सारांश: लेख के अनुसार, जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रस्तावित है, हालांकि बैठक का एजेंडा अभी घोषित नहीं हुआ है। बैठक में जीएसटी दरों के तर्कसंगतीकरण से आगे बढ़कर कर विवाद कम करने, ITC व्यवस्था मजबूत करने, पुराने कर क्रेडिट के मुद्दे सुलझाने और तकनीक आधारित अनुपालन पर विचार होने की उम्मीद व्यक्त की गई है। लेख में प्रमुख संभावित सुधारों के रूप में करदाताओं का विश्वास और सरलता बढ़ाना, ITC से जुड़े विवादों को कम करना, कंपनसेशन सेस के पुराने क्रेडिट पर स्पष्टता, पेट्रोल-डीजल एवं प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए स्पष्ट नियम तथा AI और डेटा एनालिसिस आधारित GST 2.0 का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, उद्योग की ओर से GCC, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी, वेयरहाउस और अन्य बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में इस्तेमाल वस्तुओं एवं सेवाओं पर ITC की अनुमति देने की मांग का उल्लेख है। लेख के अनुसार, CGST Act की धारा 17(5) के तहत वर्तमान ITC प्रतिबंधों में बदलाव से उद्योग को राहत मिल सकती है, लेकिन राज्यों को संभावित राजस्व नुकसान की चिंता है। लेखक की टिप्पणी में GST अपीलों में प्री-डिपॉजिट, GST ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों, धारा 129 की कार्यवाही, GSTR-9 के वार्षिक असेसमेंट तथा धारा 73, 74 और 74A से संबंधित विवादों को कम करने की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही प्रथम और द्वितीय अपील में लिमिटेशन संबंधी व्यवस्था तथा GST कानून में CPC लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। कुल मिलाकर, लेख का मुख्य संदेश है कि आगामी GST Council बैठक से व्यापार, उद्योग और करदाताओं को काफी उम्मीदें हैं और GST के अगले चरण में केवल राजस्व संग्रह के बजाय सरलीकरण, करदाता अधिकार, विवादों में कमी, ITC की स्पष्टता और कारोबार सुगमता पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक 12 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है ?
यह कि जीएसटी को एक दशक होने वाला है. अब भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एक नए चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है. जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण साबित हो सकती है।
यह कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के लगभग एक दशक बाद अब भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एक नए चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। यह कि शनिवार(29.08.2026) को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक 12 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। यह मीटिंग नई दिल्ली में की जाएगी जिसका अभी तक एजेंडा घोषित नहीं किया गया है। यह मीटिंग भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण साबित हो सकती है। यह उम्मीद की जा रही है कि बैठक में दरों के तर्कसंगतीकरण से आगे बढ़कर कर विवादों को कम करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था को मजबूत बनाने, पुराने कर क्रेडिट से जुड़े मुद्दों को हल करने और प्रौद्योगिकी-आधारित अनुपालन प्रणाली विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। निम्नलिखित विषय पर विचार किया जा सकता है
- जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में संभावित सुधार के विषय
- 2. उद्योग जगत का तर्क
- 3. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में जरूरी सुधार
- 4. कंपनसेशन सेस
- 5. पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस जीएसटी से बाहर
- 6. डिजिटल अर्थव्यवस्था
- 7. टेक्नोलॉजी होगी जीएसटी 2.0 का सबसे महत्वपूर्ण आधार
- कुछ विवादित विषय
- GST के मोर्चे पर इंडस्ट्री के लिए अहम खबर, ITC राहत की राह में राज्यों की चिंता
- इंडस्ट्री ने क्या मांग की?
- अभी क्या नियम है?
- राज्यों की चिंता क्या है?
- GST काउंसिल में आ सकता है प्रस्ताव
- लेखक की टिप्पणी
- निष्कर्ष
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में संभावित सुधार के विषय
1. टैक्सपेयर्स के बीच विश्वास और स्पष्टता और सरलता बढ़ाने की जरूरत-
यह कि जीएसटी के दूसरे दशक में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में यह बैठक महत्वपूर्ण है। कि
जीएसटी परिषद के सुधारों के अगले चरण में सबसे बड़ी आवश्यकता करदाताओं के बीच विश्वास, स्पष्टता और सरलता बढ़ाने की है. इसी दिशा में छह प्रमुख सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.। यह ध्यान देने योग्य प्रमुख क्षेत्रों में से एक जीएसटी संबंधी मुकदमों में कमी लाना है. जीएसटी लागू होने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर विवाद सामने आए हैं.। विशेष रूप से ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में गेम्सक्राफ्ट मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की संभावित कर मांग का मुद्दा चर्चा में है । यह कि प्रथम अपील और द्वितीय अपील में भी सुधार की आवश्यकता है।
2. उद्योग जगत का तर्क
2.उद्योग जगत का तर्क –
यह कि वर्षों से प्रचलित कानूनी व्याख्या के आधार पर प्लेटफॉर्म शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करता रहा है. ऐसे में जीएसटी परिषद भविष्य में ऐसे मामलों के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था ला सकती है, जिससे लंबे कानूनी विवादों में कमी आए।
3. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में जरूरी सुधार
3.इनपुट टैक्स क्रेडिट(ITC )में जरूरी सुधार-
यह कि एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार क्षेत्र इनपुट टैक्स क्रेडिट है. वर्तमान व्यवस्था में खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट कई बार इस बात से जुड़ जाता है कि विक्रेता ने सरकार को कर जमा किया है या नहीं.इससे ईमानदार करदाताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि वे आपूर्तिकर्ता के कर अनुपालन को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते।यदि खरीदार के पास वैध कर चालान हो, उसने भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया हो और किसी मिलीभगत में शामिल न हो, तो उसे कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। इससे विवाद कम होंगे और जीएसटी की मूल अवधारणा मजबूत होगी.
4. कंपनसेशन सेस
4.कंपनसेशन सेस-
यह कि कई उद्योग अभी भी कंपनसेशन सेस से जुड़े क्रेडिट और समायोजन के मुद्दों पर स्पष्टता चाहते हैं। फरवरी 2026 से कुछ वस्तुओं पर मुआवजा उपकर समाप्त करने की सिफारिश के बाद कंपनियां पुराने क्रेडिट के उपयोग और निपटान के बारे में निश्चितता चाहती हैं।जीएसटी परिषद इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर सकती है, जिससे उद्योगों की लंबित चिंताएं दूर होंगीI
5. पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस जीएसटी से बाहर
5.पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस जीएसटी से बाहर-
यह कि पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन और प्राकृतिक गैस अभी भी जीएसटी से बाहर हैं. इसके कारण विभिन्न स्तरों पर करों का बोझ बढ़ जाता है और लागत शृंखला में करों का प्रभाव बना रहता है.इन उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल करने से विनिर्माण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की लागत कम हो सकती है तथा एकीकृत कर व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
6. डिजिटल अर्थव्यवस्था
6.डिजिटल अर्थव्यवस्था-
यह कि तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था एक और क्षेत्र है जहां व्यवसाय अधिक स्पष्टता की तलाश कर रहे हैं. ऐप-आधारित यात्री परिवहन पर जीएसटी अधिनियम की धारा 9 (5) के लागू होने से अनिश्चितता उत्पन्न हुई है, क्योंकि प्लेटफॉर्म-आधारित मॉडल विकसित हो रहे हैं।जीएसटी परिषद डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका, नियंत्रण और जिम्मेदारी के आधार पर स्पष्ट ढांचा तैयार कर सकती है, जिससे कर अनुपालन आसान होगा.
7. टेक्नोलॉजी होगी जीएसटी 2.0 का सबसे महत्वपूर्ण आधार
7.टेक्नोलॉजी होगी जीएसटी 2.0 का सबसे महत्वपूर्ण आधार-
यह कि जीएसटी 2.0 का सबसे महत्वपूर्ण आधार टेक्नोलॉजी हो सकती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिसिस और उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से करदाताओं को पहले से अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और पूर्वानुमेय अनुपालन व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकती है।इससे नोटिस, जांच और विवादों की संख्या कम होगी तथा व्यवसायों के लिए कर व्यवस्था अधिक आसान बनेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी के पहले दशक का मुख्य लक्ष्य पूरे देश में एक समान कर प्रणाली स्थापित करना था।अब दूसरे दशक में प्राथमिकता सरलीकरण, अनुपालन में आसानी, करदाताओं का विश्वास बढ़ाने और विवाद कम करने पर हो सकती है.
यदि ये सुधार लागू होते हैं, तो जीएसटी 2.0 केवल कर संग्रह का माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने वाला एक अधिक परिपक्व और सक्षम कर ढांचा बन सकता है.
कुछ विवादित विषय
GST के मोर्चे पर इंडस्ट्री के लिए अहम खबर, ITC राहत की राह में राज्यों की चिंता
यह कि इंडस्ट्री ने अपने इस्तेमाल के लिए बनाए जाने वाले कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर GST में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की राहत देने की मांग की है, लेकिन इससे राज्यों के राजस्व पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही हैI
यह कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के मोर्चे पर इंडस्ट्री की एक अहम मांग पर फिलहाल राज्यों के बीच सहमति बनना मुश्किल नजर आ रहा है.
इंडस्ट्री ने क्या मांग की?
यह कि इंडस्ट्री चाहती है कि GCC, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी, वेयरहाउस और अन्य बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर चुकाए गए GST का ITC लेने की मंजूरी मिले।
इसमें निर्माण के दौरान इस्तेमाल होने वाले सीमेंट, स्टील और अन्य सामान के साथ कंस्ट्रक्शन एवं वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट सर्विसेज शामिल हैं। मौजूदा व्यवस्था में अचल संपत्ति के निर्माण से जुड़े कई खर्चों पर ITC प्रतिबंधित है।
अभी क्या नियम है?
यह कि GST कानून के सेक्शन 17(5) के तहत कुछ निर्माण संबंधी खर्चों पर ITC ब्लॉक है. खासकर ऐसी अचल संपत्ति के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले गुड्स और सर्विसेज पर ITC को लेकर प्रतिबंध हैं, कुछ निर्धारित अपवादों को छोड़कर I यानी कंपनियां अपने कारोबार के लिए फैक्ट्री, वेयरहाउस या अन्य सुविधा तैयार करने में GST चुकाती हैं, लेकिन हर मामले में उस GST का क्रेडिट हासिल नहीं कर पातीं।
राज्यों की चिंता क्या है?
यह कि इंडस्ट्री को राहत मिलने से कंपनियों की लागत और वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन राज्यों को डर है कि बड़े पैमाने पर ITC की मंजूरी देने से GST राजस्व में कमी आ सकती है।यही वजह है कि इस प्रस्ताव पर राज्यों के बीच सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा है।
GST काउंसिल में आ सकता है प्रस्ताव
इस मामले में GST की लॉ कमिटी प्रस्ताव पर विचार कर रही है और इसे आगे GST काउंसिल के सामने चर्चा के लिए लाया जा सकता है। हालांकि, अभी यह राहत तय नहीं हुई है और अंतिम फैसला GST काउंसिल की चर्चा एवं सिफारिश के बाद ही होगा।
लेखक की टिप्पणी
1.यह कि काफी समय पश्चात जीएसटी काउंसिल की मीटिंग होने जा रही है। व्यापार , उद्योग जगत और अन्य करदाता को काफी उम्मीद लगाए हुए हैं। कि सरकार जीएसटी में उन्हें छूट और प्रोत्साहन के नए नई कार्यक्रम पेश करेगी ।जैसा कि सभी पाठकों को स्पष्ट है कि जीएसटी को लगभग 1 दशक हो गया है। इस कानून के माध्यम से काफी विवाद सामने आए हैं ।उदाहरण के तौर पर यदि किसी करदाता पर मांग आरोपित की जाती है उसे प्रथम अपील में 10% प्री डिपॉजिट करना होता है ,उसके पश्चात ही वह वहां पर अपनी बात रख सकता है ,और यदि उसकी प्रथम अपील अस्वीकार की जाती है तो उसके पास दूसरा विकल्प जीएसटी ट्रिब्यूनल अथॉरिटी है जहां उसे दोबारा से 10% फ्री डिपॉजिट करके एक लंबे प्रोसीजर में में भाग लेना होगा ।जिससे उसकी वर्किंग कैपिटल और व्यापार पर असर पड़ता है। यदि बड़ी कंपनियां है तो उन्हें भी को जवाब देना होता है कि हमारे पर जीएसटी की इतनी मांग है ।तथा वैधानिक रूप से उसे पर 10 से लेकर 15% अतिरिक्त हो जाता है। जिसे संभालना व्यापार, उद्योग जगत और अन्य करदाता को मुश्किल होता है। अभी जीएसटी ट्रिब्यूनल पूरी तरीके से कार्य नहीं कर रही है ।मेरा अनुभव यह कहता है कि जीएसटी ट्रिब्यूनल से भी करदाता को बहुत अधिक लाभ नहीं मिलने वाला क्योंकि अधिकतर case या तो अस्वीकार होंगे या रिमांड किए जाएंगे। रिमांड करने की स्थिति में पुनः करदाता उसी स्थिति में आ जाएगा जिसमें वह मांग के विरुद्ध प्रथम अपील में गया था और उसके द्वारा जो प्री डिपॉजिट 20% जमा किया है, वह ब्लॉक हो जाएगा। ऐसी स्थिति में व्यापार और उद्योग जगत को एक सामूहिक प्रयास करना चाहिए और सरकार को बताना चाहिए कि जीएसटी के विवादों को कम से कम किया जाए। इसमें प्री डिपॉजिट के प्रावधान को हटाया जाना चाहिए और देश के अंदर जीएसटी ट्रिब्यूनल की संख्या बहुत अधिक बढ़ानी चाहिए ,क्योंकि आज की तारीख में जीएसटी ट्रिब्यूनल में बहुत अधिक case हैं ।जिनका निस्तारण करने में कई साल लगेंगे और उसके पश्चात नए Case भी जीएसटी ट्रिब्यूनल में आते जा रहे हैं ।मेरे मत अनुसार जीएसटी के ट्रिब्यूनल के विवाद शायद पूरे देश में सबसे अधिक होंगे जो सालों साल चलेंगे ऐसी स्थिति में सरकार को सरल प्रक्रिया को अपनाना चाहिए।
2. यह कि महत्वपूर्ण विवाद है, जिसमें धारा 129 के अंतर्गत अर्थ दंड लगाने का प्रावधान है, जिसकी प्रथम अपील इस के क्षेत्राधिकार में होती है ।जहां यह पेनल्टी लगाई जाती है जिससे करदाता को बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उसके धन , समय तथा मानसिक रूप से वह परेशान रहता है ।जब सरकार ने एक कर एक देश की अवधारणा को स्थापित करना है। और देश डिजिटल इंडिया की तरफ चल रहा है। तो उसे करदाता को यह सुविधा देनी चाहिए कि वह अपने क्षेत्राधिकार में धारा 129 की प्रथम अपील कर सके। यह कि व्यापार ,उद्योग और अन्य करदाताओं को जीएसटी काउंसिल और सरकार को बताना चाहिए ।जिससे उनका दोहन रोका जा सकता है।
3) 3. यह कि जीएसटी के अंतर्गत एनुअल रिटर्न जिसे हम जीएसटीR 9 के नाम से जानते हैं। प्रत्येक करदाता के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए और प्रत्येक वर्ष के जीएसटीR 9 का असेसमेंट किया जाना चाहिए, जिससे करदाता को उस वर्ष से संबंधित धारा 73, 74 और 74 A से मुक्ति मिल सकती है।
4. 4. यह कि जीएसटी में धारा 73 या 74 की मांग जारी करने के पश्चात प्रथम और द्वितीय अपील में विलंब के लिए लिमिटेशन एक्ट को लागू किया जाना आवश्यक है। क्योंकि जीएसटी ट्रिब्यूनल में भी काफी अपील लिमिटेशन के बिंदु पर विचाराधीन है।अतः जीएसटी को सरल बनाने के लिए विवादों को कम करने के लिए प्रथम और द्वितीय अपील में लिमिटेशन एक्ट का प्रावधान किया जाना आवश्यक है।
निष्कर्ष
यह कि आगामी जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से व्यापार ,उद्योग और अन्य करदाता को काफी उम्मीद है।जीएसटी में कई कमी है, जिन्हें सरकार अनदेखा कर रही है।सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व हित में नजर आता है। उसे करदाता के मौलिक अधिकारों पर भी ध्यान देना चाहिए और मानवीय आधार पर जीएसटी कानून में सीपीसी (CPC )को लागू करना चाहिए। जिससे विसंगति वह दूर की जा सकती है।
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डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न मीडिया/ प्रिंट मीडिया पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लिखा गया है।





