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Income Tax

रिटर्न न भरने वाले कुछ करदाताओं का टी०डी०एस० निर्धारित दर से ज्यादा दर से काटना होगा

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आयकर कानून, 1961 के अध्याय XVII बी. यानि धारा 192 से 206 बी. के अधीन वेतन, ब्याज, ठेका और कमीशन आदि विभिन्न प्रकार के भुगतानों पर टी०डी०एस० काटने के प्रावधान हैं।  वित्त अधिनियम, 2021 (बजट) के द्वारा 1 जुलाई, 2021 से इस अध्याय में एक नई धारा 206 ए.बी. बढ़ाई गई है, जिसके अनुसार निम्न दोनों शर्तें पूरी करने वाले करदाताओं का विभिन्न भुगतानों पर कटने वाला टी०डी०एस० निर्धारित दर से ज्यादा दर से काटना होगा-

1.  करदाता ने टी०डी०एस० कटने वाले वर्ष से ठीक पहले के उन दो वर्षों की आयकर रिटर्न नहीं भरी है, जिनकी आयकर कानून, 1961 की धारा 139(1) के अधीन बनाई गई समय सीमा बीत चुकी है।

इसे समझने के लिए मान लीजिए कि किसी करदाता का टी०डी०एस० 15 जुलाई, 2021 को कटना है और उसे 31 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष 2021-22 की रिटर्न 30 सितंबर, 2021 तक भरनी है। इस करदाता के केस में, चूँकि निर्धारण वर्ष 2021-22 की रिटर्न भरने की समय सीमा अभी बीती नहीं है, इसलिए यह देखा जायेगा कि उसने निर्धारण वर्ष 2021-22 से पहले के दो निर्धारण वर्षों यानि 2019-20 और 2020-21 की रिटर्न भरी है या नहीं।  यदि उक्त उदाहरण में टी०डी०एस० कटने की तारिख 1 अक्टूबर, 2021 हो तो उस तारिख को करदाता की निर्धारण वर्ष 2021-22 की रिटर्न भरने की समय सीमा बीत चुकी है और इसलिए यह देखा जायेगा कि करदाता ने निर्धारण वर्ष 2020-21 और 2021-22 की रिटर्न भरी है या नहीं।

2.  करदाता ने टी०डी०एस० कटने वाले वर्ष से पहले के जिन दो निर्धारण वर्षों की आयकर रिटर्न नहीं भरी है, उन दोनों निर्धारण वर्षों में उस करदाता के कटे हुए टी०डी०एस० और टी०सी०एस० का जोड़ 50,000/- रु० या इससे ज्यादा है।

धारा 206 ए.बी. की उक्त दोनों शर्तें पूरी करने वाले करदाताओं का टी०डी०एस० किस दर से कटेगा

उक्त दोनों शर्तें पूरी करने वाले करदाताओं का टी०डी०एस०, निम्न तीन दरों में से, जो भी ज्यादा हो, उस दर से कटेगा –

1. आयकर कानून की टी०डी०एस० से संबंधित धाराओं में लिखी हुई दर से दो गुणा

2. लागू दर से दो गुणा

3. पाँच प्रतिशत की दर

धारा 206 ए.ए. के अनुसार भुगतान प्राप्त करने वाला कोई करदाता अगर अपना पैन न० नहीं बताता है या गलत बताता है या उसका पैन मान्य नहीं है तो ऐसे करदाता का टी०डी०एस०, निम्न तीन दरों में से, जो भी ज्यादा हो, उस दर से कटेगा –

1. आयकर कानून की टी०डी०एस० से संबंधित धाराओं में लिखी हुई दर

2. लागू दर

3. बीस प्रतिशत की दर (धारा 206 ए.ए.(1) में दिये गए प्रोविजो के अनुसार धारा 194 ओ. तथा 194 क्यू. के अधीन कटने वाले टी०डी०एस० पर यह दर बीस प्रतिशत की बजाय पाँच प्रतिशत होगी।)

धारा 206 ए.बी. (2) के अनुसार अगर किसी करदाता पर धारा 206 ए.बी. के साथ-2 धारा 206 ए.ए. भी, यानि दोनों धाराएँ लागू होती हैं तो उसका टी०डी०एस०, इन दोनों धाराओं के अधीन बनने वाली दरों में से, जो भी ज्यादा हो, उस दर से कटेगा।

निम्न हालात में धारा 206 ए.बी. लागू नहीं होगी

  • धारा 192 के अधीन वेतन, धारा 192 ए. के अधीन कर्मचारियों के पी०एफ०, धारा 194 बी. के अधीन लाटरी का ईनाम, धारा 194 बी.बी. के अधीन घोड़ों की दौड़ से जीती गई आय, 194 एल.बी.सी. के अधीन सिक्युरिटी ट्रस्ट से होने वाली आय आदि के भुगतान और धारा 194 एन. के अधीन बैंक से नकद रुपये निकालने पर कटने वाले टी०डी०एस० पर उक्त धारा लागू नहीं होगी।
  • उन अनिवासियों (भारत में न रहने वाले), जिनका भारत में कोई स्थायी कार्यालय नहीं है, को होने वाले भुगतान पर भी उक्त धारा लागू नहीं होगी।

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– सुनील कुमार गुप्ता, 123 ग्रीन स्कवेयर मार्केट, हिसार

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3 Comments
  1. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद संग नमन माननीय ललित इनानी जी

    1. सुप्रभात ललित इनानी जी, धन्यवाद सहित आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है। निवेदन है कि धारा 206 ए.बी. पर लिखे गये मेरे इस आलेख में जो जानकारी आपको छूटी हुई प्रतीत हुई है, उसके बारे में सविस्तार प्रतिक्रिया देने की कृपा करें, ताकि मेरा और अन्य पाठकों का मार्गदर्शन हो सके ।

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