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भारत की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण लगातार छठवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं कल 01 फरवरी 2024 को बह सरकार का अंतरिम बजट पेश करेंगी।

इस बार के बजट पर करदाताओं और विभिन्न सेक्टर्स के उधोगों को बहुत सारी उम्मीदें है। देखना ये है कि वित्त मंत्री क्या देती हैं. मिडिल क्लास के लिए क्या कुछ खास होने वाला है या फिर टैक्स स्लैब जस का तस रहने वाला है. क्या करदाताओं को इनकम टैक्स (Income tax) के मामले में सरकार कोई बड़ा गिफ्ट ऑफर करेगी?

करदाताओं को भी इस बार के बजट में भी वित्त मंत्री से विभिन्न राहत की उम्मीदें है। अंतरिम बजट (Interim Budget) में राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रण में रखते हुए आर्थिक विकास को गति देने के लिए बड़ी बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं पर सरकारी निवेश में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है, कमजोर वर्गों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए गरीबों और कृषि क्षेत्र के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं पर भी बजट में परिव्यय बढाये जाने की उम्मीद है,

आइए जानते हैं आशीष कमथानिया एडवोकेट से बजट में होने वाले किन-किन बदलावों पर करदाताओं की और विभिन्न सेक्टर्स के उधोगों की नजर बनी हुई है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ सकती है!

दोनों टैक्स रिजीम (नए और पुराने) की कर व्यवस्था के तहत वेतनभोगी करदाताओं को 50,000 रुपये की मानक कटौती (Standard Deduction) लाभ प्राप्त है। सरकार के 2024 के इस बजट से करदाताओं की अपेक्षा है कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती की सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये करना चाहिए।

हाउसिंग लोन इंटरेस्ट की सीमा बढ़ सकती है!

गत वर्ष में पुराने टैक्स रिजीम (कर व्यवस्था) के तहत करदाताओं को हाउसिंग लोन इंटरेस्ट पर 200,000 रुपये की कटौती का लाभ प्राप्त है। सरकार के 2024 के इस बजट से करदाताओं की अपेक्षा है कि हाउसिंग लोन इंटरेस्ट की सीमा को बढ़ाकर 3,00,000 रुपये करनी चाहिए।

बुनियादी छूट की सीमा (Basic Exemption Limit) बढ़ सकती है!

सरकार ने बजट 2023 में कई राहत भरे एलान किए थे। इसके बावजूद इस साल भी यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों टैक्स रिजीम (नए और पुराने) के तहत वित्त मंत्री इस बार भी बुनियादी छूट की सीमा (Basic Exemption Limit) को कम से कम 50,000 रुपये तक बढ़ा सकती हैं। करदाता इसे बढ़ाकर 3,00,000 रुपये करने की उम्मीद कर रहे हैं। बुनियादी छूट सीमा में बढ़ोतरी से सभी करदाताओं की टैक्स देनदारी कम होगी, जिससे नेट टेक होम सैलरी में इजाफा होगा।

राष्ट्रीय पेंशन योजना NPS में अंशदान के लिए 14 प्रतिशत योगदान की अनुमति मिल सकती है!

करदाता इस बार के बजट से यह उम्मीद कर रहे हैं कि सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों के कर्मचारियों को पेंशन योजना NPS में 14 प्रतिशत योगदान की अनुमति मिले, ताकि उन्हें आयकर में बराबर छूट मिल सकती है।

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मेट्रो शहरों की संख्या में हों सकती है ब्रद्धि !

मेट्रो शहरों में एचआरए (House Rent Allowance) पर सेक्शन 10(13A) के तहत मेट्रो शहरों के कर्मचारियों के लिए एचआरए छूट की गणना का आधार मूल वेतन का 50% होता है। वर्तमान में, केवल 4 शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को ही मेट्रो शहर माना जाता है।

नोएडा, गुडगाँव, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु जो सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से हैं, इन शहरों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों की अपेक्षा है कि इनको एक मेट्रो शहर की संखिया में शामिल किया जाए, ताकि यहां रहने वाले कर्मचारियों को भी मेट्रो शहरों के बराबर ही कर लाभ मिल सके।

गरीब कल्याण योजनाओं में हो सकता है अधिक का ऐलान

पीएम गरीब कल्याण योजना के लिए रुपये का आवंटन में ब्रद्धि होने की उम्मीद है, जिसके तहत 80 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया जाता है

उर्वरकों पर सब्सिडी के लिए हो सकता है ऐलान

कृषि क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए उर्वरकों पर अधिक सब्सिडी के लिए घोषणा होने की उम्मीद है

किसानो की सम्मान निधि में हो सकती है बढरोत्री !

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में अभी तक सालाना 3 किस्त दी जाती हैं. इसमें 2000 रुपए की किस्त होती है इस बजट में किसानों को दी जाने वाली किस्त को अब 3 के बजाए 4 या 5 किया जा सकता है, इस प्रकार किसानो को मिलने वाली किसान सम्मान निधि को 6000 से बढाकर 8 या 10हजार किये जाने की संभावना है,

इलेक्ट्रॉनिक व्हिक्ल (EV), डिजिटल पेमेंट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए अधिक उम्मीदें !

इलेक्ट्रॉनिक व्हिक्ल (EV), डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए गत वर्ष एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की उच्च उम्मीदों के साथ बीता है, भारत का पेमेन्ट सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल होने जा रहा है, तथा भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के छेत्र में भी उची उड़ान भरने को आतुर है, इन सभी छेत्रों में इस बजट में नए-नए एलान/घोषणा की संभावना है,

जैसा मैंने समझा, आपके समक्ष रखा, कोई त्रुटि रह गयी हो तो, आप आशीष कमथानिया, एडवोकेट को क्षमा प्रदान करें !

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Most organizations don’t fail at compliance because laws are complex. They fail because compliance is not executed as a structured project. I work at the intersection of Project Management, Law, and Regulatory Compliance, helping businesses convert high-risk regulatory environments into cont View Full Profile

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