Gifts up to a value of Rs 50,000/- per year by an employer to his employee are outside the ambit of GST. However, gifts of value more than Rs 50,000/- made without consideration are subject to GST, when made in the course or furtherance of business.

It is being reported that gifts and perquisites supplied by companies to their employees will be taxed under GST. Gifts up to a value of Rs 50,000/- per year by an employer to his employee are outside the ambit of GST. However, gifts of value more than Rs 50,000/- made without consideration are subject to GST, when made in the course or furtherance of business.

The question arises as to what constitutes a gift. Gift has not been defined in the GST law. In common parlance, gift is made without consideration, is voluntary in nature and is made occasionally. It cannot be demanded as a matter of right by the employee and the employee cannot move a court of law for obtaining a gift.

Another issue is the taxation of perquisites. It is pertinent to point out here that the services by an employee to the employer in the course of or in relation to his employment is outside the scope of GST (neither supply of goods or supply of services). It follows therefrom that supply by the employer to the employee in terms of contractual agreement entered into between the employer and the employee, will not be subjected to GST. Further, the Input Tax Credit (ITC) Scheme under GST does not allow ITC of membership of a club, health and fitness center [section 17 (5) (b) (ii)]. It follows, therefore, that if such services are provided free of charge to all the employees by the employer then the same will not be subjected to GST, provided appropriate GST was paid when procured by the employer. The same would hold true for free housing to the employees, when the same is provided in terms of the contract between the employer and employee and is part and parcel of the cost-to-company (C2C). (Source- PIB- 11.07.2017)


किसी नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी को एक साल में दिए गए 50,000 रुपये मूल्य तक के उपहार जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, हालांकि कारोबार को आगे बढ़ाने हेतु दिए गए 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य के गैर नकद उपहारों पर जीएसटी लगेगा  

यह बताया जा रहा है कि कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को दिये जाने वाले उपहारों एवं अतिरिक्‍त लाभों पर जीएसटी प्रणाली के तहत कर लगेगा। किसी नियोक्‍ता द्वारा अपने कर्मचारी को एक साल में दिए गए 50,000 रुपये मूल्‍य तक के उपहार जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। हालांकि, कारोबार को आगे बढ़ाने हेतु दिए गए 50,000 रुपये से ज्‍यादा मूल्‍य के गैर नकद उपहारों पर जीएसटी लगेगा।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि उपहार की परिभाषा क्‍या है। उपहार को जीएसटी (वस्‍तु एवं सेवा कर) कानून में परिभाषित नहीं किया गया है। आम भाषा में, उपहार बदले में कुछ भी नकद राशि लिए बगैर दिया जाता है, यह स्‍वेच्‍छा से दिया जाता है और कभी-कभी दिया जाता है। कोई भी कर्मचारी यह नहीं कह सकता है कि उपहार लेना उसका अधिकार है। इसी तरह कोई भी कर्मचारी उपहार पाने के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता है।

एक अन्‍य मुद्दा अतिरिक्‍त लाभों पर लगने वाले कर से जुड़ा हुआ है। यहां पर यह बताना जरूरी है कि अपने रोजगार के संबंध में किसी कर्मचारी द्वारा नियोक्‍ता को दी जाने वाली सेवाएं जीएसटी (न तो वस्‍तुओं की आपूर्ति अथवा सेवाओं की आपूर्ति) के दायरे से बाहर है। इसका मतलब यही हुआ कि नियोक्‍ता और कर्मचारी के बीच हुए अनुबंधात्‍मक समझौते के तहत नियोक्‍ता की ओर से कर्मचारी को होने वाली आपूर्ति पर जीएसटी नहीं लगेगा। इसके अलावा,  जीएसटी के तहत इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (आईटीसी) योजना के तहत किसी क्‍लब, स्‍वास्‍थ्‍य एवं फिटनेस केन्‍द्र [धारा 17 (5) (बी) (ii)] की सदस्‍यता के आईटीसी की अनुमति नहीं दी गई है। अत: इससे यह स्‍पष्‍ट होता है कि यदि इस तरह की सेवाएं नियोक्‍ता द्वारा अपने सभी कर्मचारियों को मुफ्त में मुहैया कराई जाती हैं तो उन पर जीएसटी नहीं लगेगा, बशर्ते कि नियोक्‍ता द्वारा उन्‍हें खरीदते वक्‍त समुचित जीएसटी का भुगतान कर दिया गया हो। यही बात कर्मचारियों को मुफ्त में दिये जाने वाले मकान पर भी लागू होगी, जब यह मकान नियोक्‍ता और कर्मचारी के बीच हुए अनुबंध के तहत दिया गया हो और वह कर्मचारी पर आने वाली कुल लागत (सी2सी) का हिस्‍सा हो।

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