CA Sudhir Halakhandi

अध्याय -1  – क्या है जी.एस.टी.

सरकार अब एक जुलाई 2017 से जी.एस.टी.लागू करने वाली है और इसके लिए आपको विशेष रूप से छोटे एवं मझोले व्यापारियों एवं लघु एवं माध्यम दरजे के उद्योगों को जी.एस.टी. की जानकारी देने के लिए एक सीरीज प्रारम्भ कर रहें है  है इसे आप पढ़कर समझने की कोशिश करें कि आने वाले समय में आपको किस प्रकार से जी.एस.टी.कानून का पालन करना है और किस तरह ये आपके व्यापार को प्रभावित करेगा.जी.एस.टी.के दौरान आपको प्रारम्भिक रूप से यह देखना है कि अब आपको एक ही  बिक्री पर दो करों को एकत्र करना है

(1). राज्य का जी.एस.टी.

(2) केंद्र का जी.एस.टी. इन्हें एस.जी.एस.टी. और सी.जी.एस.टी. के रूप में जाना जाएगा.

जी.एस.टी. के दौरान कर बिक्री पर नहीं बल्कि सप्लाई पर लगेगा और इससे क्या फर्क पडेगा इसे हम आगे के भागों में समझेंगे. अभी आप जी.एस.टी. का बेसिक समझने का प्रयास करें .

आइये इसे एक उदाहरण के जरिये समझने की कोशिश करें

जयपुर (राजस्थान ) का एक व्यापारी “अ” जयपुर  के ही एक दूसरे व्यापारी “ब” को कोई माल 10 लाख रुपये में बेचता है और मान लीजिये कि राज्यों के जी.एस.टी. की दर 8 प्रतिशत है एवं केंद्र के जी.एस.टी. की दर 10 प्रतिशत रहती है इस प्रकार जी.एस.टी. की कुल दर 18 प्रतिशत हुई (फिलहाल मान लीजिये ) तो “अ” इस व्यवहार में 80000.00  रुपये एस.जी.एस.टी. (राज्य का जी.एस.टी.) एवं 1.00 लाख रुपये सी.जी.एस.टी. (केंद्र का जी.एस.टी.) के रूप में अपने खरीददार “ब” से वसूल करेगा.

आइये इस सौदे का दूसरा भाग देखें

आइये अब इस व्यवहार को और भी आगे ले जाए और देखे कि इसी माल को जयपुर  का “ब” नामक व्यापारी अब राजस्थान के ही अन्य शहर जोधपुर के किसी अन्य शहर के व्यापरी “स” को 10.50 लाख रुपये में बेचता है तो वह 84000.00  रुपये एस.जी.एस.टी. एवं 1.05 लाख रुपये सी.जी.एस.टी. के रूप में वसूल करेगा .
राज्य और केंद्र सरकार को राजस्व के रूप में  क्या मिलेगा

यहाँ ध्यान रखे कि “ब” पहले से ही एस.जी.एस.टी. के रूप में अपना माल खरीदते हुए 80000.00 रूपये  का भुगतान कर चुका है एवं सी.जी.एस.टी. के रूप में 1.00 लाख रुपये का भुगतान इसी प्रकार कर  चुका है एवं इस प्रकार “ब” की इनपुट क्रेडिट एस.जी.एस.टी. के रूप में  80000.00 रुपये है एवं  सी.जी.एस.टी. के रूप में इनपुट क्रेडिट 1.00 लाख रुपये है जिसे वह अपने द्वारा “स” से वसूल किये गए कर में घटा कर जमा करा देगा.

इस प्रकार “ब” एस.जी.एस.टी. के रूप में (रुपये 84000.00 – रुपये 80000.00  ) 4000.00 रुपये का भुगतान राज्य के खजाने में जमा कराएगा एवं इसी प्रकार से सी.जी.एस.टी. (रुपये 1.05लाख – रुपये 1.00 लाख ) 5000.00 रुपये केन्द्रीय सरकार के खजाने में जमा कराएगा.

इस पूरे व्यवहार को देंखे तो इससे केंद्र सरकार को 1.05 लाख रूपये का कर मिलेगा और और राज्य सरकार को 84000.00 रुपया कर को मिलेगा.

क्या राज्य के भीतर ही बिक्री होने पर भी राज्य और केंद्र दोनों का कर देना होगा

यहाँ यह ध्यान रखें कि राज्य के भीतर माल का वितरण या बिक्री करने पर भी केंद्र और राज्य दोनों को कर देना होगा और अब से व्यापारी एक ही बिल में “दो कर” जैसा कि ऊपर बताया गया है एक ही बिल में  लगाएगा और यह तथ्य कि एक ही बिल में अब डीलर्स को दो टैक्स एक ही बिल में लगायेंगे जायेंगे तो फिलहाल आपके लिए एक आश्चर्यचकित करने वाला तथ्य हो सकता है .

जी.एस.टी. जैसा कि ऊपर बताया गया है उसी तरह से लगेगा और इसके साथ ही राज्यों में लगने वाला वेट और केंद्र में लगने वाला केन्द्रीय उत्पाद शुल्क अर्थात सेंट्रल एक्साइज भी समाप्त हो जाएगा. राज्यों और केंद्र के और कौन –कौन से कर समाप्त होंगे यह हम अगले कुछ भागों में पढेंगे.

यह जी.एस.टी. का प्रारम्भिक स्वरुप है और चूँकि आप इसका पहला भाग पढ़ रहे है इसलिए यह आपको थोड़ा समझने में तकलीफ दे सकता है लेकिन आप इसे अच्छी तरह से पढ़े और समझे क्यों कि एक जुलाई 2017 से आपको ही इसका पालन करना है .इसे पढने और समझने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है .

अगले भाग में आपको हम समझेंगे कि जब एक राज्य से दुसरे राज्य माल बेचा (या भेजा जाएगा ) तो जी.एस.टी. (जिसे आई.जी.एस.टी. कहा जाएगा ) किस प्रकार लगेगा एवं इसका समायोजन तथा भुगतान किस तरह प्रकार से किया जाएगा और उसके बाद इस प्रकार कर की दर तय होगी और किस प्रकार की वस्तुए कर मुक्त हो सकती है .

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अध्याय -2
जी.एस.टी. और दो राज्यों के बीच का व्यापार

(अंतरप्रांतीय बिक्री- Interstate Sale )

जी.एस.टी. के दौरान सी.एस.टी. अर्थात केन्द्रीय बिक्री कर का कोई अस्तित्व नहीं होगा  .

आइये हम समझाने की कोशिश करें कि केन्द्रीय बिक्री कर क्या है और यह वेट एवं इसके बाद जी.एस.टी. की रह में क्यों एक मुश्किल माना जाता रहा है .

जब वर्ष 2006 में राज्यों में वेट लागू किया गया था तब केन्द्रीय बिक्री कर अर्थात सी.एस.टी. को सबसे बड़ी बाधा माना गया था और यह वादा किया गया था कि प्रत्येक वर्ष एक प्रतिशत से इस दर को गिराकर अंत में

इस कर को समाप्त कर दिया जाएगा लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया और आज भी यह दर दो प्रतिशत पर कायम है और इसके साथ ही केन्द्रीय बिक्री कर पर एकत्र किये जाने वाले सी- फॉर्म की समस्या से पूरा ही व्यापार एवं उद्योग जगत परेशान है .

आइये पहले समझ ले कि केन्द्रीय बिक्री कर क्या है क्यों कि आम तौर पर इसका नाम यह संकेत देता है कि यह केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया एक कर है जब कि सच्चाई यह है कि यह बिक्री करने वाले राज्य द्वारा दो राज्यों के मध्य होने वाले व्यापार पर वसूल किया जाने वाला कर है और देश के विकसित राज्य जिन्हें हम निर्माता राज्य भी कह सकते है इस कर से काफी राजस्व एकत्र करते है .

जी.एस.टी. एक अंतिम बिंदु पर अंतिम उपभोक्ता पर लगने वाला कर है अत; केन्द्रीय बिक्री कर का इसमे कोई स्थान नही होगा और इससे विकसित राज्यों अर्थात बिक्री करने वाले राज्यों के राजस्व पर भी नकारात्मक प्रभाव पडेगा जिसके बारे में भी केंद्र को इन राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई करनी पड़ेगी.

जी.एस.टी. के दौरान केन्द्रीय बिक्री कर अर्थात सी.एस.टी. की समाप्ती सारे देश के डीलर्स को बहुत बड़ी राहत मिलने वाली है लेकिन आगे एक और कर प्रणाली है जो एस.जी.एस.टी.- integrated Goods and Service Tax  के नाम से लगने वाली है वह अब डीलर्स को पालन करनी होगी.

अंतर्राजीय बिक्री के दौरान C-forms की जरुरत तो समाप्त हो जायेगी लेकिन ऐसा को आश्वासन हमारे कानून निर्माता रोड परमिट के बारे में नहीं दे रहे है और जिस प्रकार के संकट मिल रहें है उनके अनुसार रोड परमिट जारी रहेंगे और अब इनका स्वरुप ई –परमिट के रूप में होगा जैसा कि अभी भी जारी है लेकिन ये सभी वस्तुओं पर लागू होंगे या नहीं यह भी अभी तय नहीं है.

इसके अतिरिक्त जी.एस.टी. बिक्री पर नहीं बल्कि सप्लाई पर लगेगा इस प्रकार ब्रांच और डिपो ट्रान्सफर भी कर के दायरे में आ जायंगे और माल बेचने और बिक्री के लिए भेजने के बीच का अंतर समाप्त हो जाएगा और इसका आपकी करदेयता पर क्या असर होगा इसका अध्ययन हम आगे करेंगें लेकिन अब F-FORM पर होने वाली बिक्री नहीं होगी.

आइये अब हमारे अध्याय  -3 में हम देखेंगे समझे कि यह आई.जी.एस.टी. – integrated Goods and Service Tax किस तरह की कर प्रणाली है लेकिन आप यह मान कर चले कि उसमे भी C-form जैसी कोई समस्या नहीं होगी और यह आपके लिए एक बहुत बड़ी राहत की बात होगी  .

अध्याय -3

IGST- इंटीग्रेटेड गुड्स एवं सर्विस टैक्स

आइये अब देखे कि दो राज्यों के बीच होने वाले व्यापार को आई.जी.एस.टी. के जरिये किस तरह नियंत्रित किया जाएगा

IGST- INTEGRATED GOODS AND SERVICE TAX

दो राज्यों के मध्य होने वाले व्यापार पर निगरानी रखने के लिए एक आई.जी.एस.टी. मॉडल भी तैयार कर प्रस्त्तावित किया गया है  जिसकी चर्चा  हम आगे कर रहे है  लेकिन यह ध्यान रखे  कि यह केन्द्रीय बिक्री कर के स्थान पर लगने वाला कोई नया कर  (एस.जी.एस.टी. एवं सी.जी.एस.टी. के अतिरिक्त तीसरा कर) नहीं है बल्कि एक ऐसा तंत्र है जिसके जरिये दो राज्यों के बीच हुए व्यापार पर नजर रखी जा सके एवं यह भी सुनिश्चित किया जा सके कि कर का एक हिस्सा  उस राज्य को मिले जहाँ अंतिम उपभोक्ता निवास करता है और दूसरा हिस्सा केंद्र सरकार को .

जी.एस.टी. के तहत सूचना तकनीकी की सहायता से एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाएगा जिससे दो राज्यों के मध्य माल एवं सेवा के अंतरप्रांतीय व्यापर पर निगरानी भी रखी जा सके एवं यह भी सुनिश्चित किया जा सके कि “कर” अंतिम उपभोक्ता के राज्य को मिल रहा है . यहाँ ऊपर पहले ही यह बताया जा चुका है कि यह केन्द्रीय बिक्री कर की जगह लगने वाला कोई नया कर नहीं है लेकिन यह “आई.जी.एस.टी.” भी उद्योग एवं व्यापार के लिए प्रक्रियात्मक उलझाने तो बढाने वाला ही है .

आइये देखे कि यह आई.जी.एस.टी. मॉडल किस तरह से काम करेगा :-

(i). अंतरप्रांतीय व्यापर के दौरान बिक्री करने वाला डीलर अपने खरीददार से आई.जी.एस.टी. के रूप में एक कर एकत्र कर केन्द्रीय

सरकार के खजाने में जमा कराएगा. इस कर की दर एस..जी.एस.टी. एवं सी.जी.एस.टी. की दर को मिलाकर बनेगी. उदाहरण के लिए मान लीजिये कि एस.जी.एस.टी. की दर 8 प्रतिशत है एवं सी.जी.एस.टी. की दर भी 10 प्रतिशत है तो आई.जी.एस.टी. के रूप में जमा कराया जाने वाला कर 18 प्रतिशत की दर से केंद्र सरकार के खजाने में जमा कराया जाएगा.

(ii). अपना आई.जी.एस.टी. जमा कराते समय विक्रेता अपने द्वारा इस माल ,को जो कि उसने अंतरप्रांतीय बिक्री के दौरान बेचा है, की खरीद पर चुकाए गये एस.जी.एस.टी. एवं सी.जी.एस.टी. की इनपुट क्रेडिट लेगा.

(iii) . विक्रेता का राज्य इस बिक्री किये गए माल के सम्बन्ध में विक्रेता ने जो विक्रेता राज्य में भुगतान किये गए एस.जी.एस.टी. की क्रेडिट ली है उतनी राशि केंद्र सरकार के खजाने में हस्तांतरित कर देगा.

(iv). अंतरप्रांतीय बिक्री के दौरान खरीद करने वाला क्रेता जब भी यह माल बेचेगा तो अपनी सी.जी.एस.टी. की इनपुट क्रेडिट  क्रमशः एस.जी.एस.टी. , सी.जी.एस.टी. या एस.जी.एस.टी. (इसी क्रम में ) की जिम्मेदारी में  से लेने का हक़ होगा .

(v). जितनी राशि की इनपुट क्रेडिट अपनी एस.जी.एस.टी. चुकाते समय उपभोक्ता राज्य का व्यापारी आई.जी.एस.टी. में से लेगा उतनी रकम केंद्र उपभोक्ता राज्य के खाते में हस्तांतरित कर देगा इस तरह आई.जी.एस.टी. की इनपुट क्रेडिट क्रेता  आई.जी.एस.टी. की भुगतान की  जिम्मेदारी के लिए ले सकता है और ऐसी कोई जिम्मेदारी खरीददार की नहीं है तो इसका इनपुट सी.जी.एस.टी. या  एस.जी.एस.टी. के तहत भी लिया जा सकता है .
इस प्रकार एस.जी.एस.टी. के रूप में मिलने वाला पूरा राजस्व अंतरप्रांतीय व्यापर के दौरान भी उपभोक्ता राज्य को ही मिल जाएगा.इसका विस्तृत उदाहरण आप साथ लगे Annexure- 1 देखें .

अध्याय  -4
छोटे एवं माध्यम दर्जे के व्यापार एवं उद्योग के लिए

कर की दर – RATE OF TAX

जी.एस.टी. को लेकर एक बहुत बड़ा सवाल व्यापार एवं उद्योग में लगे हुए कर दाताओं के मन में है कि जिस वस्तु का वे उत्पादन एवं व्यापर कर रहें है उस पर कर की दर क्या होगी !!! इसी से जुडा यह भी सवाल है कि किन –किन वस्तुओं को कर मुक्त रखा जाएगा ?

आइये आज कर की दरों के बारे में आपसे  बात करते है :-

प्रश्न :- कर की मुख्य दरें क्या होगी

केंद्र और राज्य सरकार की जी.एस.टी. कौंसिल  के सदस्यों जिनमे राज्य और केंद्र दोनों के प्रतिनिधी शामिल है  ने  कर की दरों के सम्बन्ध में एक फैसला ले लिया है और उनके द्वारा 4 दरों की बात की गई है . यह दरें 5 प्रतिशत , 12 प्रतिशत , 18 प्रतिशत  एवं 28 प्रतिशत होंगी . इन दरों के दौरान विभिन्न कर की दरों के अंतर्गत करयोग्य वस्तुओं की सूची जारी नहीं की गई है इसलिए इस समय यह तो नहीं कहा जा सकता कि कौनसी वस्तु किस कर की दर के तहत आएगी .

प्रश्न:- क्या करमुक्त रहने की संभावना है ?

खाध्यान सहित आवश्यक उपभोग की कई वस्तुओं को टैक्स फ्री रखा जा रहा है . इस लिहाज से उपभोक्ता मूल्‍य सूचकांक में शामिल तमाम वस्तुओं में से करीब 50 प्रतिशत वस्तुओं पर कोई कर नहीं लगेगा और यह वस्तुएं करमुक्त की श्रेणी में आयेंगी . इस प्रकार आप मान सकते है कि गेंहू , चावल , दालें , मक्का , बाजरा इत्यादि जो इस समय अधिकाँश राज्यों में करमुक्त है के जी.एस.टी. के दौरान भी करमुक्त रहने की पूरी संभावना है .

प्रश्न :- अन्य दरों में कौन – कौन सी वस्तुएं समाहित होंगी ?

सबसे निम्न दर आम उपभोग की वस्तुओं पर लागू होगी जो कि 5 प्रतिशत की दर होगी .

शेष वस्तुओं पर या तो 12 प्रतिशत कर की दर होगी या फिर 18 प्रतिशत जिसे की “स्टैण्डर्ड रेट” कहा गया है.

सबसे ऊंची दर विलासिता और तंबाकू जैसी अहितकर वस्तुओं पर 28 प्रतिशत लागू होगी. ऊंची दर के साथ इन पर अतिरिक्त उपकर भी लगाया जायेगा.

प्रश्न :-  सोने – चांदी जेवरात इत्यादि पर कर की दर क्या होगी ?

सोने पर 3 या 4 प्रतिशत की दर लगाए जाने की संभावना है लेकिन आधिकारिक रूप से अभी इस सम्बन्ध में अंतिम कुछ भी नहीं आया है .

करमुक्त वस्तुओं की सूची एवं हर कर की दर में समाहित वस्तुओं की सूचि की भी अभी प्रतीक्षा है .

प्रश्न :-  निर्यात पर कर का  क्या होगा ?

सभी प्रकार के एक्सपोर्ट “शून्य कर” की श्रेणी में आयेंगे और इनके लिए जो भी इनपुट होगा चाहे वह सर्विस के लिए हो या गुड्स के लिए रिफंड कर दिया जाएगा . यही प्रणाली अभी भी लागू है .

प्रश्न :-  सेवाओं पर कर की दर क्या हो सकती है ?

अधिकाँश सेवाओं पर अभी प्रभावी सेवा कर की दर 15 प्रतिशत है जो कि 18 प्रतिशत होने की सम्भावन है लेकिन रोड ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर कर की दर अभी की तरह ही कम हो सकती है .

इस सम्बन्ध में प्राप्त ख़बरों के अनुसार चिकित्सा , शिक्षा एवं कृषी सम्बन्धी सेवाओं की करमुक्त ही रहने की पूरी संभावना है .अभी और जो भी

सेवाएं करमुक्त है उनके फिलहाल जी.एस.टी के दौरान भी करमुक्त रहने की पूरी संभावना है .

अब जी.एस.टी. शीघ्र ही लगने वाला है अत: सरकार को वस्तुओं की दर की एक  अंतरिम सूचि तो जारी कर ही देनी चाहिए ताकि इस सम्बन्ध में व्यापार एवं उद्योग जगत की एक उत्सुकता तो समाप्त हो . कर की अंतिम रूप से लागू होने वाली सूचि में परिवर्तन का अधिकार तो सरकार के पास हमेशा की तरह है ही .

प्रश्न :–क्या अलग – अलग वस्तुओं पर कर की दरें तय कर दी गई है ?

सुधीर हालाखंडी :- हो सकता है कानून निर्माता इस और अपना अधिकाँश कार्य कर चुके हो लेकिन अभी इस बारे में कोई सूचियाँ जारी नहीं  की गई है .

प्रश्न :- कब दरें तय होगी – क्या संभावना है ?

लेकिन इस सम्बन्ध में अभी जो अधिकारिक समाचार आ रहे है उनके अनुसार जी.एस.टी. की दरें तय करना कोई आसान काम नहीं होगा . इसके लिए पहले कर मुक्त वस्तुओं और सेवाओं की सुचि बनाई जायेगी और इसके बाद ही करों की अंतिम दरों की सूचि तय होगी और इसमें अभी समय लगेगा और ऐसी संभावना है कि जी.एस.टी. लगने के ठीक पहले ही यह सूचि पूरी तरह से घोषित की जायेगी .

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आइये समझे जी.एस.टी. को

भाग -5
छोटे एवं माध्यम दर्जे के व्यापार एवं उद्योग के लिए

दिनांक 17 अप्रैल 2017

जी.एस.टी.के रिटर्न

जी.एस.टी. को लेकर जो सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया का जो आपको पालन करना होगा वह है जी.एस.टी. के रिटर्न भरना . आइये आज आपसे जी.एस.टी. के रिटर्न भरने की प्रक्रिया के बारे में बात करते है और इसमें सबसे पहले चर्चा करेंगे उन करदाता की जो कि सामान्य करदाता है अर्थात वे करदाता जो सामान्य रूप से जी.एस.टी. का कर भुगतान करेंगें और जिन्होंने कम्पोजीशन कर भुगतान का विकल्प नहीं लिया है. अधिकाँश डीलर्स जी.एस.टी. के तहत इसी श्रेणी में आयेंगे अत; सबसे पहले इसी श्रेणी के लिए रिटर्न की चर्चा करते है :-

कुल कितने रिटर्न होंगे
आपको प्रत्येक माह तीन रिटर्न भरने होंगे जो पूरी तरह से एक दुसरे से अलग होंगे तो आइये पहले हम यह देखें कि ये तीन रिटर्न कौनसे होंगे एवं कि अवधि में पेश करने होंगे :-

रिटर्न का नाम विवरण कब तक पेश करना है
GSTR-1 मासिक बिक्री का विवरण अगले माह की 10 तारीख तक

 

GSTR-2 मासिक खरीद का विवरण अगले माह की 15 तारीख तक (10 तारीख के पूर्व यह रिटर्न नहीं भरा जा सकता है अर्थात इसे आपको 10 से 15 तारीख के बीच भरना है).
GSTR-3 मासिक कर का रिटर्न अगले माह की 20  तारीख तक. 
GSTR-9 वार्षिक रिटर्न वित्तीय वर्ष की समाप्ती के बाद 31 दिसम्बर तक. 

इस प्रकार आप देखेंगे कि कुल पूरे वर्ष में आपको एक वार्षिक रिटर्न को मिलाते हुए कुल 37 रिटर्न भरने होंगे . इसके आपको हर माह के बाद 10 दिन ,15 दिन एवं 20 दिन मिलेंगे और इस प्रक्रिया का पालन आपको हर माह करना होगा.

अब आगे हम देखेंगे कि ये तीनों मासिक रिटर्न किस तरह भरे जाएंगे और यह रिटर्न सरकार द्वारा विकसित जी.एस.टी.एन. नामक नेटवर्क पर भरना पडेगा और सभी कुछ सूचना तकनीक पर आधारित होगा और जी.एस.टी. पूरा का पूरा सुचना तकनीक पर आधारित होगा इसमें कोई बहुत ज्यादा आश्चर्य की बात नहीं है क्यों कि इस समय सेंट्रल एक्साइज , सर्विस टैक्स और अधिकाँश राज्यों में वेट भी इसी तकनीक पर ही चल रहे है .

जी.एस.टी. पूरी तरह से सूचना तकनीक पर आधारित होगा लेकिन फिर भी आपको इससे जुड़े प्रावधानों के पालन के लिए ना सिर्फ काफी मेहनत करनी

होगी बल्कि समय की मुश्किल सीमा का भी पालन करना होगा क्यों कि आपके रिटर्न पर ही आपके खरीददारों के रिटर्न भी निर्भर है और आपके विक्रेताओं के

रिटर्न पर आपका रिटर्न निर्भर होगा. यदि आप अपना रिटर्न सही एवं समय पर नहीं भरते है तो आपके खरीददारों के लिए “मिसमैच” की समस्या पैदा होगी और यदि आपके विक्रेता अपना रिटर्न सही एवं समय पर नहीं भरते है तो आपके लिए मिसमैच की समस्या खड़ी हो जायेगी .

जी.एस.टी.एन आपकी रेटिंग तय करेगा

आपके सही समय पर रिटर्न भरने , कर जमा कराने के आधार पर आपकी रेटिंग भी तय की जायेगी जिसे समय – समय पर अपडेट भी किया जाएगा और यह रेटिंग (धारा 149 ) अन्य डीलर्स के देखे जाने के लिए भी उपलब्ध रहेगी अत: आपके लिए यह ही उचित होगा कि इन नियमो का उचित पालन करे ताकि आपके साथ व्यापार करने वाले वर्तमान एवं भावी डीलर्स पर इसका अच्छा प्रभाव पड़े.

आइये अब तीन मुख्य रिटर्न्स का अध्ययन करें

जी.एस.टी.आर.-1

यह आपकी मासिक सप्लाई का रिटर्न होगा और इसमे आप द्वारा सप्लाई की गई माल एवं सेवाओं का जिक्र होगा. यहाँ ध्यान रखे कि आप द्वारा जी.एस.टी. में रजिस्टर्ड  डीलर्स को की गई सप्लाई चाहे वह राज्य के भीतर हो या दूसरे राज्य के डीलर को है , का विवरण प्रत्येक बिल का अलग –अलग देना होगा इस विवरण में खरीददार का जी.एस.टी.एन नंबर भी देना होगा.

इसके अतिरिक्त जो सप्लाई उपभोक्ता या अन-रजिस्टर्ड डीलर्स को है उसका विवरण एक साथ देना होगा. लेकिन यदि अन-रजिस्टर्ड को की गई किसी एक

बिल से सप्लाई 2.50 लाख रूपये से अधिक है तो उसकी विगत भी आपको बिल सहित देनी होगी.

इसके अतिरिक्त यदि आप राज्य के बाहर बिक्री करते है और इस बिक्री में से 2.50 लाख रूपये से अधिक के बिल की छोड़ते हुए (जिसकी बिल सहित विगत आप ऊपर लिखे अनुसार दे रहें है ) बिक्री की सामूहिक विगत आपको “राज्य वार” देनी है अर्थात किस राज्य के डीलर को आपने कितनी बिक्री की है इसकी राज्यवार विगत देनी होगी.

आप जो सप्लाई इस रिटर्न में जी.एसटी. में रजिस्टर्ड डीलर्स को लेकर भरेंगे वो स्वत : ही आपके खरीददार डीलर के विवरण में अपने –आप

जी.एस.टी.एन. नेटवर्क के जरिये उनके जी.एस.टी.आर -2 के एक भाग में चली जायेगी .

इस रिटर्न को भरते समय आपको HSN Code भी भरना होगा लेकिन यह किन डीलर्स को भरना होगा इसका अध्ययन हम आगे करेंगे.

यह रिटर्न आपको महीना समाप्त होने के 10 दिन के भीतर भरना होगा. यहाँ यह विशेष रूप से ध्यान रखें कि यदि आप 10 तारीख तक यह रिटर्न नहीं भरते हैं तो फिर आप यह रिटर्न अब आप 16 तारीख को या उसके बाद ही भर पायेंगे क्यों कि 11 तारीख से 15 तारीख तक आपके खरीददार आपके द्वारा भरी गई बिक्री को चेक कर उसे स्वीकार /अस्वीकार/ संशोधित करेंगे और उन 5 दिंनों के लिए जी.एस.टी.आर.-1 भरने की सुविधा बंद कर दी जायेगी.

जी.एस.टी.आर.-2

जो सप्लाई की विगत जी.एस.टी.आर.-1 में विक्रेता द्वारा भरी गई है वह खरीददार के खरीद के विवरण में अपने –आप ही आ जायेगी .इसी तरह मान लीजिये कि आपके विक्रेताओं ने जो आपको की बिक्री की विगत अपने जी.एस.टी.आर.-1 में भरी है वो आपकी खरीद के रिटर्न में अपने-आप आ जाएगी .

अब क्रेता उसे चेक करेगा और यदि सही होगी तो इसे अप्रूव कर देगा और यदि क्रेता के हिसाब से यह गलत/फर्क  होगा तो वह इसमें आपने रिकॉर्ड के अनुसार परिवर्तन कर देगा या और भी बिक्री जो विक्रेता ने नहीं दिखाई है या अभी तक विक्रेता ने रिटर्न ही नहीं भरा है तो क्रेता यह भी जोड़ सकता.

यह कार्य क्रेता को माह समाप्त होने के बाद अगले माह की 10 तारीख से प्रारम्भ कर 15 तारीख तक करना होगा.

क्रेता जो परिवर्तन विक्रेता के द्वारा भरे गए जी.एस.टी.आर.-1 से प्राप्त सूचना में परिवर्तन करेगा उसकी सुचना विक्रेता के पास इसी पोर्टल पर उसके जी.एस.टी.आर -1A के जरिये पहुचेंगी और यदि विक्रेता भी इसे मान लेता है तो इससे उसका जी.एस.टी.आर -1 इस परिवर्तन तक संशोधित हो जाएगा.

विक्रेता उसी माह की, जिसमे रिटर्न भरना ऊपर बताया गया है, कि 17 तारीख तक क्रेता द्वारा किये गए परिवर्तन को अप्रूव करे सकेगा और वह ऐसा नहीं करता है तो एक मिसमैच रिपोर्ट जारी हो जायेगी और इस मिसमैच रिपोर्ट का क्या होगा इसका जिक्र हम आगे करेंगे लेकिन फिलहाल यहाँ क्रेता को अपना रिटर्न भरने के लिए यह इनपुट क्रेडिट मिल जायेगी और इसके मिसमैच का फैसला किस तरह होगा इसका अध्धयन हम बाद में करेंगे.

जी.एस.टी.आर.-3

जी.एस.टी.आर-1 एवं जी.एस.टी.आर.-2 भरने के बाद 20 तारीख को जी.एस.टी.आर.-3 के रूप में एक मासिक रिटर्न भरना होगा जिसमे करदाता उसके आउटपुट में से इनपुट घटाने के बाद मासिक कर का निर्धारण करने के बाद उसे जमा करते हुए विवरण देगा.

आइये देखें की इस रिटर्न जी.एस.टी.आर.-3 में दिए गए आंकड़े किस तरह से भरे जायेंगे :-

पार्ट –A :- इस रिटर्न का पार्ट –A जी.एस.टी.आर. 1 एवं जी.एस.टी.आर-2 के आधार पर स्वत: ही भरा हुआ होगा. जिसमे आपकी इनपुट और आउटपुट क्रेडिट होगी .

पार्ट –B :- इसमें टैक्स , ब्याज एवं पेनाल्टी की विगत होगी जो कि आपके केश और आई.टी.सी. लेजर से स्वत: ही आ जायेगी . केश और आई.टी.सी. लेजर के बारे में बाद में चर्चा करेंगे.

अब आप स्वयं सोच ले कि आपके रिटर्न पर आपके सभी खरीददारों के रिटर्न निर्भर है और उसी तरह से आपके विक्रेताओं के रिटर्न पर आपका रिटर्न निर्भर है तो अब रिटर्न भरते समय “समय सीमा” का पालन करना अति आवशयक हो जाएगा .

इस समय वेट के दौरान जो रिटर्न आप भरते है उनमे जिन राज्यों में त्रैमासिक रिटर्न है वहां वार्षिक रिटर्न को मिलाते हुए आप 5 रिटर्न भरतें है और जहां मासिक रिटर्न है वहां आप 13 रिटर्न भरतें है अब इन रिटर्न की संख्या 37 हो जायेगी .

अभी तक आपको रिटर्न भरने के लिए 30 दिन से 60 दिन का समय दिया जाता है उसे भी घटा कर 10 दिन कर दिया गया है और इस पूरी प्रक्रिया के लिए आपको 20 दिन का समय दिया गया है .

इसलिए आप अभी से जी.एस.टी. के लिए तैयार हो जाएँ .

 

अध्याय -6
जी.एस.टी. – कम्पोजीशन स्कीम

क्या हर लघु उद्योग एवं छोटा व्यापारी कम्पोजीशन का लाभ ले सकता है ?

देखिये कम्पोजीशन स्कीम उन्ही डीलर्स के लिए व्यवहारिक होती है जो कि सीधे ही उपभोताओं को माल बेचते है . जो डीलर्स दूसरे  डीलर्स को माल बेचते है उनके लिए कम्पोजीशन स्कीम को कोई व्यवहारिक प्रयोग नहीं होता है क्यों कि कम्पोजीशन डीलर्स द्वारा बेचे गये माल पर “इनपुट क्रेडिट” नहीं मिलती है .

जी.एस.टी. के दौरान भी कम्पोजीशन स्कीम होगी और यह व्यापारी  और निर्माता दोनों के लिए होगी .

यहाँ आप ध्यान रखें कि कम्पोजीशन स्कीम से सम्बंधित प्रावधान जी.एस.टी. के सम्बन्ध में केद्र एवंम राज्यों दोनों के ही कानून की धारा 10 में दिए गए है और इस सम्बन्ध में रूल्स का प्रारूप भी जारी किया गया है, केंद्र का कानून बन चुका है , राज्यों के कानून उनकी विधान सभाओं में अब पारित होने है और रूल्स के अभी केवल प्रारूप ही जारी हुए है . आइये अब कम्पोजीशन स्कीम को कुछ प्रश्नों के साथ विस्तार से जानने का प्रयास करें :-

प्रश्न :- कम्पोजीशन के लिए बिक्री/ टर्नओवर की सीमा क्या होगी ?

-जीएस.टी. कम्पोजीशन उन डीलर्स के लिए ही होगा जो ऊपर बताई शर्तों के अनुसार इस स्कीम के तहत आते है वे बीते हुए वर्ष  (पिछले वर्ष )  में  50 लाख रूपये से कम की बिक्री या टर्नओवर करते है .

यदि आपका टर्नओवर बीते वर्ष में 50 लाख रूपये से अधिक है तो आप इस स्कीम का लाभ नहीं ले सकते है .

प्रश्न :- हमारे राज्य में कम्पोजीशन की सीमा 75 लाख है और वर्ष जो 31/03/2017 को जो साल समाप्त हुआ है उसमे हमारा टर्नओवर 70 लाख रूपये था और हम कम्पोजीशन का लाभ ले रहे थे . क्या अब भी हम जी.एस.टी. के दौरान कम्पोजीशन स्कीम का लाभ ले सकूंगा ?

-यदि आपके राज्य में इस समय कम्पोजीशन स्कीम की आधिकतम सीमा 75 लाख रूपये है (ऐसा मेरी जानकारी में राजस्थान में है ) और आपका टर्नओवर 31/03/2017 को 70 लाख रूपये है और आपने कम्म्पोजीशन स्कीम का लाभ लिया है तो भी अब आप जी.एस.टी. के तहत इस स्कीम के बाहर है क्यों कि जी.एस.टी. के तहत यह सीमा 50 लाख है और इसका निर्धारण भी आपके पिछले वर्ष के टर्नओवर से किया जाना है .

प्रश्न:- हम अभी भी अपने  राज्य में  कम्पोजीशन स्कीम में है अब क्या हमें जी.एस.टी. के  लिए भी कम्पोजीशन का  आवेदन करना होगा ?

-जी.एस.टी. प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के लिए तो आप आवेदन कर ही चुके होगें और अब  यदि  आप कम्पोजीशन स्कीम के तहत जाना चाहते है तो आपको इसके लिए जी. एस.टी . कॉमन पोर्टल पर आवेदन करना होगा और यह आवेदन आप  जी.एस.टी. कानून लागू होने के तीस दिन के भीतर एक फॉर्म GST CMMP-01 में ऑनलाइन करेंगे.

प्रश्न :- हम पहले से रजिस्टर्ड है क्या कम्पोजीशन स्कीम में जाने पर कोई और भी कोई शर्तें है जिनके कारण  हम जी.एस.टी. कम्पोजीशन स्कीम में नहीं जा सकते है ?

-यदि आप जी.एस.टी. लागू होने के पहले से रजिस्टर्ड है  तो जिस दिन जी.एस.टी. लागू होता है उस दिन आपके पास जो भी स्टॉक है उस स्टॉक में निम्न प्रकार की खरीद शामिल नहीं होने चाहिए :

– अंतरप्रांतीय खरीद अर्थात किसी अन्य राज्य से खरीदा हुआ माल जिस दिन जी.एस.टी. लागू हो उस दिन स्टॉक में नहीं होना चाहिए .

– भारत के बाहर से खरीद अर्थात किसी अन्य देश  से खरीदा हुआ माल जिस दिन जी.एस.टी. लागू हो उस दिन स्टॉक में नहीं होना चाहिए .

– राज्य के बाहर से अपनी ही किसी ब्रांच या एजेंट या प्रिंसिपल से प्राप्त माल जिस दिन जी.एस.टी. लागू हो उस दिन स्टॉक में नहीं होना चाहिए .

इसी तरह की कुछ सीमाएं उन डीलर्स पर भी है जो जी.एस.टी. लगने के बाद रजिस्टर्ड होकर कम्पोजीशन में जाना चाहते है.

प्रश्न :- राज्य के बाहर माल बेचने वाले क्या कम्पोजीशन स्कीम का लाभ ले सकेंगे ?

-जो डीलर्स एक राज्य से दूसरे राज्य में माल बेचते  है वे भी कम्पोजीशन स्कीम के पात्र नहीं होंगे.

प्रश्न :- क्या कम्पोजीशन स्कीम का लाभ निर्माता भी ले सकते है ?

हाँ इस कम्पोजीशन स्कीम के तहत निर्माता भी शामिल हो सकते है और वे भी कम्पोजीशन का लाभ ले सकते हैं . लेकिन यदि सरकार चाहे तो, अधिसूचना के जरिये , कुछ प्रकार के निर्माताओं को इस स्कीम से वंचित कर बाहर कर सकती है .

प्रश्न :- कम्पोजीशन कर की दर क्या होगी ?

-कम्पोजीशन स्कीम के तहत कम्पोजीशन कर की अधिकत्तम  दरें निम्न प्रकार होंगी :-

डीलर का विवरण सी.जी.एस.टी. के तहत कम्पोजीशन कर की अधिकत्तम दर.   एस.जी.एस.टी. के तहत कम्पोजीशन कर की अधिकत्तम दर अधिक प्रभावी कम्पोजीशन दर (एस.जी.एस.टी. + सी.जी.एस.टी.
ट्रेडर्स अर्थात वे डीलर्स जो सिर्फ खरीद बिक्री करते है . आधा प्रतिशत- 0.50 प्रतिशत

 

 

आधा प्रतिशत- 0.50 प्रतिशत

 

एक प्रतिशत -1%
रेस्टोरेंटस ढाई प्रतिशत  2.50 प्रतिशत ढाई प्रतिशत  2.50 प्रतिशत पांच प्रतिशत -5%
निर्माता एक प्रतिशत- 1 प्रतिशत   एक प्रतिशत- 1 प्रतिशत दो प्रतिशत

2%

प्रश्न :- क्या कम्प्पोजीशन की यह दरें अंतिम रूप से तय कर दी गई है ?

-आप यदि ऊपर लिखे जवाब को ध्यान से पढ़े तो आपको पता लगेगा कि यह  अधिक्तम दरें है औरर इन दरों से अधिक कम्पोजीशन कर नहीं लगाया जा सकता है . अंतिम दरें तो अब तय की जायेंगी.

प्रश्न :- कम्पोजीशन के तहत आने वाले डीलर्स को अपने रिटर्न्स कब- कब भरने होंगे ?

-कम्पोजीशन डीलर्स को अपना रिटर्न तीन माह में एक बार भरना होगा एवं वर्ष के अंत में उन्हें एक वार्षिक रिटर्न भरना होगा . इस आम जी.एस.टी. करदाता के एक वर्ष में भरे जाने वाले 37 रिटर्न्स की जगह कम्म्पोजीशन डीलर्स को केवल 5 रिटर्न्स ही भरने होंगे.

प्रश्न :- क्या सेवा क्षेत्र के लिए भी यह कम्पोजीशन स्कीम लागू रहेगी ?

-सेवा क्षेत्र के लिए कम्म्पोजीशन स्कीम उपलब्ध नहीं है लेकिन एक ही अपवाद है और उसे ऊपर हमने रेस्टोरेंट सर्विस के रूप में बताया है जो कि वास्तव् में सर्विस और माल के सप्लाई का मिश्रित रूप है . इसके अलावा किसी और सर्विस पर यह कम्पोजीशान स्कीम लागू नहीं है . रेस्टोरेंट के केस में वे रेस्टोरेंट जिनका पिछ्ले वर्ष में बिक्री / टर्नओवर 50 लाख रूपये से कम वे कम्पोजीशन का लाभ  ले सकते है और इस  म्पोजीशन की अधिक्तम  दर सी.जी.एस.टी. को लेकर 2.50 प्रतिशत एवं एस.जी.एस.टी. को लेकर 2.50 प्रतिशत अर्थात कुल 5.00 प्रतिशत होगी .

प्रश्न :- मेरा  एक जनरल स्टोर है जो अभी कम्पोजीशन में है अब मैं एक फैक्ट्री प्लान कर रहा हूँ जिसका माल में राज्य के बाहर भी बेचूंगा . क्या मैं अपनी फैक्ट्री के लिए एक और जी.एस.टीस. रजिस्ट्रेशन ले सकता हूँ और एक और सवाल  क्या मैं जी.एस.टी. के दौरान अपना जनरल स्टोर कम्पोजीशन में चला सकता हूँ .

-हाँ आप अपनी फैक्ट्री के लिए एक और रजिस्ट्रेशन ले सकते है जो कि जी.एस.टी. के दौरान एक ही पेन नंबर  पर एक से अधिक रजिस्ट्रेशन लेने का प्रावधान है यदि व्यापार अलग-अलग प्रकार के है .

लेकिन जी.एस.टी. के एक और प्रावधान के अनुसार यदि आप कम्पोजीशन का लाभ लेना चाहते हैं तो आपके एक ही पेन नंबर पर जारी सभी रजिस्ट्रेशन पर कम्पोजीशन ही होना चाहिए . आपके केस में आपकी फैक्ट्री , चूँकि राज्य के बाहर माल बेचने की श्रेणी में आती है , अत; कम्पोजीशन में नहीं आ सकती अत: आपका कोई भी व्यापार कम्पोजीशन का लाभ नहीं ले सकता है .

प्रश्न :- यदि मेरे एक ही पेन पर जी.एस.टी. के दौरान दो व्यापार है तो क्या दोनों के लिए 50 लाख की अलग- 2 सीमा का लाभ मिल सकता है ?

-यह 50 लाख की लिमिट प्रति व्यक्ति (Per Person) है अर्थात आप इसे प्रति पेन नंबर ही माने इस प्रकार एक पेन नंबर पर जितने भी व्यापार है उन सभी का टर्नओवर जोड़ा जाएगा.

प्रश्न:- -हमारा बीते वर्ष ( पिछले वर्ष )में टर्नओवर 50 लाख रूपये था तो हम जी.एस.टी. के दौरान कम्पोजीशन के हकदार हो जाएँगे . जिस वर्ष हम कम्पोजीशन का लाभ लेंगे उस वर्ष में भी इस लाभ की कोई टर्नओवर सबंधी सीमा है ?

-जैसे ही इस वर्ष आपका टर्नओवर 50 लाख रूपये की रकम को क्रॉस करेगा उसी समय आपका कम्पोजीशन का लाभ आगे के लिये समाप्त हो जाएगा और फिर आपको सामान्य जी.एस.टी. डीलर की तरह कर देना होगा .

प्रश्न :-क्या कम्पोजीशन डीलर को अपने बिल पर भी कुछ लिखना होगा ?

-कम्पोजीशन डीलर को अपने बिल पर “ Composition Taxable Person , Not Eligilbe To Collect Tax on Supplies” लिखना होगा .

इसका हिन्दी अनुवाद हम यहाँ दे रहे है जो कि आपको अपने बिल के ऊपर अनिवार्य रूप से  लिखना होगा :-

“कम्पोजीशन कर  डीलर, कर एकत्रीकरण के योग्य नहीं”

प्रश्न :- क्या कम्पोजीशन डीलर को अपने व्यवसाय स्थल पर भी अपने कम्पोजीशन डीलर होने की कि कोई सूचना देनी होगी ?

-हाँ , कम्पोजीशन डीलर को अपने व्यवसाय स्थल पर भी यह लिखना होगा कि वह एक कम्पोजीशन डीलर है . इन डीलर्स को अपने साइन बोर्ड पर “ composition dealer” लिखना होगा .

प्रश्न :- क्या हर वर्ष कम्पोजीशन  के लिए आवेदन करना होगा ?

-यदि किसी वर्ष में  आप इसके योग्य है और कम्पोजीशन स्कीम का लाभ ले रहें है  तो आने वाले वर्ष में इसके लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है . इस संम्बंध में जारी प्रावधानों का पालन करते हुए आप कम्पोजीशन का लाभ आने वाले वर्षों तक ले सकते है .

प्रश्न :- क्या वर्ष के दौरान कम्पोजीशन स्कीम से बाहर आ सकते हैं ?

-जो भी डीलर इस स्कीम से बाहर आना चाहता है वह जी.एस.टी. कॉमन पोर्टल पर GST CMP-04 फॉर्म भर कर बाहर आ सकता है .

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अध्याय  -7
कैसा होगा दोहरे नियंत्रण की 50 : 50 सहमती के तहत जी.एस.टी.

कौन करेगा आपका असेसमेंट (कर –निर्धारण )

जी.एस.टी.कोंसिल की जो 2016 के अंतिम तिमाही में जो  बैठकें हुई थी उनमें से अंतिम तीन मीटिंग्स में जो मुद्दा सबसे अधिक चर्चा का विषय बना था वह था करदाताओं के ऊपर “दोहरे नियंत्रण” अर्थात ड्यूल कंट्रोल का.

इसके बाद 16 जनवरी 2017 को जी.एस.टी. कौंसिल की अभी तक की  अंतिम मीटिंग हुई थी उसमे इस समस्या का समाधान ढूंढ लेने का दावा किया जा रहा है उसके अनुसार 150 लाख रूपये तक  की बिक्री तक के डीलर्स का नियंत्रण राज्यों और केंद्र के बीच 90 प्रतिशत एवं 10 प्रतिशत के अनुपात में बांटा जाएगा अर्थात 90 प्रतिशत डीलर्स पर राज्यों का नियंत्रण रहेगा और शेष 10 प्रतिशत डीलर्स पर केंद्र का नियंत्रण रहेगा. इस नियंत्रण का अर्थ यहाँ उनके “कर निर्धारण” अर्थात असेसमेंट से है .

150 लाख रुपये की बिक्री से अधिक के डीलर्स के नियंत्रण को राज्य और केंद्र के बीच सहमती के तहत  50 : 50 के अनुपात में बांटा जाएगा अर्थात कुल डीलर्स के 50 प्रतिशत पर राज्य नियंत्रण रखेंगे और शेष 50 प्रतिशत पर केंद्र नियंत्रण रखेगा.

सर्विस टैक्स डीलर्स और अंतरप्रांतीय बिक्री करने वाले डीलर्स के सम्बन्ध में भी यह फैसला लागू होगा यह अभी तक जो बयान आ रहें है उनमे स्पष्ट नहीं किया गया है और यहाँ ध्यान रखे कि सर्विस टैक्स डीलर्स  के लिए 150 लाख रूपये का टर्नओवर बहुत बड़ी रकम है और ऐसे 90 प्रतिशत डीलर्स का नियंत्रण केंद्र राज्यों के पास छोड़ दे यह शायद संभव नहीं लगता है .

यहाँ नियंत्रण रखने का अर्थ यह है कि इन डीलर्स का कर निर्धारण ऊपर बताये गये अनुपात के अनुसार राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा और इसी मुद्दे पर राज्य और केंद्र एक मत नहीं हो पा रहे थे इसीलिये जी.एस.टी. कौंसिल की कई  मीटिंगस बिना किसी नतीजे के समाप्त हो रही थी .

यहाँ यह ध्यान रखें कि जब सभी रिटर्न जी.एस.टी.एन. नामक एक ही नेटवर्क पर भरे जायेंगे और चूँकि इस समय भी लगभग अधिकांश राज्यों में वेट के भी सभी “कर निर्धारण” ऑनलाइन ही होते है तब फिर एक सोचने वाली बात यह है कि यह दोहरे नियंत्रण का प्रश्न इतना बड़ा कैसे हो गया .

अब इस 50:50 के तहत कौनसा डीलर का कर निर्धारण राज्य करेगा इसका फैसला भी किसी भी फार्मूले के तहत होगा जिस पर राज्य एवं केंद्र सहमत होंगे लेकिन ऐसा नहीं लगता इस तरह का फैसला व्यापार और उध्योग के लिए प्रक्रियाओं में  कोई सरलीकरण लाएगा  और यहाँ विशेष बात यह है कि  जी.एस.टी. पर केंद्र और राज्य ही आपस में ही प्रारम्भ से ही विवाद रहा है और जी.एस.टी. स्वयम ही केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों की एक खीचतान का मुद्दा रहा है  और इस कर प्रणाली को लागू करने में  व्यापार और उध्योग की राय को कोई अधिक महत्त्व नहीं दिया गया है . दोहरे नियंत्रण का मामला भी इसी तरह से केंद्र और राज्यों की

अपने –अपने अधिकार सुरक्षित करने की लड़ाई का ही एक हिस्सा है  इसीलिये इस तरह के 50:50 तरह के प्रक्रियाओं को और भी उलझाने वाले  फैसले लेने में हमारे कानून निर्माताओं को कोई दुविधा अथवा हिचक नहीं हुई है .

आखिर यह दोहरे नियंत्रण का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण कैसे हुआ इसके पीछे कारण यह है कि राज्यों के पास कुल मिला कर अप्रत्यक्ष कर को देखने के लिए लगभग 265000 अधिकारी एवं कर्मचारी है एवं केंद्र के पास भी इसी काम के लिए कुल 85000 अधिकारी एवं कर्मचारी है इसलिए काम का बँटवारा भी जरुरी था, ऐसा भी कहा जा रहा है  और इसके साथ ही राज्यों एवं केंद्र के अधिकारों की बात भी इस मुद्दे से जुडा था .

लेकिन यदि  व्यापार और उध्योग के हितों की और देखना हो और जी.एस.टी. को सरलीकरण की और ले जाना है तो राज्य एवं केंद्र के अप्रयक्ष करों के सभी स्टाफ को मिला कर एक “संघीय स्टाफ कैडर”   बनाया जा सकता है जिससे कि व्यवहारिक रूप से भी दोहरे नियंत्रण की समस्या हल हो सकती है और 50:50 जैसे तरीके का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता .

अध्याय -8
जी.एस.टी. सुधीर हालाखंडी – सामयिक  सवालों  के जवाब

जी.एस.टी. के सम्बन्ध में अभी तक हमने भाग – 1 से भाग -5 तक के जो लेख आपको भेजे है उसके बाद हमें काफी जिज्ञासा से भरे सवाल प्राप्त हुए है तो आगे बढ़ने से पहले आइये इनमें से कुछ का जवाब दे लें ताकि इस सम्बन्ध में आपकी जानकारी आर अधिक अच्छी हो सके . तो आइये चर्चा करें आपके कुछ सवालों पर .

प्रश्न :-क्या जी.एस.टी. गेम चेंजर होगा ? जिस तरह से प्रचारित किया जा रहा है क्या जी.एस.टी. उसी तरह से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए  “ गेम चेंजर” होगा ?

-हाँ , जी.एस.टी. के बारे में जो कहा जा रहा है वह सच है . यदि जी.एस.टी. लागू होगा तो यह भारतीय  अर्थव्यवस्था की दशा बदल कर रख देगा . भारतीय अर्थव्यवस्था पर जी.एस.टी. एक बहुत प्रभाव

डालने वाला होगा. यह भारतीय कर व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा परिवर्तन है इसलिए इसके परिणाम भी इतने ही बड़े होंगे.

प्रश्न :-क्या यह प्रभाव सकारात्मक होगा ?

-हां , आप उम्मीद  करें कि यह प्रभाव सकारात्मक ही हो क्यों कि जिस उम्मीद और प्रचार के साथ जी.एस.टी. लागू किया जा रहा अब उसमे सफलता के अलावा कोई और कल्पना करना भी अव्यवहारिक होगा . यदि जी.एस.टी. के परिणाम नकारात्मक हुए तो यह भारत की अर्थव्यवस्था के लम्बे समय तक इन्हें बर्दाश्त करना होगा क्यों  कि जी.एस.टी. एक बार लागू करने के बाद इसे वापिस लेना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं होगा.

इसलिए इस समय जी.एस.टी. की असफलता की चर्चा करने का कोई महत्त्व नहीं है और हम यह मांग कर चले कि जी.एस.टी. जब भी लागू होगा सफल ही होगा भारत की अर्थयवस्था पर इसके प्रभाव सकारात्मक ही होंगे.

प्रश्न :-क्या जी.एस.टी. के सम्बन्ध में कानून बन चुके है या अभी इनपर कोई अभी भी कार्य बाकी है ?

-केंद्र को  जो भी कानून बनाने थे वे सभी संसद से पास हो चुके है और राष्ट्रपति महोदय्य के दस्तखत भी हो चुके है . जी..एस.टी. के प्रक्रिया सम्बन्धी रूल्स के ड्राफ्ट भी जारी हो चुके है . जी.एस.टी. कौंसिल की मई माह के पहले सप्ताह में जो मीटिंग होने वाली है उसमे जी.एस.टी. के रूल्स को भी अंतिम रूप दे दिए जाने की संभावना है .

प्रश्न :-इस हिसाब से तो तैयारी पूरी हो चुकी है . क्या आपके हिसाब से अभी भी कुछ बाकी है ?

-हाँ दो मुख्य बातें अभी बाकी है . एक तो वस्तुवार कर की दर अभी तय नहीं हुई है कि कौनसी वस्तु कर मुक्त या किस पर 5 प्रतिशत या 12  , 18 प्रतिशत कर की दर लगेगी.

इसके अतिरक्त राज्यों को अपने एस.जी.एस.टी. अर्थात राज्यों के जी.एस.टी. के कानून विधान सभाओं को पारित करने है इसमें से अभी तेलांगाना ही के राज्य है जहां अभी विधान सभा का विशेष अधिवेशन बुला कर राज्य का जी.एस.टी. कानून पारित करवाया गया है . बाकी

सभी राज्यों एवं 2 केंद्र शासित  प्रदेशों को यह कानून अपनी –अपनी विधान सभाओं से पारित करवाना है.

प्रश्न :- जी.एस. टी. के लिए  1 अप्रैल 2017 की तारीख तो अब स्थगित की जा चुकी है और अब नयी तारीख 1 जुलाई 2017 दी गई है . एक तारीख और है 16 सितम्बर 20017 और इस तारीख तक  यदि जी.एस.टी. लागू नहीं हुआ तो एक अप्रत्यक्ष करो को लेकर एक संकट पैदा  हो जाएगा क्यों की जी.एस.टी. संवैधानिक संशोधन विधेयक के अनुसार 16 सितम्बर 2017 को अभी लागू सभी कर समाप्त हो जायेंगे.   ऐसे मे सरकार किस तरह से करों को एकत्र करेगी .

-जिस तरह से सरकार की तैयारी है और जिस तरह के कानून निर्माताओं द्वारा दावे किये जा रहें है उनके अनुसार जी.एस.टी. एक जुलाई   2017  से लागू हो ही जाएगा और अब सरकार का कर्तव्य भी है  कि अब वह इस तारीख से जी.एस,टी. को लागू कर दे . अत: इसमें कोई संशय नहीं होना चाहिए कि ऐसी कोई स्तिथी उत्पन्न होगी .

प्रश्न :-चलिए मान लेते हैं  लेकिन हो सकता है कि सरकार  16  सितम्बर 2017 तक जी.एस.टी. नहीं लागू कर सके तो क्या होगा ?

-इस तरह की स्तिथी में संकट तो है पर इसके दो हल है पहला यह कि सरकार कारण बताए हुए राष्ट्रपति महोदय के पास जाए और वे अपनी संविधान संशोधन विधेयक द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग कर अभी

तक जारी करों को आगे बढ़ा दें और दूसरा यह यह है कि सरकार फिर से संसद मे जाए .

इन दोनों ही रास्तों से इस समस्या का हल मिल सकता है . इसलिए आप निश्चिन्त रहिये ऐसी किसी भी स्तिथी में देश अप्रत्य्यक्ष करों के बिना नहीं रहेगा और अभी चल रहे अप्रत्यक्ष कर लागू रहेंगे.

प्रश्न :-आई.जी.एस.टी. – क्या यह वस्तु  की लागत बढ़ाएगा

आई.जी.एस.टी. के बारे में कहा जा रहा है कि दो राज्यों के बीच होने वाले व्यापार के दौरान ना सिर्फ माल की लागत बढ़ाएगा बल्कि प्रक्रिया सबंधी उलझने भी पैदा करेगा . क्या यह सही आशंका है ?

सुधीर हालाखंडी :-

आई.जी.एस.टी. कोई अलग कर नहीं है बल्कि यह एक ऐसा तन्त्र है जिससे दो राज्यों के बीच होने वाले व्यापार को इस तरह से नियंत्रित किया जाएगा जिससे एकत्र होने वाले कर का एक हिस्सा जो कि सी.जी.एस.टी. अर्थात केंद्रीय जी.एस.टी. के  बराबर होगा वह केंद्र को जाएगा एवं दूसरा हिस्सा जो कि एस.जी.एस.टी. अर्थात राज्यों के  जी.एस.टी. के बराबर होगा वह उस राज्य को जाएगा जहाँ वह माल उपभोग किया जाएगा .

जी.एस.टी. एक अंतिम उपभोक्ता के राज्य को मिलने वाला कर है  इसलिए जो निर्माता राज्य होगा उसे कोई कर नहीं मिलेगा.  इस प्रकार आपके प्रश्न का जो पहला हिस्सा है उसका जवाब है और  इससे कोई कर नहीं बढेगा लेकिन आई.जी..एस.टी .डीलर्स के प्रक्रिया संबंधी लागत एवं उलझने जरुर बढ़ जायेंगी.

प्रश्न :- क्या आई.जी.एस.टी. भी केंद्र एवं राज्यों के जी.एस.टी. कानून के अनुसार चलेगा ?

सुधीर हालाखंडी :- नहीं, आई.जी.एस.टी.  के लिए एक अलग आई.जी.एस.टी. कानून बना है जिसे सी.जी.एस.टी. कानून की तरह ही राष्ट्रपति महोदय अपनी स्वीकृती दे चुके है .

प्रश्न :- क्या आई.जी.एस.टी. भी अभी जारी केंद्रीय बिक्री कर कानून सी.एस.टी.  की तरह सी- फॉर्म इत्यादि होंगे जिनसे अक्सर व्यापारी वर्ग परेशान रहता है .

सुधीर हालाखंडी:- आई.जी.एस.टी. में सी.एस.टी. अर्थात अभी जारी  केन्द्रीय बिक्री कर की तरह कर की कोई रियायती दर ही नहीं होगी इसलिए सी-फॉर्म जैसे किसी फॉर्म की कोई जरुरत नहीं होगी.

प्रश्न :- क्या जी.एस.टी. के दौरान कोई रोड परमिट जैसा फॉर्म भी होगा या अब डीलर्स को इससे मुक्ती मिल जाएगी ?

सुधीर हालाखंडी :- ये सवाल काफी दिनों से डीलर्स के दिमाग में था और  उन्हें यह उम्मीद थी कि व्यापार  करने में इस तरह की बाधाएँ जी.एस.टी. के दौरान नहीं रहेंगी लेकिन ऐसा लगता नहीं है और अभी जारी ड्राफ्ट रूल्स के

अनुसार प्रत्येक 50000.00 रूपये के बिल के  साथ एक इलेक्ट्रोनिक वे बिल जारी करना होगा .

इसके साथ ही एक प्रावधान यह है कि यदि आपका माल वाहन कहीं 30 मिनिट से ज्यादा चेकिंग के लिए रोका जाता है तो इसकी सूचना जी.एस.टी.एन . पोर्टल पर दे सकते है इसका उद्देश्य शायद यही होगा कि इस सम्बन्ध में होंने वाली समय की बर्बादी को रोका जा सके.

लेकिन फिर भी यह प्रावधान आपके लिए प्रक्रिया संम्बन्धी संकट ही पैदा करेगा और इसके लिए सरकार से हमने भी मांग की है कि इस राशि को बढ़ा कर 5.00 लाख रूपये कर देना चाहिए.

प्रश्न :- क्या जी.एस.टी. लागू होने के दिन हमारे पास जो भी स्टॉक होगा उसे जो भी कर लगा हुआ होगा क्या जी.एस..टी. के लगने के बाद उस कर की क्रेडिट मिलेगी ?

सुधीर हालाखंडी:- हाँ आपके अंतिम स्टॉक में जो भी वेट एवं सेंट्रल एक्साइज जुडा होगा और जिसकी इनपुट क्रेडिट आपकी अभी जारी कर कानून के तहत बकाया है तो उसकी क्रेडिट आपको जी.एस.टी. कानून के तहत मिलेगा . इसके अतिरिक्त आप यदि सेंट्रल एक्साइज के तहत रजिस्टर्ड नहीं ही लेकिन आपके बिल में सेंट्रल एक्साइज लगा है तो भी आपको उसकी

क्रेडिट मिल जायेगी और यदि आपके स्टॉक पर सेंट्रल एक्साइज लगा है लेकिन बिल में नहीं दिख रहा है तो भी आपको इसकी क्रेडिट एक तय किये गए नियम के अनुसार मिलेगी.

यह क्रेडिट कुछ नियम/शर्तों  के अनुसार मिलेगी जिनका विस्तार से वर्णन हम आगे के हमारे किसी भाग में करेंगे .

प्रश्न :- इस समय जो वस्तुएं कर मुक्त है क्या वे जी.एस.टी. के दौरान भी करमुक्त रहेंगी क्या इस तरह की सम्भावना बनती है .

-अभी करमुक्त वस्तुओं की कोई सूचि तो जारी नहीं हुई है अभी लेकिन इस समय तक जो समाचार मिल रहें है उनके अनुसार आप यह उम्मीद कर सकते है कि अभी जो वस्तुएं करमुक्त है वे सभी करमुक्त , कुछ अपवादों को छोड़कर , रहने की संम्भावना है .

लेकिन इसके अन्तिम जवाब  के लिए आप अभी करमुक्त वस्तुओं की सूची जारी होने का इन्तजार करें .

प्रश्न :- क्या डीलर्स (जो निर्माता नहीं है ) उन्हें भी स्टॉक की पूरी डिटेल रखनी पड़ेगी ?

-अभी हाल ही में जो जी.एस.टी. में एकाउंट्स के सम्बन्ध में ड्राफ्ट  रूल्स जारी किये गए है उनके अनुसार सभी डीलर्स (कम्पोजीशन डीलर्स को छोड़कर ) स्टॉक की पूरी डिटेल रखनी पड़ेगी और कई प्रकार के व्यापार में यह काफी मुशकिल होगा लेकिन अभी तो सरकार की यही मंशा जाहिर हो रही है .

प्रश्न :- जी.एस.टी. के दौरान कम्पोजीशन स्कीम भी है लेकिन एक मेरा और सवाल है मेरा एक जनरल स्टोर है जिसके लिए मैं कम्पोजीशन स्कीम में हूँ और जीएस.टी. में भी यह जारी रखूंगा क्यों कि वेट और जी.एस.टी. के रिकॉर्ड रखना संभव नहीं है . अब मै एक और व्यवसाय प्रारम्भ कर रहा हूँ जिसे मेरा माल राज्य के बाहर भी जाएगा . क्या मै जी.एस.टी. के दौरान मेरे जनरल स्टोर के लिए कम्पोजीशन जारी रख सकूंगा ?

-जी.एस.टी. के दौरान यदि आपके “दो तरह के अलग –अलग” व्यापार है तो एक ही पेन पर दो रजिस्ट्रेशन आप ले सकते है . यह एक अच्छी व्यवस्था है क्यों कि कई राज्यों के वेट काननं के अनुसार एक पेन पर दो रजिस्ट्रेशन आप नहीं ले सकते थे .

लेकिन जो कम्पोजीशन के रूल्स जारी किये गए हैं उनके अनुसार यदि एक पेन पर जारी जी.एस.टी.एन रजिस्ट्रेशन के लिए आपने कम्पोजीशन ले रखा है तो उस पेन पर जारी सभी रजिस्ट्रेशन कम्पोजीशन का पालन करेंगे और जिस व्यापर में आप राज्य के बाहर बिक्री करते है वहां कम्पोजीशन संभव नहीं है .

यह एक विरोधाभासी प्रावधान है और इसमें अंतिम जी..एस.टी. लगने तक सरकार को उचित संशोधन कर देना चाहिए .

अभी हम इन सवालों का सिलसिला समाप्त कर रहें है . आपके कुछ और सवाल हम अगले कुछ अंको में लेंगे.

**************

आई.जी.एस.टी. का एक उदाहरण
आई.जी. एस.टी. किस तरह से काम करेगा इसका एक उदाहरण हम यहाँ पेश कर रहें है इसका आप अच्छी तरह अध्ययन करें तो आप समझ पायेंगे कि आई.जी.एस.टी. किस तरह से कार्य करेगा :-

TRANSACTIONS OF SALES

X, जो मुंबई के व्यापारी ने मुबई के ही एक और व्यापारी को 

X of Mumbai sold Goods worth Rs. 10.00 Lakhs to Y of Mumbai and Y of Mumbai sold the same goods to Z of Rajasthan at Rs. 10.50 Lakhs.

Now at second stage Z of Rajasthan sold the same goods to a consumer in Rajasthan at Rs.11.00 Lakhs. Suppose the rate of SGST is 8% and rate of CGST is 10%.

Now this is the transaction of sale of Goods from one state to other state and now we are trying to analyze how IGST will work here.

Please note that in the example given above we have not followed the exact situation which has been mentioned in the draft of “Integrated Goods and Service Act” with respect of transfer of fund to and from the IGST to CGST and SGST because it seems to be very complicated and need some simplification of narration but what is given in this study will give you the insight of proposed working of the IGST.

RATE OF TAXES PRESUMED

S.NO. DESCRITOPN RATE OF TAX
1. SGST 8%
2. CGST 10%
3. IGST (SGST+CGST) 18%
TAX LIABILITY OF VARIOUS DEALERS
S.N DESCRIPTION SGST

(8%)

CGST

(10%)

IGST

(18%)

REMARK
1. X of Mumbai sold Goods worth Rs. 10.00 Lakhs to Y of Mumbai. 80000.00 100000.00 NA It is an Intra-state Sales hence SGST and CGST are Payable.
Less:- Input Credit NIL NIL NA
Tax Deposited by X 80000.00 100000.00 NA
2. Y of Mumbai sold the same goods to Z of Rajasthan at Rs. 10.50 Lakhs NA NA 189000.00 It is Inter-state sale hence IGST is Payable.
Less:- Input Credit NA NA 180000.00

(SGST 80000.00 + CGST 100000.00)

In IGST the input credit of SGST and CGST paid on the goods which is sold in interstate sale is available.
Tax Deposited by Y NA NA 9000.00
3. Z of Rajasthan sold the same goods to a consumer in Rajasthan at Rs.11.00 Lakhs. 88000.00 110000.00 NA It is intra-state sale in the state of Rajasthan hence SGST and CGST is applicable.
Less:- Input Credit 79000.00 110000.00 NA The total Input credit of IGST is Rs.189000.00 and it can be set of against IGST, CGST and SGST in that order of priority.
Tax Deposited by Z 9000.00 NIL NA
TRANSFER OF REVENUE FROM STATE TO CENTRE AND VICE VERSA
S.NO. DESCRIPTION AMOUNT
1. The selling state will transfer the amount of SGST to the centre which has been taken as input credit while discharging the liability of IGST. 80000.00
2. The centre will transfer the amount of IGST to the Consumer state which has been taken as input credit while discharging the liability of SGST. 79000.00
EFFECT OF IGST ON REVENUE OF VERIOUS CONSTITUENTS
S.NO. DESCRIPTION OF CONSTITUENTS OF IGST
1. The selling State
2. The Purchasing State
3. The Centre
THE SELLING STATE
S.NO. DESCRIPTION SGST REMARK
1. The amount of SGST deposited by the First seller 80000.00 CGST and IGST are not part of state revenue hence not considered here.
 

 

2.

Less: – The selling state will transfer the amount of SGST to the centre which has been taken as input credit while discharging the liability of IGST. 80000.00 NA
3. Revenue of the Selling State NIL NA

Note- The GST is destination based tax hence the selling state will get NIL tax on inter-state transaction where goods are consumed in other state. The above calculation is supporting the same concept.

THE CONSUMER STATE
S.NO. DESCRIPTION SGST REMARK
1. The amount of SGST deposited by the seller in the Consumer state. 9000.00 CGST and IGST are not part of state revenue hence not considered here.
Add-The centre will transfer the amount of IGST to the Consumer state which has been taken as input credit while discharging the liability of SGST. 79000.00 NA
Revenue of the Consumer State 88000.00 NA

Note: – The sale price at consumer state is Rs.11.00 Lakhs @ 8% hence the revenue calculated at Rs.88000.00 is cross tallied and supported the same concept.

THE CENTRE
S.NO. DESCRIPTION CGST IGST TOTAL
1. The amount of CGST deposited by the First seller in the Selling state. 100000.00 NIL 100000.00
2. The amount of IGST deposited by the Second seller in the Selling state. NIL 9000.00 9000.00
  Total 100000.00 9000.00 109000.00
3. Add:-The selling state will transfer the amount of SGST to the centre which has been taken as input credit while discharging the liability of IGST. NA NA 80000.00
  Total NA NA 189000.00
  Less –The centre will transfer the amount of IGST to the Consumer state which has been taken as input credit while discharging the liability of SGST. NA NA 79000.00
  Result-Revenue of the Centre NA NA 110000.00

Note: – The sale price at consumer state is Rs.11.00 Lakhs @ 10% hence the revenue calculated at Rs.110000.00 is cross tallied and supported this concept.

This will complete the full circle of IGST.

एक्सपर्टस की राय  उद्योग एवं व्यापार को जी.एस.टी. के बार में जानकारी देने के  प्रयास के बारे में

Dear Ca Sudhir Halakhandi ,

It gives me great pleasure to know that you and your team are going to publish first Web book on GST in Hindi. I have gone through all topics and other materials on GST laws which is shared by you on what’s app, in which the provisions of GST law have been explained in the very simple way and cover frequently asked questions.

Gokul Ram Choudhary

Dy.Commissioner (Administration)

commercial taxes department

Bhilwara (Rajasthan)

श्री सुधीर हलाखंडी एवं सहयोगी समस्त बन्धु

आपके द्वारा प्रस्तुत संग्रह काफी प्रभावी ओर अनूठा है, इसको हिन्दी में प्रस्तुत करके आपने इसे जन सामान्य के लिए सहज बना दिया है।

इसके लिए पूरी  टीम बधाई की पात्र है  ।

Bharat Bhushan Batham,

Superintendent,

Service Tax,

Range-Ujjain (M.P.)

Mob. 7898471101

Ca Sudhir Halakhandi

Articles by ur team are just fantastic. These articles are power pack GST modules. You and ur team is doing excellent work by publishing articles in Hindi our mother tongue. It’s a need of the hour.

All the best to team for further ongoing success.

– Ca Rashmi Jain

New Delhi

सी.ए.सुधीर हालाखण्डी

आपने जी एस टी पर जो छोटे व्यापारियों के लिए काम किया है वह क़ाबिले तारीफ़ है l आप जो सामग्री एक साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर दे रहे है मै समझता हू वह सभी के लिए काफी उपयोगी साबित होगी l मै आप के प्रयास को सलाम करता हूँ l मेरी शुभकामनाए आप के साथ है I

सी ए अरविन्द माथुर

संपादक  

टैक्स अपडेट पत्रिका

Dear Shri Suhir Halakhandi

The fact is your work is really very very commendable and inspiring. Your all audio lectures I listened and inspired a lot. Your dedication to the subject and enthusiasm, I must say a continuous learning for me.

Your work is always meant and inclined to the benefit to the mass and general people centric, which is really available among professional.

Thanking you

CA. Tarun Ku. Agarwalla

Chairman – indirect tax Committee,

Utkal chamber of commerce and industry,

Bhubaneswar, Odisha.

GST faculty- ICAI

tarun@tka.org.in

 

9437036343

R/Sir Sudhir Halakhandi

It gives us immense pleasure to know about your first web book on GST in Hindi.

It shows your zeal and commmitment to keep youurself updated on the subject and share it with others.

 -Sanjeev Kumar Arora

C.E.O.

Sanjeev Arora and Company

Ambala City.

प्रिय सुधीर जी

आपके द्वारा जी.एस.टी. पर हिन्दी में वेब बुक निकाली गई है जो बहुत ही सराहनीय है . इससे आम व्यापारी को सरल भाषा में समझने में मदद मिलेगी . इसके लिए आप साधुवाद के पात्र है .

शुभकामनाओं सहित

सुरेश अग्रवाल

अध्यक्ष

फोर्टी

Ca Sudhir Halakhandi

You have written Articles in Hindi for the use of Common man, It will certainly help the Businessmen to understand the GST.

Ca RA Sharma

Past chairman

ICAI Branch

Jaipur.

BASIC ILLUSTRATION OF IGST

Though practically how IGST will actually work can only be understood properly when it is implemented but whatever information is  available at present from the basics which has been mentioned in the Draft law we can understand the IGST with the help of this very simple example:-

TRANSACTIONS OF SALES

X of Mumbai sold Goods worth Rs. 10.00 Lakhs to Y of Mumbai and Y of Mumbai sold the same goods to Z of Rajasthan at Rs. 10.50 Lakhs.

Now at second stage Z of Rajasthan sold the same goods to a consumer in Rajasthan at Rs.11.00 Lakhs. Suppose the rate of SGST is 8% and rate of CGST is 10%.

 

Now this is the transaction of sale of Goods from one state to other state and now we are trying to analyze how IGST will work here.

Please note that in the example given above we have not followed the exact situation which has been mentioned in the draft of “Integrated Goods and Service Act” with respect of transfer of fund to and from the IGST to CGST and SGST because it seems to be very complicated and need some simplification of narration but what is given in this study will give you the insight of proposed working of the IGST.

RATE OF TAXES PRESUMED
S.NO. DESCRITOPN RATE OF TAX
1. SGST 8%
2. CGST 10%
3. IGST (SGST+CGST) 18%
TAX LIABILITY OF VARIOUS DEALERS
S.N DESCRIPTION SGST

(8%)

CGST

(10%)

IGST

(18%)

REMARK
1. X of Mumbai sold Goods worth Rs. 10.00 Lakhs to Y of Mumbai. 80000.00 100000.00 NA It is an Intra-state Sales hence SGST and CGST are Payable.
Less:- Input Credit NIL NIL NA
Tax Deposited by X 80000.00 100000.00 NA
2. Y of Mumbai sold the same goods to Z of Rajasthan at Rs. 10.50 Lakhs NA NA 189000.00 It is Inter-state sale hence IGST is Payable.
Less:- Input Credit NA NA 180000.00

(SGST 80000.00 + CGST 100000.00)

In IGST the input credit of SGST and CGST paid on the goods which is sold in interstate sale is available.
Tax Deposited by Y NA NA 9000.00
3. Z of Rajasthan sold the same goods to a consumer in Rajasthan at Rs.11.00 Lakhs. 88000.00 110000.00 NA It is intra-state sale in the state of Rajasthan hence SGST and CGST is applicable.
Less:- Input Credit 79000.00 110000.00 NA The total Input credit of IGST is Rs.189000.00 and it can be set of against IGST, CGST and SGST in that order of priority.
Tax Deposited by Z 9000.00 NIL NA

 

TRANSFER OF REVENUE FROM STATE TO CENTRE AND VICE VERSA

 

S.NO. DESCRIPTION AMOUNT
1. The selling state will transfer the amount of SGST to the centre which has been taken as input credit while discharging the liability of IGST. 80000.00
2. The centre will transfer the amount of IGST to the Consumer state which has been taken as input credit while discharging the liability of SGST. 79000.0

 

EFFECT OF IGST ON REVENUE OF VERIOUS CONSTITUENTS
S.NO. DESCRIPTION OF CONSTITUENTS OF IGST
1. The selling State
2. The Purchasing State
3. The Centre

 

THE SELLING STATE

 

S.NO. DESCRIPTION SGST REMARK
1. The amount of SGST deposited by the First seller 80000.00 CGST and IGST are not part of state revenue hence not considered here.
 

 

2.

Less: – The selling state will transfer the amount of SGST to the centre which has been taken as input credit while discharging the liability of IGST. 80000.00 NA
3. Revenue of the Selling State NIL NA

Note- The GST is destination based tax hence the selling state will get NIL tax on inter-state transaction where goods are consumed in other state. The above calculation is supporting the same concept.

THE CONSUMER STATE

 

S.NO. DESCRIPTION SGST REMARK
1. The amount of SGST deposited by the seller in the Consumer state. 9000.00 CGST and IGST are not part of state revenue hence not considered here.
Add-The centre will transfer the amount of IGST to the Consumer state which has been taken as input credit while discharging the liability of SGST. 79000.00 NA
Revenue of the Consumer State 88000.00 NA

Note: – The sale price at consumer state is Rs.11.00 Lakhs @ 8% hence the revenue calculated at Rs.88000.00 is cross tallied and supported the same concept.

THE CENTRE

 

S.NO. DESCRIPTION CGST IGST TOTAL
1. The amount of CGST deposited by the First seller in the Selling state. 100000.00 NIL 100000.00
2. The amount of IGST deposited by the Second seller in the Selling state. NIL 9000.00 9000.00
  Total 100000.00 9000.00 109000.00
3. Add:-The selling state will transfer the amount of SGST to the centre which has been taken as input credit while discharging the liability of IGST. NA NA 80000.00
  Total NA NA 189000.00
  Less –The centre will transfer the amount of IGST to the Consumer state which has been taken as input credit while discharging the liability of SGST. NA NA 79000.00
  Result-Revenue of the Centre NA NA 110000.00

Note: – The sale price at consumer state is Rs.11.00 Lakhs @ 10% hence the revenue calculated at Rs.110000.00 is cross tallied and supported this concept.

This will complete the full circle of IGST.

Download GST Book in Hindi

-CA Sudhir Halakhandi

“Halakhandi”, Laxmi Market, Beawar-305901(Raj)

Cell- 9828067256, MAIL –sudhirhalakhandi@gmail.com

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10 responses to “आइये समझे जी.एस.टी. को छोटे एवं माध्यम दर्जे के व्यापार एवं उद्योग के लिए (Download E-Book)”

  1. vinod says:

    e commerce seller ko gst ka return kab kaise bharna hai

  2. VINOD KUMAR GUPTA says:

    Sudhir ji your article is very educative to tax payers, can you send this article on my mail, vrajendragupta@gmail.com. Thanks for drafting article.

  3. manohar lal mehta says:

    Thank you very sharing such useful informationon gst.
    i have a retail textiles (shirtiing suitings)business.now it exempted from vat now a days whether i have to take gst number?

  4. Bharat Bhushan Gupta says:

    Dear SudhirJi
    Many many thanks to you and your team for such excellent articles on GST. These are very useful for all persons of the society including dealers and professionals. I appreciate and salute to your sincere efforts to make available such useful information on such complicated subject GST particularly in Hindi which can be understand by common man. My best wishes to you and your team for great success ahead.
    Thanks once again.
    CA Bharat Bhushan Gupta

  5. D C Gupta says:

    thanks for describing in so easy manner…it is very easy to understand everything about GST.

    Kindly start to write for Manufacturing organisation/corporate also.

    Thanks
    D C Gupta
    Alwar Rajasthan

  6. nalin kant jain says:

    Sudhirji It is an excellent work done in GST for professionals and for general public. all is explained in a very lucid mannar. I thank u again for your work

  7. Mr. Arvind Chaudhari Victory precisions Pvt Ltd. says:

    Dear sir,

    Thanks for good information forwarder to all in simple language with simple example for middle class working, good support for taking reproducibility regarding GST.

    Many Many Thank.

  8. Navin Chandra Joshi says:

    Sir,
    can you please update on status of excise exemption at Uttarakhand and Himanchal Pradesh ? will it be continue ?

  9. Navin Chandra Joshi says:

    Dear Sir,

    Thank you very much for sharing such a useful information on GST

  10. Alok Shaw says:

    Thank You Sir,, and many congratulations… I was looking for this kind of e-book in Hindi…

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