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जीएसटी एक्ट में करदाता को कर निर्धारण वर्ष 2017-18,2018-19 और 2019-20 के लिए सेक्शन 74 के अंतर्गत Fake Invoice के आधार पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं ।टैक्स प्रोफेशनल के सामने Fake Invoice पर इसके नोटिस से निपटना आसान प्रक्रिया नहीं है ।क्योंकि प्रत्येक करदाता के तथ्य अलग-अलग है। तो टैक्स प्रोफेशनल को भी उस केस की प्रत्येक बिंदु पर स्टडी करने के बाद उसका जवाब दाखिल करना होगा। आज हम कुछ निर्णय और परिपत्र के आधार पर यह लेख प्रस्तुत कर रहे:-

जीएसटी एक्ट में invoice को सेक्शन 2 उप धारा 66 के अंतर्गत बताया गया है । कि इनवॉइस Or टैक्स इनवॉइस से आशय सेक्शन 31 में परिभाषित इनवॉइस से है।

GST Act

जीएसटी एक्ट की धारा 16 किसी करदाता को आईटीसी का निम्न शर्तों के आधार पर उपभोग करने की अनुमति देता है जैसे करदाता के पास टैक्स इनवॉइस /डेबिट नोट होना चाहिए ।माल वास्तव में प्राप्त होना चाहिए उसका भुगतान बैंकिंग के माध्यम से किया गया हो ।और आपूर्तिकर्ता द्वारा gstr-1 और 3B दाखिल किया गया हो । यदि करदाता इन शर्तों को पूरा करता है। तो वह आईटीसी का उपयोग करेगा।

निम्नलिखित केस में माननीय हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए विभाग को आदेश /निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कुछ पर हम विस्तार पूर्वक चर्चा कर रहे हैं- 

1: संचिता कुंडू बनाम सहायक आयुक्त राज्य कर रिट पिटिशन संख्या 7231/ 2022,7032/2022 कलकत्ता हाई कोर्ट 

तथ्य- इस writ में याचिकाकर्ता ने जो खरीदार है ।याचिका में संबंधित सहायक आयुक्त राज्य कर के द्वारा आईटीसी के उपभोग के लिए उसे वंचित कर दिया ।जिसमें कहा गया कि विचाराधीन आपूर्तिकर्ता के पास खरीद के समय वैलिड जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं था। इसलिए खरीदार पर जुर्माना और ब्याज लगाया गया था।

जिसका याचिकाकर्ता ने विरोध किया और प्रमाण के साथ सिद्ध करने की कोशिश की हैं।कि उसके लेनदेन वास्तविक थे ।और आवश्यक दस्तावेज उसके पास उपलब्ध है। जो सप्लाइ को प्रमाणित करते हैं ।याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जीएसटी पोर्टल पर आपूर्तिकर्ता को करदाता व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है ।जिससे सिद्ध होता है ।कि लेनदेन के समय पर आपूर्तिकर्ता का रजिस्ट्रेशन वैलिड रजिस्ट्रेशन था। यदि आपूर्तिकर्ता द्वारा कोई भी विसंगति की गई है ।तो उसके लिए याचिकाकर्ता अर्थात खरीददार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

यहां याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि लेन-देन के रिकॉर्ड बैंक के द्वारा हस्तांतरण की गई राशि का भुगतान का प्रमाण भी उसके पास उपलब्ध है ।क्या याचिकाकर्ता को दोष देना उचित होगा ।यदि आपूर्तिकर्ता द्वारा कोई जाली दस्तावेज बनाया था। तो याचिकाकर्ता के पास कोई ऐसा सिस्टम या तरीका नहीं था। कि वह जान सके की आपूर्तिकर्ता सप्लायर द्वारा कोई अनुचित कार्य किया है।

याचिकाकर्ता खरीदार ने खरीद से संबंधी जीएसटी पोर्टल पर जीएसटीआर 2a के रूप में उपलब्ध डाटा प्रस्तुत किया और याचिका में कहा कि यह आदेश भेदभाव पूर्ण है। अपने समर्थन में याचिकाकर्ता द्वारा 13 दिसंबर 2021 के एक अन्य writ संख्या 23512 में मैसर्स एलजीडब्ल्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य 2019 के निर्णय का भी उल्लेख किया।

उच्च न्यायालय का निर्णय माननीय न्यायालय द्वारा याचिका द्वारा याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और तथ्यों के आधार पर संचिता कुंडू के मामले में इस रिट पिटिशन में मामला संबंधित अधिकारी को प्रति प्रेषित किया और निर्देश दिया कि दस्तावेजों को उन्हें नए दृष्टिकोण से देखने का आदेश दिया और इस बात की जांच के आदेश दिए याचिकाकर्ता ने आपूर्तिकर्ता के पंजीकरण को रद्द करने से पहले या बाद में जीएसटी के साथ भुगतान किया था या नहीं। और याचिकाकर्ता को आईटीसी का लाभ दिया जाए।

लेखक का विचारउपरोक्त रिट में याचिकाकर्ता द्वारा जो एक वास्तविक हकदार है। सप्लायर के साथ सभी लेनदेन जीएसटी एक्ट के अंतर्गत किए गए हैं। जैसे वैलिड इनवॉइस उसका भुगतान बैंक के माध्यम से माल की वास्तविक रूप से अंकित है। जीएसटी एक्ट के सेक्शन 16 का पालन किया है अतः याचिकाकर्ता को आईटीसी का लाभ मिलना चाहिए ।यह रिट पिटिशन जीएसटी एक्ट में आईटीसी के लिए मील का पत्थर साबित होगा जो करदाताओं को न्याय देता है तथा सभी टैक्स प्रोफेशनल को भी लेकिन वह इसके संबंध में करदाता के facts को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय का उल्लेख करना चाहिये।

2 ब्राइट स्टार प्लास्टिक VS additional कमिश्नर salestax उड़ीसा रिट संख्या 15265// 2021 निर्णय दिनांक 4 oct 2021 

Writ का सार  याचिका कर्ता उड़ीसा जीएसटी एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत करदाता है यह याचिका सिटी एंड जीएसटी अपील भुवनेश्वर के एडिशनल कमिश्नर द्वारा पारित आदेश दिनांक 5 अप्रैल 2021 के आदेश पर दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी गई है ।उड़ीसा जीएसटी अधिनियम की धारा 30(2 )के तहत 7 जनवरी 2021 को उसके रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के लिए याचिकाकर्ता के आवेदन को करने वाले उचित अधिकारी द्वारा।

याचिका कर्ता  pvc पाइप हाई डेंसिटी पॉलिथीन लो डेंसिटी पॉलिथीन और आयरन scrip का व्यापार करता है। जीएसटी विभाग द्वारा नियम 22(1) के अंतर्गत GST Reg 17 मे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने जीएसटी विभाग को जारी नोटिस के संबंध में अपना जवाब दाखिल किया विभाग द्वारा उक्त कार्रवाई रोक दी गई और एक नया  कारण बताओ नोटिस जारी किया जिसमें उन्होंने कहा की गैर मौजूद आपूर्तिकर्ता से Rs 2,04,650,06=00 की आईटीसी का उपभोग किया है।

याचिकाकर्ता ने उक्त कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल करते हुए बताया कि सर्वश्री पवनसुत एंटरप्राइजेज से बिल संख्या, दिनांक, माल का मूल और भुगतान की गई सीजीएसटी एसजीएसटी राशि और कुल राशि का विवरण तालिका के रूप में निर्धारित किया गया था उसके द्वारा तीन चालान 11 अप्रैल 2018, 30 अप्रैल 2018 और 13 अगस्त 2018 के थे। और आगे बताया याचिकाकर्ता ने रिटर्न 3b में इस तरह की खरीदारी से संबंधित 3b रिटर्न में दर्शाया गया है जिसमें कुल भुगतान और टैक्स दिखाया गया है ।तथा gstr2a में आपूर्तिकर्ता का विवरण उपलब्ध है। जिससे स्पष्ट है कि खरीदे गए माल का विवरण सही है।

जीएसटी विभाग द्वारा सेक्शन 74(5 )के अंतर्गत फार्म जीएसटी डीआरसी 01 ए पार्ट में सूचना जारी की गई और उड़ीसा जीएसटी के नियम 142 उप धारा 1a के साथ पढ़ा जाए तथा याचिकाकर्ता पर कुल रुपए 3,48,066=00 टैक्स ब्याज जुर्माने की राशि का भुगतान इस आधार पर करना होगा।याचिका कर्ता ने GST विभाग से मांग की ।वह उपलब्ध सामग्री उपलब्ध कराएं जिसके आधार पर कर, टैक्स, जुर्माने  लगाया गया है। विभाग द्वारा यह टिप्पणी करते हुए की उत्तर संतोषजनक नहीं है याचिकाकर्ता का पंजीयन निरस्त कर दिया गया। याचिका कर्ता ने उन्हें धारा 30अंतर्गत प्रार्थना पत्र दिया जिसे जीएसटी विभाग द्वारा निरस्त कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने उपरोक्त आदेश के विरुद्ध उड़ीसा उच्च न्यायालय ने रिट संख्या 2708/ 2021 दायर की जिसका निस्तारण 17 जनवरी 2021 को किया गया जिसमें याचिकाकर्ता को अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील करने का निर्देश दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपीलीय दायर की जिसे खारिज कर दिया गया। अपील के आदेश में केवल भविष्य में धोखा धड़ी को रोकने या इस प्रकार की पुनरावृति  को रोकने के लिए पंजीकरण को रद्द करके सही किया है। अपीलीय अधिकारी ने पंजीकरण के संबंध में कोई विशेष टिप्पणी नहीं की है।

याचिकाकर्ता ने अपनी रिट पिटिशन में स्पष्ट किया कि जी एस टी की धारा 16 के साथ नियम 21 के सामूहिक पठन पर ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जिसमें धोखाधड़ी के लिए क्रेता व्यापारी को रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सके। रिट में बताया गया सप्लायर का रजिस्ट्रेशन 1 अक्टूबर 2019 को निरस्त किया गया। जबकि याचिका कर्ता का लेन-देन उसके पूर्व किया गया है। तथा याचिकाकर्ता के पास ऐसा कोई तंत्र नहीं था। जिससे वह सप्लायर आपूर्तिकर्ता के संबंध में जांच कर सकता था। उसके द्वारा सेक्शन 16के सभी नियमों का पालन किया है ।तथा वह आईटीसी उपभोग करने का पात्र हे।

विभाग द्वारा इस विषय में अवगत कराया गया कि विभाग द्वारा सप्लायर के व्यापार स्थल पर जांच पर पाया। कि वहां उस व्यक्ति के कब्जे में कोई व्यापार स्थल नहीं हैं।जिसके आधार पर विभाग द्वारा उसके लेनदेन को नकली माना हैं।

न्यायालय का निर्णय

न्यायालय ने याचिकाकर्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए ।जीएसटी के नियम 21 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सप्लायर के द्वारा धोखाधड़ी के परिणाम स्वरूप क्रेता डीलर के पंजीयन को स्वत रद्द नहीं किया जा सकता। जब तक की विभाग यह सिद्ध ना कर दे की आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता मैं कोई संबंध है।

न्यायालय द्वारा विभाग को निर्देश दिया कि 1 सप्ताह के अंदर उचित आदेश जारी करके याचिकाकर्ता का पंजीयन बहाल किया जाए और याचिकाकर्ता को सभी रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दी जाए.

लेखक के विचार

 उपरोक्त केस में माननीय उच्च न्यायालय ने  द्वारा स्पष्ट किया गया कि क्रेता व्यापारी का पंजीयन निरस्त नही किया जा सकता जब तक कि कोई आरोप सिद्ध न हो जाए। यदि क्रेता व्यापारी ने आपूर्तिकर्ता के साथ लेन देन धारा 16 के अंतर्गत किया है तो वह नियम  के अनुसार है। साथ ही आपूर्तिकर्ता की किसी विसंगति के लिए क्रेता व्यापारी को दोषी नहीं माना जाएगा जब तक की आपूर्तिकर्ता और क्रेता व्यापारी में कोई विसंगति सिद्ध न हो जाए। यह रिट पिटीशन टैक्स प्रोफेशनल और करदाता के लिए अत्यंत ही उपयोगी है। जिसमें माननीय  उच्च न्यायालय द्वारा सभी बिंदुओं पर स्पष्ट  रुप से चर्चा की है।

3. LGW IND LTD VS UNION OF INDIA रिट संख्या 23512/2019  JUDGMENT DATE 13/12/2021 CALCUTTA HIGH COURT

रिट के अंतर्गत विवादित विषय

जीएसटी अधिकारियों के द्वारा इस आधार पर आईटीसी देने से मना किया की जिन आपूर्तिकर्ताओं से सामान क्रय किया गया था। वह सभी गैर मौजूद आपूर्तिकर्ता थे तथा आपूर्तिकर्ताओं ने बैंक अकाउंट फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए थे ।इसलिए इनपुट टैक्स के लाभ का दावा संबंधित दस्तावेज द्वारा समर्थित नहीं है। जीएसटी विभाग द्वारा यह भी टिप्पणी करें कि याचिकाकर्ता ने लेन-देन में प्रवेश करने से पहले आपूर्तिकर्ता की सही पहचान नहीं की। इनपुट टैक्स क्रेडिट से वंचित करने का एक यह भी आधार बताया गया आपूर्ति कर्ता का रजिस्ट्रेशन लेन देन को कवर करने वाली पूर्व दिनांक से रद्द कर दिया गया था। जबकि याचिकाकर्ता के द्वारा GSTR-1, 3b समय से प्रस्तुत किए गए हैं ।तथा जीएसटीआर 2A में सभी खरीद का विवरण दर्ज है।

उच्च न्यायालय का निर्णय

माननीय न्यायालय ने उपरोक्त रिट पिटिशन को सुनने के पश्चात मामले को जीएसटी विभाग को उन्हें सुनने के लिए आदेश दिया तथा याचिकाकर्ता के लाभ की पात्रता के मुद्दे पर नए सिरे से विचार करने के लिए कहा तथा उन दस्तावेजों पर विचार करके आईटीसी जो याचिकाकर्ता के लेन-देन की वास्तविकता के दावे के समर्थन में भरोसा करता है

माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका से संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद खरीद और लेन-देन वास्तविक हैं। और  दस्तावेजों से समर्थित हैं ।और लेन-देन पुनः आपूर्तिकर्ताओं के पंजीकरण को रद्द करने से पहले किए गए थे ।जिन्हें आईटीसी का लाभ दिया जाएगा।

 लेखक के विचार

 माननीय न्यायालय ने उपरोक्त बाद में बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है की करदाता को अपना पक्ष रखने का तथा उसके दस्तावेजों का जीएसटी विभाग द्वारा सत्यापन अवश्य करना चाहिए ।ताकि याचिकाकर्ता को आईटीसी का नुकसान ना हो।

4. गार्गो ट्रेडर्स वर्सेस ज्वाइंट कमिश्नर कमर्शियल टैक्स रिट पिटिशन नंबर 1009/2022 आदेश दिनाक 2/06/2023 कलकत्ता हाई कोर्ट

उपरोक्त न्यायिक निर्णय से स्पष्ट है कि fake Invoice एक कठिन विषय है।

विभाग द्वारा जारी सर्कुलर संख्या 171/03/2022/GST Dated 6/07/2022 Fake इनवॉइस के संबंध में

CBIC द्वारा उपरोक्त सर्कुलर Fake Invoice के संबंध में जारी किया है ।जिसमें कुछ परिस्थितियों का वर्णन करते हुए ।उन पर अपनी टिप्पणी दी है ।तथा जीएसटी अधिकारियों से अपेक्षा की है । कि जहां Fake Invoice का संबंध है ।वहां उक्त सर्कुलर का संदर्भ ग्रहण करें ।इस सर्कुलर के बिंदु संख्या एक में यह व्याख्या की गई है ।जिसका सार निम्नलिखित है

Q.1  A registered करदाता ने टैक्स इनवॉइस जारी की है B रजिस्टर्ड पर्सन है। केवल इनवॉइस का इनवॉइस का लेनदेन क्या है लेकिन माल का कोई मोमेंट नहीं हुआ है?

Answer उक्त बिंदु में क्योंकि माल ट्रांसफर नहीं हुआ है ।केवल invoice का लेनदेन किया गया है ।इसलिए सेंट्रल जीएसटी एक्ट की धारा 7 के अनुसार यह सप्लाई नहीं होगी। इसलिए A पर धारा73, 74 की कार्रवाई नहीं की जाएगी। केवल धारा 122 (1)(2) के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

लेखक का मत उक्त बिंदु में यह A registered करदाता पर जारी invoice  पर टैक्स की रकम या रुपए 10,000 -10000 उपरोक्त मैं जो भी अधिक हो उसकी penalty लगाई जाएगी।

Q.2 A ने B को B ने C को invoice जारी की है जो कि fake Invoice हैं?

Answer   उक्त बिंदु में B पर  धारा 16 2(b) के अनुसार  डिमांड रिकवरी का सिद्धांत लागू होता है । विभाग द्वारा उस पर धारा 74 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी साथ ही सेक्शन 50लागू किया जाएगा। तथा धारा 75 (13)के अंतर्गत उसके विरुद्ध मांग और  रिकवरी की जाएगी।

Q.3 A ने B को B ने C को FAKE INVOICE जारी किया है बिना गुडस सप्लाई के?

Answer  उक्त बिंदु में B आईटीसी का पात्र नही है।क्योंकि जीएसटी एक्ट की धारा 16 (2)(b) की शर्तें वह पूर्ण नहीं करता है ।साथ ही उसके द्वारा C को टैक्स invoice जारी की है ।जबकि गुड्स का कोई मोमेंट नहीं हुआ है ।उस परिस्थिति में B पर धारा 73 और 74 लागू होती है ।साथ ही धारा 122( 1 )(2)और धारा 122 (1)( 7) के अंतर्गत वास्तविक आपूर्ति के बिना इनवॉइस जारी करने के संबंध में अर्थदंड की कार्रवाई भी की जाएगी।

लेखक का मत

 जीएसटी विभाग द्वारा जारी परिपत्र में fake इनवॉइस या बोगस बिल के संबंध में जो जारी किया गया है। वह अपूर्ण है। विभाग द्वारा ऐसा कोई भी तरीका या सिस्टम नहीं बनाया है ।जिससे यह सिद्ध हो कि इनवॉइस जाली है या फेक है क्या बोगस है विभाग केवल टैक्स चाहता है।

निष्कर्ष

 उपरोक्त लेख से स्पष्ट है कि जीएसटी विभाग नकली चालान या बोगस बिल के संबंध में कोई सुचारू पद्धति से निष्कर्ष नहीं निकाल पा रहा है। केवल वह Fake Invoice के सहारे करदाता को अत्यधिक टैक्स जमा कराने के लिए प्रेरित कर रहा है ।जीएसटी विभाग द्वारा मूलभूत तरीके से इस एक्ट को लागू कराने में विफल रहा है ।शायद इस एक्ट पर यदि विचार विमर्श किया जाता तो  सही आंकलन किया जाता। तो शायद  Fake Invoice का विषय कम से कम होता ।जीएसटी लागू करने के समय जो माइग्रेशन की प्रक्रिया को अपनाई गई। वह त्रुटि पूर्ण थी।  तथा विभाग द्वारा पूर्व के कर अधिनियमओ का सही आंकलन नहीं किया गया। केवल दस्तावेज के आधार पर जीएसटीएन जारी करना बहुत बड़ी त्रुटि थी। शायद आज विभाग पुनः पुराने एक्ट्स के अनुरूप कार्य करना शुरू किया है।

जीएसटी विभाग के अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करना होगा ।सभी टैक्स प्रोफेशनल को सुनने को मिलता होगा ।कि fake Invoice पर अधिकारी करदाता पर दबाव डाला है। कि वह अपना बिजनेस बंद कर दे या चला जाए या कितने रुपए का टैक्स जमा कर दे। ताकि करदाता के invoice को fake Invoice सिद्ध कर दिया जाय।

टैक्स प्रोफेशनल को नकली चालान के संबंध में जारी नोटिस पर करदाता के प्रत्येक तथ्य का आंकलन करना आवश्यक है। तभी हम नकली चालान या बोगस बिल के नोटिस का सही जवाब दाखिल कर सकेंगे। साथ ही जीएसटी एक्ट में एविडेंस के मुद्दे पर करदाता को भी अधिकार होना चाहिए ।जिस facts के आधार पर करारोपण किया जा रहा है ।उस facts से पहले उसे अवगत कराया जाए। कई केसों में यह देखा गया है जीएसटी विभाग द्वारा ऐसा कोई दस्तावेज प्रार्थना करने पर भी जारी नहीं किया जाता है। साथ ही जीएसटी विभाग को ऐसा सिस्टम या तरीका खोजना होगा। जिससे बोगस बिल या नकली चालान या बोगस व्यापारी का पता चल सके।

उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है।

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