य एवं सही कॉपी है।”
3. उस पर नाम, हस्ताक्षर, तारीख और पदनामडालें।
4. फिर उस कॉपी को स्कैन करके अपलोड करें।
सरल भाषा में-
स्व-प्रमाणित = अपनी जिम्मेदारी पर कॉपी को “सही और मूल के समान” मानकर हस्ताक्षर करना।
जीएसटी अधिनियम 2017 के Rule 26 में “Authentication” या “Self-certification” का अधिकार केवल Registered Person या उसके अधिकृत Signatory को दिया गया है।
अर्थात
1. स्व-प्रमाणन (Self-certified copy)-
यह कॉपी करदाता (Taxpayer) या उसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) ही कर सकता है।
उदाहरण: कंपनी में Director/Authorized Signatory, फर्म में Partner, Proprietorship में मालिक।
इस पर वह लिखता है “यह मूल प्रति की सत्य एवं सही प्रतिलिपि है” और हस्ताक्षर करता है।
2. Advocate / Tax Practitioner-
यह कि करदाता के लिए दस्तावेज़ तैयार कर सकते हैं, लेकिन स्व-प्रमाणन (self-certification) उनकी ओर से मान्य नहीं है।
हाँ, यदि करदाता उन्हें Authorized Signatory बना दे (जीएसटी पोर्टल पर Nomination करके), तो फिर Advocate उस capacity में “certify” कर सकता है
3. अन्य मामलों में Advocate का Role
यह कि कोई Affidavit या अनुवाद (Translation) का शपथपत्र है, तो Advocate/Notary उसमें Attestation या Oath Administer कर सकते हैं।
परंतु order की copy या appeal documents को “self-certified” करने का अधिकार केवल Taxpayer/Authorized Signatory के पास ही है।
महत्वपूर्ण बिंदु-
यह कि Authorized Signatory बनने पर वही व्यक्ति दस्तावेज़ों को Rule 26 के अनुसार Authenticate कर सकता है।
यदि आप किसी Advocate/Tax प्रोफेशनल को Signatory बना दिया गया है, तो वह जीएसटी Appeal में order को self-certified कर सकता है और appeal documents पर sign कर सकता है।इसके अलावा, किसी भी proceeding (Return, Reply, Appeal) में वही जिम्मेदार व्यक्ति माना जाएगा।
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डिस्क्लेमर- यह लेखक के निजी विचार हैं। जो जीएसटी ट्रिब्यूनल द्वारा जारी निर्देश पर आधारित हैं।


