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इंस्पेक्शन , सर्च, और सीजर का जीएसटी एक्ट 2017 के अध्याय 14 में उल्लेख हैं। और इस अध्याय में कुल 6 धाराएं है । जिसमें आज का हमारा विषय धारा 67 के संबंध में चर्चा करना है । इस धारा के साथ तीन नियम 139 ,140 ,141 हैं। Act की भाषा को सरल भाषा में हिंदी या अंग्रेजी या दोनों में ही लिखते हैं और पढ़े। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम जीएसटी एक्ट 2017 के सेक्शन 67 अर्थात इंस्पेक्शन, सर्च ,सीजर पर चर्चा करते हैं

निरीक्षण (Inspection) एक प्रॉपर अफसर को व्यवसाय के किसी भी स्थान तक पहुंचने और रिकॉर्ड की जांच करने के लिए सक्षम बनाता है। निरीक्षण एक नरम प्रावधान है । इसे धारा 67 उप धारा(( 1) नियम 139 (1 )के अंतर्गत परिभाषित किया गया है। जिसमे ज्वाइंट कमिश्नर या उच्च अधिकारी के द्वारा स्वयं/ अपने अधीनस्थ अधिकारी (सीजीएसटी एक्ट में परिभाषित अधिकारी) को निरीक्षण करने के लिए अधिकृत कर सकता हैं। अर्थात ज्वाइंट कमिश्नर or उच्च अधिकारी इस सेक्शन के अंतर्गत एक प्रॉपर अफसर को अधिकृत पत्र जारी कर सकते है । जो नियम 139 (1 )में जारी किया जाएगा । इस अथॉरिटी को जीएसटी INS 01 मे ऑथराइज किया जाएगा। ऐसे PROPER OFFICER को अधिकार होगा । कि वह कर योग्य व्यक्ति के व्यवसाय के किसी भी स्थान का निरीक्षण कर सकता है ।

माल के परिवहन में लगे किसी व्यक्ति ,गोदाम के मालिक या संचालक या किसी अन्य स्थान के व्यवसाय के स्थान का निरीक्षण कर सकता है।

M/s Rajeev Traders v/s State of UP & Other writ petition 819/2019 Dated 22/07/2019 Allahabad High court मे Proper Officer के अधिकृत को सही माना गया है।

कर योग्य व्यक्ति की परिभाषा।- सीजीएसटी एक्ट 2017 की धारा 2(107) के अंतर्गत पंजीकृत /पंजीकृत होने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति धारा 22/24 के योग्य हैं।

व्यवसाय का स्थान CGST act 2017 की धारा 2(85) के अनुसार व्यवसाय के स्थान मे निम्न शामिल हैं

1. जहां से व्यापार सामान्य रूप से किया जाता है और उसमें एक गोदाम या कोई अन्य स्थान शामिल होता है जहां से एक कर योग्य व्यक्ति अपने सामान को स्टोर करता है या सेवाएं प्रदान करता है या प्राप्त करता है।

2. वह स्थान जहां से कर योग्य व्यक्ति ने अपने अकाउंट्स बुक रखी है यदि अकाउंट्स बुक फर्म के स्वामी या डायरेक्टर या अन्य प्राधिकृत व्यक्ति के निवास स्थल पर हैं तो उस निवास स्थल का भी निरीक्षण किया जा सकता है।

3. वह स्थान जहां से करयोग्य व्यक्ति का एक एजेंट के माध्यम से वह व्यापार करता है।

Proper officer धारा 67(1) के अनुसार जांच का अधिकार

धारा 67(1) (a) यदि सक्षम अधिकारी को उसके पास यह कारण हो-

1 गुड्स/ सर्विस से लेनदेन छिपाया गया है।

2 Act के विरुद्ध अधिक ITC /

Or

3 Act के नियमो के उल्लंघन मे लिप्त

Or

अधिकारी को यह मानने का कारण कि कर से बचने के लिए वह उपरोक्त विषय में संलग्न हैं

धारा 67(1) (b) सक्षम अधिकारी को विश्वास करने का कारण हो। कि माल के परिवहन के व्यवसाय में लगा कोई व्यक्ति भण्डार गृह में-

1 रखे गए सामान पर कर के भुगतान से बचना ।

2 इस act/ rules कर की देयता की चोरी की संभावना है।

तथ्यों का दमन का अर्थ फैक्ट्स और इंफॉर्मेशन की घोषणा जो एक व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम या नियमों के तहत बनाए गए Return,/Report/ statements या किसी अन्य दस्तावेज में घोषित करने की आवश्यकता है या उचित अधिकारी द्वारा लिखित रूप में मांगी जाने वाली कोई जानकारी प्रस्तुत करने में विफल होना।तथ्यों का दमन होगा।

विश्वास करने के कारण का अर्थ भारतीय दंड संहिता 1860 के अनुसार किसी व्यक्ति के पास विश्वास करने का कारण कहा जाता है। यदि उसके पास उस चीज पर विश्वास करने का पर्याप्त कारण है अन्यथा नहीं।

तलाशी और जब्ती(सर्च एंड सीज) इस शब्द की व्याख्या सरल भाषा में सरकारी तंत्र की एक प्रक्रिया है। जो किसी स्थान, क्षेत्र ,व्यक्ति ,वस्तु आदि को ध्यान से देखना जांच करना ।जो छुपाया गया है या किसी उद्देश्य के लिए खोजा गया है जो Act के खिलाफ है।

तलाशी और जब्ती के लिए वैधानिक नियम धारा 67 (2) के अंतर्गत ज्वाइंट कमिश्नर के पद or उच्च पद का अधिकारी किसी भी माल/ दस्तावेज/ पुस्तकें या चीजों की तलाशी या उनका जब्ती कर सकता है । यदि उनके पास विश्वास करने का कारण है । कि यह सामान दस्तावेज किताबें चीजें किसी भी स्थान पर गुप्त रखी जाती है ।यदि ज्वाइंट कमिश्नर/ Proper Officer की राय है कि सामान जब्ती के लिए उत्तरदाई है ,और दस्तावेज ,अकाउंट्स बुक्स आदि इस Act के अंतर्गत किसी कार्रवाई के लिए उपयोगी होंगी । तो वह तलाशी और जब्ती करने के लिए संचालन के अधिकृत कर सकते हैं।

नियम 139 (2) के अनुसार सीजर का आदेश GST INS 02 मे जारी किया जायेगा।

1- M/s Rajeev Traders v/s State of UP & Other writ petition 819/2019 Dated 22/07/2019 Allahabad High court मे सीज की कार्रवाई को उचित माना है।

2. Sandeep Kumar singhal v/s Deputy Commissioner, Revenue,Bureau Of Investigation North Bangal Headquarters writ petition 321/2023 Dated 10/03/2023 में जीएसटी विभाग द्वारा धारा 67/68 मे कार्यवाही की और फिर धारा 129 में। जिसके विरुद्ध व्यापरी Calcutta High court मे writ file करता है। जिस पर माननीय हाईकोर्ट ने विभाग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग झूला झूल रहा है ।उसे यह नहीं पता कि वह कार्रवाई धारा 67 या 68 या 129 में कर रहा है । तथा रिट पिटिशन स्वीकार की गई और जुर्माने की राशि को समाप्त किया गया ।

नियम 139(3 ) यदि सीज करना संभव ना हो तो सक्षम अधिकारी को यह आदेश दे सकता है। कि उस माल के मालिक या संरक्षक बिना अधिकारी की अनुमति के माल नहीं हटाएगा।

नियम 139 ( 4 ) के अनुसार उपरोक्त आदेश जीएसटी INS 03 के रूप में जारी किया जाएगा।

गुप्त शब्द की व्याख्या — जीएसटी एक्ट में कहीं भी गुप्त शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है सामान्य बोलचाल में इसका अर्थ इस प्रकार समझा जाता है -जो छुपाया या छुपाया गया हो ।इसलिए दस्तावेजों को अधिकारी से छुपाने के स्थान से उचित स्थान या सामान्य स्थान पर नहीं रखे जाते ।तो इस स्थान को गुप्त शब्द नाम दिया जाएगा M/s Rajeev Traders v/s State of UP & Other writ petition 819/2019 Dated 22/07/2019 Allahabad High court मे गुप्त शब्द के लिए माननीय उच्च न्यायालय ने वेब स्टार के थर्ड न्यू इंटरनेशनल डिक्शनरी में गुप्त शब्द को परिभाषित क्या है।

पैरा 14 में M/s Durga Prasad v/s H R Gomus Superintendent Central Excise, Nagpur AIR 1966 SC 1216 मैं स्थापित सिद्धांत है कि कानून में प्रयुक्त शब्द का अर्थ उसी संदर्भ में दिया जा सकता है जिसमें उसका उपयोग किया गया है

नियम 139 (5 )के अनुसार सक्षम अधिकारी स्थल पर स्टॉक इन्वेंटरी उस व्यक्ति द्वारा तैयार और सत्यापित किया जाना आवश्यक है। जिससे माल को जब्त किया गया है।

धारा 67(3)के अंतर्गत जीएसटी एक्ट के अनुसार नोटिस जारी करने के लिए जिन पुस्तकों चीजों या डाक्यूमेंट्स सही नहीं हैं।उन्हें उस नोटिस जारी करने के 30 दिनों के भीतर ऐसे व्यक्ति को वापस कर दिया जाएगा।

धारा 67 ( 4) के अनुसार सक्षम अधिकारी धारा 67 (2 )के अनुसार किसी भी परिसर के दरवाजों को सील करने या तोड़ने किसी बॉक्स पात्र को खोलने की शक्ति होगी ।जिसमें किसी व्यक्ति के द्वारा सामान खाते किसी प्रकार के रजिस्टर क्या दस्तावेज जिस पर संदेह हो पाया जा सकता है। जहां पर ऐसे परिसर, पात्र ,बॉक्स ,अलमारी ,आदि तक पहुंचने से इनकार किया जाता हो।

धारा 67 (5) के अनुसार जिस व्यक्ति को हिरासत में धारा 67( 2 )के तहत कोई दस्तावेज सीज किया गया है तो उचित अधिकारी की उपस्थिति में उनकी प्रतियां और उससे उद्धरण लेने का हकदार होगा। Proper Officer document की कॉपी बनाने से इंकार कर सकता हैं।

गुड्स को सीज करना

धारा 67( 6 ) के अनुसार प्रोविजनल आधार पर माल की रिहाई धारा 67( 2 ) के अंतर्गत जब्त किए गए। माल को स्थाई आधार पर किसी बॉन्ड और सुरक्षा प्रस्तुत करने या कर ,दंड ,ब्याज के भुगतान पर जारी किया जा सकता है।

नियम 140 (1) के अनुसार जीएसटी एक्ट के अनुसार बॉन्ड के लिए INS 04 में सुरक्षा के लिए कर, interest और दंड की राशि के बराबर बैंक गारंटी भी ली जा सकती है । लागू कर का अर्थ है -IGST,CGST,SGST ,और अन्य कर।

नियम 140 (2) के अनुसार यदि अस्थाई रूप से जारी माल नियत तिथि पर प्रस्तुत नहीं किया जाता है। तो सुरक्षा बांड को भुनाया जाएगा और tax, Penalty, Interest आदि को शामिल मुजरा किया जाएगा।

M/s Rajeev Traders v/s State of UP & Other writ petition 819/2019 Dated 22/07/2019 Allahabad High court मे Tax, पेनल्टी, की राशि 50% की सीमा तक और बैलेंस राशि के लिए सिक्योरिटी bond तथा प्रोपर ऑफीसर के satisfaction पर आदेश जारी किया है।

CBIC के परिपत्र संख्या 3/ 3 /2017 जीएसटी दिनांक 5 जुलाई 2017 के अनुसार किसी भी प्रॉपर ऑफिसर द्वारा धारा 67 नियम 140 के अंतर्गत सीज किए गए सामान को अस्थाई रूप से जारी करने के लिए सर्कुलर जारी किया है।

परिपत्र संख्या 17/ 2018 सीमा शुल्क दिनांक 15/10/2018 द्वारा अधिसूचित किया गया है। कि यदि किसी प्रॉपर अफसर ने मूल्यवान सामान को जब्त किया है। तो उसके भंडारण के लिए एक प्रक्रिया घोषित की गई है । जिसमें गोदाम की चाबी या सीसीटीवी कैमरे ,एक्सरे मशीनें ,जीपीएस ट्रैकिंग आदि के लिए एक s.o.p. जारी की है।

धारा 67( 7 )के अनुसार जब किसी GOODS को धारा 67(2 )के अनुसार जब्त किया गया था । उस माल के लिए 6 महीने के भीतर यदि कोई नोटिस नहीं दिया जाता है ।तो उस माल को उसी व्यक्ति को वापस कर दिया जाएगा ।जिसके कब्जे से उसे जब्त किया गया था।

नियम 141 (1) के अनुसार उचित अधिकारी बाजार मूल्य or टैक्स, INTEREST और अर्थदंड जो भी कम हो के भुगतान पर खराब होने वाले सामान को तुरंत जारी किया जा सकता है ।जिसके लिए प्रॉपर अफसर जीएसटी INS 05में एक आर्डर जारी करके माल छोड़ेगा।

नियम 141(2) के अनुसार यदि कर योग्य व्यक्ति खराब होने वाले माल के बाजार मूल्य या टैक्स पेनल्टी या इंटरेस्ट आदि का भुगतान करने में विफल रहता है । तो गुड्स को उचित अधिकारी द्वारा Goods का निपटान किया जा सकता है।

धारा 67(8) के अनुसार उचित अधिकारी द्वारा अग्र लिखित वस्तुओं के बारे में शीघ्र निर्णय लेगा जैसे -माल नष्ट होने वाली प्रकृति का हो या समय बीतने के साथ गुड्स का मूल्य कम हो जाएगा या माल के भंडारण के लिए स्थान की कमी है या चीज के बाद माल नहीं रखने का कोई कारण हो।

धारा 67(9) प्रॉपर ऑफिसर नष्ट होने वाले/ खतरनाक उत्पाद की सूची बनायेगा।

धारा 67(10 )के अनुसार भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के अनुसार इस धारा के अंतर्गत भी तलाशी और जब्ती पर लागू होते हैं। यहां केवल यह संशोधन किया गया है कि मजिस्ट्रेट शब्द के स्थान पर जहां भी मजिस्ट्रेट आता है वहां आयुक्त शब्द का स्थापित किया गया है।

धारा 67(11) के अनुसार प्रॉपर ऑफिसर के पास यह विश्वास करने का कारण है। कि व्यक्ति कर का दुरुपयोग कर रहा है या कर कर अपवचन किया है।तो वह ऐसे कारणों को लेख बंद करते हुए अकाउंट्स बुक अन्य डाक्यूमेंट्स अभिग्रहण की कार्रवाई कर सकता है। तथा जब तक कार्रवाई चलती रहेगी ।वह अकाउंटस को सीज कर सकता है

धारा 67( 12) के अनुसार आयुक्त किसी भी अधिकारी को कर योग्य व्यक्ति के व्यापार स्थल से सामान खरीदने के लिए अधिकृत कर सकता है ।टैक्स/ चालान /सप्लाई बिल जारी करने की जांच के लिए कर योग्यव्यक्ति या व्यवसाय परिसर का प्रभारी व्यक्ति ऐसे अधिकारी द्वारा खरीदे गए माल की वापसी पर जारी किए गए टैक्स /चालान /सप्लाई ऑफ बिल को रद्द करने के बाद राशि वापस कर देगा।

इति सिद्धम ।

नोट: यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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मेरा नाम संजय शर्मा हैं।मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में इनडायरेक्ट टैक्सेस में वकालत करता हूं ।तथा मेरी शैक्षिक View Full Profile

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