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जीएसटी – सरलीकरण और सकारात्मक परिवर्तन अब बहुत जरुरी है

November 15, 2019 10353 Views 3 comments Print

ध्यान रखें इस समय सरकार पूरा प्रयास कर रही है कि किसी भी तरह से जीएसटी से जुडी समस्याएँ हल कर करदाताओं को राहत दी जा सके और देर से ही सही इस और से सकारात्मक संकेत आने लगे है और यह एक उम्मीद जगाता है कि अब उलझे हुए जीएसटी को सुलझा लिया जाएगा लेकिन इन प्रयासों को और गति देने की आवश्यकता है और समस्याओं को सुलझाने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ जमीनी स्तर पर जुडे जीएसटी विशेषज्ञों की मदद ले और इस समय नए प्रयोग करना जैसे “इनपुट क्रेडिट का 20%” वाले प्रावधान फिलहाल स्थगित रखे.

GST Annual Returns – How to File Simple GSTR-9

May 22, 2019 38904 Views 9 comments Print

The GSTR-9 is a very complicated return form and once I have described it as a ‘Round Square’. It is not a simple return and like most of the cases of GST procedures simplification is missing from this form also and further filing instructions attached with this Return form are also confusing.

जीएसटी मोटर व्हीकल्स पर इनपुट क्रेडिट – एक वस्तुस्तिथि

February 4, 2019 80469 Views 10 comments Print

कार , स्कूटर्स , मोटर साइकल्स इत्यादि यदि आप अपने व्यवसाय के लिए खरीदते हैं या उनकी मरम्मत कराते हैं , टायर बदलवाते हैं और इस पर जीएसटी का भुगतान करते हैं तो क्या आप इसकी इनपुट क्रेडिट ले सकते हैं क्या ? यह सवाल कई बार पूछा जाता रहा है तो आइये आज इस […]

बजट -2019 : कर प्रस्तावों पर प्रतिक्रया एवं विवेचन

February 1, 2019 9546 Views 0 comment Print

इस समय की सरकार का आम चुनाव के पहले जो अंतरिम बजट इस समय वित्त मंत्री श्री पीयूष गोयल ने पेश किया उसमें यह तो उम्मीद थी कि आयकर में कुछ तो छूट मिलेगी ही और इस सम्बन्ध में ये उम्मीद कुछ हद तक पूरी तो हुई ही है और अब 5 लाख तक की कुल आय पर कोई कर नहीं देना पडेगा. आइये इसे और अन्य परिवर्तनों को ध्यान से देखें कि आखिर इस अंतरिम बजट में हुआ क्या है कर प्रस्तावों को लेकर.

जीएसटी एक्सपर्ट सुधीर हालाखंडी के साथ एक इंटरव्यू- जीएसटी का 18 माह का सफ़र

January 15, 2019 10296 Views 3 comments Print

भारत में लगने वाले जीएसटी के बारे में सोचे तो कभी –कभी एक नाम आता है जहन में और वो नाम है जीएसटी एक्सपर्ट सुधीर हालाखंडी का . आइये आज उनसे एक मुलाक़ात करते हैं और अन्य बातों के साथ –साथ मालुम करते हैं कि कैसा रहा भारत में जीएसटी का 18 महीने का सफ़र और अब आगे उन्हें क्या चाहिए

जीएसटी कोंसिल की 32वीं मीटिंग के फैसले और उनके प्रभाव

January 10, 2019 20307 Views 5 comments Print

सुधीर हालाखंडी जीएसटी कोंसिल की 32वीं मीटिंग: जीएसटी कौंसिल की ताजा मीटिंग के फैसले और उनके प्रभाव जीएसटी कौंसिल की 32वीं कौंसिल की मीटिंग 10 जनवरी को संपन्न हो गई और इसमें जैसी कि अपेक्षा थी लगभग उससे के अनुसार छोटे एवं मध्यम उद्योग एवं व्यापार के हित में जो फैसले लिए गए उनका और […]

जीएसटी कौंसिल की 32वीं मीटिंग- उम्मीदें और आशाएं

January 8, 2019 26073 Views 5 comments Print

जीएसटी कौंसिल की 32 वीं मीटिंग अब 10 जनवरी 2019 को हो रही है, माहौल और कारण कोई भी हो, जिनके कारण हम अब जीएसटी में तीव्र सुधारों की आशा कर रहें हैं , उनकी गहराई में जाने की जगह , आइये देखें इस मीटिंग से हम क्या उम्मीद कर सकते हैं क्यों कि अब जीएसटी कौंसिल के त्वरित फैसले ही जीएसटी में उद्योग एवं व्यापार का विश्वास को ना सिर्फ पुन: स्थापित कर सकते हैं बल्कि जीएसटी को भी एक नया जीवन दे सकते हैं :-

GST Late Fees Fiasco And Solution

January 4, 2019 3696 Views 7 comments Print

When goods and service tax was introduced in India in July 2017 and first returns were filed in the Month of Aug. 2018, the first most controversial aspect of the GST was surfaced in the form of GST Late fees.

डीलर्स में असंतोष बढ़ रहा है सरकार को जीएसटी लेट फीस लौटा देनी चाहिए

January 4, 2019 15339 Views 11 comments Print

जीएसटी के दौरान रिटर्न देरी से पेश किये जाने के लिए लेट फीस के प्रावधान बनाये गये थे उनके बारे में जीएसटी विशेषज्ञ प्रारम्भ से ही सहमत की नहीं थे क्यों कि जीएसटी कानून नया था और ये लेट फीस के कानून ना सिर्फ सख्त थे बल्कि लेट फीस की राशि का डीलर द्वारा भुगतान किये जाने वाले कर की राशी से भी कोई संबंध नही था और इसके कारण हुआ यह कि जिन कर दाताओं के कोई कर की मांग नहीं थी उन्हें भी लेट फीस के रूप में हजारों रूपये की लेट फीस जमा करानी पड़ी थी.

जीएसटी- राजस्थान सरकार भी अन्य सरकारों की तरह ई-वे बिल पर छूट दे

January 4, 2019 2139 Views 0 comment Print

जीएसटी के दौरान ई –वे बिल का एक प्रावधान है जिसके अनुसार 50 हजार से अधिक के माल की सप्लाई पर ई –वे बिल जारी करना होता है और इस प्रावधान को लेकर व्यापार और उध्योग प्रारम्भ से ही असहज महसूस करता रहा है और इस सम्बन्ध में प्रारम्भ से ही दो तरह की मांग की गई उनमें से एक तो थी कि इस फॉर्म की अनिवार्यता को 50 हजार रुपये से बढ़ा कर 2 लाख कर दिया जाए और दूसरी थी कि इस केवल एक राज्य से दूसरे राज्य को गई गई सप्लाई के दौरान ही लागू किया जाए अर्थात राज्य के भीतर की सप्लाई पर पर ई-वे से या तो मुक्ति दी जाए या कोई छूट दी जाये .

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