आखिर सेबी की आंखें खुली: नए जमाने की टेक्नोलॉजी कंपनियों के मूल्यांकन पर लगेगी लगाम
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आखिर सेबी की आंखें खुली: नए जमाने की टेक्नोलॉजी कंपनियों के मूल्यांकन पर लगेगी लगाम

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पेटीएम, जोमेटो, नाइका, मेक माइ ट्रिप, आदि नए जमाने की युनिकोर्न स्टार्ट अप हाइटेक कंपनियों ने घाटे में होने के बावजूद अपने  शेयरों का अत्यधिक मूल्यांकन कर आईपीओ के जरिये आम निवेशकों से अरबों रुपये बटोरें और आज यह हाल है कि शेयर मुंह के बल गिर चुके हैं और आम निवेशकों को भारी नुकसान सहना पड़ा.

सबसे बड़ी बात ये सब हुआ सरकारी एजेंसियों जैसे सेबी, आरबीआई और वित्त मंत्रालय के नाक के नीचे, कानूनी तरीके और सर्वसम्मति से. इसमें कोई राय नहीं कि यह एक पब्लिक लूट से कहीं से भी कम नहीं है और इसकी जाँच होनी जरुरी है.

फिलहाल सेबी ने इस कमजोरी का संज्ञान लेते हुए एक विमर्श पेपर जारी किया है, जिस पर जनता और हितधारकों के विचार 05/03/2022 तक मांगे गए हैं.

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इस पेपर में कुछ प्रमुख अनुपालन ऐसी स्टार्ट अप टेक्नोलॉजी कंपनियों पर लागू करने जो प्रस्तावित किए हैं:

1. इन कंपनियों को अब विस्तार में आईपीओ में लाये जा रहे शेयरों का मूल्यांकन को समझना पड़ेगा.

2. इन कंपनियों ने आईपीओ से पहले अपने शेयरों का क्या मूल्यांकन रखा था और जब उन्होंने एंजिल इंवेस्टर या अन्य निजी निवेशकों से पैसे लेते समय कौन से प्रेजेंटेशन दिए थे- यह सब दस्तावेज आईपीओ के समय निवेशकों के सामने रखने होंगे.

3. इन कंपनियों का पिछले 3 सालों में लाभ न होना और घाटे में चलना चिंता का विषय है.

4. ऐसी कंपनियां लम्बे समय से घाटे में चल रही है और इनकी प्राथमिकता लाभ कमाने से ज्यादा व्यापार वृद्धि पर होता है, जिसका सही आंकलन बहुत जरूरी है.

5. कुछ कंपनियां जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध है, वे शेयर मार्केट रैली का फायदा उठाना चाहती है और उनके शेयर आज भी मार्केट में भारी डिस्काउंट में ट्रेड कर रहे हैं.

6. फिलहाल कंपनियां ईपीएस, पी/ई, रिटर्न आन नेट वर्थ, नेट असेट वेल्यू और अन्य समान कंपनियों से तुलना आदि आंकड़े बताए जाते हैं जो कि काफी पुराने मापदंड है और नए जमाने की इन कंपनियों पर फिट नहीं बैठते.

7. इन घाटे वाली कंपनियों के लिए शेयर मूल्यांकन का आधार, महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षमता के मापदंड एवं आंकड़े जैसे बीते समय में हुए लेनदेन, मूल्यांकन, पैसे कब कब कितने उगाहे गए, कितने ग्राहक जोड़े गए, समाज में कंपनी के आइडिया की स्वीकार्यत, आदि के आंकड़े को प्रदर्शित करना होगा.

8. पिछले 18 माह के शेयर मूल्यांकन के आंकड़े क्योंकि वर्तमान आंकड़े कंपनी की वित्तीय स्थिति की सही जानकारी निवेशकों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं.

9. पिछले तीन सालों में इन कंपनियों द्वारा किन आंकड़ों पर पैसे जुटाए गए, वह सब विस्तारपूर्वक निवेशकों के सामने रखना होगा और आने वाले समय में कौन से ऐसे आधार और मापदंड होंगे जो कंपनी के वर्तमान मूल्यांकन को सही ठहराते है.

10. शेयरों के जरिये पैसे उगाही के मापदंड को बिलकुल साफ तरीके से इन कंपनियों को पेश करना होगा, बिना किसी लाग लपेट के और किसी भी प्रकार से गलत, भ्रामक और झूठ नहीं होना चाहिए. मापदंडों की व्याख्या विस्तार से निवेशकों के सामने रखनी होगी.

11. इन मापदंडों को आडिटर द्वारा सत्यापित कराना होगा और इनकी तुलना दूसरी देशी और विदेशी कंपनियों के साथ करते हुए भी आंकड़ों को पेश करना होगा.

12. पिछले 18 माह में जितने भी शेयर बेचें गए, जिस कारण से कंपनी के शेयरधारकों में 5% या उससे अधिक का बदलाव यदि हुआ है तो इसकी जानकारी उपलब्ध अपने प्रासपेक्टस में करनी होगी.

13. शेयर मूल्यांकन का आधार सेबी की प्राइमरी मार्केट कमिटी द्वारा जांचा जाएगा और उसके बाद ही आईपीओ का अप्रूवल दिया जावेगा.

साफ है स्टाक एक्सचेंज और शेयर के दामों पर नजर रखने वाली एजेंसी सेबी द्वारा जारी विमर्श पेपर ने इन नए जमाने की टेक्नोलॉजी कंपनियों के उल्टे सीधे किए जा रहे शेयर मूल्यांकन पर लगाम लगाने की कोशिश की है ताकि भविष्य में घाटे में चल रही इन कंपनियों में निवेशक लुटने से बचें.

यह नियम जल्द से जल्द लागू हो ताकि शेयर बाजार का फायदा सही कंपनियों और सही हितधारकों तक पहुंचे.

लेखक एवं विचारक: सीए अनिल अग्रवाल जबलपुर 9826144965

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